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PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR) 174 CORE COURSE

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PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR) 174 CORE COURSE
PRACTICAL GRAMMAR
(APPLIED GRAMMAR)
CORE COURSE
B.A HINDI
III SEMESTER
(2011 Admission)
UNIVERSITY OF CALICUT
SCHOOL OF DISTANCE EDUCATION
CALICUT UNIVERSITY P.O., MALAPPURAM, KERALA, INDIA - 673 635
174
School of Distance Education
UNIVERSITY OF CALICUT
SCHOOL OF DISTANCE EDUCATION
STUDY MATERIAL
B.A HINDI (2011 Admission onwards)
III SEMESTER
CORE COURSE
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Prepared by
DR. J. AMBIKA DEVI
ASSO: PRO. OF HINDI(RTD)
‘PRASANTHI’
BILATHIKULAM ROAD
NADAKKAVU (P.O)
KOZHIKODE. 673011
Scrutinised by
DR. PAVOOR SASHEENDRAN
38/1294, APPU GHAR
EDAKKAD
CALICUT – 5
Layout & Settings
COMPUTER SECTION, SDE
©
Reserved
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 2
School of Distance Education
Module – 1
Unit
Unit
Unit
Unit
Unit
Module – 2
Unit
Unit
Unit
Module – 3
Unit
Unit
Unit
Unit
Unit
Unit
Unit
Unit
Unit
- 1
-
- 3
-
- 2
-
- 4
-
- 5
-
- 6
-
- 8
-
- 7
-
- 9
-
-11
-
िलंग
-
कारक
-10
-12
-13
-14
-15
-16
-17
-
-18
Unit
-19
-
Unit
- 20
-
- 22
-
Unit
Unit
Unit
- 21
- 23
- 24
वचन
-
Unit
Unit
समास
-
-
काल
-
-बोधक
-
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 3
School of Distance Education
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 4
School of Distance Education
Module l
UNIT - 1
भाषा और
भाषा वह साधन है
का
अपना
करता है । भाषा ‘भाष’ धातु से बनी है । भाषा दो
कई
होता है ,
भाषा
है । भाषा
है तब उसे बोली कहते
बोली के िलए
बन जाती है तब
भाषा का
के
एवं िच
अपनी
अपनाया है । यह
भाषा पर
होता है । मूल
संकेत है और एक
बनता है और
होते
पर
से
संयोग या संिध से हु ए उनके
का वह
–
का
भाषा
रहती
के आधार पर
कहा है ।
भाषा का अनुगामी है ।
के
को
का
बनता है ,
भाषा और
करना
भाषा को
पर
है । जैसे
से
से
भाषा
है ।
करते
वैसे िलखते
करता है ।
से
बनता है ,
होती है । किथत भाषा और
के िलए एक
होता है । उसे
बनते
ने
इसी आधार पर
कहते
से
भाषा।
एक से
के तीन भाग
3)
का
-
को
संकेत केवल एक
और एक से अिधक
2)
भाषा। भाषा
के
भाषा बन जाती है ।
का
को
भाषा केिलए होती है । जब भाषा
के िलए
से एक भाषा बनती है । भाषा दो
है ।
बनते
- 1)
भेद
बाँधा है ।
सरलतर
के िलए िभना
अिधक
ने अपने
सहायता से
दे ता है ।
के
- किथत भाषा और
उतनी
का पालन करना पडता है ।
भाषा
करता है तथा
होता रहता है । जब भाषा बोलचाल
होता है । भाषा के
भाषा
किथत भाषा
होता है ।
होती
होते
हमेशा
को एक िनयम
के बीच
बोलचाल
कुछ
से
के उस
भाग है ।
पर
है
उसे कहते
के भेद, आकार,
होता है ।
के भेद,
को कहते
जाता है ।
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
,
से
पर
बनाने का िनयम,
और
होता है ।
– खंड,
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School of Distance Education
UNIT - 2
उस मूल
के
को कहते ,
न हो
।
उदा – अ, इ, उ, ए
राम – र्+आ+म ्+अ ।
भाषा
चार
होनेवाले
होते
इन
को
के समुदाय को
कुल 44
कहते
कहते
हर भाषा के िलए अपने अपने
होते
होते
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।
क, ख, ग, घ, ङ
च, छ, ज, झ, ञ
ट, ठ, ड, ढ, ण
त, थ, द, ध, न
प, फ, ब, भ, म
य, र, ल, व, ष, श, स, ह ।
तीन और
सकता है ।
जैसे –
भी होते
ये
, ,
है ।
का
हो
– क् +ष ्+अ
– त ्+र्+अ
– ज ्+ञ ्+अ
िगनती
हो सकती।
के दो भेद होते
– 1)
2)
कुल 11
और 33
सहायता से
–
होते
11
। कुल िमलाकर 44
होता है
कहते
होते
के
सहायक
है ।
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 6
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।
School of Distance Education
सहायता से
–
कर सकता है उसे
के ‘क’ से ‘ह’ तक
। कुल िमलाकर 33
इसके अलावा अनुनािसक,
अनुनािसक – इसका
पुनः।
और
– जब
इसका
।
नामक तीन
है ।
नाक और मूँह से होता है । इसका
करते समय
–
कहते
नाक से िनकलती है । इसका
अथवा
इस
है । उदा – हँ सना, गाँव
के बाद ‘ह’
है – अतहा,
है । उदा – कंठ, हं स
लगे तब उसे
कहते
उदा – अतः,
,
, पुनहा।
UNIT - 3
के भेद
के आधार पर
मूल
इ, उ, ऋ।
- मूल
वे ,
के दो उपभेद
ई।
– दो मूल
औ।
के दो भेद होते
वे
– 1) मूल
दूसरे
जो मूल
– 1)
के मेल से बनते
2)
से
होती।
भी कहते
उदा – अ,
उदा – आ, ई, ऊ, ए, ओ, औ ।
2)
के मेल से जो
के मेल से जो
होता है उसे
बनता है उसे
कहते
कहते
उदा – अ+अ = आ, इ+इ =
उदा – अ, उ, ओ, अ, ओ,
मूल
(अ,इ,उ,ऋ)
(आ,ई,ऊ)
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
(ए,ऐ,ओ,औ)
Page 7
के आधार पर
School of Distance Education
के भेद
के काल –मान को
– मूल
रखकर
के
लघु –
एक
उदा - अ, इ, उ, ऋ (मूल
के
का समय लगता है उसे
के भेद और भी
रण
तीन
सानुनािसक
कहते
का समय लगता है , उसे
या
कहते
)
जाते
से
पुकारने के अवसर पर
भी इसका
को
)
दो
से
- लघु और
का समय लगता है उसे लघु कहते
उदा – आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ (सब
–
जाते
समय लगता है उसके
के
-
के दो भेद
ये
–
, सानुनािसक और िनरनुनािसक ।
का एक और भेद भी
का अंितम
कहते
जाता है –
है
लंबा करके बोला जाता है और उसके
उदा – अरे माधो..., हाय रे ...।
करते
और िनरनुनािसक –
जब
का
मुख और नािसका से होता है उसे सानुनािसक कहते
जब
का
केवल मुख से होता है उसे िनरनुनािसक कहते
उदा – माँ (आँ)
उदा – अ, इ, उ
UNIT - 4
सहायता से
तीन
के होते
-
का
– 1)
25 होते
कर सकते
2)
कहते
3)
‘क’ से लेकर ‘म’ तक ।
पाँच-पाँच
क, ख, ग, घ, ङ – क
च, छ, ज, झ, ञ
ट, ठ, ड, ढ, ण
त, थ, द, ध, न
प, फ, ब, भ, म
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 8
School of Distance Education
इनके
जीभ मूह
ँ के
- इनका
और
- इनके
है ।
भाग का
करती है ।
करते समय जीभ मूँह के
से इनका
र, ल, व – ये
न
मुख
भाग का
के बीच है ।
का
है – ‘बीच
करती है ।
’। उदा – य,
से रगड रवाकर िनकलती है । उदा – श, ष, स, ह –
UNIT - 5
दो
के पास पास होने के कारण उनके
मेल जाने से जो
होता है , उसे संिध कहते
उदा – राम + अवतार = रामावतार (अ+ अ= आ)
तीन
होती है – 1)
- दो
के
(इ+ इ = ई)
मेल से जो
के पाँच भेद होते
– दो
1)
कहते
उदा –
2)
र
– 1)
पास पास
3)
होता है उसे
कहते
2) गुण 3)
4) यण ् 5)
तो
के बदले एक
उदा –
+
=
बन जाता है , उसे
+ आलय =
+
=
+ उपदे श =
2)
गुण
–
‘अ’ या ‘आ’ के आगे ‘इ’ या ‘ई’ लगा तो
िमलकर ‘ओ’ और ‘ऋ’ हो तो
उदा –
दे व +
=
िमलकर ‘अर्’ हो जाते
िमलकर ‘ए’, ‘उ’ या ‘ऊ’ हो तो
(अ + इ = ए)
सुर + ईश = सुरेश (अ + ई = ए)
वीर + उिचत = वीरोिचत (अ + उ = ओ)
राज +
=
(अ + ऋ = अर्)
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
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School of Distance Education
- ‘अ’ या ‘आ’ के आगे ‘ए’ या ‘ऐ’ हो तो
3)
िमलकर ‘ऐ’ और ‘ओ’ या ‘औ’ हो तो
‘औ’ हो जाते
िमलकर
उदा – एक + एक = एकैक (अ+ ए = ऐ)
वन + औषिध = वनौषिध (अ+औ = औ)
4)
यण
- इ, ई, उ, ऊ या ऋ के आगे कोई
‘व ्’ और ऋ के
उदा –
‘र्’ हो जाता है ।
+
‘य ्’, उ, ऊ के
(इ+अ = य ्)
=
सु + आगत =
(उ+आ = व ्)
मातृ +
– (ऋ+आ = र्)
=
- ए, ओ,ऐ, औ से परे
5)
तो इ, ई के
कोई
‘औ’ को ‘आव ्’ हो जाता है ।
हो तो ‘ए’ को ‘अय ्’, ‘ओ’ को ‘अव ्’, ‘ऐ’ को ‘आय ्’ तथा
उदा – ने + अन = नयन (ए को अय ्)
ने + अक = नायक (ऐ को आय ्)
भो + अन = भवन( ओ को अव ्)
भौ + उक = भावुक (औ को आव ्)
जब एक
है , उसे
दूसरे
कहते
या
से िमलता है और उसके मेल से जो
होता
उदा – सत ् + उपयोग = सदुपयोग
िनयम
1)
क् , च ्,
और प ् के आगे कोई
या
हो तो क् - ग ् होता है , च ् - ज ् होता है ,
का तीसरा चौथा
–
अथवा य ्, र्, ल ्, व ्, ह
से कोई
होता है और प ् – ब ् होता है ।
उदा – वाक + ईश = वागीश
अच +
=
+ आनन = षडानन
2)
जाता है ।
के पहले
उदा – वाक + मय =
से परे कोई अनुनािसक
हो तो पहला
उसी
का अनुनािसक
हो
(क का ङ अनुनािसक)
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
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3)
School of Distance Education
‘त ्’ के साथ कोई
, ग, घ, द, ध, ब, भ अथवा य, र, ल, व
जाता है ।
उदा –
कोई
हो तो ‘त ्’ का ‘ ’ हो
जगत ् + ईश =
उत ् + गम =
तत ् +
4)
=
‘त ्’ के साथ ‘च ्’ हो तो
िमलकर ‘च ्’ और ‘ ’ के साथ ‘छ’ हो तो
जाता है । ‘त ्’ के साथ ‘ ’, ‘ड़’, या ‘ढ़’ होने पर
िमलकर ‘ ’ होता है और ‘त ्’ के साथ ‘ल’ हो तो
िमलकर ‘ल ्’ हो जाता है ।
उदा – उत + चारण =
(त ् + च =
सत ् + जन =
बृहत +
)
(त ् + ट =
उत ् + डयन =
)
(त ् + ड =
तत ् + लीन =
5)
)
(त ् + ज =
=
(त ् + ल =
िमलकर ‘ज ्’ या ‘झ’ हो
)
)
‘त ्’, ‘ ’ के साथ ‘ह’ हो तो ‘त ्’, ‘ ’ होता है और ‘ ’ ‘ध’ हो जाता है ।
उदा – तत ् +
‘छ’ के
कोई
( त ् + ह - -ध)
=
हो तो ‘छ’ ‘
’ बन जाता है ।
उदा – आ + छादन =
+ छे द =
6)
‘म’ के साथ ‘क् ’ से ‘म’ तक का कोई
उदा – सम ् +
हो तो ‘म ्’
बन जाता है ।
=
सम ् + तोष = संतोष
7)
‘म ्’ के साथ य, श, ह तो ‘म ्’
बन जाता है ।
उदा – सम + हार = संहार
सम + शय = संशय
सम + योग = संयोग
8)
ऋ, र् या ष ् के बाद
‘न ्’ हो तो वह ण हो जाता है ।
उदा – भूष + अण = भूषण (ष ् + न ् = ण)
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
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School of Distance Education
ऋ + न ् = ऋण (ऋ + न ् = ण)
9)
अ,आ को छोडकर
कोई
के
‘स ्’ के
आ जाय तो ‘स ्’ ‘ष’ बन जाता है ।
उदा – अिभ + सेक = अिभषेक (इ+स ् = ष)
+ सम =
10) र् के साथ
(इ+स ् = ष)
र् हो तो पहला र् का लोप होता है और उससे पहले का
होता है ।
उदा – िनर् + रस = नीरस
-
और
के साथ
के मेल से जो
होता है , उसे
कहते
उदा – मनः+ रथ = मनोरथ
दुः+ उपयोग =
िनयम
1)
और ‘
उदा –
से
’
अ हो और
के
का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ
अथवा य,र,ल,व आ जाय तो पहला ‘अ’
पर ‘ओ’ होता है ।
यशः+ गान = यशोगान (श ् अ
मनः+
ओ)
(न ् अ
=
ओ)
रजः+ गुण = रजोगुण
सरः+ ज = सरोज
के बाद श ्,ष ्,य,स हो तो
2)
उदा –
दुः+ शासन =
िनः+
के
3)
उदा –
=
बाद के
के समान बन जाता है ।
भी श होता है )
(
(
स बन जाता है )
इ या उ हो और उसके साथ क् ,ख या प ्, फ
से कोई
हो तो
‘ष ्’ हो जाता है ।
दुः+ कर =
िनः+ पाप =
के
4)
उदा –
5)
‘अ’ हो और उसके साथ ‘अ’ से
कोई
हो तो
का लोप होता है ।
अतः+ एव = अतएव
के
अ,आ के
हो अथवा य, र, ल, व, ह
और कोई
से कोई
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
हो अथवा उसके साथ
हो तो
र् हो जाता है ।
का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ
Page 12
उदा –
िनः+ आशा = िनराशा
िनः+
School of Distance Education
=
िनः+ झर =
6)
से कोई
उदा –
के
अ और उसके साथ अ या
हो तो अ
के
का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ
ओ होता है ।
अथवा य,र,ल,व,ह
मनः+ अिभराम = मनोिभराम
अधः+ गित = अधोगित
मनः+ हर = मनोहर
इसके अलावा कुछ अिनयिमत
उदा –
होती ।
पुराः+ कार =
नमः+ कार =
ितरः+ कार =
Module ll
UNIT - 6
एक से अिधक
करनेवाले
समूह को
उदा – लड़का,
कुछ
को
उदा –
से बनी हु ई
को
कहते
कहते
को
, कलम।
कहते
(‘कु’
होती । जब वे दूसरे
है । इसका कोई
दूधवाला –(‘वाला’ का
के साथ
जाती , तब
के साथ ‘कु’ लगने पर इसका
दूध के साथ लगने पर वह
होती । ऐसी
होता है ।)
होता है ।)
के
1.
के आधार पर
तीन
के
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
– 1)
2) यौिगक 3)
Page 13
अपनी
:–
को
School of Distance Education
कहते
हो, उनके
के
करने से कुछ
होता। ऐसे
उदा – धन, घोडा,
यौिगक
: – जो
दो या दो से अिधक
के योग से बनते ,
यौिगक
कहते
उदा – राज + महल = राजमहल
+
: – जो
का बोध कराते हो,
उदा -
=
दो या दो से अिधक
के मेल से बनते हो,
कहते
पंकज = पंक + ज (पंकज का
है
से
दशमुख = दस + मुख (दशमुख का
से
2.
के तीन भेद
वाचक – जब
उसी
– जब कोई
‘गधा’
उसका
कहते
– जो
है ‘
से क
से
–
उदा –
वे
या सांकेितक।
वाचक है ।)
’। इस
या गुण का बोध करानेवाले
को
होता है – राम एक
है ।)
का
है । इसका
से दूसरा
होता है ‘
सूिचत
समय’)
के भेद –
के चार भेद
के जो
उदा – वायु,
3)
है रावण)
िलए बना है तब उसे वाचक कहते
करता है और गूढ़
के आधार पर
–
है कमल।)
इसका
- 1) वाचक 2)
हो गया। (
3.
कहते
है दस
न बतलाकर अपने
राम एक गधा है । (यहाँ गधा का
उदा -
इसका
बोला या िलखा जाये और
उदा – गधा एक जानवर है । (
को िछपाकर
करके
,
- 1)
2)
का
3) दे शज 4)
होते
उसे
,
जो
से
पर कुछ
करके
करते
-
आसरा
आग
आँसू
सच
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 14
दे शज – ये
School of Distance Education
से
बने
से बने
उदा –
के अनुसार
य
के
,
के
,
, पेट,
– ये
भारतीय भाषाओ के
करते
उदा -
से –
अरबी से
कई
, िसनेमा,
भाषाओं जैसे अरबी, फारसी,
,
से
,
- मौलवी, अदालत, दुिनया, अमीर।
फारसी से –
, बाग, आदमी, चाकू, कारखाना।
से
- दारोग, काबू, लाश, तोप।
से
- सुरंग, दाम
UNIT - 7
कुछ
ऐसी होती , जो
हो जाती । इस तरह
को
होती। जब वे दूसरे
के साथ
(Affix) कहते
जाती
तब वे
उदा – कुछ, िनर, वाला।
दो
के होते
– जो
2)
के आरं भ
कहते
उदा –
- 1)
लगाकर उसके अ
अप + यश = अपयश (
लाकर
कर
उसे
)
उप + वन = उपवन(बगीचा)
+ योग =
(
)
अन + पढ़ = अनपढ़ (
कु +
– जो
उदा -
=
या
(बुरा
पढ़ करके)
)
के
लगाकर उनके
बुढ़ा + पा = बुढ़ापा (बुढ़ापा
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
को बदल ,
कहते
)
Page 15
+
School of Distance Education
=
से
(
)
िलखा + आवट = िलखावट
बुरा + ई = बुराई
दूध + वाला = दूधवाला
बच + पन = बचपन
UNIT - 8
समास
रखनेवाला दो या दो से अिधक
, इस मेल को समास कहते
उदा -
िमले
को
या पद िमलाकर जब एक
पद अथवा सामािसक पद कहते
या पद बनते
घोडे का सवार – घुडसवार
सा मुख –
धन का पद - धनपद
काठ
पुतली – कठपुतली
समास होने पर बीच
उदा -
तथा
,
का लोप होता है ।
धन का पद - धनपद ( ‘का’ का लोप होता है ।)
समास
1. समास
दो
का योग होता है ।
2. दो
के मेल से एक पद बनता है
3. दो
के बीच
4. दो
कभी पहला पद
5. समास
उदा –
का लोप होता है ।
जुडते
का
होता है और कभी दूसरा पद
तो
=
के
+
का
होता है
होता है ।
=
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 16
School of Distance Education
समास और
समास
होते
दो
होने पर दो
का योग होता है ।
के संयोग से
समास हो सकता है ।
उदा – पीता
=
र।
द कहते
करने
दो पद है – ‘पीत’ और ‘
को
के तोडने
के
उदा – रात–
होता है ।
को
के तोडने
कहते
के
कहते
इसका
और
करने पर इस तरह होता है – पीत +
’।
को अलग अलग अपनी
-
समासवाले
के
’=
होती है । समास
समास
–
का योग होता है ।
पद भी िमल जाते
समास करने पर ‘पीत है जो
केवल
को
दो
रखकर उनके आपस के
को
है रात और
समास के भेद
समास के छः भेद होते
1.
पहला पद या
उदा –
पद
1)
समास –
होता है ।
2)
समास
3)
पहला
4)
5)
हो उसे
6)
समास कहते
इसका
के अनुसार)
(
आजीवन ( जीवन
)
यथासमय (समय के अनुसार)
समास –
2.
हो उसे
समास
समास कहते
उदा – राजसभा (राज
हो और समास करने पर पहली
का लोप
सभा)
को
(
पद
)
समास के दो भेद है –
2) समानािधकरण
1)
i.
पद का
–
लगायी जाती है ।
उदा – राज-सभा (राजा
पहले
संबंध कारक
करने पर पहला
और दूसरे
सभा)
है और दूसरे
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
कारक
है ।
Page 17
के छः भेद
इस समास के
कारक
को
(
करण
का लोप होता है उसी कारक के अनुसार इस समास का
होती है ।
–
उदा –
२.
-
पद
नाम होता है –
१.
School of Distance Education
– को
कारक है )
‘से’ है ।
-
उदा –
(अकाल से
)
मनमाना (मन से माना हु आ)
३.
‘के िलए’।
–
उदा – रसोईघर (रसोई के िलए घर)
(हवन के िलए
४.
अपादान
–
उदा –
(
‘से’ है ।
से िगरा हु आ)
(पद से
)
(ऋण से
५.
संबंध
)
)
‘का’, ‘के’, ‘
–
’ है ।
उदा – सेनापित (सेना का पित)
राजमाता (राजा
माता)
( दे श का
६.
अिधकरण
)
‘ ’, ‘पर’ है ।
–
उदा – वनवास (वन
वास)
आपबीती (अपने आप पर बीती)
(
कभी कभी
उदा –
समास
(
सरिसज (सर
)
पद
का लोप
होता है । उसे अलुक्
कहते
रहनेवाला। ‘ ’ का लोप)
होनेवाला। ‘ ’ का लोप)
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 18
नञ
School of Distance Education
– अभाव या िनषेध का
सूिचत ककरनेवाला ‘अ’ या ‘अन’ लगाने से बननेवाले
कहते
उदा –
( जो
को ‘नञ’
न हो)
अनपढ़ ( न पढ़ा हु आ)
अछूता ( न छुआ हु आ)
उप पद
समास
–
उदा –
कोई उप पद न हो तथा बाद
जलज (जल
समानािधकरण
जात) - कामदे व
समास के
-
आती है उसे समानािधकरण
अथवा
है ।
–
’ कहते
) – कलम
मनोज – (मन
ii.
पद हो, उसे ‘उप पद
कहते
के बाद एक
कारक
इस समास के पद उपमान- उपमेय अथवा
उदा – नील कमल - नीला कमल
यहाँ नीला
और कमल
है ।
म – घन (बादल)
कभी कभी संबध बतानेवाले बीच के पद का लोप भी होता है ।
पहले
का दूसरे से संबध बतानेवाले बीच के पद का लोप होता है उसे
iii.
होता है उसे
समास –
समास के
होता है और
समास कहते
उदा –
लगते
समास –
उसे
समास
–
समास कहते
समुदाय का बोध
का समूह)
होते
समास कहते
उदा –
’ समास
‘
का समाहार)
(तीन
चौमासा (चार
iv.
(काला) उपमान और उपमेय
और
करने पर और, या, अथवा
योजक
और
– पाप और
तन-मन – तन और मन
समास के
का िलंग साधारणतया
हो तो उसी के अनुसार िलंग हो जाता है ।
म
के अनुसार होता है । कभी कभी
उदा – राजा-रानी आये।
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 19
समास
School of Distance Education
एक से अिधक
उदा – माता –
जुडते
आये, राम-
आते थे।
कभी कभी बहु वचन - सूचक
उदा – आपके
v.
का
ब
के साथ भी पाया जाता है ।
लडके-
समास – इस समास
होता है । इसे
उदा –
समास कहते
र (पीत है
अनंग (
समास
पद अपने
समास है ।
उदा –
से कोई पद
- कामदे व)
पद का पहला
दूसरे
का
मृगलोचन -
पद
)
है अंग
से
होता। पर समास पद
क
होता है ।
होत है । कई
पद
समास
भेद से
के
1) मृग के लोचन –
2) मृग के समान लोचनवाला –
समास
1) पीला कपडा –
-
2) पीला है अंबर (कपडा)
वह
(
–
समास)
Module lll
UNIT - 9
के
कहते
,
या
होता, वे
,
िलंग, वचन, कारक अथवा काल
सूचक,
,
और
है ।
के
,
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
के अनुसार
होता है ,
िलंग, वचन, कारक अथवा काल
,
सूचक,
या
वे
के अनुसार कोई
है ।
है ।
Page 20
School of Distance Education
UNIT - 10
(NOUN)
वह
(
है ,
),
या भाव को सूिचत करता है । राम (
,
)।
(
के तीन
,
),
–
a)
(Proper Noun)
b) जाितवाचक
(Common Noun)
c) भाववाचक
A.
( Abstract Noun)
उसे कहते
–
एक
का बोध होता है ।
,
उदा – राम, गंगा,
B.
जाितवाचक
उदा -
– जाितवाचक
एक जाित के सब
जाित का बोध होता है ।
से सजातीय
से
उदा - सोना,
के समूह को
करते
ये जाित
उसे समूहवाचक
के आधार पर होते
कहते
उदा – सेना।
कहते
, पानी, लोहा।
भाववाचक
उदा -
का
का बोध का बोध होता है उसे
– भाववाचक
सूचना होती है ।
वे
के
, गुण, दोष,
का
,
, गुण, दोष – िमठास, कटु ता, नीचता...।
- लडकपन, यौवन, दासता,
भाव –
D.
का बोध होता है ।
, नगर, सभा,, जल
से सभी
C.
से
...।
, शोक, भय...।
जब
उदा – हे
इस
गुण को
, तुम
से
करते
तब वे जाितवाचक
बनते
बनो।
है –
कभी कभी जाितवाचक
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
पर
रहनेवाला। यह जाितवाचक
है ।
होती ।
Page 21
School of Distance Education
उदा – गाँिधजी कल यहाँ
E.
भाववाचक
यहाँ गाँिधजी
कभी कभी जाितवाचक
उदा – हाथी और घोडे
भाववाचक
a) जाितवाचक
बडा
चार
से –
के समान
है । यहाँ चाल
है ।
होती ।
जाितवाचक है ।
से बनती
लडका – लडकपन
–
से –
b)
अहं – अहं कार
अपना – अपनापन
से –
c)
चतुर – चतुराई
मीठा – िमठास
से – चढ़ना – चढ़ाई
d)
सजाना – सजावट
घबराना – घबराहट
F.
के समान
उदा –
होने वाले
का आधर
मानो। ‘बडा’
है । यह
गुणी-
के
है । यहाँ
पर होता है ।
के समान
होते
उदा –
का कहना
का
के
एक से अिधक
से
के
बनते
के एक दूसरे के िमलन से
होता है इसे
और कारक के कारण होता है ।
उदा – लड़का पठता है –
का
होता है ।
िलंग, वचन
पठती है ( िलंग के कारण)
लड़का दौडता है - लड़के दौडते
लाओ – मेज़ पर
कहते
का
(वचन के कारण)
है ( कारक के कारण)
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 22
School of Distance Education
UNIT - 11
िलंग
के
जाित का बोध होता है उसे िलंग कहते
a.
–
जाित का बोध करानेवाले
को
िलंग कहते
b.
-
जाित का बोध करानेवाले
को
कहते
,
, बेदंगी
उदा –
,
और
–
, सीता...।
उदा – लड़का, नर, राम...।
है । उदा – पेड, नगर,
...।
है । उदा – लता,
,
जो
है वे
िलंग से
दो िलंग
कई
है । उदा –
से
होता है ।
के नर और मादा का बोध होता है पर उनका
, कौआ,
–
, भाई, बैल...।
एक िनयम
, चीता ।
– कोयल, चील, मैना।
जाितभेद
करने केिलए इनके साथ नर या मादा
लगाना
कौआ, नर चीता, मादा चीता ।
के अंत
आ, पा, आव और पन हो
उदा – नर कौआ, मादा
होते
उदा – बुढ़ापा, चढ़ाव, लडकपन
के अंत
आई, वट, हट और ता हो वे
उदा – चढ़ाई, सजावच,
से
, सरलता
होते
।
बनाने का िनयम
क
के
अ को आ करने से – उदा –
ख
के
अ को ई करने से – उदा – दे व – दे वी,
तनुजा ।
ग
घ
मृगी।
कुछ
के
के
–
, बाल – बाला, सुत – सुता, तनुज –
–
, कबूतर –
, मृग –
आ को ई करने से – उदा – रसा – रसी, लडक़ा –
आ को इया करने से – उदा –
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
–
, बूढ़ा –
,चूहा –
Page 23
ङ
या
धोबी –
के
, कहार –
च
कुछ
छ
उपनामवाचक
ज
कुछ
School of Distance Education
के
के
मोरनी।
लगाने से – उदा – सुनार –
,
नी या आनी लगाने से – उदा – िसंह – िसंहनी, मेहतर – मेहतरानी, मोर –
के
के
ठाकुर – ठकुराइन, पांडे – पाडाइन ।
बाप,
इन
पर
के
आइन
लगाने से – उदा – बाबू – बबुआइन,
– उदा –
–माता,
–औरत, वर- वधू, माँ –
–भाई।
से
बनाने का िनयम
a. कुछ
‘ओई’, ‘आव’ और ‘औरा’ लगाने से –
उदा – बहन – बहनाई, ननद – ननदोई,
b. कुछ
के
, िसल – िसलौरा ।
–
‘ई’ को ‘आ’ करने से –
उदा – जीजी – जीजा, झोली – झोला ।
c. कुछ
के
उदा –
।
–
के अंत
d.
उदा
‘ई’ को ‘अ’ करने से –
‘आ’ लगाने से –
।
–
UNIT – 12
वचन (Number)
सं
और
के िलए, इसे वचन कहते
। वचन दो
के
स
के होते
से यह
त हो
वह एक के िलए
होता है या अिधक
–
1) एकवचन (Singular)
2) बहु वचन (Plural)
1) एकवचनः
सं
उदाः
के
स
पढ़ती है । (
से एक
का बोध कराने वाला
एकवचन है ।
– एकवचन है )
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 24
School of Distance Education
2) बहु वचनः
सं
के
स
उदाः
से एक से अिधक
पढ़ती
का बोध हो उसे बहु वचन कहते
– बहु वचन है )
(
कभी कभी आदर के िलए एकवचन बहु वचन के
उदाः
अब
होते
बहु वचन
(
)
बहु वचन बनाने का िनयमः (क)
के
‘आ’ के
पर ‘ए’ लगा दे ने से एकवचन का
बहु वचन बन जाता है ।
उदा – लड़का – लडके, कपड़ा – कपड़े , बेटा – बेटे ।
‘
के
’
एक समान
)
सभी
रहते
के (
,
,
,
के बहु वचन बनाने का िनयम
’ तथा ‘
‘
बनाया जाता है ।
उदाः
, गाय –
–
’ तथा ‘
‘
के
’
,
सं
–
के
उदाः
,
–
,
,
(ग )
िमलता है । इस
‘ई’ के
–
लगाने पर-
-
के बाद ‘एँ’ या ‘ ’ जोड़ने से शेष
उदाः लता – लताएँ,
करने से बहु वचन
।
‘याँ’ जोड़ने से बहु वचन
‘या’ हो उनके ‘या’ के ऊपर केवल
–
पर ‘एँ’ का
, रात –
–
के
’
पर ‘इ’ होता है ।
उदाः
‘अ’, ‘आ’ के
-
का बहु वचन
िमलता है ।
,
िनयम (बहु वचन) सूिचत करने के िलए कभी कभी
(1)
जोडते
उदा – पाठकगण,
(2) कुछ
उदा –
, लोग,
, बाबू लोग।
हमेशा बहु वचन
,
के एकवचन के साथ गण,
बोले जाते
, लोग, होश
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 25
3) जाितवाचक सं
ऐं हमेशा बहु वचन
जब जाितवाचक
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होती है । जब
के समान होता है तब वे बहु वचन
उदा – भारत
रावण
(4) जब
कमी
होता है ।
(यहाँ रावण जाितवाचक
और भाववाचक
है ।)
जाितवाचक के समान होता है तब वे बहु वचन के
उदा –
और
के
का
है । (जल बहु वचन एवं जाितवाचक
होते
है ।)
UNIT - 13
कारक (Case)
कारक कहते
या
के
से उसका
के
के साथ
होता है उसे
उदा – राम ने रावण को मारा।
इस
‘ने’ और ‘को’
उदा –
इन
के
उसका
सूिचत होता है ।
मारा? - राम ‘ने’
मारा? – रावण ‘को’ । इसिलए ये कारक
कारक के आठ भेद होते
–
कारक
-
ने
कारक
-
को
-
से
-
को
-
से
-
का, के,
करण कारक
कारक
अपादान कारक
कारक
अिधकरण कारक संबोधन कारक
क
पर,
- हे , अरे , अपी, अहो ।
कारक – (Nominative)
या
‘ने’ है ।
के
से
करनेवाला या
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
का बोध होता है उसे
कारक कहते
Page 26
School of Distance Education
उदा – राम गया।
मोहन ने खाया।
‘राम’ और ‘मोहन’
के
कारक है ।
को सूिचत करने के िलए कोई
उदा – राम ने
ख
ने है ।
जाती है ।
िलखी ।
कारक (Accusative)
या
पर
के
का फल पडता है उसे
कारक कहते
।
उदा - राम ने रावण को मारा।
रावण मारा गया है । यहाँ ‘रावण’
कभी कभी
कारक है ।
‘को’ का लोप होता है ।
उदा – रामू ने
िलखा।
यहाँ ‘को’ का लोप होता है । ऐसा भी होता है - रामू ने
ग
को िलखा।
करण कारक ( Instrumental)
के साधन का बोध करानेवाले
कलम से
िलखते
िलखने का साधन कलम है । कलम के
घ
के
को करण कारक कहते
िलखने
‘से’ है । उदा –
होती है ।
कारक ( Dative)
कारक
का वह
है , जो उस
‘को’, ‘के िलए’ है
उदा – मोहन ने राम को पाँच
का बोध कराता है
िलए
कोई काम
।
मोहन ने राम के िलए पाँच
ङ
‘को’ है ।
।
अपादान कारक (Ablative)
का वह
कहते
उदा –
यहाँ
करण कारक
से
से
है
‘से’ है ।
के
से पृथक होने का बोध हो उसे अपादान कारक
िगरते
का
सूिचत होता है ।
कारक और अपादान कारक
‘से’ साधन सूिचत होता है । अपादान कारक
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
‘से’
‘से’ है ।
सूिचत होता है ।
Page 27
कलम से िलखता है -
करण कारक
से आ रहा है च
School of Distance Education
अपादान कारक
कारक (Genitive)
के
से उसका
‘का’, ‘के’, ‘
’
से
।
उदा – राम का घोडा, राम के घोडे , राम
छ
कारक कहते
बहन ।
अिधकरण कारक (Locative)
और ‘पर’
के
से
।
उदा –
के आधार का बोध होता है उसे अिधकरण कारक कहते
शेर जंगल
अिधकरण तीन
है ।
के होते
कालािधकरण –
भावािधकरण –
काल
के भाव के
भय होता है ?
ग.
–
का
से आयेगा ।
ख.
पर
–
कालवाचक और
होता है उसे कालािधकरण कहते
उदा – रामू दोपहर
भावािधकरण होता है । उदा – शेर को दे खकर
होती है उसे
कहते
के सात कभी कभी
उदा – कल रात मूसलधार
ज
‘ ’,
रहता है ।
मेज़ पर
क.
होता है उसे
हु ई ।( कल रात
मूसलधार
। उदा –
मेज़ पर है ।
लगती ।
हु ई – ‘ ’ का लोप)
संबोधन (Vocative)
के
से
को पुकारना सूिचत होता है उसे संबोधन कारक कहते है ।
उदा – हे राम! वहाँ मत आना।
संबोधन कारक
लगाये जाते
कोई
है ।
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
उसको
करने के िलए ‘हे ’, ‘अरे ’
को
Page 28
School of Distance Education
UNIT - 14
( Pronoun)
के
कहते
उसके
उदा – राम
लाना भूल गया।
है ।
1)
-
जाता है
वह, अपनी,
राम
का
जाता है ।
जगह
हु ए है ।
के पाँच भेद होते
, तू, यह, वह (ए.व) हम, तुम, ये, वे, आप (ब.व)
2)
– यह, वह (ए.व), ये, वे (ब.व)
3)
– कोई, कुछ (ए.व - ब.व)
– जो, सो (ए.व - ब.व)
4)
– कौन,
5)
(ए.व - ब.व)
या लेखक बोलते या िलखते समय या तो अपने
–
और पढ़नेवाले के
अथवा अपने और सुननेवाले को छोडकर
कहते
कहते
से बोलनेवाले, सुननेवाले और
तीन
कहते
का
जाता है ।
को हटाने के िलए
योग के अनुसार
क.
करने के िलए
जाता है । वह अपनी
उसने कहा –
इसिलए
को
के होते
के
–
,
का
का
जैसे –तू , तुम और आप ।
कहते
और हम
के बहु वचन से
और बहु वचन
के
कुछ कहा या िलखा जाए उसके िलए
जैसे – यह, वह (ए.व), ये, वे (ब.व)।
है ।
है । यहाँ हम
होते
एकवचन
के
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
पर
,
को
और
(ए.व), हम (ब.व)।
–
के
कुछ कहा जाए उस
– बोलनेवाला या िलखनेवाला अपनेिलए
– सुननेवाले या पढ़नेवाले के िलए
कुछ कहता है , या सुननेवाले
है । हम बहु वचन
होता है ।
करता है उसे
होता है उसे
होने वाले
है ।
हम
का
कहते
को
का हम
एकवचन
Page 29
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तू और तुम
यहाँ आओ। इसी के
पर आप यहाँ
होता है । जैसे – आप मेरे
।
के
ए। कभी कभी
कभी कभी आदर के िलए आप का
करते
जोडा जाता है । जैसे – आप लोग यहाँ
िनजवाचक आप और
और बहु वचन
आता है । जैसे –
होते
आप केवल
आदर के िलए आपका
चक आप
यह और वह के
आप काम
कभी (2) आप भले
जैसे – तुम
भी आप का
बहु वचन सूिचत करने के िलए आप के साथ ‘लोग’
भेद होता है । िनजवाचक आप समान
से एक वचन
आप पढ़ू ँ गा। हम आप
वह केवल बहु वचन
करते
और
करते
अकेला जाता है । िनजवाचक आप
‘आप’
करते
िनचवाचक आप तीन
तथा
से
के साथ आता है । जैसे – तू
अकेला आ सकता है . जैसे – आप भला तो जग भला । वह अपने आप समझ गया।
ख.
वे
ऒर
संकेतवाचक और िनदे शवाचक भी कहते
जैसे – यह, वह, ये, वे।
, हम, तुम, आप, यह, ये, वे इन
करने के िलए ‘ ’, ‘ई’,
संकेत
य जोडते
। झैसे –
या
, तू
,
, आप
जाता है ।
के साथ
अिधकता
।
ग.
कहते
से
जैसे – कोई, कुछ ।
या
a. ‘कोई’ का
के
बात का बोध न हो उसे
के िलए होता है । जैसे – बाहर से कोई आ रहा है ।
b. जब
का पता न होने पर – जैसे – अरे ! कोई कमरे
c.
के
भाग
‘कोई’ लगे तो उसका
d. ‘कोई’ जब दोहराया जाता है तब
e. कोई के साथ एक लग जाने पर
कुछ का
के िलए
अनिगनत
होता है । जैसे – पानी
है ?
लगभग होता है । जैसे - कॉलेज से कोई पाँच सौ
को सूिचत करता है । जैसे कोई कोई
सूिचत करता है । जैसे – तुम
के िलए होता है । जैसे –
पर
को रोकते
से कोई एक गा सकेगा।
कुछ है ।
कुछ है ।
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 30
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कोई का
के िलए होता है और कुछ का
घ.
वाचक
से दो
जो, सो
और
से एक
का
सोचते ?, आज कौन आएगा?
कौन का
बोलेगा , थैली
के िलए होता है ।
है
कभी कभी कौन का
िभ
कौन का
के िलए
वाचक
बात
कहते
है ।
होता है
का
के िलए होता है ।जैसे -
केिलए ‘कौन’ को दोहरा भी
के
का बोध हो उसे
रहता है । जैसे जो गाता है
करने के िलए
–
उदा – आप
के बीच के
जैसे – आपने जो कहा सो हो गया।
कभी कभी जो या सो
ङ.
के िलए होता है ।
कहते
के िलए होता है । जैसे – कौन
बाधा डालनेवाले तुम कौन हो।
जाता है । जैसे – कौन कौन
लाएंगे।
होता है । जैसे - इसने कौन अपराध
को दोहरा दे ता है । जैसे – राम ने
का
के
भी होता है । जैसे – तुम मुझसे
लडोगे।
का
वचन और कारक के कारण
का
भी
और
संबोधन
से के
होते
एक
िलंग के कारण
होता।
से होता है ।
होता।
पर
होता है उसी के अनुसार उस के िलंग, वचन भी होता है ।
का
कारक
एकवचन
,
करण
अपादान
अिधकरण
मुझको, मुझे
मुझसे
बहु वचन
हम
हमको,
हमसे
मुझको, मेरेिलए,मुझे
हमको, हमारे िलए,
मेरा,मेरे,
हमारा, हमारे ,
मुझसे
, मुझपर
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
हमसे
, हमपर
Page 31
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तू
करक
करण
एकवचन
बहु वचन
तूने
तुम, तुमने
तुझको, तुझे
तुमको,
तुझसे
तुमसे
तेरा,तेरे,
अिधकरण
,
, तुझपर
,
, तुमपर
वह
करक
करण
अपादान
अिधकरण
एकवचन
बहु वचन
वह,उसने
वे,
उसको, उसे
उनको,
उससे
उनसे
उसके िलए, उसे
उनके िलए,
उससे
उनसे
उसका, उसके,
उनका, उनके,
उस पर,
उनपर,
UNIT - 15
(Adjective)
कपडा, लाल कमल।
से
या
सूिचत करे , उसे
बतलाई जाए उसे
है , लड़का
जो
कहते
जैसे – रे शमी
लड़का।
है ।
के पहले आता है उसे
है , फूल
जैसे –
कहते
है । इसिलए यह
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
कहते
जैसे –
फूल।
है ।
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जो
के बाद आता है उसे
लडका
। जैसे –
जो
कहते
है , होिशयार
है ।
के साथ उसको
रामनाथ
चार
के
के बाद आने के कारण यह
करने के िलए
रामनाथ कहता हूँ ।
के साथ समानािधकरण
जैसे – वह लड़का बड़ा होिशयार है ।
है ।
होता है उसे समानािधकरण
कहते
है ।
–
क . गुणवाचक (Adjectives of Quality)
ख.
(Adjectives of number)
ग.
(Adjective)
घ.
१.
या
(Demonstrative Adjective)
गुणवाचक
जो
के गुण, रं ग, आकार,
जैसे – लंबा, सुशील, काला, गोल,
।
गुणवाचक
के
जैसे –
के बदले बहु धा
राजा (
को बतलानेवाले
के
भी
को गुणवाचक
कहते
आते
का राजा )
जापानी कपड़ा (जापान का कपड़ा)
गुणवाचचक
जैसे –
२.
का
होता है । तब उनका
-
के
ने सच कहा है ।
कहते
। जैसे – एक, दो, पहला, दूसरा, दुगुना...।
के तीन भेद होते
1)
3)
– इससे
के चार भेद
।
गणना,
का बोध हो, उसे
–
2)
a.
के समान होता है ।
बोधक या
बोधक
का बोध होता है । जैसे – चार, आठ, सात ।
–
गणनावाचक – गणनावाचक
षण से गणना का बोध होता है । जैसे – एक
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
, चार फूल, सात
Page 33
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गणनावाचक
के साथ एक लगाने से लगभग का
लगभग
होता है । जैसे –
आदमी ।
b.
से
–
दूसरा, चौथा...।
– गणनावाचक
c.
– दुगुना, ितगुना ।
३.
के
के
‘गुना’ लगाने से
से
कहते
, गणना का
।
एक आदमी –
होता है । जैसे – पहला,
बनते
माप- तोल या
। जैसे
का पता होता है उसे
जैसे – दो सेर चावल, चार गज कपडा ।
के दो भेद होते
–
और 2)
1)
ण-
जौसे - दो सेर चावल ।
से
से
लगता है । जौसे – बहु त दूध ।
४.
या
कहते
कहते
जैसे – यह
से
।
।
‘यह’, ‘वह’
, वह
जब
का पता लगता है ।
से
ऒर
का पता न
या संकेत
जाता है उसे
जाता है । इसिलए इसे
।
के
हो तब वह
बन जाता है ।
जैसे – वह घर राम का है ।
कई
ऐसे
मूल
जैसा रहता है ।
जैसे – वह, यह ।
के
कारण
भी िलंग, वचन और कारक के अनुसार
कुछ
होता है ।
होता है ।
के िलंग और कारक के
जैसे – काला कपड़ा - काला कपड़े
काला धोती - काला धोितयाँ
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 34
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के साथ ई
हो जाते
जैसे - काली धोती
के
होता है ।
होता है जो
के
होने पर
जैसे – वह घोड़ा, वे घोड़े
पृथकता अथवा अिधकता
के िलए
को दुहराता है –
जैसे – छोटे छोटे फल, लाल
का भी
होता है । जैसे – बडा
गुणवाचक और
जब
लड़का ।
करते
तब वह
बन जाते
जैसे – थोड़ा खा गया, चावल बहु त है ।
भी लगती
जैसे –
के साथ जब
आता और वे
।
बन जाते
। तब उनके साथ
का
िमलता
को दान दो ।
UNIT - 16
(Verb)
काम के करने या होने का बोध हो उसे
कहते
जैसे : पढ़ना, खाना, दौडना, पहनना।
धातु –
ये सब
है ।
i.
1)
उसे
के मूल
को धातु कहते
उदा- पढ़ना, खेलना, खाना
मूल धातु ‘पढ़’, ‘खेल’, ‘खा’
के आधार पर
के दो भेद होते
(Transitive Verb) –
कहते
उदा – राम
है । मूल धातु
- 1)
‘ना’ जोडकर
2)
के
का फल
को छोड
पर पडता है
पढ़ता है ।
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 35
School of Distance Education
राम है ।
है । और
2)
का
पर पडता है ।
के
(Intransitive Verb) -
कहते
का अभाव है ।
का फल
पर
पडता है उसे
उदा – मोहन सोता है ।
कभी कभी एक
को एक ‘
होता है और कभी कभी दो
’ कहते
भी होते
एक
होने वाले
उदा – राम ने खाना खाया।
खाना
कहते
है । केवल एक
उदा – माँ ने
होता है । दो
होने वाली
को
को दूध
दो
होते
–‘
’ और ‘दूध’।
दो
होते
एक ‘
’
और दूसरा
‘गौण’
उदा – माँ ने
को दूध
इस
‘गौण’
उदा –
कभी कभी
होता है ।
भेद
1.
-
को पूरा करने के िलए दूसरे
यह दो
है । ‘गौण’
’
ने कथा सुनाई।
के
ii.
है दूध ‘
वे होती है ,
आशय
होती है । ऐसी
अथवा
को
से पूरा
होता,
कहते
के होती है ।
१.
–
उदा – वह
है । यहाँ
२.
के
–
कहते
का अभाव है ।
को पूरा करने के िलए जोडा गया है ।
होने पर भी
का भाव पूरा न हो, उस
को
उदा – सीता ने पढ़ाया।
यहाँ
है ।
पूरा
यहाँ
सीता ने ‘
होने पर भी
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
’ पढ़ाया, ‘
का भाव पूरा
’ पढ़ाया, यह पूरा
होता।
इसिलए यह
Page 36
School of Distance Education
३. पूरक -
को पूरा करने के िलए
पूरक कहते
के पूरक ‘
होते
उदा –
उसे होिशयार समझता हूँ । (
राम बलवान है (
iii.
या
पडती है ,
पूरक’ तथा
के पूरक ‘
पूरक’
पूरक)
पूरक)
यौिगक धातु –
के
से धातुओं के दो भेद होते
मूल धातु - मूल धातु वे , जो दूसरे
यौिगक धातु – यौिगक धातु वे
नाम धातु – जो
। 1) मूल धातु 2) यौिगक धातु ।
से न बने
जो दूसरे
से बनाये जाते
या
,
जैसे – कर, बैठ, पढ़ ।
। उदा – खाना से
।
,
के आधार पर बनती है उसे नाम धातु
कहते
।
उदा – हाथ से हिथयाना
से
अपना से अपनाना
iv.
से यह जान पडता है
करने
दे ता है उसे
(casual verbs) कहते
उदा – राम ने मोहन से
यहाँ राम
करनेवाले को
और
राम ने मोहन से
मूल
से
जो
उदा –
को
न करके
दूसरे को
िलखवाया ।
न िलखकर मोहन से िलखवाता है । इसिलए यह
जाती है उसे
िलखवाया ।
राम
होती है उनसे
और
बन सकती
है ।
कहते
है और मोहन
।
और
है ।
बन सकती है ।
दूध पीता है ।
पीना
है । इससे
से
बनती है – माँ
बना सकती है । उदा - माँ नौकर से
को दूध
को दूध
है ।
है ।
बनाने का िनयम
मूल धातु के
बनती है ।
आ जोडने से
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
और वा जोडने से
या
Page 37
School of Distance Education
उदा – उठना – उठाना - उठवाना।
चलना – चलाना - चलवाना
पढ़ना – पढाना - पढ़वाना
दो
के धातुओं
ए और औ को छोडकर
पहला
हो जाता है ।
उदा – जागना – जगाना – जगवाना
भूलना – भुलाना - भुलवाना
छोडना – छुडाना – छुडवाना
धातुओं के
ला और लवा लगाते
उदा – पीना –
। तब
हो जाता है ।
–
सोना – सुलाना – सुलवाना
खाना –
नामु धातु
v.
बनते
या
को छोडकर
)
धातु के समान
आ, ओ,और ला
उदा – लाज –
होते
लगाते
नामधातु
जोडने से जो धातु बनती है अथवा जो नाम (
कहते
पहला
जो नामधातु
हो जाता है ।
लगाने से
– लजाना
हाथ – हिथया – हिथयाना
झूठ – झुठला – झुठलाना
UNIT - 17
काल (Tense)
कहते
के
से
। काल के तीन भेद होते
के होने का समय और
अथवा
का बोध हो उसे काल
1) भूतकाल
2)
3)
काल
काल
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 38
School of Distance Education
भूतकाल
से
का बोध हो उसे भूतकाल कहते
उदा – राम ने
।
िलखी ।
भूतकाल के छे ः भेद
भूत,
-
भूत –
के
भूत,
भूत,
से भूतकाल के
भूत,
भूत, हे त-ु हे तुमत भूत।
समय का बोध न हो उसे
भूत कहते
उदा – मोहन ने खत िलखा।
यहाँ
का
भतकाल –
होता है उसे
बोध होता, जो
के
भूतकाल कहते
उदा – राम ने
इससे पहले
।
के
भूत कहते
उदा –
का
का समय अभी अभी
हु आ है , इसका बोध
हु ई है ।
से यह
ने दूध
होता है
के
को
हु ए बहु त समय हो चुका है , उसे
था।
से
िमलता है ।
भूत -
हु ई है ।
है ।
अभी अभी
भूत –
से
भूतकाल
के उस
हो
को
के साथ ‘था’, ‘थे’, ‘थी’ लगाने से
भूत कहते
का पता न लगे, उसे
भूतकाल कहते
यह
हो
भूतकािलक
भूतकाल
हो
थी। पर
उदा - वह पढ़ रहा था। वह सोता था ।
कब समा हु आ इसका पता
भूत काल –
भूत कहते
के
के साथ ‘ता था’, ‘ते थे’, ‘रहा था’, ‘रहे थे’ लगाना
से भूतकाल
सूचना िमलती है
उसके होने
कुछ
हो उसे
उदा – वह आया होगा।
उसने खाया होगा ।
‘
’ जोडने से
भूतकाल
हे त-ु हे तुमत भूतकाल –
हो
थी ।
भूतकाल िमलता है ।
के
से यह पाया जाये
कारण से न हो सका उसे हे त-ु हे तुमत भूतकाल कहते
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
है ।
के साथ ‘हूँ गा’, ‘हूँ गी’, ‘होगा’, ‘होगी’,
भूतकाल
होना संभव था
Page 39
School of Distance Education
(Present Tense)
होती। उसे
के
को
काल कहते
काल कहते
रहती है ,
उदा – रामू पढ़ता है ।
सीता गीत गा
काल तीन
उसे
है ।
के होते
काल -
कहते
काल 2)
– 1)
वह
है
काल 3)
से
का
काल
होना पाया जाये,
उदा – मोहन पढ़ता है ।
रमा गाती है ।
के साथ ‘ता’, ‘ते’, ‘ती’ जोडने से
बनते
वह है
जाये।
काल
के होने
पाया
उदा – वह खाता होगा ।
सीता जाती होगी ।
के साथ ‘ता होगा’, ‘ती होगी’, ‘ते
–
होता, उसे
’ लगाने से
’, ‘ती
का वह
है
कहते ।
यह
िमलते
होता है
का
अभी
है ,
उदा – वह खा रहा है ।
चल
है ।
के साथ ‘रहा’, ‘
’, ‘रहे ’ जोडने से
िमलती है ।
काल ( Future Tense)
काल, 2)
होनेवाली
काल –
काल कहते
को
काल कहते
काल
का वह
है
काल के दो भेद
से
के आगे होने
– 1)
सूचना िमले उसे
उदा – वह आयेगा।
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 40
School of Distance Education
राम आज बंबई जायेगा।
सीता कल घर आयेगी।
के साथ ‘येगा’, ‘येगी’, ‘येगे’ जोडने से
िमलते
काल –
के होने
उदा – संभव है , आज
संभावना हो उसे
काल कहते
हो ।
से ‘गा’, ‘गे’, ‘गी’
पृथक कर दे ने से
काल िमलेगा।
UNIT – 18
(Voice)
उसे कहते
यह जाना जाये
है या केवल भाव है , उसे
का
कहते
है ,
उदा – राम ने रावण को मारा।
तीन
के
– 1)
है ।
उसे
3) भाव
2)
कहते
हमेशा
के िलंग, वचन और
के अनुसार होता है ,
उदा – लडका पढ़ता है ।
लड़का
है और
सीता
ग है इसिलए
िलखती है । इसमं सीता
है .
भी
है इसिलए
है ।
के िलंग, वचन के अनुसार हो, उसे
–
है ।
का
उदा – राम
होता है ।
का सीधा
से होता
कहते
िलखता है ।
है । इसिलए यह
होता है ।
होना है ।
से होता है ।
है ।
के िलंग, वचन के अनुसार
का होना
है ।
बदलती है ।
धानता होती है और
हमेशा
का
उदा – राम ने रावण को मारा । राम से रावण मारा गया। PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 41
रावण
School of Distance Education
है ।
है ।
के
का
उदा – माँ ने
को दूध
।
माँ से
को दूध
गया ।
दो
होते
एकवचन और
उदा – यहाँ बैठा
क
होती है ।
से बनता है ।
इसका
होता है ।
हमेशा
बनाने
को
भूत के
के
से भा
होती है । यह हमेशा
जाता ।
या
अनुसार जाना
रहता है ।
जाता ।
मुझसे पढ़ा
से
का
और दूध ।
–
भाव
–
है । गौण
जोडने
बनती है ।
करना
। ऐसा करने से
। उसके साथ काल,
से
, वचन और िलंग के
और
उदा – 1) राम ने रावण को मारा । राम से रावण मारा गया। 2) राम रावण को मारे गा । राम से रावण मारा जायेगा । 3) राम रावण को मारता है । राम से रावण मारा जाता । पहले
जोडना
दूसरे
‘जाना’
जाना
।
का
‘मारा’ भूतकािलक
‘मारे गा’
काल
तीसरे
उदा – मोहन
‘जायेगा’ जोडना
।
है ।
को भूतकािलक
(जाता) जोडना
से
के साथ ‘जाना’
काल है । इसिलए
काल
का
है । इसिलए ‘मारा’
।
‘मारा’ भूतकािलक
का भूतकािलक
बदलकर
बदलकर (मारा) उसके साथ
बन सकता है ।
उठता (
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
)
Page 42
School of Distance Education
मोहन से उठा
वीणा
जाता । - (
)
चलती । (
वीणा से चला
)
जाता । - (
)
UNIT – 19
या
अभी तक हमने
के बारे
आता है । इसिलए
या
बोधक ।
पढ़ िलया है । उनके
कहते
के बारे
चार
के होते
– 1)
िलंग, वचन,
का
और कारक के अनुसार
है
अब हम
बोधक 3)
2)
के दूसरे
बोधक 4)
UNIT – 20
– Adverb
उसे कहते
उदा - रमेश
इस
होती है ।
चलता है ।
है –
‘चलना’
है ‘
से
संयोजक –
कहते
वह है
।
जैसे – खूब पढ़ो ,
है ।
’
के तीन भेद है - 1) साधारण 2) संयोजक 3)
साधारण - साधारण
कहते
’ । इसिलए ‘
।
होता है
साधारण
से होता है
संयोजक
या
दौडो ।
का
।
जैसे – जहाँ तक हम चल सके वहाँ तक
योजना का
भेद के साथ होता है
से या
है ।
संयोजक से होता है ।
का
के
कहते
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
,
,
,
।
Page 43
जैसे – गेहूँ
खाओगे
School of Distance Education
....
कह तो लो ।
होता है
है
जैसे – वह
इसका
वे केवल गेहूँ
खाते
हो जाने से
का
और कुछ
खायेगा । इन
बदल जाता है ।
काम करे गा ।
यह है
जो काम उसे
है केवल वह
के आधार पर
करे गा और कुछ
के चार भेद होते
।
– 1) कालवाचक 2)
3)
4)
कालवाचक –
से समय, अविध तथा काल का बोध होता है
जैसे – काम को अभी पढ़ना
।
कहते
आजकल रोज़
होती है ।
कभी कभी
भी रात के समान लगता है ।
मोहन पढ़ाई
सदा
है ।
अभी, आजकल, कभी कभी, सदा,
कालवाचक
से
–
कहते
कालवाचक
।
के
,
है ।
का बोध होता है
उदा – जहाँ तक जा सके वहाँ तक जाओ ।
जाओ और वहाँ लेटो ।
घर के सामने एक
है ।
बाहर रोशनी भीतर अंधेरा ।
हाथ से मारते
जहाँ, वहाँ,
।
, सामने, बाहर, भीतर,
–
कहते
जैसे – उतना पढ़ो
चावल थोडा खाओ ।
खूब खाना
।
से
।
अिधकता-
का बोध होता है
हो ।
।
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 44
अपना,
School of Distance Education
, थोडा, खूब
।
वे
के होने का ढ़ं ग,
का पता िमलता है ।
जैसे – राहु ल धीरे धीरे चलता है ।
सीता मधुरतम गाती है ।
यथा हम
तथा िमलते
।
धीरे धीरे , मधुरतम, यथा-तथा
UNIT - 21
बोधक
बोधक
के साथ बनाते
उदा – धन के
है जो
।
या
के साथ आकर उनका
के
कोई काम न चलता ।
घर के नीचे एक तालाब है ।
के पास एक
भी है ।
, नीचे, पास
के अनुसार
क.
बोधक
बोधक के दो भेद होते
– ये
कारक
जैसे – दो
ऒर
भी आती है । जैसे का, के,
।
याँ भी आती है ।
इनसे पहले आया ।
राम का मकान मोहन के घर से परे
क.
2)
के बाद आते
कभी कभी अपादान कारक
‘से’, ‘परे ’
– 1)
या
उदा - घर के भीतर, घर के पीछे , घर
उदा –
है ।
।
अपादान कारक
– यह सं
तक राम
के
।
के साथ
आते
।
रहे गा ।
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 45
School of Distance Education
घडे भर पानी के िलए पाँच
दे ने
सूचक
‘तक’, ‘भर’
गे ।
।
UNIT - 22
( Conjunctions)
योजक या
दूसरे
वे
या
जो
से जोडते ,
या
न बतला कर एक
बोधक कहते
या
का
दो
या
जैसे – सीता और गीता अपने घर गयी ।
सीता और गीता को िमलानेवाला योजक
के तीन
1) संयोजक – कई
का मेल
उदा –
भेद
– 1) संयोजक 2)
का संयोग
और राम कल बंबई
जैसे – चाहे दे श
और वहाँ उनके साथ मोहन भी
3) भेदबोधक – दो
या
अथवा मानवीय
को
दो
,, मगर, वरन ्,
उदा – मुझे वहाँ जाना था,
ख.
इस
के
है ।
को भेदबोधक कहते
। ये कई
के होते
सूिचत करते
। जैसे –
के कारण जा न सका ।
, कारणवाचक और उपदे शमूलक –इसिलए, सो, अतः,
, इसिलए
,
जा न सका ।
– तो, जो – तो,
तुम कहते तो,
।
को पहचानना।
है ।
संकेतबोधक –
जैसे –
कहते
मं से पहले का िनषेध या
।
जैसे – राम समय पर आ न सका इसिलए
ग.
करनेवाले
से एक से भेद बतलानेवाले
–
,
।
का बोध कराएँ
सेवा करनी
क.
। इसके
है ।
‘या’, ‘अथवा’, ‘वा’, ‘चाहे ’
पर,
को संयोजक कहते
– जो
2)
।
3) भेदबोधक
करनेवाले
होता है ।
‘और’, ‘भी’ संयोजक
‘और’ है ।
,
,प
संकेतबोधक
है ।
जाता ।
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 46
घ.
, इस
School of Distance Education
– इन
के
पहली बात का और
है ।
जैसे – कोई भी समय पर
पहूँ चा यहाँ तक
के और दो
भेद होते
समानािधकरण –
समानािधकरण
जैसे –
के
धक कहते
माँ-बाप का
।
भी 10 बजे तक न आये ।
– 1) समानािधकरण 2)
समान पद के
, मगर
,
कहते
।
को
१.
२.
करणवाचक –
३.
उपदे शवाचक -
४.
संकेतवाचक –
को
जैसे –
।
, इसिलए
, जो,
।
।
- तो, जो-तो,
करनेवाले
।
-
–
को
हाय! अब
को
–
, जो
–
से जोडनेवाले
वह बीमार है ।
, याने, मानो
–
4)
।
आयेगी
के चार उपभेद होते
के हो, वे
।
–
जैसे – आज नौकरानी
जो एक
।
– इसिलए, अतः
4)
को जोडते
।
क – या, वा, अथवा, चाहे
– पर,
या
।
–
1) संयोजक – और, तथा, भी, एवं
3)
, याने, मानो, यहाँ तक
अजीब है ।
समानािधकरण के चार उपभेद होते
2)
होता है ।
से
के
, शोक,
-बोधक कहते
,
,
।
, घृणा
।
अरे ! आप कहाँ जा रहे ?
हे राम!
बोधक
के सात भेद
करो ।
को सूिचत करने के िलए
-
लाते
।
–
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 47
School of Distance Education
बोधक – वाह –वाह!,
1)
!, आहा!, शबाश!
-
2) शोक बोधक – आह!, ऊह!, हा-हा!,
बोधक – अहो!, ऒह!,
3)
4) अनुमोदन बोधक –
–
!
!, हाँ-हाँ!,
!, वाह!, शबाश!
बोधक – िछ!, हट!, अरे !, िधक् !
5)
6)
–
!, बहु त
!,
!, हाँ!, जी हाँ!
7) संबोधन बोधक – अरे !, रे !, अपी!, अहो!
कभी कभी
,
,
जैसे – भगवान,
, लो, चुप,
कभी कभी
जब
या
हो जाते
।
भी
होते
। जैसे –
के समान
मनोभाव को
कराते ।
हाय हाय
मचा रखी है ?
सब लोग
-
हाय – हाय,
-
जैसे –
भी
,
न हो !, बहु त
होते
हो गया !
!,
तब वह
होता ।
तब वे
पुकार उठे ।
के समान है । इसिलए यह
बोधक
है ।
UNIT - 23
,
के
पर
से
बनता है , एक या अिधक
है । कहने या िलखनेवाले का पूरा भाव
जैसे – मोहन
राम
इन
जायेगा।
के भेद,
से
हो जाय तो उसे
के
,
से
बनता है । एक से अिधक
कहते
बनाने का िनयम,
से
बनता
पढ़ता है ।
िलखता है ।
से लेखक का पूरा भाव
होता है ।
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 48
– कुछ
होता ।
बनी रहे
School of Distance Education
ऐसे होते
के
कहते
समूह को
।
दो
और
के होते
के रहने पर भी कहने या िलखनेवाले का पूरा आशय
और
– 1)
के रहने पर भी जो कुछ सुनने
2)
के अधीन होते
उदा – राम ने कहा था वह कल पाठशाला
है । इसे
इस
राम ने कहा था और
रखनेवाले
है और कल पाठशाला
भी कहते
को
एक भावना होती है ।
जैसे –
जायेगा ।
कुछ थोडा सा भाव
जायेगा
करनेवाले
त
को
कहते
तरह पढ़ना ।
चलना ।
इन
होता है ।
के मु
–(
दो भाग होते
कुछ
के
)
जैसे – मेरा
का
जो कुछ
मेरा
है और
होता है उसे
से भरा हु आ है
है । इसिलए
(
है ।
इस
चार भाग हु ए – 1)
चार
क.
होता है उसे
कहते
कहते
।
से भरा हु आ है ।
है , शेष उसका
का
और 2)
)
–(
उस
। 1)
भेद
) और मेरा
(
) 2)
है । मेरा
का
का
–
कहते
। हु आ है
3)
(
है और मेरा
) 4)
–
– राम गया ।
ख.
– वह कह चुका ।
ग.
–
फूल
के भेद
के अनुसार
के आठ भेद होते
–
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
Page 49
School of Distance Education
– इस
1.
से
जैसे –
भारत
बात का होना सूिचत होता है ।
राजधानी है ।
िनषेधवाचक –
2.
का अभाव
जैसे –
के
– इस
3.
जैसे -
कुछ भी
से
पा सकते ।
सूचना होती है ।
तुम कल कालेज
– इससे
4.
होता है ।
जैसे –
और उपदे श
,
का बोध होता है ।
तरह पढ़ो ।
का भजन करो ।
– इससे
5.
लाख
िमले ।
– इससे
6.
या
जैसे –
सूचना होती है ।
।
अंक पा
7.
जैसे – आज
।
या संभावना
–
8.
का भाव सूिचत होता है । जैसे – हाय राम को एक
,
सूचना होती है ।
होगी ।
सकेत
जैसे –
सूचना होती है ।
हो तो ...
राम
काम करे गा ।
रचना के आधार पर
रचना के आधार पर
।
3)
१.
सरल
एक
–
जैसे – मोहन िलखता है । (
राम
के तीन भेद होते
मोहन
- 1) सरल या साधारण
और एक
होता है उसे सरल
और िलखता है
मेज़ पर रखी है । (
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
, 2)
और
कहते
धेय है )
है और रखी है
है )
Page 50
’ और ‘मेज़ पर’ केवल
‘राम
२.
School of Distance Education
और
हो उसे
जैसे – जो
कहते
करे गा –
1)
के
– 1)
2)
जैसे – मेरा
3)
का
–
कहते
है
तुमने
तुमने
के
को मारा –
कहते
जैसे – ये
है ।
उसी
जायेगा जो
से डरते
उसी, जो
के
को
।
उसी छा को
पर होता है , उसे
को मारा, यह सच है ।
– जब कोई
2)
पर आया है । इसिलए यह
के
का काम दे ता है तब उसे
रहे गा ।
जो खूब मारता है ।
है ।
– जो
3)
जैसे –
के
का काम दे ता है उसे
कहते
करता है उतना फल िमलता है ।
जब तुम कहोगे,
सब कुछ
।
जब,
है ।
–
हो, उसे
जैसे – वह
कहते
दो या दो से अिधक
तरह पढ़ता था,
एक दूसरे पर
है ।
कर चुका ।(सरल
योजक
जुडे हो,
न
तो पास होता ।
दो या दो से अिधक सरल अथवा
जैसे -
एक या
है ।
तीन
३.
हो और उसके
है ।
उसे सफलता िमलेगी -
है ।
एक
करे गा उसे सफलता िमलेगी ।
जो
इस
है ।
उसे कहते
अिधक
का
न होता है । इसिलए ये
)
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
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School of Distance Education
हम
कर चुके तो वे आए ।(
)
और मेरा मन ठं ड हो गया । (
चार
1)
के होते
संयोजक -
एक
2)
िमलता है और
से
बढ़ता है ,
सूचक –
से
से
दो
से एक को
या राम को
जेसे – तुम आगे पढ़ो
।
योजक
का
,
का
को संकुिचत
पहले
बढ़ते रहे
या
एक
।
ऐसे
का दूसरे
होता है तो
एक
बार िलखा या कहा
दे ता है ।
को
कहते
बुखार सब
।
फैलाता है ।
।
हमने होना था, पर
एक
आता हूँ ।
कहते
जैसे – आजकल सुना है बरसात के मौसम
रोज़
आप
और मन को भी
जो आसानी से समझकर छोड दे ते
कहते
होता है ।
आते ।
न बुलाया
को
जैसे –
दूसरे का
।
मुझे
जाता है । ऐसे
।
पैसा दूँगा ।
बीच
जब
रहता है ।
करना
एक
मुझे पैसा िमला इसिलए
कभी कभी
का
भरता है ।
अथवा हे तुसच
ू क–
जैसे –
होता है ।
होता ।
जैसे – मुझे
4)
।
जुडा रहता है ।
का एक दूसरे से भेद या
वह खूब खाता पर बडा
3)
सूचक,
,
उसके साथ गया ।
–
जैसे –
– संयोजक,
दूसरे के साथ संयोजक
जैसे – वह आया और
से
)
है । दूसरे
कर सकते
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
लोग से होना
के
।
बदल
, पर
होता है ।
जा सकता है । मूल
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क.
सरल
से
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–
उदा – सरल
- राम ने मोहन का
- राम ने उस
ख.
को
जो मोहन का था ।
से सरल
– उसने कहा
सरल
ग.
।
पापी हूँ ।
– उसने
सरल
को पापी बताया ।
से
सरल
–
होने पर
-
हु आ और
घ.
लोग खेत
जाने लगे ।
खेत
जाने लगे ।
से िनषेध वाचक तथा
– मोहन सोहन से बडा है ।
िनषेध वाचक - मोहन सोहन से बडा
।
मोहन सोहन से बडा है ?
–
UNIT – 24
और मुहावरे
कहते
वे
भाषा
जो
। बोलचाल
गई हो
जैसे – मेरे पेट
का अपना
बहु त आनेवाला ऐसा बँधा
चूहे कूद रहे
वह इतना चालाक है
उनके
‘पेट
से
।
बात
करते ,
मुहावरा
और
अलंकृत
।
कमर टू ट गई है ।
अपने मािलक को
पर नचाता है ।
चूहे कूद रहे ’, ‘कमर टू ट गई है ’, ‘
है । यहाँ ‘पेट
का न रहना, तथा ‘
कहलाते
कोई अनुभव
या कहावत कहाता है ।
जब से उनका लड़का मरा है
इन
न बता कर कुछ
चूहे कूदने’ का
पर नचाने’ का
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
है
पर नचाता है ’ , इन
भूख लगना, ‘कमर टू टने’ का
है अपने वश
रखना । अतः ये
है
का
या
मुहावरे
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School of Distance Education
इसी
जब कोई आदमी काम करना न जानता हो परं तु अपने
को िछपाने के िलए बहाने बनावे
तब कहा जाता है – नाच न जाने आँगन टे ढ़ा ।
जब कोई आदमी अनेक
तक नली
ये
रखो तो भी
बंधे हु ए
।
और
और
बहु त पसंद
खाकर भी अपनी
जाती है , और
अनुभव
के
आदत न छोड़े तब कहा जाता है
तथा अलंकृत भाषा
से भाषा
कहे गये , अतः ये
तथा
,
कथन बड़ा
दुम सौ
होता है ।
आती है ।मुहावरे दार भाषा
मुहावरे
अंग-अंग
-
अँगूठा
-
अंधे
-
अंधेरा घर का उजाला
-
के घोड़े दौड़ाना
-
पर
-
पड़ना
अपना
सीधा करना
बहु त
होना
चीज़ को दे ने से
करना।
सहारा
एकलौता बेटा
सोचना
समझ न पाना
करना
–
आँख उठाना
-
आँख खुलाना
-
होश आना
चार होना
-
आँख से आँख िमलाना
नीची होना
-
होना
पीली करना
-
नाराज़ होना
आकाश पाताल का
–
बहु त भेद
आग
घी डालना
-
आसमान िसर पर उठाना
-
बहु त कोलाहल करना
बजाना
-
करना
ईद का चाँद होना
-
िचरकाल पीछे
उँ गली पर नचाना
-
वश
गंगा बहाना
-
से
के साथ
नीयत से दे खना
बढ़ाना
दे ना
रखना
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
बात करना
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कमर टू ट जाना
-
कान भरना
-
चुगली करना
-
बहु त
-
बरबाद होना
गुड़ गोबर कर दे ना
-
काम
घर
-
मौत मरना
खाक उड़ाना, खाक
िमलाना
गंगा
िनराश हो जाना
तरह से मरना
दे ना
दौड़-धूप के
घाट घाट का पानी पीना
-
चाँद पर थूकना
-
चार
-
थोड़े
का दूध याद आना
-
सब सुख भूल जाना,
जमीन पर पैर न पड़ना
-
बहु त अिभमान होना
जल भुन कर कोयला होना
-
टस से मस न होना
-
टाँग अड़ाना
-
बाधा डालना
टोपी उछालना
-
िनरादर करना
चाँदनी
ितनका
पकड़ना
जहाँ तहाँ का अनुभव करना
करना और फलतः
का सुख
भी न
माँगना
-
बात बढ़ाना
थूक कर चाटना
-
वचन दे कर
दम तोडना
जाना
करना
-
मर जाना
दूना रात चौगुना होना
-
खूब
बाल सफेद करना
-
लगाना
-
बात को बढ़ा कर कहना
नाक कटना
-
बदनामी होना
नाक चढ़ाना
-
घृणा करना
नीला पीला होना
-
धूप
नमक
संकट आ पड़ना
पागल हो जाना
ितन का ताड़ करना
तले उँ गली दबाना
होना
होना
अनुभव
PRACTICAL GRAMMAR (APPLIED GRAMMAR)
आयु
दे ना
आना
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नौ-दो
होना
उछालना
-
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भाग जाना
करना
-
बात
-
,
परदा डालना
-
िछपाना
पहाड टू ट पड़ना
-
पेट
-
चूहे कूदना
तले से ज़मीन िनकल जाना फूँक-फूँक कर कदम रखना
-
बगुला भगत
-
उछलना
आना
खूब भूख लगना
होश उड़ जाना
सोच-समझ कर काम करना
-
खूब खुश होना
-
काम
बात का धनी
-
वायदे का
बाल
-
बाज़ार
पर होना
खाल उतारना
पर होना
करना
बाल पकना
-
बूढ़ा होजाना, अनुभव
बाल बाल बचना
-
हािन पहूँ चने
बेगार टालना
-
बोली मारना
-
भनक पड़ना
-
भाड़
मारना
चूस
पर
मारना
करना
जरा- सी कसर रह जाना
लगाकर काम न करना
के
कहना
खबर दे जाना
समय गँवाना
-
बेकार
-
बहु त कंजूस
-
का
नकल करना
मगज चाटना
-
तंग करना
माथा ठनकना
-
आशंका होना
मारा मारा
-
होना
मूँह-तोड़ जवाब दे ना
-
पूरा-पूरा जवाब दे ना
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मूँह फक हो जाना
-
मूँह
-
खाने को ललचाना
-
अिधक
पानी भर आना
मूँह लगाना
गरम करना
चेहरे का रं ग उतर जाना
दे दे ना
-
दे ना
राई का पहाड़ बनाना
-
बात को बढ़ाकर कहना
रात-
-
हमेशा
लंका कांड होना
-
खूब मारपीट होना
लंबी-चौ
-
हाँकना
करना
होना
-
होना
लहू के घूँट पीना
-
करना
लहू पसीना एक करना
-
लोहे के चना चबाना
-
काम करना
शैतान के कान कतरना
-
बहु त चालाक होना
-
करना
करना
बाग
-
समझ पर
पड़ना
बहु त
करना
बहकाना
-
होना
-
जमाना
िसतारा चमकना
-
उदय होना
िसर पर खून सवार होना
-
जान लेने पर
िसर पर हाथ धरना
-
सहायता करना
सौ बात
-
िनचोड़
-
फूँक डालना
बैठना
एक बात
करना
हँ सी उड़ाना
-
हाथ
-
मैल
हाथ पर हाथ धरे बैठना
-
हाथ पसारना
-
होना
करना
बैठना
माँगना
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हाथ-पैर मारना
-
हाथ साफ करना
-
पानी
करना
-
अंत गता सो मता
-
काने राजा
-
गाँठ के पूरे
आप मरे जग परलै
चोर कोतवाल को डाँट
ऊँची दुकान
पकवान
करना
बेईमानी से ठगना
करना
-
होश उड़ना
आँख के
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-
भय या आशंका से दुखी होना
वह
थोड़ा पढ़े िलखे का मान होता है
, पर धनवान
है तो संसार है
-
अपराध करके
को डाँटना
काम करना
-
एक अनार सौ बीमार
-
जब एक चीज़ के बहु त से
एक पंथ दो काज
-
एक काम करने से दो
काला
घर का
बराबर
लंका ढ़ाहे
तब कहा जाता है
का लाभ होना
फूट से घर नाश होता है
-
िचराग तले अंधेरा
-
चोर
-
पापी
-
सावधान रहने से लाभ होता है
-
बलवान
ितनका
जागे सो पावे सोवे तो खोवे
पास
ऐसे
घटना के होने पर भी उसका
पर बुराई का होना जहाँ उसके रोकने का
न होना या
हो
डर जाता है
दे श
का दबदबा रहता है
जैसा दे श वैसा भेस
-
रहे वैसी
जैसी करनी वैसी भरनी
-
तन को कपड़ा न पेट को
-
बहु त
थोथा चना बाजे घना
-
काम न करनेवाला
दाम बनाये काम
-
पैसे से सब काम हो जाते
करनी
फल िमलता है
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बकवास बहु त करता है
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धोबी का
घर का न घाट का -
रहना मगर से बैर
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जो एक
दूसरे
पर जमकर काम न करे , कभी एक
और
सफल न हो, उसे कहा जाता है ।
-
अधीन होकर रहे और उसी से बैर करे तो गुज़ारा
न रहे गा बाँस न बाजेगी
-
नुकसान हो उसका नाश
नाच न जाने आँगन टे ढ़ा
-
काम करने
नीम
-
अधूरा
नौ नगद न तेरह उधार
-
उधार सौदा दे ना
मान न मान
तेरा मेहमान
-
जूती िमयाँ के िसर
-
िमयाँ
जान का खतरा
कर दे ना
न होने पर दूसरे को दोष दे ना ।
हािनकारक होता है
गले पड़ना
से उसी
सभी
अथवा
हािन करना
-
हाथ कंगन को आरसी
-
के िलए और
हाथी के दाँत खाने के और
के और
-
कहना कुछ और करना कुछ और
-
होनहार के
के होत चीकने पात
चलता है ।
है ।
सौ सयाने एक मत
होनहार
लगे और कभी
एक सलाह होती है
।
पहले
से
जाते
**********
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