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NOVEL AND SHORT STORIES IN HINDI 182 UNIVERSITY OF CALICUT

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NOVEL AND SHORT STORIES IN HINDI 182 UNIVERSITY OF CALICUT
NOVEL AND SHORT STORIES
IN HINDI
Study material
VI SEMESTER
B.A HINDI
CORE COURSE
(2011 ADMISSION)
UNIVERSITY OF CALICUT
SCHOOL OF DISTANCE EDUCATION
THENJIPALAM, CALICUT UNIVERSITY P.O., MALAPPURAM, KERALA - 693 635
182
School of Distance Education
UNIVERSITY OF CALICUT
SCHOOL OF DISTANCE EDUCATION
Study material
VI SEMESTER
B.A HINDI
CORE COURSE
NOVEL AND SHORT STORIES IN HINDI
Prepared by
Dr.RANJITH M
ASST.PROFESSOR
DEPT. OF HINDI
MES ASMABI COLLEGE, P.VEMBALLUR ,
KODUNGALLUR
Scrutinised by :
Dr. PAVOOR SASHEENDRAN (Retd.)
38/1294, APPUGHAR,
EDAKKAD P.O.,
CALICUT
Type settings & Lay out
Computer Section, SDE
©
Reserved
Novel and Short Stories in Hindi
Page 2
School of Distance Education
INDEX
1.
के
2.
5
9
3.
'दौड़ '
19
4.
कहानी
22
5.
कहानी
6.
7.
8.
“
9.
10.
11.
अपराध
का
के कुछ कहानीकार
"
के घेरे
भूख
12.
25
29
36
39
41
43
45
47
Model Question Paper
Novel and Short Stories in Hindi
49
Page 3
School of Distance Education
Novel and Short Stories in Hindi
Page 4
School of Distance Education
एक
के
कथा
के
युग
हु ई। जीवन
और कहानी नामक दो
का आयाम,
का
हु ई
हु आ। इन
कहानी
के
का
है पास
का मूल
"
(रखा हु आ).मतलब वह
मानता हू ँ .मानव
-कारण
घटनाओं
ने
बार इस
या कोई भी
हमे
के
के छह
इन
के
माने जाते है -
,
का
को
बनाते है . लेखक को
है . उनको एक साथ बनाना लेखक का परम
Novel and Short Stories in Hindi
.
डालना
को
से
है " गुलाबराय
होने
होती वरन ् यह मानव-जीवन को
से
के बारे
होता है उस
का सबसे
कथा
रोचक
से
को पहचाना
होते है . अब हम
एवम
कथानक है
रचना होती है । इन
कलेवर तैयार हो जाते है .
लाना
पर
का
के साथ
से भी
है .
और
के बारे
.
,दे श काल एवं
. िजस
के ढाँचे के ऊपर पूरे
का
,संवाद, भाषा
इकाई है यह .
को
इसको है .
आकार
जीवन का
जीवन के
से
है य़ह
से बंधा हु आ वह
मनोरं जन के
करने
और
का पालन करते हु ए कहे जाते है .
तथा पेचीदगी के साथ
व
अनके
करने
और घटनाओं का यथासंभव सजीव
है . "
का अनुकरण,
आनेवलॆ एक जन
को जीवन का
"
होने के कारण कथा
के कारण
लघुकथा नामक
के
के
,
युग कॆ दे न है । जॆवन के सभी पहलुओन का
जीवन के
अ.
–
के
कथा
है –
बन गई।
का अंतर,
,
,
सबसे
माने जाते है
भी होते है .इन सबको एक साथ
का आधार ठू ं ठ
अनुमती
Page 5
School of Distance Education
आ.
िजन
के जीवन
होते है .उन
के
के
,
ई. दे श काल एवं
तो
कर
उ .भाषा
न
सभी काम
लेखक के कथन के
के
मदद दे नेवाले भाग है संवाद .
के अनुसार संवाद होना
वातावरण
कहानी कहाँ चलती है
के कहे
के
के बारे
के
.
सूचना यहाँ
. उस दे श और
के बारे
है . इन
बांटने पर
को है
.
होते है.
हो .
के
उनके बीच हो रहे संवाद का सहारा ले सकते है .
लेखक अपनी भाषा के
अपने
है .
जाता है वे
भी होता है .
को आगे ले जाने
करने और
ऊ.
के
का चयन होता है और उनके अनुसार
इ .संवाद
,
घटनाओं को लेकर कथा का आयोजन
के
न
के
अपनी मन
को इस बात पर
बात हमारे सामने रखते है. हर
दे ना होगा
के
लेखनी चलाते है. िजस
पाठक को
. तब हम कह
अपनी
भाषा
जाते है . सभी
के
सफल है .
के अपने
जाते है
१ .सामािजक
२.
३. जासूसी
४.
५.
६.
बोध के
७.
८.
९.
१०
११ जीवनी परक
१२ घटना
Novel and Short Stories in Hindi
Page 6
School of Distance Education
का
और हर
करके इसके
युग 1800
2
4
तक
युग 1920
से 1936
तक
युगीन
से 1920
बँगला और
से हु आ ."
रचना हु यी .इस युग
और
के
इस युग के
बहु त से
सन १८ ७ ९ ईसवीं के
जी के अधूरा
कथा ‘नामक
है .'
युग
ने
बँगला से अनुवाद
. ये
सीखी
सुधा
भी
एक साथ ,
कृ त "
था .
रचना
"
रचना हु यी
ने '
था . बाबू
इतने
हु ए
रचनाएँ है .
का
इनको पढने
बाल
माना जाता है .
.
','
' का '
मेहता लजा राम शरम कृ त
'
'
',
'
.'
'
','
' , 'हवाई नाच' :
'
के '
.
.बँगला भाषा से
'
युग
जासूसी और सामािजक
आपने डा .
जी ने '
है -"
' एक कहानी कुछ आप बीती कुछ बीती '
हठ' , 'एक खेल '
'.'
'
रचना
,जासूसी तथा रोमानी
जाते है .
'
को
ने
लाला
का भी बहु त
'
तथा
के
,
के साथ साथ
.
के
रहा. पूरे दे श
तक
से आज तक
जी ने अपने
भाषी
तक
तक
से 1900
युग 1936
5
से 1850
भाषी
.
युग 1850
युग 1900
3
और अनेक
योगदान
जा सकता है .
1
केवल
':
','तारा',
'
.
'वीर
:
','लाल पंजा ','सागर
'
Novel and Short Stories in Hindi
Page 7
School of Distance Education
युग
.
ने
के कारण कई
जयशंकर
है
को
नए युग का
के
,चतुरसेन
युग 1936
इस युग
के पकड़ से बचाया और
से
होते है ,
गए .
सहाय ,
,
हु लचल और
युग के
वेरमा , शरण
के नाम
से आज तक
-
-
:
,
‘
’ और ‘
’
बोझ’
‘
‘साँप’
बात
के बाद
तो बहु त सारे
गए
रहे ,
जीवन-
के
के बीच एक
ने
को वे
एक
या तेवर
तरह टँ गी
रचना
रचना
सघन
,
नाथ रे णु, अमृतराय, तथा
,
मोहन राकेश,
साहनी, भैरव
,
के
जोशी, अमृतलाल नागर, रांगेय राघव और भगवती चरण
मासूम रज़ा ने
,
छू सके जो सामािजक
बनकर
, यशपाल,
,
के
है । अमरकांत,
,
तथा
ने
यादव,
भाव बोध वाले अनेक
भी नए कथा
के
XXXXXXXXXXXXXXXXXXX
Novel and Short Stories in Hindi
Page 8
School of Distance Education
दो
के
(३१ जुलाई, १८८० - ८
बर १९३६)
के उपनाम से
से एक
नाम से
ने
िजसने
कर
जाता है । इस नाम से
है िजसके
लेकर
य
का
८
का
से
से
उपन ्यास से
गए और बाद
उपन ्यास
इसका
, जब
मसौदा भी पहले
अवध के
बदलाव का
Novel and Short Stories in Hindi
, १९०५ तक
'
से
एक ऐसी
उनका
यह मूल
का
यशपाल से
पहले होता है ।
‘'आवाज-ए-
हु आ। उनका दूसरा
गया। उन ्
से उन ्
य को
भारतीय
उनके सभी
हु आ।
उपन ्यास
'सेवासदन' (1918)
'बाजारे -हु स ्न' नाम से पहले
कराया। 'सेवासदन' एक
गया। इसके बाद '
एक अंधे
,
' नाम से 1907
आए थे,
जीवन पर
के दौर
' (1927), 'गबन' (1931), '
त हु आ।
उनके
' नाम से तैयार हु आ था
'
ने
य
के वेश ्या
व ्यक् त मुख ्य समस ्या भारतीय
जीवन पर उनका पहला उपन ्यास '
'गोशाए-
कराया। '
उपन ्यास
के अनुसार 'सेवासदन'
पराधीनता है । इसके बाद
के बाद िजन
’
'सेवासदन' पहले
कहानी है । डॉ
सा
के साथ आगे बढ़ाने का काम
) ‘असरारे
के लेखक थे और
के
अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत
कथा-
व हमसवाब' िजसका
[
को गहराई तक
नींव रखी। उनका लेखन
के उपन ्यास न केवल
, १९०३ से १
मूल
के महानतम भारतीय
एक ऐसी परं परा का
आगामी एक
मूल ्
(
उपन ्यास '
'
कहानी और
परं परा
और
मील के पत ्थर
उनका पहला
बनने
ने
तथा सुधी संपादक थे। बीसवीं शती के
तक
उपन ्यास[
मूल
बंगाल के
का अभाव था, उनका योगदान अतुलनीय है ।
सामािजक
'’
था।
[]
के
, कुशल
और
]
व नवाब राय नाम से भी जाना जाता है और
मुंशी
शती के
ने
वाले धनपत राय
' (1921) आया। इसका
'सेवासदन'
इसे पहले
का संभवतः पहला उपन ्यास है । यह
' (1925), 'कायाकल ्प' (1926),
' (1932) से होता हु आ यह सफर 'गोदान' (1936) तक
सूरदास को कथा का नायक बनाकर
कर चुके थे। गोदान का
य
,
कथा
व
को
य
य
Page 9
School of Distance Education
महत ्
स ्थान है ।
'आलोचनात ्मक
य संबंधी
' तक
त करती है । एक सामान ्य
नायक बनाना भारतीय उपन ्यास परं परा
फंसकर हु ई कथानायक
अपने
अंत तक
है । '
गोदान का
से मोहभंग हो चुका था। यह
का अधूरा उपन ्यास है ।
'
ने
उपन ्यास को जो ऊंचाई
" (७
,
-
और सफल
,
को
के
बचपन लखनऊ,
िजले
एवं नई
होने के साथ-साथ वे एक
कहानी,
लेखन
लेखक
का मूल कथ ्य भारतीय
उपन ्
के
को
को
को एक
,
का
ने
के
१९३२-२७
जगत
और
मोड़ दे नेवाले कथाकार,
पकड़
करने
बहु आयामी
के
भी थे।
२००७)
लेखन,
उनके लेखन के कई तरह के रं ग दे खने को
पटकथा जैसी अनेक
का लेखन केवल गंभीर
७
१९११
हु आ।
एम.ए. करते समय
बीसवीं शती के सबसे
,
एक चुनौती बनी
जाना जाता है । इनका
, अपने अपने अजनबी।
जीवन
हु ए, खासकर उनका
, १९८७
के
तब तक
भी दे खा जा सकता
बीता। बी.एस.सी. करके
: शेखर: एक जीवनी,
(
, कथा-
दौर
से जुड़कर फरार हु ए और १९३० ई. के
अनेक जापानी हाइकु
६
, १९११- ४
के कुशीनगरनामक
और
,
के उपन ्
कई भाषाओं
उपन ्यास गोदान।
"
अंत इस बात का गवाह है
, वह
के उपन ्यास भारत और
जीवन पर
करते-करते उपन ्यास के
'
का दामन थाम लेते
का
को पूरे उपन ्यास का
के जहन को झकझोर कर रख जाती है ।
' और '
'
' से
बदल दे ने जैसा था। सामंतवाद और पूंजीवाद के
मृत ्यु
उपन ्
मुख
'
गये।
वाले
से एक समझे जाते
से
जुड़ा
रहा
अपनी
-
एक सड़क
,तीसरा आदमी ,डाक बंगला ,
आँधी,आगामी अतीत,सुबह...दोपहर...शाम,
,लौटे हु ए
खोया हु आ आदमी,
,
बात,एक और
,,
Novel and Short Stories in Hindi
Page 10
School of Distance Education
जी का
बाबू
करने के
माघ
साहू दान दे ने
थे। इनका काशी
महादे व' से बाबू
का
दे हावसान हो जाने के कारण १७
, घर
सहारे के
हड़पने का
काशी मे
जहाँ
है
कालेज
,
के
हु ई,
, तथा फारसीका
बाद
ने तीन
गया है । '
करते
रोमांस के कारण
, नगर,
जी
इरावती
रोमांस के
१९२९- २५
के
और
Novel and Short Stories in Hindi
था। वे
; दूसरे
लेखन के
पर
गया इनका अधूरा
है ।
अपने
से
मे
है जो
होते हु ए भी
२००५)
(१९९५),
से
एक
' को
भी
का अंतर
है जो भावुकता और
का समाधान करता है।
'रसमय
सभा के
हु आ।
आदर का
और जीवन का
(३
को
के
इनके
भी थे। वे
जीवन के सुधार के संकेत
है । इन
गया,
थी और कहा जाता
गंभीर
'कंकाल',
'
अपनी
थे। वे
का
जैसे
एकसवैया
थे और शतरं ज के
47) को उनका दे हांत काशी
14, 1937 (
का
से
का
के
जी
जाती है ।
, पुराण तथा
खान पान एवं गंभीर
रोग से
भी
'
और कला के
बाग-बगीचे तथा भोजन बनाने के
थे।
माता और बड़े भाई का
घर पर
'रसमय
का आदर
से
,
'कलाधर' के नाम से
वेद,
के
जी
जनता काशीनरे श के बाद 'हर हर
धीरता और गंभीरता के साथ
घर के वातावरण के कारण
करनेवाले,
बाबू
हु आ। इनके
जी पर आपदाओं का पहाड़ टू ट पड़ा।
भाभी,
थे। इनके
था।
काशी के
था और काशी
गत करती थी।
केवल
.
थे और इनके
बड़ा
, इन सबका सामना
,
नौ
10, संवत ् 1946
और
बुनावट पर
एक
कथाकार और
अकादमी
जा चुका है ।
नंद कुमार
(१९८५)
(१९५८) से
से बेजोड़ समझी जाती
के घर
थे।
दे श
लेने वाले आठ भाई
पाने वाले
भारत सरकार के
पहाड़ी छायाएं दूर तक पहचानी जा सकती
से
Page 11
School of Distance Education
कहानी
-बोध लाने वाले
परं तु िजतना
है उतने से
तो संशोधन
,
महान
से
इनका
३
का
) के
से जूझने के बाद ७६
को भारत
१९९०
अपने
हु आ
एवं
के
के समय
थे
,एक
नाथ 'रे णु' (४
१९२१,
नाथ 'रे णु'
के पहले
से
के बाद रे णु ने
।
कूद पङे । बाद
काशी
1950
Novel and Short Stories in Hindi
था।[
कला
है
के
अपने
पर गहनता एवं
के
१९५९ से १९७२
करके
कहानी माया
हु आ। वे
पर
आफ
सृजनपीठ भोपाल (१९८१-८३) और यशपाल सृजनपीठ
के
इंटरनेशनल
इसी समय बीबीसी
उनपर
२६
छत' और 'वे
था--
, २००५ को
' उनके
उनका
१९९९
भूषण से
,
हो
गया था.
',
. उनका
सन २००२
से नोबेल
छत, रात का
हु ई थी।
गया। 'रात का
को
भारत
के
,
- ११
१९७७)
मैला आंचल को बहु त
गया
नेपाल के
ऐसे रहे
था।
भारत सरकार
सुख ,लाल
है ।
लगभग समूचे यूरोप
का
का
सुख', 'लाल
सरकार
से
रहे (१९८९)। १९८८
गया।[3]
'एक
तक
) के फेलो (१९७३),
(
हु आ
कम
कहानी
के
था और इस दौरान
का
बनी िजसे १९७३ का
द
फेफड़े
जैसे कुछ
१९२९ को
करने का अवसर
-
(
सफल हु ए
को भेदकर उसके भीतर पहुं चने का भी
एम ए करने के बाद कुछ
तक यूरोप
एडवांस
है ।
है ।
कालेज से
वे
और
पाने
के आधार पर भारतीय और
से
वहाँ
वे बहु त
का
के
से 1942
थी िजसके
तथा
करने
से कोईराला
रहकर
िजसके बाद वे
भी
िजसके
Page 12
School of Distance Education
नेपाल
हु ई । १९५२-५३ के समय वे भीषण
ओर उनका झुकाव हु आ । उनके इस काल
कथा
, उनके परम
से
रहे थे िजसके बाद लेखन
कहानी तबे एकला चलो रे
झलक
है ।
नींव रखी ।
थे ।
, एक
कई रचनाओं
के रे लवे
का
है ।
रे णु के
लेखन
इसके बाद के
मैला आँचल और परती
वो बात
मैला आंचल ,परती
साहनी (८
संघ (
के
भारत आकर
) से जा
(फॉरे न
से थे। १९३७
एम ए करने के बाद साहनी ने १९५८
के बाद
के
हाउस)
रहे । १९९३ से ९७ तक वे
मानवीय
वामपंथी
के
साहनी
तो
भी
कॉलेज, लाहौर से
लय से पीएचडी
अकादमी के
भी
रहे । यहां
नामक
लेखक संघ (
के
गया था।
Novel and Short Stories in Hindi
, १९७५
का लोटस
भारतीय जन
रहने के बाद
भाषा
काशन गृह
दो
का
वे
) से भी जुड़े
रहे ।
लेखक माना जाता है ।] वे
को अपने ऊपर कभी हावी
के साथ जुड़े होने के साथ-साथ वे मानवीय
जाएगा
भी करते थे।
का
परं परा का
रहे और
के जाने माने
बाद
अनुवादक के काम
-
अलंकरण से
जुलाई २००३)
होने के साथ-साथ ये
नयी
साहनी को
अकादमी
सरकार के
पंजाब
बने। १९५७ से१९६३ तक
करते थे। आपाधापी और उठापटक के युग
लेखन के
लाहौर
अंबाला और अमृतसर
१९६५ से १९६७ तक दो
लेखक संघ और
१९१५- ११
का काम
इसके
जैसे
और जाता है पर
चौराहे , पलटू बाबू रोड
,
के
भारत
ऊपर
.
,जूलूस
साहनी
तक लेखन का
साहनी का
अपनी
को कभी आंखो से ओझल
के
वे
बलराज साहनी के छोटे भाई थे।
, १९८३
लेखक
गया। उनके
होने
अलग था।
१९७५
उनके
तमस के
(पंजाब सरकार), १९८०
तथा १९९८
तमस पर १९८६
एक
भारत
का
Page 13
School of Distance Education
- झरोखे, तमस,
३
(
पाई और
कहानीकार
तक
आपका
से
`तीन
कहानी
एक
`आपका
साथ
और
भी
गया उनका
(१९६६)
के सफलतम
है िजसका एक एक अंक लेखकहै ।
के बीच आम आदमी
`महाभोज' (१९७९) पर
'रजनीगंधा' नामक
भी
:- आपका
६
ने
नाटक
,
उनके
सैलाब' (१९६२), `
' और `
को
' (१९६२) पढ़े
रखकर
जाता है । लेखक
था। आपने `
गहराई को
हु आ था। इसी
गया उनका
यादव के
एक दुखांत
से
का घर'
करने वाले उनके
'
हु ई थी और उसको १९७४
संगीत नाटक अकादमी,
, एक इंच
हार गई' (१९५७),
दे खा झूठ' उनके
अकादमी,
, कोलकाता,
, महाभोज,
एक
रहे एक
पीड़ा और
हु आ था।[2] इसके
सरकार, भारतीय भाषा
से
लेखन का
`एक इंच
से एक नाटक भी
एम ए
करने
सच है '(१९६६), `
', `
' (१९७१)
नाम का चुनाव
के मीरांडा हाउस
भी जाने माने लेखक थे।
ने
, नीलू
मंदसौर िजले के भानपुरा गाँव
था।[1] लेखन के
सृजनपीठ
सुख
माडी,
१९३१)
का बचपन का नाम
तक
, मायादास
सच है ' पर
का
का
,
और
और कलवा, एक कहानी यह भी।
:
. .
:
.ए.
'
'
(१९८४-८८)
-
'
Novel and Short Stories in Hindi
१९५४
:
'(१९६३-६६), '
' (१९६७-७८), '
- '
' (१९७८-७९), 'गंगा'
' (१९६१-६३) '
'
Page 14
School of Distance Education
(१९७९-८०)
'(१९९०-९२)
'
१९९७
' से
'
१९८०-८२
'तीसरा आदमी', '
' और '
त' आँधी'
', '
तथा '
'
गाथा है । “
'
'
'
,
' पर गुलज़ार
'
', 'आगामी अतीत', 'सुबह-दोपहर शाम', '
'
', 'डाक बंगला',
-
-'लौटे
', '
'
,
“
(अशोक बाजपेयी)
: १४
१९३१
:
बाद,
, जनपद-
, भागे हु ए लोग, डेरे वाले, हौलदार, माया सरोवर,
,
, मुठभेड़,
,
,
, छोटे -
,
,
,
, मुख सरोवर के हं स, कबूतर खाना,
,
बचपन गाँव के
से
उनके आठवीं
डी.ए.वी.
के
सहज
तक
तथा
,
के
Novel and Short Stories in Hindi
का नाम माधव
वातावरण
गंगा
इंटर कॉलेज
वे इलाहाबाद
,
,
,
,
तथा माता का नाम
हु आ।
हु ई। दोनो
माँ
खरे से
दे वी
थीं, िजनसे
हु ई। नौवीं से बारहवीं
गए जहाँ
था। उनका
पाए।
पढ़ाई बाँदा के
,
Page 15
School of Distance Education
और
के साथ यह
और १९५९
एम.ए.
और १९६१
वे भारतीय
कुशलता का
वे
सेवा
करते रहे । १९६०
धनबाद
उसने
पहु ँचाया। इसके बाद वे
अनुवाद
ने १९६३ से
हु ई।
सेवा के
के
लेखन के संसार
समीरे , पाँच
वाला घर, फूल...
: 22
: कहानी,
:
,
कुछ
-
(
िजस
गए
कर
तक
और
,
भी बने और १९९७
से
जमीन, हु जूर दरबार,
,कोहरे
वे चुन
हु ई। ]
है ।
रोशनी , धीर
कैद रं ग], धूल
पर।
)
, नाटक, अनुवाद
,
, नो सूनर, इतना कुछ,
: अपने से अलग,
: कहानी,
पद
बनकर आ गए।
;
:
: 13
के
पहले
बन गए।
,
: 3 जुलाई 1939,
:
कालेज
से
)
: सनातन
:
और
(
1980,
कॉलेज गोरखपुर
जो अभी तक
- वह अपना चेहरा, उतरती हु ई धूप, लाल

) इलाहाबाद
(
पास करते
लगभग एक साल तक वहाँ काम करने के बाद वे
इसके साथ
१९५७
1903,
Novel and Short Stories in Hindi
,
,
तो
,
-
,
है
, इधर-उधर, बाहर न भीतर, खोई हु ई थाती
, मृगांत
,
(
,
,
)
Page 16
School of Distance Education
: घृणामयी,
,
,
,
: धूपरे खा,
,
:
,
:
: 1
1939,
:
, कहानी,
,
,
,
, बांदा, (
: 22
:
-
,
:
वापसी,
: 25
,
, हु जूर दरबार,
,
,
, पगला बाबा,
,
1948, इलाहाबाद (
कुइयॉजान, जीरो रोड
, काले साहब,
,
: नए पुराने माँ-बाप, अंत:पुर, धांसू,
, कहानी, लेख
,
)
, फूल ...
, हवाबाज,
,
,
,
याँ
,
)
,
: शामी कागज,
,
, आलोचना
: वह अपना चेहरा, उतरती हु ई धूप,
धीर समीरे ,
,
1910, जालंधर (पंजाब)
, कहानी, नाटक,
,
, सुबह के भूले,
,
,
: 14
,
:
,
,
,
, िजंदा मुहावरे ,
, संगसार,
, गूग
ं ा आसमान, दूसरा ताजमहल, बुतखाना
,
,
1938, कोलकाता
Novel and Short Stories in Hindi
Page 17
School of Distance Education
: कहानी,
:
मन
, नाटक,
,
,
, वंशज,
, टु कड़ा-टु कड़ा आदमी,
:
शहर के नाम, समागम,
,
), मीरा नाची (
: 26
:
(
2003
,
,
,
, शालभंिजका
,
, कहानी, नाटक,
:
,
-
,
, कठगुलाब,
), जूते का जोड़ गोभी का तोड़,
,
1931, भानपुरा, मंदसौर (
: 3
:
,
1967
: कहानी,
:
,
:
Novel and Short Stories in Hindi
,
,
)
,
, महाभोज,
,
,
,
,
Page 18
School of Distance Education
तीन
'दौड़ '
, कथा-
-
-
थीं।
, कमतर
२ नवंबर १९४०
, मुंबई, पुणे, नागपुर और
'छुटकारा', 'उसका यौवन', 'जाँच अभी
' और '
', '
दर नरक', '
-'बेघर', 'नरक
'
' और '
के
'कहानी'
(
-भारती (
)
के आधार पर 'दौड़ '
राकेश और
रे खा का
ने अपने
और
जीनेवाले
उन पर पड़ने लगा .
के बाद पवन
समाज के
के
लोगो का हाल
गए और
होगा सवाल उठाकर
Novel and Short Stories in Hindi
ढे र
छोडी थी .
उपाधी
एम. बी. ए
भी
बनायी .
के बाद
के
आगे बढ़ते है .राकेश और
.एम ् .बी .ए .
लगा . .उसी बीच उनको
को अपने जीवन
०
का
को
. बाजारवाद के
जीवन
, उ०
)
रे खा के बेटे पवन और छोटू के
था .रे खा ने अपनी
सामान उन
'दौड')
'
ठहरने लगे. ऐसे हाल
से न पूछ कर
राजकोट
पवन और
के बाद पवन को
के सामान वह भी
हु यी .अपने
और
के
रहने लगे .
के
हमारे सामने आ रहे है . छोटू भी
गाँव
बूढ़े मा - बाप
रह जाते है . उन
हो जाता है .
Page 19
School of Distance Education
राकेश और
के .िजन
रे खा इस
का
कथोपकथन
पुरानी
वे कर रहे है उसके
जीवन का
दे श काल
करते है
के
कहनेवाले बात कहाँ
है ..
से दो
गया है .रोजगार चाहने
भाषा का
भी
इस
है .
के
साल
हमार समाज
ताकत थे.
अपने मन
.गाँव
यह
और
काम
रह जाते बूढ़े माँ- बाप.
सफलता दे ता है वह अहमदाबाद शहर है .
है .
एकदम
के कई
बात
भाषा के
के साथ -साथ
छूट
भाषा का
आज
के सामने
Novel and Short Stories in Hindi
है
के
है समाज
का
है .
बोये गए बीज अब भी
भारत के
से दूर होते रहे .इसका फल आज हम भोग रहे है .
दे खो वहां के नौ जवान अपने बारे
दे
खोल
समाज ने
है .
का जाल
एम बी ए
तरह से
हम उस
है .
अब घट रहे है .नाम और धन कमाने
है .यह
कम हो रहे है . उनके सामने
का
ने
ने
होगॆ. उस दे श का पहचान भी
फस कर लोग अब जी रहे है . उसके फल
.मानव और जानवर
के
के माने जाते
रह जाते है.
जाने पर सब कुछ छोड़ कर वे चले जाते है और जहां पहुं चते है वहां का हो जाते है
के जाल
और
है .
का एक
समझाना
कसी भी गाँव
कथोपकथन को है .
और
रहने के बाद हमार दे श आज़ाद बन गये.
भी ,शहर
हो जा रहा है
पर
नए
हो रहे है है .-इलाहाबाद और अहमदाबाद . इलाहाबाद, अपनी
करने के
शासन के
है.
ने
है इसका सूचना
छोटू
भी है .
संवाद का
के
मौजूद है .यह
रोज़गार और
हाव भाव वे
दे श को अपनी -अपनी
शासन
है . पवन ,
को आगे ले जाने का
को अपनी मन
भावनाओं और तनाव को
आज
पर
के साथ,
से
के
हो रहे है . भारत
युवा
है .
सेवा मे
युवा
होने
दौड़
लोग अब
लोग जीने को भूल रहे है .
के सामने एकदम नए ढं ग के
है .उस से बचना असान काम
भी उसका असर दे ख सकते है .
के पैर लड़ खडा रहे है.
जाता है . समाज
सेट है ,
का
को मानते
रखने वाले
अब
है . बाजारवाद और
और
करनेवाले एक पहलू
कैसे हमारे समाज एक
करनेवाले
बाजार
Page 20
School of Distance Education
सकते ".
पर
डालती है .
बीसवीं
के अंत
एक जगह ,
समाज के बदलते
इन
को जाता है तो दुसरे
'दौड़'
ममता
फल
गया है . भारतीय
के
जानने या उनके बारे
है .
एक कार है . यह एक
के बीच हो रहे
है : 'इलाहाबाद
के
आने पर गंगा जल
बाधा डाल रहे है .
साटलाइट
यह
और
ढं ग के रोज़गार और
दौड़
लोग अब
के
के बीच
को मानते
लोग जीने को भूल रहे है . यह
Novel and Short Stories in Hindi
यहाँ
डाल
चलेगा “
'दौड़ '
इस
हर
और
अब हर
है
जीवन
आज
है ,
से
,
गया है. पवन और
समाज का जीता -जागता
अपनाए थे. मगर काल
होते .इस
खोल
कर रहे है .
वाला सच है .उन
ऐसी
है दौड़ .
सोचने तक तैयार
और
है
के
जीने जा रहे है समझकर राकेश अपने बेटे से यह
जी
के
के
है .
बूढ़े तो इस बात सोच कर दर रहे है
का
जी
गया है . भारतीय
फल
के बारे
ममता
के
और
औरत, एक बूढ़ा आदमी, एक
बदल गया है . यह बहु त
.वे
से तुम
नयी
चुके है . समाज के साथ साथ मानव के मन भी
उनके पास कौन होगा ?ऐसी भावना से
के तुरंत बाद
सवाल पूछ रहे है .
ममता
और
भी इसका
के
है .इसका सजीव
हर घर अब एक
पकड़ से आज समाज
‘यानी
फल
सोचने कोई तैयार
कॉलोनी '
एक
को अपनाने लगे.
समाज के लोग अपने
हम यह समझ जाते है
बढ़ रहे है .समाज के इस भीषण
लगे.
के नायक और
कौन मर जाता है यह कोई भी बता
और
वे अणु
घटने लगे। अपने और अपने
के कारण समाज अब
रहे है . यह समाज के
और .
समाज का जीता -जागता
अपनाए थे. मगर काल
है .् हर
के अंधे कुएं
खायी
.पुरानी
है
होते .इस
समाज
है दौड़ .हमारा समाज
पुरानी और
है दौड़ .
के बीच
सोचने तक तैयार
दूसरो के बारे
दे
समाज
जी
बारे
.कब
बहु
से ताकत कमाते है .तीसरा
सामने टकरा रहे है ,
संकट का
और सामंती
,
भी एक मरे हु ए चूहे बेच
-"
.
भारतीय समाज के सबसे गहरे
आज ऐसे दोराहे पर खडा है जहां से एक
दुसरे
से कहते
है
वे अणु
घटने लगे। अपने और अपने
के नायक और
समाज ने
के जाल
.मानव और जानवर
है .यह
भी इसका
युवा
को अपनाने
के
है .
और
के सामने एकदम नए
फस कर लोग अब जी रहे है . उसके
अब घट रहे है .नाम और धन कमाने
दे
है .
Page 21
School of Distance Education
कहानी
कहानी
-"कहानी एक ऐसी
करना
करते है "
रचना है
लेखक का
"कहानी
चार
जीवन के
होता है .उसके
के
एक अंग या
,
शंकाओं और
कहानी के
कथा लेखन के
सब एक
,
के
और अहम है । हर लेखक अपनी
के अनुसार कथानक का चुनाव करता है । वैसे हमारे
कदम-कदम पर कथा के
के सामने
पड़े रहते
करने
भी रचना
गयी
. उनको लेखक से अलग
संवेदना रचना के
पाती।
होना
एक
ओर
है ।
रचना का कोई
होता।
कथानक का चुनाव बहु त
-
वह
होता। आप
पहले से मौजूद है । तब सवाल उठता है
है जहाँ रचना
से हाथ
कथा
अनगढ़ घटना को उठाता है,
उसे तराशते हु ए एक
-
रचना के
नया
का
होता है? मेरे
बनाता है ।
बैठता है ।.
Novel and Short Stories in Hindi
करता है ।
सजीव एवं सहज होना
है ।
होती ।
से
कथा लेखन
;
तो पता चलेगा
-
और
नयापन ला दे ती है ।
वह
तरह होती है जो चाक पर रखी हु ई
कर दे ता है । रचनाकार भी इसी तरह जीवन से
, अपने अनुभव तथा अपनी
करता है । इस
को भीतर-भीतर पकने दे ता है । रचना का
वह रचना करने के
और
के अनुसार
पर
को खंगाल कर
-
उस
अपनी
सामािजक-
-
बात है
बन जाती है ।
के इशारे पर
, अपनी
होते है .कहानी के
के रचना दमदार
नयी जमीन तलाशती है और
के समय लेखक
या
का भी उतना
इन
वह चीज है जो रचना को नया और
रचनाशीलता
कथानक और
होती है उसे अपनी
कथानक के चुनाव से भी
कभी भी नया
खोज है "
संवेदना के कोई भी रचना पाठक को बाँध
और
होता है ।
कथा लेखन
दमदार
भाव को
समाधान
है कथानक का चुनाव। कथा के
का चुनाव बहु त
एक मनोभाव को
लेखक रचना के
के सहारे
उठाए गए
जब उसके भीतर पक कर तैयार हो जाता है तब
Page 22
School of Distance Education
सृजन-
रचना
जो पाठक को सीधे
करता है ।कथा
लगता है
वैसे रचना
रचनाहै । रचना
है ।
का चयन और उनका
भाषा िजतनी
सृजन के दौरान लेखक को
पाठक पर कम पड़ता है । भाषा
सीधे
होनी
अपनी अपनी लेखन
करने
भाषा का
करना
भी रचना
जान होती है ।
से
है । अभी तक
से
को
को
का भी
और सामािजक
कम
के आधार पर
रचना पाठक को बाँधती है । सृजनकरते
पर
लेखक
है ।
अपनी
रचना आदमी को
Novel and Short Stories in Hindi
होती है
अवधारणा को लेकर
.
मत
भी रचना के आलोक
हम
संरचना, उसके गुण और दोष के आधार पर
करता है ।
के
के
ढाँचे के साथ
जा सकता है ।
के अलावा और भी कई
है , िजनका
रखना
एवं दूसरा उसका
। इन
का कथा
कथा को खड़ा कर दे ता है ।
होता । और यह
होता है । िजंदगी
के दौरान रचनाकार के
और
को
का
कला को
पहला है
है ।
यादगार बन जाती है । हर लेखक
बहु त बड़ा योगदान होता है । कभी- कभी तो
उसके
को
जब
ढाँचा,
बहु त
का है ।
गयी है ।
,
करने
होती है । हर
गुण होती है
भी कम
रचनादो
होता,
से
तो
भी रचना के
कथा
और
का भी उतना
के
मूल
रचना
होता है ।
छोड़ने
को बाँधने के
कोई
समझ सकते
भाषा सहज, सरल,
भाषा का है उतना
है तो
तभी होते
को उसके
रचना-
िजतना
होती है । ।
का
होगी।
पहचाना जाता है ।
गया हो। कुल
रचना
उतनी
भाषा कमजोर होने से रचना का
कोइ रचना
होती है । पाठक
पाठक पर पड़ता
मारक
पर मनोनुकूल
होना
कभी-कभी तो ऐसा भी होता है
सृजन के दौरान भाषा पर
होगा लघुकथा
बनाने
अगर भाषा का
होती है वो है रचना
अदा करता है ।
है ।
िजतना
अपनी भाषा के
रचना को
करने
होगी रचना का उतना
तभी वह अपने
लेखक अपनी रचनाओं
करने पर ऐसा
भी बहु त
भाषा का बहु त बड़ा
दे ना
पैदा करती है
के दूसरे पहलुओं पर
रचना को
और
कथा
रचना
रचना-
से िजन
भाषा,
के
, संवेदनशीलता और
भी तय करते
लेखक के अपने
,
कोख से तप कर
,
जीवन
हु यी
,
रचना का कोई
करती है ।
Page 23
School of Distance Education
कहानी
= कहानी
एक छोटे आकार का आखयान है
= जीवन
के
एक
रचना हो
=
=एक
संवेद का होना
=अंत
एवं संतोषजनक हो
=तुरंत अपनी
और बढ़ने
हो
कहानी के
१
कहानी
२ सामािजक कहानी
३ वातावरण
४
कहानी
कहानी
५ घटना
कहानी
६ जासूसी कहानी
७
कहानी
८
कहानी
“
, जो आपको अपने वातावरण के रं ग से सराबोर
,
,
?
.
”
Novel and Short Stories in Hindi
Page 24
School of Distance Education
पांच
कहानी
का
युग[
का
कॉलेज
19वीं
. इस कॉलेज के दो
के
तथा
सदासुखलाल ने सुखसागर तथा मुंशी इंशा
भाषा
उस समय
रची गयी थीं.
सहयोग रहा
का
के आसपास हु आ. इस
खडी
के
ईसाई
ने अपना
खां ने 'रानी
खडी
जी तथा सदल
कहानी'
को
तैयार
. ये सभी
रचना
इन सभी
सन ् 1803
के
करवाया. इसके बाद
का खूब
कानपुर के पं जुगल
1826
से
ने
. इसी समय गुजराती भाषी
वेदांत
बंगदूत नामक
1829
समाज
ने
. इसी समय
का भी योगदान रहा. बंगाल के राजा राम मोहन राय ने 1815
अनुवाद
. इसके पहले
नामक
के
का पहला समाचार
दयानंद
.
युग
(1850-1885) को
जाता है .
सुधा,
रचना
. उनके
नाटक नारायण
नंदन
लेखक होने के साथ साथ
राजा भोज का सपना
. साथ
, भारत
नाटक
दास, बाबू
युग का
मैगजीन और
हु ए. इस काल
,
के
-
, अंधेर
तथा
अनेक
. ये नाटक रं गमंच पर भी बहु त
रचना हु ई. इस काल के
, राधा चरण
, और
माना
, लाला
,
लाल
.
से
भी थे. इस युग
है
युग[
महावीर
1903
जी ने
Novel and Short Stories in Hindi
के नाम पर
इस युग का नाम
के संपादन का भार संभाला.
युग रखा गया. सन
खडी
के
Page 25
School of Distance Education
को
को
और
के
. इस काल
से
, कहानी, नाटक एवं समालोचना का
,
कहानी का
युग से
इंदम
ु ती कहानी को कुछ
जी
,
के एक बडे समुदाय को खडी
हु आ.
कहानी मानते .
का समय,
जी
और
कर
. अब कथा
हु आ.
लाल
बंग
दुलाई
उसने कहा था
.
युग[
और
आठ
कथा
के
का
ने
रहा
, गबन एवं गोदान
तथा
सीधे जीवन
रचना
के दो
, नमक का दरोगा तथा ईदगाह
, वृंदावनलाल
, जयशंकर
, भगवतीचरण
से जुड ग़या.
.
. पूस
, राहु ल
जीवन और
थे
रात, कफन, शतरं ज के
खूब
,
मानसरोवर के
हु यीं. इसकाल के
, पांडय
े बेचन
.
का कांटा , तीन
सेवा सदन,
तीन सौ से
के नाम
कुछ कम है और सामिजक शोषण ,अनाचार एवं
कहा था,
केवल मनोरं जन, कौतूहल
के
, पंच
,
जी
है.
के लेखन से
.
,
,
, िजन पर
हु आ,
जयशंकर
जी
कला ,दे वदासी ,
के
कहानी
सन १९११ ईसवीं
है अलग है .
इंद ु
छापा था. कहानी
के
रचनाएं है .
थे .
के
,
युग
, िजनका
:
,
आ है ,
Novel and Short Stories in Hindi
Page 26
School of Distance Education
,
न कहकर, एक संकेत,
,
,
इस युग
पर
के पर
कहानीकार:
,
कहानी और
चौहान ,
,राजनीतक
,
और चले. इस युद के
दे वी ,उषादे वी
कहानी
के नाम
युग
से
मोहभंग
पर बल दे नेवाले इस
कहानी ,
समय
परता के कहानीकार:
जी.पी.
है .
के
,रांगेय राघव जैसे
जोशी जैसे
वेरमा ,राहु ल
और
,
कहानीकार "
-
के
,मोहन
,
युग
से नयी कहानी
के
वेरमा ,
,
पर
आने लगी .यशपाल,
जैसे सामिजक
,
पर कहानी
, के
के संकर का जागता
का
हु ई .
के
के नाम आते है
और
बोध
,
हु आ है . कहानी
के
एवं
मोहन राकेश ,
यादव
,
सन १९५४
के बाद नयी कहानी ,सचेतन कहानी ,अकहानी ,सामानांतर कहानी ,जन
,
रे नू ,
कहानी
ममता
भी
हो
,
कई
आये .
राय ,रांघेय राघव, शैलेश
है .
,
सोबती ,
-
कहानी लेखको के
है .
,सुधा अरोड़ा ,गीता
जैसे कई
,
,
,
Novel and Short Stories in Hindi
,
,
Page 27
School of Distance Education
भारती,
, मोहन चोपड़ा, कमल जोशी,
,
आज नई
, जो धीरे -धीरे कुछ
,
के ‘
’
,
उघाडक़र रख सकता है ,
Novel and Short Stories in Hindi
Page 28
School of Distance Education
छह
के कुछ कहानीकार
कुमार
कुमार का
का नाम
, सन १९०५,
था।
इनका
ने
२
दे न
है । इनके
को
जैसा
इनके
अपनाया, जो अपने समय का
के
तराशने का
काम
कहानी ने
छाप है ।--
वे
का सबसे बड़ा
गई तोड़-फोड़ ने
न होता तो
सीखा।
, एक नया `
थे,
के साथ समझा जा सकता है ।
पर
से
के
को साथ-साथ
का
, एक नया तेवर
के सामािजक
और
था। भाषा के
का पहला पाठ
भी
माता एवं मामा
थे।
के पूरक थे।
को
योगदान
के
था।
करते रहे ; वे
जीवन और
हु आ।[2] उनके बचपन
हो गई।
अपने पथ के अनूठे
बहु त से
रखकर
गांव
तथाकहानी है । एक
के दो
इनका पालन-पोषण
के
के
का
ने
संभव न होता।
को एक
आज के
'
को
भाषा और
पर
'फाँसी' (१९२९), 'वातायन' (१९३०), 'नीलम दे श
. कहानी
(१९३३), 'एक रात' (१९३४), 'दो
' (१९३५), 'पाजेब' (१९४२), '
'
' (१९४९) तथा 'जै
' (सात भाग)।
‘
: ७
:
’
१९११
–
‚ फारसी‚
–
१९२५
वे बी .एस .सी .
करने के बाद एम .ए .
’‚ ‘
‘
’‚ और ‘
’ और ‘
Novel and Short Stories in Hindi
–
’
‚
’ – जैसे युगां
–
।१९२९
–
–साथ ‘
१९२७
.एस .सी .
’ ने ‘तार
Page 29
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कहानी–
, परं परा,
:
: ३
:
एम. ए.
, जयदोल,
,
१९३१
(१९४९) और
(१९५२) से।
(१९५२-६१),
:
सन ् १९६४
(१९६१-६४)
(१९९२-९४)
(१९५७), `
' (१९६२), `
`
'(१९६६), `
', `
(१९९१)
' और `
'
' उनके
:१३ नवंबर १९१७
-
,
सामने आई,
'
'
–साथ,
एक सेतु भी माना जा सकता है । 'वसुधा', 'नया खून'
दन–
– काठ का सपना, सतह से उठता आदमी।
साहनी
एम.ए. , १९५८
कहानी
१९७५,
:
(
: ८
पंजाब
: १९३७
,
-
(भारत सरकार)।
Novel and Short Stories in Hindi
, १९७५,
, १९१५ को
(अब
लाहौर
कॉलेज, लाहौर से
से पी.एच डी.
, वांग चू,
)
.
), १९८३,
(पंजाब सरकार), १९८०, लोटस
, १९९८,
Page 30
School of Distance Education
मोहन राकेश
: ८
१९२५
:
,
-
,
:
-
,
मालती जोशी
,
४
:
जून
१९३४
१९७१
'
'
,
,
,
, तेलुग,ू पंजाबी, मलयालम,
,
,
,
,
एक रात है ,
,
,
, टु कड़ा टु कड़ा आदमी,
, समागम,
Novel and Short Stories in Hindi
-
, मन न हु ए दस बीस,
,
शैशव,
-
-
,
,
,
२५
,
१९३८
,
,
,
, बाबुल का घर, औरत
२०
,
' नाम से तथा
'
'सात फेरे '
- पाषाण युग,
,
,
, नाटक
, शहर के नाम,
-
, जूते का जोड़ गोभी का तोड़।
Page 31
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: ४
, १९२१।
-
,
:
-
कहानी
१९४२ के
१९५०
:
आदमी।
, भारत।
,
,
और
महक, एक
,
धूप,
सुधा अरोड़ा
४
१९४६
१९६७
-
१९६९ से १९७१
'
बगैर
(२००३),
(
, १९९३ से १९९९ तक
'
तराशे
हु ए(१९६७),
(१९७७),
(२००४),
),
: १७
' और '
-
महा
(१९८७),
(२००५),
१९२३
:
:
हँसी
.ए., बी.ए.
,
बी.
,
काला
(२००७),
ए.।
,
लेखन को बहु आयामी
'
'
,
, झरोखा,
, महान उपासक तथा बहु मुखी सेवक है ।
:
Novel and Short Stories in Hindi
१८९३ ई.
Page 32
School of Distance Education
नाम केदारनाथ था,
" नाम से
"
-
(
, सतमी
),
,
राजी सेठ
: १९३५, नौशेहरा छावनी (
)
- अंधे मोड़ से आगे,
,
,
,
,
अमरकांत
: १ जुलाई, १९२५
,
: १९४१
,
(
)
, जो १९४२
गई, और अंतत: १९४६
-
१९४७
.ए.।
: १९४८
'
' इलाहाबाद,
'भारत'
"
:
'
-
'अमृत
का 'कहानी'
"
', ' दे श के लोग', ' मौत का नगर', '
: '
' और 'कुहासा'
इलाहाबाद
-
मोहन राकेश
: ८
१९२५
:
,
-
,
: 10
:
1944, बहे ला, बालाघाट (
के
)
, कहानी
Novel and Short Stories in Hindi
Page 33
School of Distance Education
:
बेसर,
, कोरजा, अकेला पलाश
:
,
, एक और सैलाब,
, समर
: 30/11/1944 ,
,
, गोमा हं सती है ,
, कहानी,
:
,
, अगनपाखी,
,
,
)
,
,
,
, दूसरा घर,
,
, एक वह,
:
,
, सोने का
, जल टू टता हु आ, बीच का समय, सूखता हु आ तालाब, अपने लोग, रात
:
बरस,
, कानी बाट, ढहता कुतुबमीनार,
,
1924, गोरखपुर (
: 15
,
, चाक, झूला नट,
,
-
,
,
-
का सफर,
,
,
?, एक कहानी लगातार,
1944, वाराणसी (
: 25
,
, बीस
, आज का
,
,
,
,
-कथा,
)
, कहानी,
:
:
सांझवाती,
, सुबह के इंतज़ार तक,
:
,
,
वेणु का नया घर,
: 20
:
,
,
,
, 1947
-
सफरनामा,
,
,
,
, नाटक
, आदमी जात का आदमी,
- जलते जहाज पर,
Novel and Short Stories in Hindi
,
, मुंडरे पर,
र!
, आसमाँ कैसे-कैसे,
,
,
,
,
, मानुष-गंध,
,
,
,
Page 34
School of Distance Education
: 03/09/1938,
(
-
,
)
!, कोठे पर कागा, सूरज के उगने तक,
ने कहा था,
,
,
-
,
,
, कथा नगर,
,
, ओ
, अपने-अपने
,
, कथा सतीसर
: 21 नवंबर 1931, अकोला (
,
)
: कहानी
:
(पंजाब)
: 1951,
- घोड़ा बादल,
- वह मेरा चेहरा, काला आजार, उस शहर तक,
: 17
, हे लो सुरजीत
1978
, कहानी
:
:
-सा कुछ,
:
1944, लखनऊ (
: 4
)
, कहानी
:
:
,
: खुले आकाश के नीचे, राजा का चौक, जंगल गाथा,
,
,
********************************
Novel and Short Stories in Hindi
Page 35
School of Distance Education
सात
“
"
. मुंशी
.
,
,
‘
जब वे 23
‘
.
,
(31 जुलाई,
1880)
,
,
‘
‘सोजेवतन’ जून, 1908
बन गया.‘सोजेवतन’
योगदान था.
‘
.
’
31 जुलाई, 1880
.
.
‘आवाज-ए-
.
: वरदान,
’, ‘
‘
’
गोदान, मनोरमा, मंगलकहानी-
:
300
Novel and Short Stories in Hindi
(
).
. ये शोजे -वतन,
1 मई, 1903
’, ‘
’ तथा
-
’ माना
‘
;
.
, सेवा-सदन,
.
’
,
संसार
. मुंशी
.
.
, सामािजक,
अपनी लेखनी से
.
,
,
. उनके 21
,
, गबन,
, नमक का दारोगा,
,
,
Page 36
School of Distance Education
,
पंचमी,
,
,
नाटक:
कहानी के
“
,
.
,
,
,
के आधार पर
"
.
‘मानसरोवर‘
और
.
का
है ,
जो 'मानसरोवर '
साथ काम
. तन व ्
.इसी आधार पर
.
.
. इस कहानी के नायक
.
जाते है .
थे.
थी. वह
,
आया भी.
,
.
, 1936 को 56
गया है . भारतीय
,
,
.
,
08
,
"
.
,
.
.
"
वह एक चौड़े मुँह,
,
,
.
, और फूले
; और
, माँ-
-सा जान
,
-
.कभी Novel and Short Stories in Hindi
-सपाटे करते, कभी-
.
, सेवा
Page 37
School of Distance Education
छूटता,
,
खूब दे ख-
होता,
लगा,
गी,
बदलता,
,
, रं ग-
-
,
, बाल बनवाता, कपड़े
?
,
रोग भूल गयी। 15
-के-
-रात उनके
उनको छोड़
आपको
को बहु त दुःख हु ए .
"
,
सरल भाषा का और मुहावरे दार भाषा इस कहानी
कहानी
है .बोलचाल
भाषा का
पर चार चाँद लगाती है .
कम से कम
है .
के
इस कहानी
आधार
15
,
खींचकर बढ़ा दे ।
-
बाहर
के सहारे अपने मन
संवाद भी
है .
हमारे
भीतर है ,यह समझने
आप अपने इस रचना के
Novel and Short Stories in Hindi
बात कहना
संबंधी धारणाओं पर
सलाह आप दे रहे है. साथ
कर रहे है . भारतीय समाज
दे रहे है.
जी
को
है ,वह इस कहानी
भी
उठा रहे है. असला
साथ भारतीय समाज
के
है इसका समाधान भी
Page 38
School of Distance Education
आठ
मोहन राकेश
:
: पंजाब
मोहन राकेश
से
भाषा
आते गए
गज़ब का सधाव
'आधे
अधूरे'
३
के
रचनाकर
होने
मोहन राकेश
अनुशासन भी है ।
दे र बाद
वे कथा-
के
भारत-
तक '
नाते
वे कथा-
'संगीत
लेखक और
कहानी
के
थे और
रे ल
तक
पीड़ा बहु त
है ।
' और
नाटक
अकादमी'
से
के
से
आते गए
रोने लगी तो उसको
थी .
खुसी तो दे खा वह उनके इंतज़ार
भाषा
गज़ब का सधाव
के बीच हो रहे घटनाओं के
जा रहे थे .रात के
उसको पानी ले आते है . वापस
-लेखन के
के
कहानी का
है, िजससे वे
भेज कर वापस आ
एम ए।
थे और
' के संपादक। 'अषाढ़ का एक
के बहु मुखी
आप कर रहे है .
लेखक एक बार
के
और
अमृतसर
लेखक और
हु ई है । कहानी के बाद राकेश को सफलता
कुछ
को
अनुशासन भी है । कहानी से लेकर
है । कुछ
के आधार पर
खूबी यह थी
१९२५
है , िजससे वे
खूबी यह थी
, एक
१९७२ को नयी
कहानी के
एक
के
से
के बहु मुखी
एक
कथा-
८
आपके
एक युवती और
के बीच
-
आने के पहले
दरवाज़े पर
गाड़ी
, एक
गहन जीवन
आ जाते है . थोड़े
बढ़ता है . वह युवती अपनी
बढ़ते है .बीच
उतारकर लेखक
थी.लेखक जैसे तैसे
थी .एक दुसरे के बारे
को
के
बताते बताते वे सोने लगे.
बातचीत के बीच एक दूरे के नाम पूछने वे भूल गए थे. सुबह उठकर दे खने पर लेखक के पास के
कोयी
था.
न
इस कहानी
के
को कोयी नाम
Novel and Short Stories in Hindi
के
है .ये
सामने आ रहे है ।
कोई भी हो सकते है .
समाज के
Page 39
School of Distance Education
कहानी
है
कम
और
मोहन राकेश
घट रहे है . रे ल
के
और जा रहे है .
भी
.समाज को
समझने और उनको
बनाने
आगे बढ़ रहे है .छोटे -छोटे ,मगर नपे तुले
गहन बात कहने
घटना
हम सब
संवाद के
को दे खते
िजस युवती
से
के
के
समझौता करना पड़ता है. नर
भी
वह सुख
है. समाज
ऐसे लोगो के
दे रहे है.
-
के
कभी कभी हम भूल जाते है । ऐसे
थी
Novel and Short Stories in Hindi
है . यह
कभी कभी
वे
उनसे
लेखक इस कहानी
है .वह इस कहानी
बात हो रहे है . कभी कभी एक दूसरे को अपने मन चाहे साथी
हम अनजाने से
सोनेवाले
इस कहानी
भी दे श का हो सकता है .
करते है . भले
लोग हम सभी के
का
का हो ,
थी.
. अपने
जीते है. एक दुसरे को
अपने को माननेवाले
भी हम भूल
संसार
का और
ऐसे भी कुछ लोग है जो अपने बारे
है .
के
को
पायेगे. लेखक
सैर करने वाले
सोचता
.
जीना है इसका
Page 40
School of Distance Education
नौ
के घेरे
सोबती
: १८
-
१९२५ को गुजरात (
,
)
-
- सूरजमुखी अँधेरे के,
मरजानी,
-
अकादमी,
, समय सरगम,
,
,
- हमदशमत
-
,
-
,
२०००-२००१
,
गया है ।
के घेरे कहानी एक
से
-न-
सुखद
से
से
-जगत ् को
जी के
से
इतनी
के साथ
है ।अनुभव
को िजस
वासनाएं
हु आ है
के
के बारे
Novel and Short Stories in Hindi
के हर पड़ाव पर
कराया है ।ये
और
करती
जीवन के
करते
आज के बदलते
के
और अंतरं गता से
और
सोबती ने अपनी रचना-
समाज के सच को
और सामािजक
हमारे समाज
के घेरे '.
-ब-
को
अपनी
'
करने
करती
समय का सच इन
भी
से उपजी ये
वह
बनी हु ई
अपने समय और समाज
है ।
नज़र अपना रहे है . इसी के आधार पर
,ये दो
कर
के
है .
रं ग और चेहरे
गयी कहानी है
उनके अकेलापन और
पर पहु ँच चुका है अपनी इलाज के
, उनके
. है जा
Page 41
School of Distance Education
होने के कारण उनके साथ उनके
उनके मन
आने के
तैयार
झलक रहे है. आज वह अकेला है ,उनके मन
हू ँ और सुबह हो जाती है .लेटा
रहते
रहता हू ँ शाम हो जाती
याद आते है, जो
थे .
होने के पहले
पीड़ा इस
है "
घटनाएँ
लेटा रहता
लेटा रहता हू ँ , रात झुक जाती है "
पहले इसी के
होकर जी
यो
थी और
को
भी हु आ था .
बुआ ,
उसको
और
इस कहानी के
ये
भी है .
है .
जो
समाज
भी इस कहानी
एक
फैलाना चाहती है
के
गया है
सहज एवं सरल भाषा का
कहने
एक ख़ास
िजन
से
है .
के
अपनी
है उसके
है .समाज के बुराईयाँ सहज ढं ग से
करते है . इस कहानी
करती है
इस कहानी
उनको भी
आ रहे है .
भी है .
लोगो के
मनाने का भी मौक़ा उनको दे ता
करते है ,वैसा
हमसे
हर
सोबती जी ने अपनायी है , वह इस कहानी
का इलाज
और
कैसा
इस कहानी
और
समाज
.कहना
इस
है ,यह कभी भूलना
के
को अपनी मन
मे है . वह भी इस कहानी
होगा कुछ लोग उनसे
पर
पीड़ा का
है . कम से कम
का भाव रखते है .
से
गया
.
भी एक
हो रहे है. यह सोबती जी
बात कह दे ने
है .]]
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
Novel and Short Stories in Hindi
Page 42
School of Distance Education
दस
अपराध
उदय
: १
, १९५२,
, कथाकार और
: सुनो
घोड़ा,
, अबूतर कबूतर, रात
, और अंत
)
, पॉलगोमरा का
आँच (
और आलोचना
गांधी
)
भारतभूषण
,
, ओम
. उदय
के
थे .
रचनाओं को
एक है
होने के कारण
पहचान
पर
.लेखक घुन से
हो गया था िजसके
है .
इतने
हु ए थे
मारता
रहता
है
लथपथ होकर घर पहुं चता है
भाई को मारने लगे.
भाई तो
हो गए और अमानवीय
याद तक
को पता था, मगर वह कुछ
Novel and Short Stories in Hindi
खेल
लेखक को
खेलना था. उस शाम
गया .इससे तंग लेखक
और अचानक वह लेखक के सर पर लग जाता है
और कहता है
पडा था .
याद आयी तो
.भाई भी उनको बहु त
है जब उससे
उनको भाई ने मारा .सुनते
होने पर भी उनको खूब मार खाना पड़ा .लेखक ने सोचा
लेखक पर उस नज़र का असर
भाई को तो वह घटना
का खेल तो अकेला
वह लेखक को भूल
इतना कुछ हो जाएगा .. मार खाते
बाद उनको इस घटना
आप
भाई को सज़ा भुगतनी पड़ी और
हो पा रहे है .
थे ,मगर
आप
के संपादन
कर पाया है .गाँव के सभी
लेखक उस खेल
,
के शाडोल नामक गाँव
मेल जैसे
,
एवं अंतर
बाद भी वह अपने आप को
को लेखक के भाई खेल
था
रहे है .
एक ऐसा अपराध
उनके भाई अपने
(कहानी
, मोहनदास (लघु
कहानी के कथा नायक मै अपने बचपन के उस घटना को याद करता
रहे थे .छोटा
एक
से
,
के उन
अपननी अलग पहचान बनायी है .
अपने भाई के
अब
)
),
लड़ाई, कला अनुभव, लाल घास पर नीले घोड़े (अनुवाद), अनेक
भाषाओं
:
और रात
(
और
.
तैराक
भाई कातर
बहु त
से लेखक को दखा था,उस
साल
बाद मा -बाप मर जाने के
मांगना ,चाहते है मगर माँ बाप तो है
और
थे .लेखक को
वह भवान जैसा लगता भी था
अपराध के
रहे थे .यह सच तो
करते थे .मगर उस पल लेखक के मन से बीती गयी सब
.भाई
सुन
कर पॉते थे .भाई
- कातर आँखे
चेतना
ओझल
को
लेखक
से
Page 43
School of Distance Education
बेचन
ै कर
.
थी .कहानी के
गलत और
सोचे जो
यह
को बदलने
पडेगा .
इस कहानी
होगा .
का भाव मन
कहानी
दो
का
है .
Novel and Short Stories in Hindi
है .
है .
बाद
है
उसे बदला
सामािजक जीवन
तंग
अपनी
को कोई नाम
.अतीत
उसके करान हो रहे सभी
उठने पर मानव
एक भी संवाद
करने
घटना है. यह ऐसा अपराध था िजसके
था ,मगर अब
केवल
हम लेते है
जी ने यहाँ
मगर नपे तुले
बस
है ,
जा सकता था .
भी
जाकर
समान
को
गए
बदल जाते है इसका
भी
दे खने लायक
लेखाक इस खानीइ
भी
है .यह तो एक नया
है
झेलना
है .चोट छोटे
है .
है ऐसा कहना
Page 44
School of Distance Education
भूख
भारतीय
कथाकार
का
लेखन से जुड़े ,
का कथाकार
तौर से भले
दरअसल वे मानवीय
है । आज
के
वाद या
का शोर
है ।
करतीं, पर
से गहरई से जुड़ी
पर िजस तरह के सीमा संकेत
सहज
कर
बाँधती
िजंदगी के
जाते
उन सभी सीमाओं का
,
वे िजस कुशलता से घर,
और
उसी कुशलता से घर के बाहर
और
को भी
भूख एक बडा
है .उस
को
,
तथा साथ-साथ
और
जीने को मजबूर
से
उस दबी-
करने
सफल हु ई , जो अपने
का
इस कहानी मे
ने
है
रहे है
और
तीन
सूचना दे
है .
काम करने के बीच मर गए थे।
भूख कैसे
नाम के
पती िज़ंदा था वह हर
ढूँ ढने
के
पड़
हो
पती
मदद दे कर जाते है . अपनी और अपनी
के सामने वे जाती है ,मगर
होते . भय यह था
. सब तीन
थी.उसने कई
माँ को
भी
से
वह शायद काम न करके
थी। मगर अब उसको राशन
है । सामने के
करने वह तैयार हो जाती . मगर वहां भी उसको
तो
और
टू ट जाते है .
सोचते वह थक जाती है .कई
दे ने तैयार
हमारे
.
बनवाने और
सहायता
भी
माँ को
को संभालते
इस कहानी मे समाज
पती के मौत के बाद जीवन
इसके बारे
कोई भी तीन
जब
के
को
से भी उसको कोयी
दे ने से इनकार करते रहे . सड़क बनाने के काम तक
पड़ोस
के
उसके
दया
करती है । मगर कोयी फ़ायदा
हु ई ।
Novel and Short Stories in Hindi
Page 45
School of Distance Education
उसी बीच
से कलाबाई नामक औरत
कहती है . पहले तो उसने न कहा था .
को भर पेट खाना
भूख के कारण वह तैयार हो जाती है .कलाबाई ने वादा
लाया तो
से भूखा रहने के कारण
से वह
दो
और
बना दे ती है . सभी
कहानी संवाद के
मगर कोयी फायदा
तीन
हर तरह शोषण के
समाज
बता दे ते है
इस से भी
घटनाएँ समाज
का संवाद इस कहानी
होती रहती है क़ाम के
Novel and Short Stories in Hindi
उसको
बाहर
से
चलता
करना है
है ।
और उस मा को कोसने के
जी
.
करना है . भूख
माँ हमारे सामने कई
भी लोग
हो रहे है . ढे र सारे
ऐसे कई
वेतन
है
को भीख मांगने छोड़ने
बनाए जा रहे .मगर उनके पास सहायता पहूं चता
से रची कहानी है
जैसे जीवंत
है ।
है. भूख के कारण अपने
खडा कर रहे है । यह घटना अमानवीय तो
दे ने
हु आ .
है .
आगे बढ़ रहा है . छोटे छोटे
अचानक अकेले बाहर आने पर उसको थोड़ी दे र पता
सच यह है
उसे बहु त
,कलाबाई और
गाँव के जीवन
के िज़ंदा रहने तक घर के
.
को दे गी
को पता चलता है भूख के कारण कुछ
जी ने इस कहानी
हमारे समाज
भी
जाने के कारण
मर गया है । तब
छोटू
पकड़ा था।
िज़ंदगी से चुने गए
इस कहानी को
और हर
छोटू के हाथो से चावल का
पीटती है और वह बेहोश हो जाता है .
खाने
को उसके साथ भीख मांगने भेजने को
शाम को वापस घर
।उस तरह काम होते रहे . एक
कई
छोटे
अगर
और
के
के
रहने
'भूख'
Page 46
School of Distance Education
बारह
'
: ७
१९११ को
के
दे ख–रे ख
–
भाषा व
'
के
कॉलेज
बी .एस .सी .करने के
पंजाब से
इंटर
और उसके
पढ़ाई
बने।१९२९
कर १९२७
कहानी–
‘तीसरा
, जयदोल, ये तेरे
’ ने ‘तार
’‚ ‘दूसरा
’‚ और
तथा ‘
’ और
का भी संपादन
–
का भी।
–
नामक
अपना
बात,
के संपादन के साथ–साथ ‘
’ – जैसे
’ जैसे
लेने के कारण
, परं परा,
:
को
बनाकर संसार
आदे शानुसार
खुदा ने
भेजा है . उठो
और कहा "
संसार का
पुनर
डू बे मानव जाती को बचाने
. अपने आप को भगवान ् ,मसीहा और
का सबसे बड़ा
है
करो।" भगवान ् के
वह अगले
बतानेवाले
से
उन पर लोग
सोच कर ,उसके नाम पर हो रहे
से उसको एक ऎसी औरत को
मारने लगे।
अनाचारो
को बचाने वह
है .
के कारण बहु त
गए थे .उस औरत को साथ लेने के कारण समाज उनको
तो
समाज से लड़ने का
के
समाज
भगाने
आ जाता
वे
बी .एस .सी करने के
रखा‚ पर
न हो
मानव जाती
और बँगला
पास
लाहौर के फॉरमन कॉलेज के
–
‘
‚ फारसी‚
हु ए।वहाँ से
बाद एम .ए .
पढ़ाई
घर पर
के साथ। १९२५
बाद
िजले के कुशीनगर नामक
परसपर
बढ़ानेवाले है कह कर
करने
उसको
है .भूख को जीत
Novel and Short Stories in Hindi
से
करने
समझते है
लेता है .
से समाज को बचाने
है .तब उसे
है जो
से
मालूम होता है समाज
तो िजंदगी
भी जीत
वह
जेल
करते है .एक
डालते है .
है ।एक
उसके
हर
भूख के कारण
.इस
पास
सोचकर वह
को
एक भूखा
हो रहां
के
Page 47
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से अंनाज
लोग उसे
चुरा कर समाज के
बनाकर एक
खुदा
के
को दे ने का
डाल दे ते है .
बन कर समाज को
करने
को हर
है .इस से ऊब कर वह ख़ुदकुशी करने का
यह
है
लेता है .यह जान कर
लेता
अपने आप पर जीत
है . पानी
पराजय
कूदने के पहले उसे
करने के बाद दुसरे
पर चलना
होगा।
यहाँ
छोटे
जी अपनी सरल भाषा के
कहने
है .छोटे
से कहानी आगे बढ़ते है .
समाज
सभी लोग
को सुधारने
. समाज का
आज
रहे है .मगर लोग
धयान
दे ता
है .सबसे पहले
सभी
जो
करने के कारण
को थोड़ा
के
के
है .
.
से
बता रहे है .समाज
कहानीकार
है . अपनी
के
पालने लोग तैयार हो रहे है.
का
है
है ,
.समाज
अपने आप पर जीत
के
जैसे कई
Novel and Short Stories in Hindi
बढ़
फतवा
दे ते है उसको
पड़ी औरत
,
इसका खोज कर रहै
उसे पता चलता है भूख
का मूल कारण है .समाज से भूख
सफल हो
समाज
हालत
कारण
को है लगता है समाज को
सब से पहले
करता
रहा था आज वह भी कम हो रहे है .
समाज
चलता है
का
गहन
करते
करना
,भूख
पर लेखक इस कहानी के
होगा. तब
,
पता
हमारा जीवन
पर आसीन
डाल रहे है
Page 48
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MODEL QUESTION PAPER
SIXTH SEMESTER B.A HINDI DEGREE (SDE)EXAMINATION
NOVEL AND SHORT STORIES IN HINDI
Time Three Hrs
लघु
Weightage 30
(दो- तीन )
१ . 'भूख' कहानी
२ . "तुम तो
३.
है ?
हो "
समझाईये
और
1
a
2
b
के घेरे
3
4 भूख
५.
c
और पवन
कहाँ
६ . सैर करते
७. .
लेखक और
बाबु कौन था ?
८.
९.
के
पांच
१३ ."
१४ . "आप
के
और कहानी का अंतर
है ?
कौन कौन सी
पर
है तो भूखे मरना
बात है "
'
सामािजक
जीवन
कमी है "
एक है ,अबाध और
१६ .'दौड़'
१८ .
१९ .
(
के
२ .'
और
( राकेश,
सामािजक
कहानी के
,
' के
(मोहन राकेश,
३. 'दौड़ '
(5X2 =10 weightage)
के
१७ ."दौड़ "
१ .आशा
हो रहे है ?
से परे है "
है ?
दो
कारण होते है ?
(9 X 1 =9 weightage)
आपस
१५ . "
के बीच बीच
नाम
११ .'भूख' और '
१२ . 'दौड़ '
होने वाला है ?
रचना है ?
'
१० .
सोबती
d
के बारे
भूख ,
है ?
,पवन ,
Novel and Short Stories in Hindi
कैसे हो रहे है .
एक लेख
(2X4 =8)
PART I I MULTIPLE CHOICE QUESTIONS
,
कौन है ?
पुरानी
का
, ममता
के
के आधार पर समझाईये
)
)
------ है
)
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School of Distance Education
४.
युग,
(
५ .'
६.
७.
८.
के
युग,
युग -------- है
युग ,
युग)
के घेरे ' कहानी के नायक कौन है
(रवी ,पवन .,छोटू ,राजू )
को अपना जीवन ---- सा जान पड़ता था
( नरक ,
,
)
भीख मांगने के
(पती को ,छोटू को ,
को ,कलावती को )
को कौन अपने
(
९ . हम
छोड़ती है ?
बना रहे है ?
, भगवान ् , मोहन राकेश ,.
---
(खुदा ,आसान ,
१० .'दौड़'
(आलोचना,
,
१२ .'उसने कहा था '
कहाँ
अमृत,
)
है " यह कथन
,यशपाल,
१३ .
,
,
,
)
(
बात है
,
१५ . ' मैला आँचल
)
रचना है ?
,
१६ . 'मानसरोवर "
का
,
,
१७ . समाज के सभी
( भूख, चोर ,
१८ . ’
,हँसी )
’
,कहानी,
(
(भूख, तालमेल ,
का
,सामािजक
,
)
है ?
.मोहन राकेश )
का मूल कारण ------ है
रचना है ?
,
१९ . ".-------------- बड़ा गड़बड़
२० . “
)
को चुनकर
,
,
(
है ?
,
------हो तो भूखे मरना
(
(
हु ई ?
रचना है ?
(
१४ . आपस
)
,रोजू )
,
(उषा
होते है .
,
११ ."मेरे शहर
(पवन,
और
सोबती )
“ नाम से
)
है "
, मुब
ं ई,राजकोट इलाहबाद )
,बाजारवाद )
शहर ----- है
3 weightage
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