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Literature IN HINDI UNIVERSITY OF CALICUT B /B.S

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Literature IN HINDI UNIVERSITY OF CALICUT B /B.S
Literature IN HINDI
STUDY MATERIAL
BA/B.SC
III SEMESTER
COMMON COURSE
CU CBCSS
(2014 ADMISSION ONWARDS)
UNIVERSITY OF CALICUT
SCHOOL OF DISTANCE EDUCATION
THENJIPALAM, CALICUT UNIVERSITY P.O. MALAPPURAM, KERALA - 693 635
517
School of Distance Education
UNIVERSTY OF CALICUT
SCHOOL OF DISTANCE EDUCATION
Study Material
III Sem BA/B.Sc
Common Course
Literature in Hindi
2014 Admission Onwards
Prepared by:
Smt.Vanaja K.G.
(Head of Department),
Associate Professor,
Department of Hindi,
ZG College, Calicut-14
Type settings and Lay out
Computer Section, SDE
Literature in Hindi
©
Reserved
Page 2
School of Distance Education
3rd semester BA/BSc common course.(Hindi.)
Study meterials.For SDE Students.
Text books- 1.kavya suman.(poetry collection) 2.sahithya sopan.(prose collection)
3.A. B. C. D.-(Novel)-Ravindra kaliya
1.
सुमन-संपादक-पी.जयरामन.
, नई
.।
Module-1.
1.कबीरदास के दोहे - 16 से 20 तक। 2.सूरदास के पद3.
5.
वधु-
पंत। 4.
पद(1 से दो तक)
-
बोध-
Module -2.
6.मुझे कदम कदम पर-
7.यमराज
8.धूल
तरह सच- अशोक वाजपेयी। 9.
2.
सोपान- .संपादक-
.
दे वताले।
- उदय
-अमन
10.
समय-
जगूडी।
काशन,कानपूर।
Module- 3.
1.नमक का दारोगा-
2.
युग- मोहन राकेश। 3. वह चीनी भाई-महादे वी
Module -4.
4.जहाँ आकाश
दे ता-
5.भगत
गत-
परसाई।
Module-5.
3.ए.बी.सी.डी.-
Literature in Hindi
- वाणी
Page 3
School of Distance Education
Literature in Hindi
Page 4
School of Distance Education
Module.1.
1.कबीर के दोहे।(16-20)
Introduction .
वे
कबीर
से
समय
हु आ जब
वह उतना
के
और
से
थी.। कबीर का
मुखर है । कबीर
दोहे
कबीर
है और
ओर
को
वह
दे ती है ।
3.
अपने
कर ले और
कर ले ।
का
के
जब तक
होता है और न वह
कबीर
से उसी
वह
4. कबीर इस दोहे
केवल कबीर दुखी है जो
चेतन
यहाँ कबीर दास
हु आ था,
के बारे
है । एक
आज काल
-
बतते . वे कहते
–
के
णी संसार
होकर
पर
ले जाता। वैसे
डू ब जाय।
चौदह
का
के अभाव
चौदह कलाएँ जगत ् के
चौसठ
है तो
को
होता है - न उसका
शूरवीर है जो
को
के बारे
उसे इस यो
कर ले। कबीर का कहना है
बताते
का जीवन
को दे खकर दुखी रहता है ।
कड़ु वा लगता है तो दूसरे
ओर
करके बीच
तपा- तपा कर
जाग भी रहा है और
एवं जीवन
डू ब गये,तट-
लोहे को पीट-पीट कर सुघड और सुडौल आकार
) को
(
दे ते है । याने भोग-
मँझधार
वे कहते -
लुहार
के नाम पर
है ।
करती है ।
बताते
के
हु आ।
कोई अपने
बडे
,
बताते है । वे कहते
वह
जीवन
थी। समाज
तथा
को
चौदह कलाओं के समान
होता है ।
यहाँ खारा-मीठा का मतलब
Literature in Hindi
अपने
से
एक ऐसे
के
,
लेकर सागर तरने का
चलता।
पर खरा उतर कर
जीवन के
है ,
करते रहे और इस
कर पाता है ।
जीवन
बहु त
के बारे
का आलोक न हो, तब तक मानव मन का
को
खाकर और सोकर अपनी
5.
को
कंचन
होकर
हो जाय,
बना दे ता है िजस
दे ता है । कबीर कहते
दे ते
के बारे
हो सकता। भाव यह है
चौसठ कलाएँ
दोहे
एक
के
को
नाव का
भी कभी लालच के पीछे
2. कबीर इस दोहे
कलाओं
डालने का
के
जाता है
और
को माना है ।कबीर का
िजतना
का
हु आ। याने
यहाँ कबीर यह कहना चाहते
के
पर भी
एक ओर समाज सुधार का
के
पहू ँच पाये ; जैसे कोई
न
ऐसा माना जाता है
,
और
भी
और
कबीर का
माने जाते
उनके
लालच का दाँव खेलते रहे ,एक दूसरे को धोखे
तक
अपने
सामािजक,
हु ई है । कबीर के
के
जुलाहा है ।
भी
भारत
हु आ है तो
दोहा-1.
शाखा या संत
परं परा के
के बारे
वे कहते कर
मीठा लगने लगता है । एक
दे ता है ।
के दोष- गुण है । वैसे मंडप और
साधना
संसार सुखी है जो
सोता है ।
रो भी रहा है ।
कहते
वे कहते - यह संसार
जो कल
से सुफल और
बना
ह मंडप
बैठा
है ।
Page 5
School of Distance Education
2.सूरदास के पद-1 &2.
Introduction –
सूरदास
के
नामक गाँव
घर से
शाखा के सब से
एक गौड
सं.1540
होकर चले गये और गउघाट-मथुरा-
सूर को
दे
होने के बाद ,
थे।
के
, भाव,और भाषा
जगत ् का
रचनाएँ - सूरसागर,
हु आ
का संगम
यहाँ सूरदास कहते
यहाँ सूरदास भगवान
वे सगुण
कोई कुछ भी
है यह। सूरसागर के तीन भाग है -
, बाल
आप के चरण
,
से
करता हू ँ।
करते
वे कहते —
कह सकते। वह तो गूँगे के मीठे फल के जैसे है , जो मीठा फल खाकर उसका रस
का
भी
मन और वाणी के
है । इस
सगुण
से मतलब है
संभव
, आपके
इसका कारण भी बताते
उसे जान पाता है ।अपनी
समझकर सूरदास अपने
साधारण
शायद
सब कुछ दे ख सकता है , बहरा सुन सकता
को भजते
वाला भी है ।
,तथा
हम दे ख सकते
अपार
समेटता है , वैसे
कर लेता है ,
वे गाते
सबसे
राजा बन सकता है , ऐसे
बार बार करता हू ँ ।
संतोष
आवाज़
और
रचनाओं
पद का है । सूरदास कहते - हे ,
है , गूँगा बोलने लगता है ,
अपने
से
कहा गया होगा।
पद सूरदास के
के बारे
थे।
रखने लगे।
कृ पा से पंगु (लंगडा आदमी) पहाड चढ़ सकता है ,
2.
थे। बचपन
गाया करते थे।
सखा भाव
रचना है - सूरसागर। महा भागवत के आधार पर
और
वे
जाकर रहने लगे। सूर के
दे व के
बन गये। सूर
के अनुसार सूरदास का
हु आ। कहा जाता है
था। पहले सूर दास
के कहे अनुसार अपने
वे
1.
है ।
एवं
को वह
तक पहू ँचा
होकर कहाँ दौड़े? अत: सब
का है तथा
है तथा
कर सकता।
असीम
है । जो उसे
,गुण, आकार
सोचने पर वह अगम है ,ऐसा
का गायन कर रहा है ।
जो
याने
सूरदास सगुण
है ।
को
उसका पहू ँच
है । सगुण
अपनी
तक पहू ँचा सकता है ।
Literature in Hindi
Page 6
School of Distance Education
वधू-
3.
के
थे। बचपन से
दे खने को
। लोकायतन,
है ।
अकादमी
,
,
पले
,
को माँ,
घर
अपने
रखकर वह
एक
जी भर रोती है । दे खने
है ।
पर
मवधू
बनना। और
माँ
घर जाती है वह रोती है ।
उतना कातर
है ।
पने
से कहती है
कहती
उ- पंत।
से हँस हँसकर
करने लगी।
है ।
बन जाता है । यह जीवन
3. पंत जी को कौन सी
के
पंत।
अपने
वह रोने का अवसर है ।
है ?
बैठे,
, पंत,
,
को पकड-धर कर
के
से
है ।
से रोतेसे टू टती हु ई सी
,
अनेक
पर
भर
सुनकर
(
)
लाना याने
उसका
के
के घर जाते समय वधू का रोना गाँव का एक
कोई
है । इस
के
नर-
उभर
से भी वह कछ कहने
आता। जन जीन
से जीवन बँधा हु आ है ।
हर
)
हु आ?
कहाँ जाती है ?
के घर।
से रोती हु ई
उ- माँ, ताई, मौसी, फुआ,
Literature in Hindi
के घर जाती है ।
(भूल) न जाना। इस
2. पंत जी का पूरा नाम
उ–
से रो धो
है ।
, सहजता
है ।
हमेशा घर सँभालकर रखना। मौसी कहती है
रचना है ? (
1.
5. वह
लेती है । अपनी
के समय रोना-धोना एक
Questions & answers.
उ-
सुनकर गाडी के
आँचल आँसुओं से तर
भी वह रोती है ।
से अपना
4.
के रोदन के ऊँचे
एवं रोचक
है । माँ
कातर हो जाता है ।
के घर जाती है ।
लगी। यहाँ याने गाँव
उ-
है । गाँव
है । अपनी मौसी से वह आपा खोकर
गाडी चल पडी। वह अपने
,
वधू सहज
के घर जाती है ।
फुआ से वह हाहाकार करते हु ए
जाते
क
लोकायतन के
भाषा सहज और
से दबकर या कटकर कौन मर गया है ,या
ये आतुर हो
लेती है ।
हु ए है ।
है -पाँच
दे खा है ।
का
, कला और बूढ़ा चाँद
,
वेला है । वह अपनी माँ से
का मन
पर भीड लग गयी है ।
चुप होकर
या
है ।
के घर जाती है ।
वह अपनी ताई से गा-रोकर
रँभाकर वह
के
, और
के बहु रंगी
और कहानी
तथा सखी
,
छायावाद,
,गुंजन,युगवाणी
,
के
है ।
सारांश---
और
थे,
नामक नाटक
और
एक है ।
,
इस
ऐसी
के
करके अपने
बाहर झाँक
के
लेती है ?
, पडोसी
से।
Page 7
School of Distance Education
गाडी से बाहर झाँक
6.
उ-
?
के रोदन सुनकर।
–
1.
रोना गाना यहाँ चलन भर,
आता उसमे उभर न अंतर,
जन
जाती
,
के घर।
पंत जी
के मनोहर
भाग
“
पंत जी
एक रचक रचना है ।
है । वधू बनकर
से
बाहर तो वह रोती है ।
गाँव
है ।
या
,
भी
का
,
जी
था।
माना है ।
जो
भी हास-
के
लेती है ।
का
वह
आया है , उसी का
,
“
” एक
भर काम करके
का आगमन ।
जब गाडी
यहाँ
करता है । अलसता
कोई वीणा
, जगतीतल
कोई
Literature in Hindi
के
आ
सरोवर
पर, ऊँची उछलती
ओर एक
, सुकुल
जैसी
अधर मधुर है ।
है ।
सोती
से
के समूह
,
है ।
बीवी,
के
दे ने,
करने
धीरे धीरे उतर आ
वह गंभीर है ।
होता।
एक
चमार
,
अपनी सखी के
, अपने
, बेला,
को एक
गुँथा हु आ एक तारा हँसता है । वह अपने
है वह। नीरवता
को
रहा है ।
भाट,
चाहनेवाले जगत को
बजती थी। कोई अनुराग –राग का आलाप भी
,
के
का
है ।
है ,
थे। नाम के
तरह
भी
उसके
लता के कोमलता
तरह वह
से वे
है ।
से भरे आसमान से एक
उसके घुँघराले काले
के
संकलन है ।
होकर
भी कोई आभास
और
- संकलन है ।
पकड,
,
एक है । बहु मुखी
थे।
उनके
,
चंचलता का
,
रहा है ।
के
से वहाँ का जीवन बंधा हु आ है ।
बादल को
,
का समय था।
। आकाश
के घर
खुशी रहती है ।
,
, अपरा,
डालकर आकाश पथ से छाया
भी
बनने
ने भी
“बादल राग”
है ।
है
उसके
के बाद
से रोते
-
के
,
कहानी संकलन है । अलका,
का
पले पंत जी
-
छायावाद ,
दे खते थे।
है ।
करने लगी।
-
उनका
” से
है । इस
से हँसते हु ए
के गोद
हु आ है । सरस भाषाऔर कोमलकांत
से वह
के समय रोना एक
4.सं
थे।
के घर जे समय वह अपने
लगी तब से वह अपने
नये
का
के सुकुमार
-राज
रानी
पर बाँह
-झुन
सा
है ।
के
चुप-चुप गूँज
Page 8
School of Distance Education
वह
का
अनेक
दे खते
भाव
है । और
होता है और
यह
है ।
तरह मादकता
जीव चेतना
जब
है ।
होकर
ओर आधी रात का
राग के
के
ने
सेलेकर
नामक
बहाती हु ई
गोद सो जाते
जाता है तब वह
उसके
संकलन
तक के
चरण
(थके हु ए )
कंठ से
को
और बीती घटनाओं से
हो जाती है ।
हो जाती है ।
है । नाद
से यह
का
:
हो गयी है ।
के
एक
, सजीव, भावमय
Questions & answers.—
रचना है ?
1.
उ-
जी
का पूरा नाम
2.
उ-
है ?
को -----------
3.
उ-
भी कहते है ।
कहाँ से उतर आ
4.
उ- मेघमय आसमान से।
5. उसके
पर
गूँथा है ?
उ- एक तारा।
6. थके हु ए
को वह
उ-
या
कब
7.
उ-
है और कैसे
का
उ- नीरवता।
परम
सखी कौन है ?
पडा?
राग।
है ?
10.
उ5.
- बोध-
बहु मुखी
के
हु आ। नाटक,कहानी
था।
कुआनो
अनेक
हु आ जल,
के जैसे।
हो जाती है ?
के कंठ से कौन सा राग
उ- एक
गाँव
है ?
के समय।
8.
9.
है ?
के
थी।
वे
तीसरे
–
, एक सूनी नाव,
पर टँ गे लोग
Literature in Hindi
,
का
और नई
का संपादन भी
, अब
हटाओ,
अकादमी
थे । तो भी वे मूल
के
पर टँ गे लोग (
15
व
है ।
),
के
से
सडक, लडाई
है ।
है ।
के समय
लेखक के
नाटक, लाख
1927 को
--- काठ
िजले के
को अपनी माँ से
अपनी पहचान बनायी।
नाक, बतूता का जूता
, बाँस का पुल,
, सूने चौखटे , सोया
बाल रचनाएँ।
Page 9
School of Distance Education
रचना
बताते
- बोध
आजकल के
जी आज
बोध का एक
के
ढं ग है ।
- बोध के
भी
तथा
जी कहते है
के बारे
का
- बोध
बढ़ गया है ।
सारांश.---------अपने इस गटापारची बबुए के
बजाते रहो। तो शायद पेट पल जायेगा।
पर
बाँधे हु ए
उसके
बाँधकर चौराहे पर खडा कर दो। और चुपचाप ढोल
केवल कुतूहल
ढोल या
है ,
बाजे के बजाने के अनुसार
तो कुतूहल वश दे खते
चौराहे
करते रहते है तो वहाँ से गुज़रने वाले
। और शायद कभी कुछ दे ते भी
मगर
को कभी
दे खते।
भूखी
तरह- जो अपने
- हाथ- पैर पटकते रहो,
जाएगा। कारण
हाँडी फँसकर उससे बच पाने के
से टकराते रहो और केवल छपटाते जाओ, तो शायद दया
शोख़
के
करनी को दे खकर मज़ा लूटते है , पर
को
हाँडी
को दे खते
हु ई
उस लाश को
को दे खकर लोग हँसते है ,
वैसे आम जनता को भी शायद भूख
के जैसे पंख रं गकर छोड दे ने से हर
हाथ उठा सकती है । मगर इस
रह जाएगा।
है
पर
आजकल
के
आज
ता, भूख,
तो उसके
मरने के पहले अपने
के बाद
करते है , िजससे अपने को
पर एक
न
कैसे भी हो ,उनका कोई मतलब
या महँ गी चीज़ भी
फूल या कफन का कोई
कहते
जाएगा। तब
सब सजाकर रहने पर भी पहचानी जा सकती है । अगर कोई दूकान
भी
िजसके पास
को संवेदना
के
ऐसे
का गडबड न आ पहू ँचे। वातावरण या
मतलब यह है
फँसे
हु ए हँसी- खेल करना पडेगा।
भी
ल जाएग। तो शायद दया
के (अहं भाव से
के) आँसू पसंद करती है । आम
अपनी
हाथ – पैर पटकती रहती है -
या
न हो, तो भी वह दूकान टू ट जाएगा। अगर
है तो शायद कल
सब कुछ है ,
इतना सब कुछ है ,तो भी
कहता हू ँ
भी
को
यह
बनेगी।
है ।
केवल
,उसका
-
बोध बढ़ गया है ।
Questions & answers.—
1.
-बोध
उ-
है ?
2.गटापारची बबुए को कैसे,कहाँ खडा करना है ?
उ-
बाँधकर ,चौराहे पर खडा करना है ।
है ?
3.
उ- कुतूहल।
4.
उ- शोख़
को
के।
आँसू पसंद है ?
5.इस
उ–
के बदलते
Literature in Hindi
कहना चाहते है ?
-बोध के बारे
Page 10
School of Distance Education
Module -2.
6.मुझे कदम कदम पर- गजानन माधव
गजानन माधव
,सामािजक, और
भी जीवन के
वायुसेना,
का
पर काम
के साथ हु ई है ।
नामक
भी लगते
जाय।
मुझे
,कामायनी एक
तो उन सब
जाता हू ँ
होता है
पर आते
तो
है । और
ने
वाणी
चुनाव
फैलाए हु ए पडे
कुछ गहरे
मुझे
को
अधीरा है .
घूमता-
-
बैठा है । हँसते हँसते
को दे खकर
,
कहना चाहते
, झगडा
जब
और
शाखा-
कर पाता है ।
Literature in Hindi
और जीना
कथाएँ
सुनने को
ठगा जाता हू ँ या
को लेकर जब
व
जो रोज़- रोज़
का
रोज़
है । और
अजीब है ।
होता जाता हू ँ।
भी
हो
जानने
। दु:ख
सब कुछ
जलती हु ई
घर लौट आता हू ँ तो उपमाएँ
को ढ़ूँ ढने लगता है तो समाज
है । बाँ फैलाये हु ए सौ
कमी है । वरन ् यह है
से गुज़रना
भी करती है । मरने और जीने
है । कहानी ,
और
भी हो जाता हू ँ और
करते करते
को सुलझना भी वे चाहते
रहती
इन सब
हू ँ। यह
, ज़माने के
को और
सौ
न जाने
तरसता है । कभी कभी अपने को
है । और यहाँ खडे होकर
, अहं कार-
लगते
को जानकर
है ,लाग-डाँट करती है ,और
कहते
एक पैर रखता हू ँ तो सौ
उतरना चाहता हू ँ ।
सी पीडा है । पल भर
धारण कर सामािजक
घर पर भी पग- पग पर चौराहे
यह
के
पडती है । चाँद का मुख टे ढ़ा है ,
, हर-एक छाती
या अपने अधीन हो जाता है ।
के
भी ये सब है ।
सौ
उभरती है ।
चमकता
चढ़ती । घबराये हु ए
यत,
,पीडा,
ता
होकर एक
हटते।
कथाएँ, तरह- तरह
यहाँ
झलक
हू ँ। और मुझे यह दे खकर बडा मज़ा आता है
यहाँ
इन
,
1943
जो
से पार करना चाहता हू ँ। इस तरह खुद
यह जगत
पर भी वे पीछे
था उनका ।
नामक आलोचना,सतह से उठता हु आ आदमी नामक कहानी
हर
मेरे
फलक पर रखा है ।
झेलना पडा।
से गुज़रना चाहता हू ँ । उनके अनुभव और अपने सपने सब बहु त
एक अजीब
सब तरफ अपने को
पाता हू ँ
के
13)।
,
नीर (आँसू)
चाहता हू ँ।
सन ् 1917 को हु आ।(
को
से ओत-
कहते है - मुझे हर कदम पर चौराहे
फूट पडती है ।
सदा
है ।
रचनाएँ
सारांश-
सब
से अनेक
तक अपराजेय
,
खाक धूल,
के
अनेक
दु:ख
वे समझ पाते
अपने घर
के
,
है । नव-नवीन
सोच रहा हू ँ
आज
सताता है । और
वाले सौवह
Page 11
School of Distance Education
यहाँ कहना चाहते
बढ़ने के
और सौ-सौ
खुले हु ए है ।
पड जाते है और ठगा जाते है ।कई
के दबाव
Questions & answers.—
का पूरा नाम
1.
आजकल
इन
और
2. मुझे कदम- कदम पर
3. कदम- कदम पर
उ-
से
हो या समाज के
तो ये चुन
पडकर लोग
चयन
के
कर पाते
हो आगे
ये
कर पाते।
है ?
उ- गजानन माधव
उ- गजानन मधव
के
हु ई है ?
को
है ?
उभरती है ?
4.
उ- एक अजीब सी अकुलाहट।
वाणी
5.
उ-
है ?
पीडा।
6. चौराहे पर खडे होकर
उ-
करते
को
है ?
लेकर और
मुझको कुछ दे कर ये चौराहे फैलते
जहाँ खडे होकर
कुछ करता हू ँ.......
जाते।
.....
के मतानुसार
खोजते
चलते समय
से गुज़रते हु ए
जाते
मतलब यह है
7. यमराज
उनका
पग- पग पर चौराहे
पीडाएँ दे खते हु ए, चलते-
जो
पडे
करनेवाले
से कम
का
पर खून से,
Literature in Hindi
दे वताले.----
के एक
और
दे ता है । दे वताले का
को हु आ। दे वताले का
दु:ख
एवं
के ताप
सादगी,सरलता,
, उजाड
है ।
,अनुवाद,
दु:ख,
तपकर
को समाज के
फैलाए हु ए सौ-सौ
समय चौराहे पर खडे होकर
हर
-
और
है । वे अपनी
करते करते
लेकर चलते समय आगे
इन सब
उससे बढ़कर
है ।
दे वताले
है ।
पले-
के बैतल
ू िजले के एक छोटे -से गाँव जौलखेडा
,कोमलता से
के
,संपादन
,
-
का
7 नवंबर, 1936
रखनेवाले एक
अपनी लेखनी चलाई है ।
और जीवन
नामक
Page 12
School of Distance Education
सारांश--
से मुलाकात हु ई है या
ने गाँव के
इसके बारे
वह जताती थी जैसे
मुझे कोई पता
खोज लेती है ।
एक बार माँ ने मुझसे कहा
करना
बात
तुम जहाँ भी हो वहाँ से हमेशा
हु आ
माँ के समझा दे ने के बाद
पहचानने
तब
छोटा था और
है यमराज का घर।
कभी भी
को लाँघ लेना संभव
यमराज का घर दे ख लेता।
यह एक सरस
है ।
दे खो ,सब उनका शानदार या
थी।
का समना
था। अगर
यह
बदल गया
अपना शासन करते रहते
,
जीने और दु:ख
वह
है । और
सोया।
करना पडा।
मुझे इतना फ़ायदा
दूर- दूर तक गया है
के छोर तक पहू ँच पाना संभव होता तो
जो माँ जानती थी।
है
आजकल सब
उनका राज है । पुराने ज़माने
,
है ।
माँ
के अनुसार
यमराज के
है ।
भी
महल है । याने सब
ज़माना
कुछ कहना
हो जाती है । सभी
अपनी दहकती
रहा है । और वह यमराज
वे कहते है -
यमराज के घर का पता पूछा था तो उसने बताया
पैर करके
आज िजधर भी पैर करके सोओ तो
माँ अब
इसके बारे
बताते
तरफ पैर रखकर मत सोना
मुझे कभी भी
और मुझे हमेशा माँ या आयी।
महल है । और वे सभी
के बारे
से बातचीत होती रहती है । उससे
करने (सहने) के
यमराज को
के
सब
,
हु ए जैसे
यमराज का शासन है । जहाँ
यमराज को एक
सब
यमराज
Questions & answers.’’’
यमराज
1.
उ-
माँ
2.
दे वताले
बातचीत करती रहती?
उ-
से।
यमराज को
3.
है ?
करना
?
उ- यमराज दं ड दे ता है ।
माँ व
4.
के मत
उ-जीने और दुख सहने के
से माँ का
5.
उ- पैर
बात
8. धूल
संगीत,
हु आ।
है । वे भारत भवन ,
खोजती रहती है ?
उपदे श था?
खोज लेती है ।
ओर करके मत सोना। वह यमराज
तरह सच- अशोक वाजपेयी..
, और
गांधी
गायन के जानकार
अकादमी
है —शहर अब भी संभावना है , एक पतंग
Literature in Hindi
है ।यमराज को
,
,
और दयावती
अकेला
अशोक वाजपेयी का
अनेक
।
शेखर
के
करना
1941
हु आ
है । उनके
Page 13
School of Distance Education
सारांश-
से
यहाँ सच को ढोकर चलने
पडा हु आ है और
का बोझ भी और कोई
कहते - हम
समय
सच भी
उठाएगा।
आदमी गायब होने का सच,
परे शान करता है । हर
का सच
भी
तंग करते
बडे सच के
कई
के बारे
बताते
वे कहते है
को साफ़ कर उस धूल को दूर करने
जानते
इतने सारे सच उठाये
के
हम चल रहे
जाने का सच और चूहा दौड
पडकर छोटे -छोटे सच के सहयोग को घूरे पर
से पुराने
तरह यह
आयेगा।
यहाँ
सभी
मानव
को बाहर
दबा दे ता है । और वह सच उसके
के बरे
जाने का सच भी
2. हम
3. कब
9.
उदय
उ- अशोक
पैदा होता है
उ- चूहादौड
उ- पुराने
उ– उदय
भगत भूषण
बताते
मानव अपने समाज
पडने वाले
दे पाता। वह अपने
इतने सारे सच को
होकर हार जाने पर।
पर जमी धूल
ओर संकेत करती है
मानव
का
Literature in Hindi
ओर।
के
सन ् 1952
का
के शहडोल िजले के सीतापुर गाँव
, संपादक,
काम
,
से
घोडा, और
सारांश--
बेबसी
तरह।
.
अने
कहानी है ।
कोई
उ- सच को।
अपनी
,
तरह यह सच हमारे ऊपर पडा है । उसी
उठाकर चल रहे
,
के
पडता है ।
है
4. सच अब हमारे ऊपर कैसे पडा है
5. यह
दे ता है ।
इस धूल को साफ़ करने
बोझ बन पडता है ।
तरह सच
अपने समय का सच, अपने
वाला
कर पाता। वाणी
Questions & answers.
1. धूल
पर जमी हु ई धूल
) भी
(
आता। वैसे सच
भाग लेकर हार हो जाने से
के बासी पानी को बदलने और घडे को पता भी न चलने का सच भी हमारे सामने
छाई
कोई
तरह है जो
मोह तथा लालच और जलन बढ़ जाने और जगह कम होते जाने का
भरोसा न
पुराने कमरे
सच वह धूल
के दु:ख,
,
वैसी
अनुवाद, पटकथा, कहानी,
,
थे। सुनो
है ।
हु आ।
यह
तैसी रह जाती है ।
,
, अबूतर-कबूतर, एक भाषा हु आ करती है ,
चाहते
कहानी
,
ज़माना कोई भी हो
आँख, नयी
का
का जीवन एक दु:खांत
Page 14
School of Distance Education
एक औरत
ज़रा दे र पहले
और महँगाई
से खुदरा नोट
हु आ है । उसी बस
के बारे
जो औरत करवा चौथ का
और डर से
आप के
से
एक औरत अपने
कराता है
कहाँ
उसे
ने
का
अपना
का दोष
सब
बाँध
है .
जाती है । कुछ
बाल काढ़े और
दूध
तेजाब (
तंदरू
एक
सुलाकर सड़क पर रोडे
पढ
है
बोतल,
हाहाकार समूचे
है तो
उससे
उदय
के, बस
माँज
धो
,
, सडक
जाने के
-
इस
चाहते
दे ह
कर
या
बाहर सड़क
पर खडी हु ई पूछती है
तरह जीने दो। एक को
है । एक औरत
कर
अँधेरा है ।
है । एक तो
चैनल पर फैशन परे ड दे ख
बाहर
नाले
आटा गूँथ आयी थी । उससे
बनाकर
लेने से इनकार करती हु ई
का जीवन आज भी अनेक
,
सब कुछ करते
जाती है ।
है ।
तक
उनका
के अँधेरे
कटार उतरती है ।
संसार
को बोरे पर
है । एक औरत
गया है , कहता है - मुझे
एक दूसरे को छूती हु ई ज़मीन पर चुपचाप
घोषणा करते ,भाषण दे ते
वैसे सब
बाहर
है । एक कपडे
जगाना है ।
नेता लोग ,
तक करते है , लोग। यह एक
Literature in Hindi
र
दायीं आँख जलने से बच गयी है । एक औरत
है . साथ
खोज लेती है । वहाँ भी
के बारे
फट
ज़ेवर खो गया है । और एक तो
, और एक लाल-
है । वह यह जानना चाहती है
थाने के गेट पर दो
यहाँ यह
मेरे अतीत
एक अपने आप बोलती है । एक औरत तो
तादाद बढ़ायी जायेगी
गूँजता है ।
आप के
ने उसके फोटो और
ख़ुश करना है
है । एक
गुज़रता है । एक ओर लेखक गण,
, घर
अपना दु:ख कह डाला
का छोटा –सा
है । एक
को
राजधानी के
बोलते
कसम खाती हू ँ
एक औरत का कलेजा जो बोरे से
दे दे ना।
है । वहाँ भी
लगा
एक के ऊपर
हु ई पायी गयीहै । उसके शव के पास उसकाडेढ़ साल का बेटा बैठा रो रहा है ।
धीरे से
संसद
लौट आना।
से
के कारण
हु ई बोलती है था,
जल गये
तुम जो जी आये, कर लो मेरे साथ। पर मुझे
) से जल गयी है । पर एक बात
जलती हु ई अपनी
अपने
हु ई औरत का कोयला अपने
से
बैठना है और इस संसार कहाँ जाना है ।
एक औरत हारकर कहती है
उसके झोले
से मारे
खडी हु ई, अपनी जैसी
आवाज़
हो गये?
है ।
उसके
एक औरत फोन पकडकर रोती है ।
सबेरे शहर के
या सास के
करती है ।
से पहले बहु त
जलाया है , मगर उसके
लंबा , आग जैसा धधकता
,
गाडी
का
हज़ार
थी। एक औरत ने जो संगमरमर जैसे सफ़ेद है ,
पर
के साथ
मेमो भेजा है ।
कैसा होगा। एक औरत के हाथ तवे
एक औरत अपने नाक से बहता खून
कडी
दो-तीन
है । एक औरत, आधी रात बालकनी
के आधे से
गया है ।
अपने अलावा और
था, वहाँ एक
है । उसके साथ अभी
लेती है , वह अपने
हु ई एक औरत अपने
उसके
खौलता हु आ तेल
गया है ।
ने आज
ले
को नहलाती हु ई फूट-फूटकर रोने लगती है और पागल जैसी बार-बार चूमती है । वह
यह सोचकर दु:खी हो जाती है
बयान
लाचार
औरत के घर से लौटने वाले अपने शराबी
,
से
उसके
औरत अपनी जैसी
हई है । और सोती-सोती अचानक
और बेबस
पूछती है
कर
बने रहने
जाने से
से अपने घर जाने का
सब
भी हर रोज़
को कोई बचाव
छुपती
के
न
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School of Distance Education
Questions & answers….
रचना है
1.
उ- उदय
।
2. अपने घर जाने के
कौन
3. आधी रात बालकनी
कौन
उ- एक औरत ,
ले
से।
उ- एक औरत अपने शराबी
और महँगाई
4.
उ- बस
5. अपने
दो-तीन
के बारे
फूट-फूटकर रोयी
सोचकर।
पडी लाश के पास कौन बैठा रो रहा है
6.
उ- उस औरत का डेढ़ साल का बेटा।
7. एक औरत
अपना
उ- उसके
मे
िजले के धंगण गाँव
हु आ। दस
, संपादक
अथवा
जगूडी का
भी
नामक
के
से अलंकृत हु ए है ।
समय
चाहता हू ँ। इस
वे कहते है—इस
चाहू ँ तो एक
समय
का
समय
अगर
हु ए
है , इस
सब से
है । तो भी वे
समय
कोई
रह भी
सकता।
भी
चले गये, कई
होकर
हु ए
ना
करना पडेगा। जो मुझे िजतनी बार आ-आकर
के
, राज अब भी मौजूद है , बची हु ई
बनना
चाहते।
है । वे कहते है
होना चाहता हू ँ ।
अगर
आदमी
बनना
ऐसा कुछ होना भी
हू ँ या मुसलमान
सुअर हू ँ। परं तु इस
करना पडेगा। या मुसलमान होकर मुसलमान
उतनी बार
मारा भी जाऊँगा।
आज
मानव या आदमी
बनना चाहता हू ँ। और न कोई चाकू या
रह पाऊँगा।
हो
अकादमी
,
कहू ँगा
घूमते
के कारण वहाँ
सृजन
हो जाऊँ तो शायद मुझे यह कहना पडेगा
एक गऊ आदमी हू ँ। या
जानवर होकर भी घृणा का
Literature in Hindi
हु ए थे। अपने
रघुवीर सहाय
अपने समय का
होकर मुझे
सन ् 1944 (जूलाई-1)को
छोडकर
है ।
पर,नाटक
अपने समय का कोई
तो कहना पडेगा
कभी
काम
।
आजकल के सामािजक वातावरण का
समय है । इससे बचकर जीवन
बन कर जीना चाहते
कर
हु ई। भरत-चीन
है -- शंखमुखी
वे
है
घर –
रहे । इसके बाद
है । 2004
बाँध
जगूडी....
भारतीय थल-सेना
1961
गये। उनके
हू ँ। ये
ने उसके फोटो और
समय-
10.
मेरे
है
कौन कह
को नहलाते समय औरत
उ—उसके
रहे ।
कर
का।
बारे
है
का
का
Page 16
School of Distance Education
भरोसा
रहते हु ए
कोई
इस
समय
एक
सकता हू ँ ? अगर
के
है । तो भी
तो उनका अपना
परं तु एक
हू ँ।
हू ँ। इस
हू ँ
, सामिजक या
से मुडभेड करते
के
या
हू ँ, आदमी हू ँ, एक
तो
यहाँ
सी
वैसे
साधारण
कहते
रहना चाहता हू ँ। एक रहने
हू ँ।
समय
के
एक दल के
पर
करते
के बारे
दूसरे दल के
आज कल सब
वे मानव बनकर ,आदमी बनकर या
जाएगा।
कोई
भर उनके
का
हु ए
बताते
घर
यह सब हो
एक
का
दूसरे
से झगडा करते है । समाज के
राज
बनकर जीना चाहते
हम कर सकते
इससे बच पाना
अगर ऐसा संभव
Questions & answers---समय
1.
रचना है ?
उ-
जगूडी।
होना
2.
उ—
3.
4. इस
5. इस
अपने बारे
उ
उ-
कहते
समय
गुणडे का
कहते है ?
वे
बनना
है ,
समय
चाहता।
है , और
जानवर होकर भी रहना
जानवर होने पर घृणा का
उ- एक रहने
Literature in Hindi
चाहता है ?
चाहता।
भी है ।
बनना पडेगा। ऐसा होने को
क25130001263हाँ रहना चाहता है
घर
?
चाहता।
रहना चाहता है ।
-----------------------------
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Module-3
prose text.
1.नमक का दारोगा-
लेखक
और
के
के
-
के
हु ई। बचपन से
1936
तीन सौ
सेवासदन,
सभी रचनाओं
नमक का दारोगा
है
यहाँ वंशीधर के
और
पालन पर डटे रहने का उपदे श भी
तक को खोना पडेगा ,
का
भी
और वंशीधर
है ।
वरदात ऐसे
भी कुछ लोग
पैसा भी बहु त
वह
पर
बहता हु आ
था। वंशीधर ने कई
भी दारोगा के पद पर।
का मन
ढूँ ढे।
य युवक था। बडे
थे। वंशीधर ने
और
तथा
चापलूसी करके उसे
से मस न हु ए।
तक पहू ँच गये,
के
Literature in Hindi
ये
याँ गाँव के
के पास आदमी भेजा।
धन के नशे
भी
और
के
चूर थे।
अधीन है ।
वंशीधर तो अपने
डलवायी.
भी हो जाता है।
को
से
समझ बैठा था
भी रख
आ सकती
को घूस के
हमेशा कहा करते
आय
, वह
आधी रात को मुंशी वंशीधर
थी।
जाकर
को
नमक के बोरे से भरे
के सामने और सब कुछ
वंशीधर के पास पहू ँच,े और
बता
लगे. हज़ार,दो हज़ार,तीन हज़ार करके
से हटनेवाला
से
का चाँद था और
खरखराहट सुनी।
आलो
यह
पाने को ललचाने लगा।
था। एक
फुसलाना चाहा। अपने को वंशीधर का सेवक
तब धन का लालच
के
उसे नमक
धनी
भाषा
कहानीकार ने
वेतन
, कठोर
ने अपने कमरे पर पड़े –पड़े पुल को पार
रोका और जाँच-पडताल
तरफ़ से
का था। उसके
राय
यह सुनकर फूले न समाये।
वंशीधर बेमरौवतत
खाना और
को
जीवन
को
डालते हु ए कहानीकार ने नव
कारबार करते रहे । नमक
,
कोई
हमारे सामने
लगाया और नमक के लेने –दे ने
लगा। पढ़े -
आय
का
चमक
से यह
-चुपके नमक का
मुंशी वंशीधर पढ़े -
है । अगर धन
वंशीधर के जैसे
मैनज
े र
सरकार ने नमक पर
थे
पर
ने
हु आ है ।
कहानी है । इस कहानी के
समझायी है । भाषा,भाव,
है ।
म
तथा मुहावरे दार भाषा है ।
हट जाता है और
हु आ
,गबन,गोदान,
का
को
करते है तो भी उसका परदा
सन ् 1880
संकट से गुज़रना पडा था।
,
और
एक
धन
उनका
भारतीय जीवन
रचनाओं
, सरल एवं आम जनता के समझ
जाने जाते
तथा
,
–सारांश--
है
वंशीधर तो टस
हज़ार
था। उसने जमादार बुलाकर
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School of Distance Education
अगले
करते थे। पेशी
का
रखनेवाले थे,
वंशीधर
रहे गा।
आया।
करने लगे।
था। उसके
का परवाना भी भेजा गया।
वंशीधर के घर
थी। वंशीधर
गया। उस रथ से
शायद
के
फटकारने लगे तो
इस पर
का
थी।
परायण संसार
भी अपने को ऐसे ऊँचे पद
कहा-“
था ।
एक
है
दारोगा बनाये रखे।“
वंशीधर ने डबडबाती
कर
सजग
के
का कोई
डी हु ई
के सामने डाँटने-
है,उस पर
ऐसे
ओर बढ़ाते हु ए कहा-आप
का मैनज
े र बना
। परन ्
ले
वह आप को सदै व
से भर
अपनी
से भी मेरा काम पडा है । और
मेरे धन
के
से ,एहसान के भार झुके
कर सकते ,
और
बताकर टालने
आप
न रहा। उसने सोचा
वंशीधर को
पढकर वंशीधर का
हज़ार रईस दे खे ,
से
,कठोर
और वंशीधर
ने वंशीधर को अपनी
को अपने धन का गुलाम बनाकर छोडा है.।
परवाह
सकता। दारोगा ने अपनी
लगा हु आ कागज़ वंशीधर
वेतन भी
के
वंशीधर के घर के सामने एक सजीला रथ आकर
ने बात काटकर कहा—“ ऐसै बेटा
उस
बात दुहराते रहे. ।
न
तो हु आ।
कम है । “
गवाह के
है,आगे से ऐसे मामले
को उतरते दे खकर वंशीधर के
आये
से आगे आने लगे।
झुँझलाये, माताजी दु:खी थी और
हो गये । ऐसे मे एक
था। छह हज़ार
गया।
डालते थे। बला इतने से
व जो उनसे
था।
से ऐसे ओछे काम हो भी
कोई सीमा
दशा और भी
ओर से
पैरवी करने के
को इतना
के
वंशीधर पर
गये।
जज ने तजबीज
के कारण
और
हािज़र
दे नेवाला भी कोई
कर
उन जैसे
और
कचहर
तो
श ने मुकदमा
और
ऐसे
बात थी। लोग उन पर कई
कोई पूछनेवाला
अभाव
गये
के मुँह
से
,बेमुरौवत,
पर
और
One word questions & answers.
1. नमक का दारोगा
उ-
2. नमक का दारोगा
उ- कहानी।
3. नमक का दारोगा के
उ- मुंशी वंशीधर।
Literature in Hindi
रचना है? ( मोहन राकेश, यशपाल,
रचना है? (
कौन है? (
,
,
, कहानी,
, वंशीधर,
)
)
, नौकर)
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4. एक
पडने वाले
उ-
के चाँद से
वेतन .
5. बहता हु आ
उ-
आय।
उ- नमक
उ-दातागंज के एक
के मत
उ-
?
, दारोगा पद ।
कौन है?
8. पं.
संसार भर और
(धन
के
उ-दारोगा पद से
मुंशी वंशीधर को अपने
उ- पं.
तक
राज है?
)
9. मुंशी वंशीधर को अपने
10. अंत
गयी है?
है?
6. मुंशी वंशीधर को कहाँ,कौन सी
7.
तुलना
कौन
?
परायणता का इनाम तो
से. उसके सारे जायदाद का
और कैसे?
मैनज
े र के
वंशीर को
Short answer type (paragraph) questios & answers.
ढूँ ढनेवाले वंशीधर को
1.
उ-वंशीधर के अनुभवी
हु ए हो।
है,वह घस-फूस
पडू ँ। अब
रखनी
ने
ने
घर का
होती है ।
हो।
बदले
अपनी
ओहदे
जाती
ओर
कगारे का
था। इस संसार
उसे
दे ख रहे हो। ऋण के बोझ से दबे
मत दे ना।
आय हो।
पर
हो रहा हू ँ। न मालूम कब
चढ़ावे और चादर पर
आमदनी
अपना
,
दे ता है इसी से
अपना पथ
अपना सहायक था। जब सब लोग चाहनेवाले नमक का दारोगा पद
को छोडा
-चुपके ले गया तो
वंशीधर
तरह बढ़ती
ऐसा काम ढूँ ढना जहाँ कुछ
मुंशी वंशीधर एक
पैसे का लोभ
?
को समझाते हु ए कहा- बेटा,घर
2. मुंशी वंशीधर
उसने इन सब
उपदे श
भी पीछे
वंशीधर को
अंत
Literature in Hindi
का
वह
.।
परायण वंशीधर उसे
मुडा।
हज़ार तक
नामक उस इलाके के
हाख पकडकर
दे ने तैयार हु आ।
भी
न ये सब वंशीधर को
परायण वंशीधर के आगे धन का अहं याने पं.
मैनज
े र बना
वंशीधर एक
होने पर भी
ज़मांदार नमक के कई बोरे
ले चला ।
कुशल एवं
अदालत मे पैसे के कमाल से
दारोगा
, और
न ने
से बच गया और
भी हटने
परािजतत हु आ. । वह उसे
हु आ।
Page 20
School of Distance Education
कौन है ? दारोगा वंशीधर उसे
3.
दातागंज के एक
का लेन-दे न करनेवाला था। सब लोग
तक उसके मेहमान थे। एक बार
उसे रोका। वह अपने को
हु कुम
दे ने को भी तैयार हो गया।
तट पर आपने
कहकर
कृ पा-
थी,
का
को
कुछ
जायदाद का
मैनज
े र बने।
2.
लेखक
रहे
1925
भाग इस कहानी का है ।
क
सुनी थी।
को
के
युग
अपना
बढ़ती
युग
लेखक कहते
है । लेखक का कहना है
का
लेखक के
बन गए
Literature in Hindi
छोडा है ।
सन ् 1973
हर
अब कोई गज़ल तो गज़ल
हो
करने
है । उनके रचे तीन नाटक –आषाढ़ का एक
उनका
कमरे ’,उनका
युग इसका एक
आज का युग
अपनी
,कहानीकार,और
,
हँसी उडायी है ।
के
अब मैनेजर का पद
है ।
“‘
से मोहन राकेश
पन-
अनेक
धन के बल से
वंशीधर को
नाटककार,
,नये बादल, जानवर और जानवर ,एक और
भी
वंशीधर नामक एक
समय आलोपीन वंशीधर के घर आ पहू ँचा। इस
के राजहं स और आधे-अधूरे –एक नाटककार के
भावगत एवं
तीन सौ
ने वंशीधर से यह
- मोहन राकेश
हु आ। और
-कहानीकार है ।
का
।
युग-मोहन राकेश.-सारांश-
अमृतसर
ले चलने का
करके उसपर वंशीधर ने मुकदमा दायर
तो भी नाटककार के
,
हज़ार तक
करनी पडेगी।
एक रोचक कहानी है ।
के तट से वंशीधर ने आलोपीन
अपील है. । यहाँ वंशीधर के
वंशीधर ने
रहने को कहा। यह भी
है ।
अफ़सर
नमक के बोरे ले जाते थे
खींचने वाला
बाद एक
ने वंशीधर से ये
थी। वह
भी बडा लंबा-चौडा था।
आज
वह उससे आसानी से बच पाया। यह भी
भी
बडी
वंशीधर कठोर होकर उसे पकडकर
है । नमक का दारोगा
पं.
है । अपने इलाके
पं.
-
मानव जीवन का
नव युवक के
ले चला?
ऋणी थे। उसका
Model annotations.1.
पकडकर
रचनाएँ
रो ,
का युग है । इस युग
का
के
”
लेखन
उदाहरण है ।
का एक
-
साधन है,
हर चीज़ का
बन गयी है ।
,कोई गीत, गीत
से लेखक इसका
है ।
तथा नवीन
है.
सन ्
रहा, सब
करते
परक
न
चीज़
Page 21
School of Distance Education
लेखक कहते
रात को सोने तक और सबेरे उठने के साथ
भजन, और गीत के साथ साथ चाय,तेल,और
सुनने का
हो गया था
छुटकारा पाइए। एक
न
,सब
है-गीत के साथ
चीज़ पर
लेखक आगे कहते है
जो
न
का केश-
उसके हाथ
,
वहाँ
का
का यह
लेखक को
तेल
के
के कारण
एक
एक दूसरे का
शीशी फूल का भी
आजकल
दाताओं के
से
,
,
और
के संगमरमर
के) होता है । वैसे कई
और
का रास कोई
सफलता का
Literature in Hindi
का
पर साबुन
से सं
जाय। वैसे फूल
है ।
, लाल हाथी का
साबुन होगा ,िजसका
भी कंपनी को
ओर से
का
साधन,
सुषमा और
महासागर
कंपनी
और चीज़ व
है ।
शीशी का और
का
हर
इन
का
दानवीरता का
है।
उसे
कोई न कोई
होता होगा। अखबार और
इन सब का उपयोग
का
के
तैयार
हमारा जीवन
यह चेतावनी भी दे ते
,
(
है ।
बन दाते
पडता है िजसका हमारे जीवन
आज
का साधन
िजया जा सकता है । घर, बाहर,सडक पर और बस
.। मोहन राकेश जी
बहु त सी
साधन का तथा
अपने आप
ऐसी बन पडी है
और
फ़सल कपडे
उससे कपडा
है और
बदल रहा है । दे श के पुराने
पैदा होता है ।
गेहूँ
,
उपदे शकता, आलोचकता,
का
है । हर चीज़ ,हर जगह अपने अलावा
हो सकती है । उदाहरण
उपयोग है
सेब
हर
उभर रहा है । कोई ऐसी चीज़
मज़बूती के
याद
है.।
है ।
बने हु ए है ।
सफेद रं ग के शह के
का सहारा लेती है । कशमीर
पैसे का एक
दे ने
-रहना
का
और
,
के
जानेवाले अणुबम बीमा कंपनी
नई फ़सल से
का
को
उदाहरण के
है.।
पडते
से
कोई गीत गीत
न हो। उदाहरण के
याद
के
सब
का भाव
भी जगह का भी
अपने
शीशी
है,
तक
-
चीज़ का
कंपनी के
तथा खजुराहो के कमरे
बहु त सी
औषधी का
बन गए
,
गीत या भजन केसाथ
वे कहते थे- अब मेरे
बन गयी है । आजकल हर चीज़ का एक नया
न
, और
,
कंपनी के
आपके
गूँज उठते थे।
हो गया।
चीज़
सुनने पडते थे।
–
गायब,
का
रहा, कोई गज़ल गज़ल
दे श
हर गीत के साथ उनके
-
लेखक के
के
ओर से
के धोखे
कला
पडना
होने लगा है ।
बनता है ।
के
वाले
से जोडा जाता है।
वह अपने
से कहती होगी। नये
िजसने उसे
,ऐसै छपा होगा। नयी
हो।
Page 22
School of Distance Education
–कला
के
के
पर
का तथा
और
के
सकता है । रे ल और हवाई के
का
भी हो सकता है ।
दे सकते
लेखक को अब हर चीज़
और उसके
चीज़ का
के बेबी
नई
वे
याद
को दे खने से ऐसा लगता था मानो
का
करने
था। कोई
का समूचा कलेवर
1.
उ- मोहन राकेश।
युग
2
उ—
3.
रचना है?(
मोहन राकेश का
नाम
उ-मदन मोहन गुगलानी।
4.
लेखक को
उ-
5.
गेहूँ
सुनने
से
फसल
उ- कपडे
6.
7.
-------- के
उ
9.
उ
Literature in Hindi
के।
और रे स-
संसार के सामने आ सके।
सहायक होती थी।
का
, कैमरे
बी
याद
का
का
, नाटक कहानी,
सा
था।
चला आ रहा
होता था। अंत
सामने खडा है. ।
,
)
)
आदत कहाँ से हो गयी?
है ।
से
मे
वे चाहते थे
याद आती थी और मन
है?
सहायता से हर चीज़ का नया
उ8.
का।
शीशी।
------------
कंपनी
है?
----------- फूल का
उ-
है?(
,
लगता था।
, मोहन राकेश,
कौनसी
के
के नाम से
का
आइने के समने खडे होते तो लगता था
One word questions & answers.
जा
सबेरे चाय का नाम लेते
दे खकर
काम आ
हो सकता है ।
दे ता है । हर चेहरे ,हर
राजपुत का चेहरा सामने
सफेद दं त
का
भी हो सकता है ।
उस लडके को उस कंपनी के हवाले कर
कंपनी के
के लाल
बचत
का
है । जैसे दवाई
का
दे खा करते थे।
याद आती थी और तब एक
मारकर हँसना
दवाई
के साथ जोड दे ते
चाय लेनेवाले लडके
वे कहते है
के
आ जाता है, िजसका चेहरा
होती थी
का आपस
अब हर
न
का
था। वैसे
पर बीमा
लेखक आगे कहते
हर नाम का
ऐसी
से सब
उभर रहाहै ।
िजया जा सकता है ।
के।
का
जा सकते है?
Page 23
School of Distance Education
चायवाला
10.
लड़का लेखक को कैसे लगता है?
उ- वह
रहा है ।
खुद आइने के सामने खडे होते तो लेखक को कैसा
11.
उ-
का
खडा है. ।
होता है?
Short questions& answers (paragraph q.& a)
-युग –लेख
1.
उ-
पर
–युग नामक लेख के
है ।
सफलता
और
लेखक ने
कंु जी बन गये है ।
को
करते हु ए समाज और जीवन
Model annotation—
1.गोया
से
राकेशजी कहते
के
सफल बनाने का उपदे श,
जैसे सब कुछ
3.वह चीनी भाई- महादे वी
-
ढं ग से
- सारांश---
महादे वी
,
का
महादे वी
’ िजस भावुक
और
Literature in Hindi
से बच
कला
बनाया है ।
बढ़ती
सकते। घर
बंद
तो हर दोराहे चौराहे और
दे खने को
एक
होने पर भी एक
,
रे खाएँ ‘ इस
से वे
रचनाएँ है- -नीहार,
रे खाएँ
भी वे
कमतर
से
. । जीवन
िजया जा सकता है ।
सन ् 1907 ई.
मीरा नाम से भी जानी जाती थी। उनके
अपने
.
से
के
1987 ई. को हु आ।
,
भी
मूल
तैरते आते . घर से
है- उसे केवल इन
रचना है. ।
समाज
,इन
है
का
आजकल के
है ।
, जैसे
से हवा
अपनी
के
होता है । यह सब दे खकर ऐसा लगता है मानो
महादे वी जी
अतीत के
को भी
जीवन जीने का उपदे श
से
कला
है ।
पडता। अखबार उठाए तो भी
हु आ था। और
भी वे
लेखक
सफलता से चलायी है । उनके
–युग का है ।
रोचक
सडक के खंभे पर
लेखक
अपनी
हम जहाँ जाएँ, िजधर जाएँ,जहाँ
होकर बैठ जाएँ तो
‘
का
समाज के हर बदलती
के बारे
है । आज
है- उसे केवल इन
के हर
भाग उनके
को
रोचक और सरस
बदलती
िजया जा सकता है ।
अपने
के
भी
आप
उ- मोहन राकेश
,
का
युग
,नीरजा,
अपना
और
, और उससे ऊपर एक
और संवेदना के साथ
से पठनीय
इस
गये है, वह
रचना
संकलन यामा,
,
,
के
गये।
,
थी।
के
,
,
या।
,
के
के उदाहरण है । उनके
है । ‘अतीत के
Page 24
School of Distance Education
एक
का दु:
मातृ-
महादे वीजी का एक
महादे वी
रचनागत
कथा
जाना,
जाना , उसके बाद
जो
है । िजस
से
है।
करती है । वे कहती ---“ जो कथाएँ
है, वे
बहन के बीच
के
पाने के लालच
इसी काम के
के बाद चीनी भाई का
बढ़ने लगता है ।
उसको
हु ई। संयोग से एक
दूकान पर लगा
अब वह
अपनी
,भारत
अब उसे दूसरा कोई
तो सके अपने वश
खोजता रहा। एक
उसके
सचमुच
?” इतने
हमारे
को अपना
दे ने के
है । चीनी भाई
बह
माँ और
भाई-बहन पर बढ़ जाता है । पैसै कमाने और
लगा दे ती है । एक
न
बहन रात
और
के
से
ने पकड
ने उसे
उसने
और
से
पता
अपने कपडे
कर
कपडे लेकर जाने लगा। कपडे का थान उठाकर वह घूम-घूमकर बेचता। इस
बात थी,
से भरकर
जीवन-यापन और
सीखने
अपनी
आती, उसे भी वे अपनी भाषा
बहन थी। पर धीरे - धीरे
और
महादे वीजी ने सोचने का अवकाश पाने के
बोला
भाषा
आई। चीनी भाई ने उसे बहु त ढूँ ढा, परं तु उसका
रहने का उसका
बहन को खोजना
महादे वीजी को पत चला
भेजा? चीनी भाई
है । चीनी भाई
रहकर भी बोलने
ता के एक
हो
को पढ़कर चीनी भाई के
िजस
के समझ
के काम
, पर लौटकर
चला। बहन को ढूँ ढते- घूमते
को
माँ का
बहन को
के
जैसे
भाषा
से चीनी भाई
के सहारे छोडकर माँ का संसार से चले
का बाँध तोडकर ,
।“
घर से
के
महादे वी
होती है और
:
कथा भी इसका अपवाद
व
का
हु ए ‘वह चीनी भाई’
हो जाता है । इस चीनी भाई
माँ को ले आना, पाँच
और संवेदना पैदा होती है वह महादे वी
का बयान करता है , बहु त सी
पट
और सात
पर
और
बहन से
कौशल से और िजस
होता है वह
करके घर
भाई-
र अपने
चीन से
था –
लडने के
था।
तो कोई है
-
चीज़ है ।
खोज।
तक वह बहन को
उसका बुलावा आया है ।
खुल गई-“हम कब बोला हमारा चाइना
जीवन-
और बहन
,
बुलावा
है? हम कब ऐसा
भी अपने दे श के
यह
One word questions & answers1.
चीनी भाई
उ-महादे वी
रचना है?
.
2. महादे वी
रचना है-चीनी भाई?
उ-
3. चीनीभाई के अपने वश
उ-
4.
और बहन
खोज।
के चंगुल से चीनीभाई को
उ- उसके
Literature in Hindi
के पुराने
थी?
बचा
?
Page 25
School of Distance Education
बचपन
5.
लोग चीनी कहकर
उ--महादे वी
को।
6. चीनी भाई ने महादे वीजी को
उ-
7. चीनी भाई
?
चैना लौट गया?
उ-
भाग लेने के
8. चीनी भाई
उ-
ने
करने
9. चीनी भाई कैसे
उ- अपने
को कौनसा काम के
के बीच फँस गया?
को
उ- एक
हु आ?
काया पलटकर बाहर
Short questions & answers-
1. महादे वी ने चीनी भाई का कैसा
है ट से आधा माथा ढके ,
उ—
-मूँछ
रं ग के डोरे से भरे हु ए
थी।
3. चीनीभाई को अपनी बहन कैसे
उ- चीनीभाई के
को
के
का
कोमल
कहानी भी कह
हु आ?
4.महादे वी
करवाने लगी।
ने कैसे समझ पाया
उ- भारत
रहकर
के
चाइना
के
है? हम कब ऐसा बोला
करता था
अथाह
इतने
था.
Literature in Hindi
आयी।
धडे हु ए
को महादे वी
का हर घुमाव और
बाद एक
करते करते एक
से भर
-से पुरानेपन
ने दे खा।
उसी रं ग से बने
कर
थी, जीवन के अभाव
का जीवन बहु त
हो गया।
का कायापलट करके रं गीन
सजाकर रात
।बहु त खोजने पर भी उसे
चीनी भाई को अपने दे श के
आया। यह जानकर महादे वी जी ने उससे पूछा
सुनकर चीनीभाई
कोट
के बाद उसके और
बाहर ले जाती थी। बहु त
का पता
कभी लौट
छोटे पैर, पतलून और पैजामा का
के आधार पर
महादे वी जीको
पंखड
ु ी चीनी
गयी
के जूते
पैजामा और कुरते तथा कौट
घोषणा करते हु ए
के बीच फँस गया।
?
उ- धूल सेमटमैले सफेद
2.
?
खोज करते करते बालक चीनी भाई
चीनी भाई
10.
करते थे?
था. ?
चीनीभाई को चीन से
तो वहाँ कोई है
,
लडने
बुलावा
बुलावा
भेजा? यह
खुल गई। वह महादे वी से पूछने लगा- हम कब बोला हमारा
? उसका यह सवाल और उसके मुख का भाव
न जीवन-यापन और
जीवन-
से यह
भी चीनी भाई को अपने दे श
Page 26
School of Distance Education
4.जहाँ आकाश
दे ता-
लेखक
सारांश-
के बहु मुखी
—
है .।नाटक,
, जीवनी,
,कहानी,
सन ् 1912 ई.
हु आ। बंगाल के
के
कलाकार
सभी रचनाएँ सामािजक
के बाद के
है, जहाँ
शोर
Modue-4
से
का अनावरण
है ।
और आसमान को छू जानेवाले
उनका अपना
जीवनी- आवारा मसीहा-
है । धरती अब भी घूम
लेख
इस युग
तो
भी
से आसमान
रहे
है । सचमुच यह
यह
आकाश
और
है
कला और
है । यह
पर भूख से तडपकर
मानदं ड
हु ए
का नगर है । सभी तरह के
कुशलता से 303
सडक पर
कोसते
,
ऊपर
पडते है। मुडकर दे खे तो पता चल
अब
,
आना- जाना ,और इसी आने-जाने के बीच
छुरे बाजी तक सभी कुछ होता है ।
ओर
पैर
रहे
है ।
से भाग आये
वह
एक
,
जैसे नाटक,
Literature in Hindi
(
) है, और
है ।
और नेताजी सुभाष,
, बाढ़,
होटल मे ले चला।
,
पर भी कई कई
से लेकर जेब-कतराई तक, नेताओं के
पसारकर सो जाते
से
तक
और
सब कुछ
और इस सब को भोगने वाले दे शी-
काल से
कला
का घोल है ।
,सब
का
ऐसी तूफानी
इन
,
के
पर कसी के हाथ क
का
,
एक
यह असहाय अकेलापन
है ।
एक ओर जीवन के वानदं ड पनपते
के फुटपाथ
बटोरकर
नगर के
एकदम उनके
पुरना
-
कुचलती है,
खाना बनाते ,
वे कहते
घुस जाते
भीड है। बस के
पर
को
हो जाते .।
इस
, बैरे और मोहक
मंिजल के बालकनी के नीचे
करती है ।
नये
आ गया है । सब कुछ राजसी और
,
, िजसके
गूँजते .। एक दूसरे को चीख चीखकर
बीच एक अजनबी बनकर लेखक अपने को असहाय पाता है ।
लगा
ने
चला सकते
होती
लगता है । लेखक गाडी से उतरकर भीड
के पीछे भागे जा
ने
के
टकराती . । तभी न जाने कहाँ से
दबाव पाकर वे
आयी है । नीचे गंगा है।
- जैसे समाज सुधार,कला और संगीत
भीड उमड़ती है । सहसा कुछ
ओर रख दे ती है । कुछ दे र बाद
और
है । यहाँ के भावुक लोग संगीत और संगीत
–
वैसे वे उतनी
धुआ.ँ ,
है जहाँ आकाश
है.। आते-जाते लोग। सब अकेले
यहाँ सब कुछ दौडता है ।
दे ता।
असल
दे ता और धरती पर न पैर पड़ते है.। यह हबडा का पुल है और
भीड़ हर
है ,नामक
कलकता शहर के बारे
के आकाश पर ऐसे कुछ छाया रहता है िजसे कुहरा कह सकते
का एक
है । उनका
केवल
से
घोष
उनके
पर घर बनाकर
होता है । उन
बनकर रहनेवले भी है ।
बंगाल
और शरत, राममोहन और
राय ,इन सबके इस नगर
तक है । भावुकता है,आँसओ
ु ं का सैलाब है ।
सब कुछ होते है Page 27
School of Distance Education
अनोखा नगर है। गोमुखी
मचलती
बडे बाज़ार और
जाती
और यह
आज भी धरती पर पैर
भागीरथी यहाँ
पर बैठे
उ-
2. यह
पड़ते,
आज भी आकाश
दे ता-
नगर के बारे
उ-
यहाँ
नाम है?
उका।
Short questions &answers.—
1.
उ-
के
का
है ।समाज सुधार का
और भाषा का
के फुटपाथ
उ-
के अलावा
पर
और
गत –
5.भगत
लेखक
हु आ। अपने
के
-
कटु
खोज।हँसते
से तडपकर
हु ए है । यह
से
है । कई
तक
था । अपने पाप
Literature in Hindi
चलता है ।
यहाँ रहते
तक होता रहता है ।
परसाई । सारांश-
—रानी नागफनी
कहानी
के कारण भगत जी
हु आ
कहे जानेवाले
सी
थे.
,
का
का
यह भी
है । उनके
,भूख
क
बंगाल
और
सन ् 1924
कहानी,
। भगत
,अनाचार,
है- तब
गत परसाई जी
के बहाने
-
और जल तथा तट
हँसी उडायी है. इस लेख
भगवान ने
कला,
उमडता आया
यहाँ घर बनाकर रहता
पर-जैसे
का जमाना और
अपने को बडे
और
परसाईजी का
है । उनके
जी भगवान
,
से
रोते , जैसे उनके
लेख है,
एक-न-एक नया
तक
?
है । यहाँ के आकाश
का नगर है । यहाँ हर तरह के
, कला और संगीत का
है ।
भीड रहती है । वहाँ पैर
ने
से यहाँ
समाज के सभी
थी, भूत के पाँव पीछे ,
हु आ
दे ता। वहाँ
का नगर है ।
और
के फुटपाथ
के
है
पर
के मानदं ड
3.
है?
आकाश
और
उ-
दे ता ।
-------------- का नगर है ।
5.
2.
से लावा उमड़ता है।
हु आ है?
के बारे
उ-
हु आ है ।
पर
रचना है?
4. गोमुखी भागीरथी का
सकता. ।
फुट-
छाती पर
रचना है?
उ-
3.
पैसा गढ़ते
नगर उमडता रहत है जैसे
One word questions & answers.1. जहाँ आकाश
बन गयी है ।
नरक का दं ड
बात और
खा
गया
पहू ँचाया
Page 28
School of Distance Education
परसाई जी कहते
था.
याने
हु ए ,
अपने
नरक
ऐसे
भगत जी
के
पाप
थे
हो गयी। वे सीधे
।
उनसे
करना चाहा।
भगतजी
भगवान के दरबार
अभी तक
बुरा लग.।
ऐसा
मुझे
रहा। भगवान ने भगतजी को समझा
भी करने लगे थे.।
काम
भगवान
भगतजी ने कहा
सुनकर भगतजी ने कहा
कोई बुरा काम
है ।
भी
भगतजी के
गया और मर गया. ।
वह
फेल हो जाने से
ने सुनाया
एक बीस-
सका था, िजससे वह फेल हो गया था.।
बाद
भगवान ने भगतजी को बता
हू ँ। भगतजी ने भगने
लेख के
तो
हँसी उडायी है. । वे यह कहन चाहते
जाते .।
Literature in Hindi
हू ँ ,
,
भगवान ज़ोर के
बडी
है । तब
तो भगवान ने भगतजी
भजन करता
है ।
से भगवान का नाम सुनकर
को
से तंग आकर लोग भगवान
परहँसी आयी।
कहा
के
पर
भगवान माननेवाले
के रामनाथ
वह बीमार था ,
के कारण
थी। भगतजी के
और
थे। भगवान ने भगतजी
को बुलाया और
ने
नींद और आराम
को बुलाया गया ।
पकडकर ले गया.।
-भजन से
ने
के कारण वह पढ न
को दे खते हु ए
के नाम पर
बेवकूफ
दे नेवाला हू ँ।
चैन से नींद और आराम
साल के
नरक के डरवने दूत
से परसाई जी ने
एक चपरासी
पर भजन गाकर तुम ने बहु त बुरा
पहले भगतजी के
कैसे हु ई। तब
था।
उसका हालत
सी जगह
भगवान ने आगे कहा
तरह चापलूसी सुनकर खुश होनेवाला
लेने का उपदे श
करने को
भगवान
है। यह सुनकर भगतजी ने कहा-
जाता। भगवान को भगतजी
कहा और
भगत जी से
दे वता ने उससे नाम –धाम सब पूछकर कहा
कोई
या
है, कोई
भगवान
था.
तुल हो गये।
के
या नरक दे इसका
ले चला. ।
से पूछा
भगवान तो
भी
दे खने, रे ल-
सुनकर भगवान को बोर हो गया और उनसे पूछा गया
भगतजी भगवान से
सुनाया
ने
पर पहू ँच।े वहां के
माँगा तो
था।
भी लगवाते थे.। कभी कभी
लेने और दे ने के
आया।
नरक का दं ड
संभावना
भगतजी भगवान का भजन करता रहा और समीप आकर
भगतजी
पूछा
के
पर खडा कर
मामला बडा पेचीदा है और
को
के कारण
भी होता था।
पर
हु ई तो वे
को धकेलकर आगे बढने लगे तो वह भीमाकाय बना और उसने भगतजी को
उठाकर एक दे वता के
अनायास
नरक से
और
) माँगा। भगतजी को
(
हु ए पाप
आधीरात तक भजन करते थे। लाउड
परवाह
भगतजी
कहे जानेवाले भगत जी
डाल या गया है । अपने
भगत जी अपने
–
के बडे
नरक
भेज दे ता
रचनेवाले
-भले
से
हो
Page 29
School of Distance Education
One word questions & answers.1. भगत
गत
2. भगत
गत ,
उउ-
परसाई
उ- एक
कौनसी
।
कहाँ गया?
उ- नरक गया।
ने
है?
कहानी है?
के बाद
5.
।
कहानी।
3. यह
4.
रचना है?
सोचा था?
उ- भगत जी सीधे
जाएगा।
6. भगवान के सामने पहू ँचने पर भगत जी ने
उ-
7. भगवान
, मुझे
एक
गयी
8. भगवान
9. भगतजी को नरक
डालने
उ- उसने
चापलूसी से खुश
सुनकर।
कहकर हँसी उडायी?
उ-भगत भगवान को
10.
सा जगह
बोर हो रहे थे?
उ- भगतजी के
समझता है ।
उ- भगवान का है । भगत जी से।
को बुला
न
12 भगत का
परसाई
वह आधी रात तक भजन-
सुनकर वह
एक
है . ।वह अपने लाउड
अपने को बडा
होने के नाते
Literature in Hindi
है ,
भगवान ने
मु
लाउड
के रामनाथ
तरह पढ़ न सका , और
करता है, लाउड
मानने के कारण वह
सुनकर वे न सो सके और
नामक
लगाता है । कभी कभी
भी, याने
को तंग करता रहा. न
ने कहा
लाउड
फ़ेल हो गया।
उसने
है भगत। भगवान के नाम पर
भी लगाता
तैयार है.
है । वह झूठा चापलूसी करता है । यह
सका।
को और
गत। इसका
मरने और मारने तक
है?
?
बढ़ गयी और वे मर गये।
कहानी है-
के नाम पर वह अपने
सका,और न चैन से सो भी
दे खता हू ँ। यह कथन
बयान दे ने
जी ने कहा
कर सके।
है ।
करने
भगवान ने भगत जी के
रमनाथ
उसने ऐसा
है ।
होता,
11. भगत को
?
वह
घर
भी संयमी
तरह काम कर
Page 30
School of Distance Education
Module-5.
ए.बी.सी.डी.--का सारांश-
1.
एक सफल कथाकार,
जगत ्
अनमेल
है ।
ए.बी.सी.डी.
के जीवन
कहनी
है ।
का
कहानी है- ए.बी.सी.डी. ।
हरदयाल और
हरदयाल और
करती
से
माँ शील
जब जब मौका
हमेशा
और
तरह
शील
सब तरह शील
लोग अपनी
को
हो? यह कैसी
उसके माता-
एक
धीरे शील और हरदयाल को
ये
को
से
शीनी अपना
लगा। उसके पूरे
शीनी और
को खबर कर दे गी। नेहा
को
नाम
के दो
भी
Literature in Hindi
,
एवं
रहते
से घृणा
को
पेश करती थी।
थी
हो जाते
शीन और नेहा इसे
के पहले
समझ
अपनी
पहनाते रहते
यह सुनकर
है जो यह भी
के साथ ऐसा
सब को चेतावनी(अगाह)
माँ- बाप
“ माँ और
थी
अगर
शीनी के साथ थी। उसे लग रहा था
वहाँ तो डेट
जाना
बात थी।
को साथ लेकर घर आयी। शील को लड़का खूबसूरत और
न थी, जो इस
करके
शीनी ने हमेशा अपने माँ-बाप को तनाव
परे शान रहे थे। पूरे
तौर पर
पानी
पसंद आया और
भी हु ए।
तैयार
इतने
जो अपनी
शीनी के साथ ऐसी बातचीत होने के कारण शीनी पहले
और उनके
तीखी आलोचना
रहते हु ए भी
थी। शीनी ने अपनी माँ से कहा
कौन ऐसे माँ-बाप
ने उस पर हाथ उठाए तो
इस
का
दे खना चाहती थी।
अभी तक यह मानने के
बक
के साथ कैसे पेश आना
जवान
नी
के यौन जीवन के
के
---शीनी और नेहा- के साथ कानडा
जैसी भारत
थी
पैदा करने वाले माँ- बाप भी
हु ई । उसने पूछा-“
पले-बढ़े उनके
गया है । हरदयाल नामक एक
और डैडी ने एक दूसरे से बातचीत तक
तक छह
है ।
और
तब तब वह
नफ़रत करती । ये
आता
का
का दे श है । और हर कभी भारत के बारे
से कहा करती थी
जाती। यह भी
रहने वाले
के उपासक है ।
भारत
भी करती थी।
के एक
शील अपनी दो
शील भारतीय
उनके
लेखक, संपादक
,
का अमन-चैन
के
शीनी और
साल बाद शीनी ने
रखा था। जब
के
के
से तलाक करने का
िज़द करती
हो गया था। हरदयाल और
नव युवक के
दे ती है । धीरे
जाना है । उनका
तब भी
था
शील ने
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वह भी एक भारतीय
रहा होगा।
और शीनी के सुखद और
तलाक लेने पर
उसे
कामना
माँ शील ने खाना-पीना छोड
थी जो अभी तक
तक
नेहा ने अपनी
थी।
जवाब
रोज़ रोज़
था।
तलाक के बाद शीनी आज़ाद हो गयी। वह
उसने
हरदयाल के
घर
एक
के साथ
मनाने के
और
माँ के साथ
जंगल
कलह से
हो गयी। अबरोल नामक एक
शीनी को दे खा है । तीन
शील ने
अब तक
अपने घर आये
गजब का
से अनुरोध भी
।
ए.बी.सी.डी. नामक इस
जाने पर वहाँ ये लोग अपनी
उस
संस
के
जैसे
भारत
भारतीय
भारतीय न घर का न घाट
2.शीनी का
ए.बी.सी.डी. नामक
से
शीनी
है । शीनी एक
होती है । अपने
माँ शील अपनी
“दे खना माँ एक
Literature in Hindi
से
और
बन जाते
उनके
को भरत
के
साल
है अभी तक
वह पागल हो जाएगी या
उसी दे श का है । उनके
इसका उदाहरण है ।
है- शीनी। वह एक भारतीय
से
के
पल बढ़े
,जो
घृणा का भाव पैदा हो जाता
संतान होने के नाते हरदयाल और शील उसे बहु त लाडको
तैयार भी हु ए।
भारत से
गण
कोई
से हरदयाल
चाहा है
मगर उनके
का दे श है । शीनी ,नेहा ये दो
है ।
के
अपने
पहू ँचते है ।
कथा
ने तो
को
को मानने वाले भी है । ऐसे वातावरण
का
मालूम हु आ
थे।
करो।
ने यह
सभी तरह के खुले जीवन को दे खते-सुनते इन
है । ये सोचने लगते है
को दे खने पर
शीनी अपने सयाने
से थोडा समझौता करने के
के
हो जाते
और
और शीनी
था। वौसे
नई गेल
के
के
ने
पहू ँच गये। तलाक के समय अदालत का फैसला था
वे तो पहले से भी
हो गये। यह भी
उठने
है, अलग हो जाना। वह तो
और
और शील
खबर
कोई फायदा न उठा। तलाक का
पर इसका कोई असर
दे खा तक
भंग हो गया। शीनी
तरह
कर पाये थे
तलाक ले
ने
मातमी माहौल। यह एक ऐसी
दे खभाल कर लेते थे। हरदयाल और शील अभी तक समझौता
परवाह
वैसे इन
अब उनका
से थोडा और सोचने का सुझाव रखा।
कारण पूछने पर नेहा से शीनी ने कहा
हरदयाल से कहा
कहना पसंद
जीवन
ये
(कैनडा के)
तक शीनी के
से उसे पाला –पोसा।
बनाकर रखना चाहती है । माँ बताती थी
कर लेगी।“
गयी है ,तो शीनी तुनककर बोलती है
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खुलकर बताना
वह कुछ भी
आदत है । बाहर और भीतर वह एक है । माँ-बाप से भी
अपनी माँ
पास
खासी सूरत और
रहने का इरादा है तो
है ,
से एक
जवान ग
लौटकर
से
बन जाओ। वहाँ
के चले जाने के बाद माँ ने जब उसे डाँटा तो उसने बदतमीज़ी
के
से
काम कर
यहसुनकर वह कहती है
यहाँ आकर
लड़के ने
मांग
एक
पर यह सूचना
से
। दो
ले
हू ँ।
शीनी को
उसके
भारतके
तो भी वह
से
ने शीनी को
“
शीनी तो एक
का
के वातावरण का अनुकूल
साधारण सी,
सकते
3.ए.बी. सी.डी. नामक
संकट का
के
के
के
भारत से
हो जाता है ।
एवं
को
Literature in Hindi
और
हु ई
एक
प
है । ऐसी
रहना चाहती
समारोह या फलाहार से
पर जाना,
भारतीय सब
वह
का संपू
के
तो
झलक पेश करता है ।
से
जुलकर रहना
कारण भारतीय
जाने वाले लोग अपने साथ अपनी
अलग
करने का सलाह
अपनी तरह से
पर
- ए.बी.सी.डी.
तलाक के बाद शीनी
भारतीय से
शीनी को
भी उसका कोई परवाह
शीनी ने फोन
है । उसका जीवन के
घृणा है । जब उसके
परे शान बन जाते है तो उसके भी कोई
के
करती है ।
-
के
न
हरदयाल को ऐसा लगा
के साथ होने वाले
सी बात थी। उसके मत
माँ-बाप के जैसे
बना दे ती।
बाद एक
,मुझे डराइए
–“
ईज़ नोट माई कप आँफ
भी
उसके माताहै । अपने
होकर जवाब
तरह तरह के
हू ँ। अवर मैरेज ईस नोट
है । एक बार
होता।
,इंिजनीयर
,
भी हु ए।
बन जाती है । वहाँ भी वह एक जाने-माने
तो उसने
जाती थी।
तो
अपमानजनक बात थी।
था। माँ शील खाना-पीना छोड
शीनी एक
माँ –बाप
नामक एक गोरे को लेकर आयी। और माँ-बाप से
भी
वह पापा
जैसे आसमान से
जब माँ ने कहा
थी। यह तो शीनी के
सोचो। ऐसे
है ।“
आज
शीनी उन सब के फोटो
शीनी अपने साथ
समझौता करके
जवाब
आये तो शीनी
जैसे अनेक पेशे के लडके थे।
,
करो और घर बसाने
–“
–खासी
भी हो जाते
जब भारत से उसे अनेक
हँसी उडाती हई वह
करते
है । इन
यह
है । उसके मन
अपने बारे
पले-बढ़े
भाव हम शीनी
सोचती
दे ख
का या
को भी ले जाते है । परं तु
है । और
का मेलजोल
ए.बी.सी.डी. ,दो
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जाने वाले
कैनडा जाने वाले हरदयाल और शील के
भारतीय अपने
बचाकर रखने का मतलब , अपनी
बचाकर रखना है ।
सामने
घर घर
भारतीय
को
खून
के
दो
नये
उनके मन
परे शान रहे । पूरे
अब वह अपने
संयम के
से
पाती
के बीच का
रखा है । पहले
गोरे से
हो गया था।
तक
के
के
है । भारत और
-
के बीच का
हरदयाल और शील
पले-बढ़े
हरदयाल और शील भारतीय
तरह
है जहाँ से
का चैन तो
और वे
वह
से
के
लेखक
के माता-
के
से
यह एक
सावधानी के साथ चलते
है, न
हमेशा तनाव
चेतना को अपने
हो जाता है । इस
यहाँ न
के
और
उभरता
से दु:खी एवं
करने का िज़द ठानी तो वे
बाद एक नया शगूफा।
से तलाक करने को सोचती है । उसके तो दो जवान बेटे भी है । ये सब हरदयाल और शील के
को बढ़ाते
न
शीनी और नेहा
उसको तो भारत को
तो उस
का है । तब
होता है । इस
है ।
जब बडे हो जाते है । तभी
के
न होकर दो
का
शीनी
षय को पेश
एवं
घृणा है और इसके साथ तालमेल
पर
के
उनके
सब
दो
या सफेद बनाने
इस
भी
का
और
अपनी
वह तब तक संभव है
के बीच का
दे ता है ।
है ।
और
भारत है ।
के उपासक है ।
इस
एक छोटा सा भारत बचाकर रखना चाहते
संकट पैदा हो जाता है ।
है । उनके तो
से
या
से सो भी
सकते। हरदयाल
करने लगती है । नेहा भी इसी
है । इस
से
दे खने पर
मालूम होगा
है ।
खाना-पीना तक छोड
इस
से
के हर
थी।
और शीनी
---
है । वे कथाकार,
का
1939 को
1
लेखक, और संपाजक के
हटाओ, ज़रा सी रोशनी,
,
सलामत है, 17 रानडे रोड, ए.बी.सी.डी.(
रचनाएँ
का सह संपादक, ध
,
Literature in Hindi
कूचे,
कई
का
या
के
उप संपादक
के
है ।
छुटट शराब (
)
,
है । आजकल भारतीय
हु आ।
भूषण
और नया
एम .ए.
( कहानी
) । दे श-
भी
मे काम
,
का संपादक के
---नौ साल
) खुदा
अनेक
है । भाषा नामक
से
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