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िनणर्य सुरिक्षत रखा गया- नव बर 27 2013 2014

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िनणर्य सुरिक्षत रखा गया- नव बर 27 2013 2014
नई िद ली के िद ली उ च
यायालय म िनणर्य सरु िक्षत रखा गया- नव बर 27,2013 िनणर्य घोिषत िकया गयाः जनवरी 06,2014 ड
यूपी (सी) सं. 3673/2010 भारत की एकीकृत टे लीकाम सेवा प्रदाताओं के संघ एवं अ य
........ यािचकाक तार् प्रितिनिध व िकया गयाः
ी रामजी
वकील,
ीिनवासन, विर ठ ी ल मीश कामथ और ी उमंग गु ता वकील के साथ यओ
ू आई और अ य
प्रितिनिध व िकया गया-
बनाम ........प्रितवादी सु ी वनेसा िसंह एवं सु ी नेहा िसहं , वकील के साथ डीओटी के िलए
सु ी मनीषा धीर, वकील सीएजी के
गौरं ग कांत, के वकील के साथ िलए
ी
ी
अमन लेखी, व. वकील यओ
ू आई के िलए
ी नीरज चौधरी और सु ी रव योत
िसंह, वकील के साथ
ी राजीव मेहरा,
एएसजी ट्राई के िलए
ी कुमार रं जन
िम ा, वकील के साथ सु ी संगीता िसंह,
वकील ड
यूपी (सी) सं. 3679/2010 से युलर ओपरे टर एसोिसएशन आफ इंिडया एवं अ य
प्रितिनिध व िकया गया-
............यािचकाक तार् ी गोपाल जैन,
ी अिभषेक मनु िसंघवी, विर ठ वकील के साथ बनाम दरू संचार िवभाग एवं अ य
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
........प्रितवादी प ृ ठ 1 से 32 प्रितिनिध व िकया गया: डीओटी के िलए सु ी वनेसा िसंह और सु ी नेहा िसंह वकील के साथ सु ी
मनीषा धीर वकील, यओ
ू आई के िलए
ी
नीरज चौधरी एवं सु ी रव योत िसंह,
वकील के साथ
ट्राई के िलए
ी राजीव मेहरा और
ी कुमार रं जन िम ा, के
साथ वकील सु ी संगीता िसंह, वकील कोरमः माननीय
ी प्रदीप नंदराजोग,
माननीय
ी वी, कामे वर राव,
प्रदीप नंदराजोग,
1.
यायाधीश यायाधीश यायाधीश यह अब अ छी तरह से मा य है िक दस
ू रे िव व युद्ध के बाद, कुछ लोग
मानते है िक अमरीका की आिथर्क नीितय की उदार िवशेषताओं
वारा प्रभािवत होकर
एक नया आिथर्क आदे श और एक नई तरह का रा य उभरा, िजसने शासन म
यवसायीकरण,
वैज्ञािनक
और
तकनीकी
िनपण
ु ता,
प्रशासिनक
प्रित पधार्
िन पक्षता के मू य और आदश को प्रो साहन िदया। पिरवतर्न रोइगं से
और
टीिरंग पर
था। उदारीकरण का युग पूरे ग्लोब म उभरा, कुछ दे श ने उसे दस
ू रे िव व युद्ध के बाद
तुर त अपना िलया और कुछ ने धीरे धीरे और अिन छा से, यह समझते हुए िक
वैि वक अथर् यव था म नगरपािलका शासन मौजद
ू ा वैि वक सोच के साथ साथ चलनी
चािहए। कई लोग मानते है (हमारे मत से गलत) िक िनयामक प्रणाली रोइगं से
टीिरंग को पिरवतर्न से नए प्रकार के शासन के पिरणाम व प थी। 2.
पूवर् उदारीकरण युग म भी अिधकांश बीसवीं सदी म िनयामक के दो तरीके
मह वपूणर् उ यम को शािसत करते थे (i) िनजी
िविनयमन मख्
ु य
प से
वािम व वाले उ यम का
प से क पनी कानून के मा यम से िकया जाता था; और (ii) मख्
ु य
उ योग और उपयोिगताएं िविभ न प्रकार के सावर्जिनक
वािम व के मा यम से
शािसत थी, िजनम से रा ट्रीयकृत िनगम सबसे अिधक मह वपण
ू र् थे। िनजीकरण
प ट
प से इसके पतन की ओर इशारा कर रहा था। 3.
यिद िविनयम ऐितहािसक
प म पहले से िव यमान थे तो क पनी कानून के
प म िविनयम के शासन के िनमार्ण की क्या आव यकता थी। प्र येक क पनी के
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 2 से 32 लेख की सनदी लेखाकार
वारा अिनवायर् लेखापरीक्षा आव यक है जो क पनी का
कमीर् न हो और केवल सनदी लेखाकार सं थान को जवाबदे ह हो। 4.
उ तर पार पािरक िनगम िविनयम की सरलता से िनजी उपयोिगताओं के
अधीन अ तगर् त सम याओं को समझने के
वारा आगे आना चािहए और िनगम
उ यम के िविनयम म क पनी कानन
ू की भिू मका की
के
5.
वारा शु
थापना म कमी को समझने
करने की आव यकता है । क पनी कानून को तीन प्र न के उ तर दे ने थेः (i) कानून
वािमय और वह
जो िनगम को चलाने का दै िनक कायर् करते ह के बीच उिचत संबंध क्या है ? प्र न
आधिु नक िनगम के बहुत मह वपण
ू र् संरचना मक िवशेषता से उदभत
ू हुआ िनयंत्रण से
वािम व के पथ
ृ क्करण िजसे यवसाियक जीवनकाल के के द्रीय िवशेषता के प म
मा यता दी गई है । (ii) कानूनी
वािम व की आगे कौन से दावे, जो शासकीय िनगम
म कुछ कहने का हक दे ते ह और (iii) िनगम एवं लोकतांित्रक रा य के बीच उपयुक्त
संबंध क्या है ? 6.
क पनी कानन
ू तीन प्र न का संतोषजनक उ तर दे ने म असमथर् था और
इस प्रकार वतर्मान क पनी कानन
के अनुसार क पनी िविनयम के प्रचिलत ढं ग म
ू
सभी िनजीकृत पािटर् य को सि मिलत करना संभव नही था। 7.
क पनी कानन
ू तीन प्र न का ठोस उ तर उपल ध नही करा सका, इसका
कारण था िक क पनी के मामले एक सं था के
के
प म पणधारक से संबिं धत मामल
प म माने गए थे एवं िनदे शक (क पनी के एजट के
प म) केवल पणधारक को
जवाबदे ह थे। क पनी एक िनजी स व थी तथा यह कहने की हकदार थी िक इसका
शासन स पि त अिधकार वाल के िलए आरिक्षत था िजसे इिक्वटी म धािरता के
म वैिधक
वािम व
यवसाियक प्रब धक
प
वारा धोिषत िकया गया था। िन संदेह, क पिनय के बोडर् म
के प्रवेश के साथ
वािम व एवं िनयंत्रण के पथ
ृ क्करण म
िनणार्यक पिरवतर्न आया था। पर त,ु िजस पर क पनी िविध
वारा
यान नहीं िदया
गया था, वह था िक अपने शेयरधारक की तुलना म एक पथ
ृ क यिक्त व के
प म
क पनी का कानन
ू ी स व यह मानने म िवफल हुआ था िक शेयरधारक को कुछ
िवशेषािधकार प्रदान िकये गए थे, िजनम से सबसे मह वपण
ू र् – िनगमीकरण का
िवशेषािधकार – सीिमत उ तरदािय व था, ऐसा िवशेषािधकार जो अ य आिथर्क
क तार्ओं को नहीं िदया गया था। जबिक,
भागीदार के
यवसाय करने वाला एक
यिक्त अथवा
प म यवसाय करने वाले दो अथवा अिधक यिक्त अ य पक्ष के प्रित
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 3 से 32 यिक्तगत
प से उ तरदायी थे तथा अ य पक्ष को दे य के िनपटान म उनकी
यिक्तगत स पि तयॉ ं ज त की जा सकती थीं, तथािप ऐसा शेयरधारक की स पितय
के िव द्ध नहीं िकया जा सकता था। क पनी िविध ने इसकी अनदे खी की थी िक
क पिनय तथा इनके शेयरधारक को िवशेषािधकार रा य
क्य िक रा य
वारा प्रदान िकये गए थे,
वारा िविध का स पादन िकया गया था। इसने कोई प्रितदान नहीं
ं
मॉगा,
क्य िक सशतर् अिधकार अथार्त िवशेषािधकार िनिगमत क त य का पालन करने
अथवा
यापक जनिहत म िनगिमत
यवहार पर कुछ प्रितब ध
को मानने के
पार पिरक दािय व पर थे। संिवदाऍ प्रदान करने म सम या को सल
ु झाने के िलए,
िज ह कुछ उदारता कहत है , रा य ने कुछ शत रखी िज ह वह
ृ
िनगम
वारा ही परू ा
िकया जा सकता था। एकािधकार‐रोधी- कानन
से कोई प्रभाव नहीं पड़ा। सावर्जिनक
ू
िनगम के प्रभु व वाले एक रा ट्रीयकृत क्षेत्र का िनमार्ण करना भी, िजससे एक अ तर
लाने की आशा थी, िवफल हो गया था। िनराशाजनक
लघुअविध राजनीितक दबाव से
प से, रा ट्रीय क्षेत्र की सरकार
यापार योजनाओं को आकार दे ने म मंित्रय
वारा
परोक्ष ह तक्षेप के कारण सावर्जिनक जवाबदे िहता के अपवंचन के कारण अपने प्रयास
म िवफल हुई थी। 8.
लोकतंत्र प्रणाली का एक अवगण
ु कट्टरपंथी बहुसंख्यक राजनीित है िजसका
पिरणाम कट्टरपंथी राजनीितक िनयंत्रण होता है । नीितयॉ ं पाटीर् संघषर् तथा अनभ
ु ागीय
िहत
वारा िनधार्िरत की जाती है । शासक वगर् सं थागत
यव थाओं के िवषय म
पारदिशर्ता की कमी सिु नि चत करता है । शासन प्रणाली म संकट था। संकट के दो
पहलू थेः (i) नीित की िवफलता के साथ आिथर्क नीित की िवषय सच
ू ी; तथा (ii) शासन
प्रणाली का अपना संकट। जैसा िक िव वान लेखक माकर्वै ड डी ने जोनाथन केप,
ल दन
वारा प्रकािशत ‘िद अनप्री सी लड सोसाइटी’
यू डीमा
स ए ड ओ ड
पालीिटक्स 1988 (पीपी 175 एवं 206) ने इसे ‘क्लब सरकार’ का पिरणाम बताया
था। जैसे कोई भी पहले से यह नही बता सकता िक कौन क्लब की सद यता प्रा त
करे गा, जैसे कोई भी यह नही बता सकता िक क्य कुछ क्लब क्लब पिरसर म ब च
को अनम
ु त करते ह तथा कुछ नहीं करते तथा कुछ एक िनधार्िरत अविध के िलए
करते है ः जैसे कोई यह नहीं बता सकता िक क्य कुछ क्लब एक िविश ट ड्रैसकोड
िनधार्िरत करते ह तथा कुछ नहीं करते; क्लब सरकार की भी समान िवशेषताऍ थीं। 9.
अतः क्लब सरकार की तीन आ चयर्जनक िवशेषताऍ थीः (i) अनौपचािरकता;
(ii) अ तरं िगय
वारा अपनी अ तरं गी ि थित के कारण प्रा त की गई जानकारी पर
िव वास करना; (iii) सावर्जिनक संवीक्षा तथा जवाबदे िहता से आवरण। ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 4 से 32 10.
यिद नये माडल को सफल होना था तो उभर कर आई नई आिथर्क
तथा नये प्रकार के रा य को
यव था
यवसाियकता के मू य तथा आदश, वैज्ञािनक तथा
तकनीकी िवशेषज्ञता, शासन म प्रशासिनक दक्षता तथा तट थता को प्रो सािहत करना
था। 11.
यह ठीक ही कहा गया है िक संकट आने वाले कल के िक्षितज तथा
पिरक पना के साथ बीते हुए कल की किमय एवं बरु ाईय के बीच संबध
ं को िवकिसत
करता है । अतः, शासन यव था के संकट को भत
ू काल की िवकासहीनता तथा भिव य
के नवप्रवतर्न के बीच संबध
ं को िवकिसत करना पड़ा तथा इसके िलए क्लब प्रणाली के
िवनाश के बारे म सोचने के िलए आव यक ज्ञान तथा बनाई जाने वाली आव यक
नीित प्रितिक्रया के बारे म सोचने के िलए आव यक ज्ञान की एक समझ की
आव यकता होगी। िविनयामक रा य तथा िविनयामक कानन
ू जो इस पहलू पर
नहीं दे त, उनका कोई भी िव लेषण हमारे िवचार से एक अधरू ा िव लेषण है । 12.
यान
क्लब सरकार प्रणाली की िवचारधारा उन आशंकाओं का पिरणाम थी िजनसे
शासक वगर् का आमना सामना हुआ था। ये आशंकाऍ औपचािरक लोकतंत्र तथा सशक्त
कामकाजी वग ः लोकतांित्रक राजनीितय के नये संसार वारा खड़ी की गई थी। इसकी
प्रितिक्रया कुलीन तंत्र की
ढ़ता तथा शासन यव थाओं म गोपनीयता के
अतः, नये प्रकार के रा य को ‘चालन’ पर नहीं अिपतु ‘पिरचालन’ पर
प म हुई।
यान केि द्रत
करना था- अथार्त व तओ
के बजाय सरकार के िनदश के बारे
ु ं एवं सेवाओं की आपितर्ं
ू
मे रणनीितक िनणर्य लेने थे। 13.
उदारीकरण तथा िनजीकरण को भी सावर्जिनक क्षेत्र के सध
ु ार के
प म
िनजी तथा सावर्जिनक के बीच सीमाओं को पन
ु ः पिरभािषत करना था। नई आिथर्क
यव था को छह आयाम के साथ उ नत होना थाः (i) िनजीकरण, (ii) बाजारीकरण,
(iii) िवके द्रीकरण, (iv) उ पादन अनक
ु ू लन, (v) गण
ु व ता प्रणाली,तथा (vi) कायार् वयन
की प्रबलता। 14.
िनयंत्रक को शू य भरना था। 15.
नये िनयंत्रक रा य को न केवल आिथर्क नीितय के संकट का बि क
वयं
शासन की प्रणाली के संकट का सामना भी करना था। इसे क्लब सरकार के खंडहर पर
सं थाओं का पन
ु ः िनमार्ण करना था। इसम क्लब सरकार की मख्
ु य िवशेषताओं का
थान लेना शािमल था। ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 5 से 32 16.
क्लब सरकार की तीन िवशेषताओं: (i) अनौपचािरकता; (ii) अंतरं िगय
वारा
अपनी अंतरं गी ि थित के कारण प्रा त की गई जानकारी पर भरोसा करना; तथा (iii)
सावर्जिनक
संवीक्षा
औपचािरकता;
का प्रावधान;
था। 17.
तथा
जवाबदे िहता
से
आवरण,
को
(i)
मानकीकरण
तथा
(ii) अतंरिगय तथा बाहरी यिक्तय दोन को सल
ु भ यवि थत सच
ू ना
तथा (iii) िनयंत्रण तंत्र तथा सावर्जिनक िरपोिटर्ं ग को सद्र
ु ढ़ता से बदलना
अतः िनगरानी की मह वाकांक्षी प्रणािलय म लेखापरीक्षा का िव तारण नये
िनयंत्रक रा य के िवकास का अप्र यािशत पिरणाम नहीं है । वे इसके अि त व का
के द्र है क्य िक वे क्लब सरकार के िवनाश की मख्
ु य अनुिक्रया ह। वा तव म,
कुलीनतंत्र और गु त िनयम को परा त नहीं िकया जा सकता जब तक अद नी सत्र
का ज्ञान, सभी को उपल ध, सावर्जिनक ज्ञान म पिरवितर्त न हो जाये। 18.
िवशेष तौर पर िनयम के अधीन सं थान – बड़े कॉरपोरशन के पास उपाय की
युिक्त िव या के काफी
ोत होते ह। पिरणाम यह है िक, िनयम के मह वपूणर् क्षेत्र म
िनयामक और िविनयिमत के बीच बुिद्धमता की लड़ाई िनरं तर जारी रहती है, पूणर्
प
से अनुपालन से बचने या केवल मौिलक अनुपालन करने के उ े य से; िजसम से
सव तम द तावेज कॉरपोरे ट कर
़
जुडे होते ह। 19.
यव था और िव तीय बाजार के िनयम के क्षेत्र से
़
केवल एक इ छा िक बडे कॉरपोरे ट यह महसस
ू कर िक बुिद्धमता की लड़ाई
प्रितकूलता उ प न करती है : अनपेिक्षत पिरणाम की पण
ू र् िविवधता, जो बदले म,
िनयम
के उ े य को िवफल करती है । उपाय और प्रितकूलता आदे श म गहनता
उ प न करती है और इसका मतलब िक जो जैसा है वैसा ही रहता है । 20.
उसके साथ-साथ, जो िज मेदारी (िनयामक के
प म) मांगते है को यह भी
समझना चािहये िक उनकी सफलता का सव च अवसर, िनयंित्रत करने वाल के प्रित
िवनम्र और मैत्रीपण
ू र्
यवहार करना होगा, और उनके िदमाग पर प्रभाव डालना िक
िनयामक के दौरे का उ े य उनकी सहायता करना है और िशकायत के िलये आधार
बनाना नहीं। िज मेदारी मांगने वाल को िनरीक्षण के िलये मैत्रीपूणर् सलाहकार का
नजिरया अपनाना चािहये; जो िजनसे वो िमलने जा रहा है से सही करने के इ छुक
कुलीन यिक्त की तरह बतार्व कर और न िक गलितयां ढुंढने और इन सब म गलती
िनकालने के इ छुक संिदग्ध प्रित वंदी के नजिरये से। ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 6 से 32 21.
‘िरस क यन
ू ’ का िसद्धांत दावा करता है िक कुछ चीज मानवता के िलये
समान है - वायु, जल आिद, इसिलये, इन संसाधन का अिधग्रहण लोग म िव वास के
प्रित मख्
ु य
प से रा य के साथ िनिहत ह। िरस क यून िनजी िनयंत्रण से हटा िदया
गया था और ट्र टी अथार्त रा य को संसाधन की संरक्षा का क तर् य िदया जाता था
इस तरीके से जो उ ह सप
ु ािरभािषत सावर्जिनक उ े य के िलये उपल ध कराता है ।
भारत के संिवधान का अनु छे द 3(बी) रा य को िनदश दे ता है िक समद
ु ाय के सामग्री
संसाधन से संबंिधत उसकी नीितय , को इस तरह िनदिशत िकया गया है िक यह
संसाधन साझे िहत की सहायता के िलये सव च
प से िवतिरत ह । (2012) 3
एससीसी 1 लोक िहत मक
ु दम के िलये के द्र बनाम यओ
ू आई म िरप ट िकये गये
िनणर्य के पैराग्राफ 75 और 85 म उ चतम
यायालय ने दे खा:- ‘’75.
रा य को प्राकृितक संसाधन िवतरण करने की शिक्त होती है । तथािप,
चँिू क वे सावर्जिनक संपि त/रा ट्रीय पिरसंपि त शािमल ह, जो प्राकृितक
संसाधन के िवतरण के समय रा य समानता और लोक
यास के िसद्धांत के
साथ तालमेल करके कायर् करने के िलये बा य ह और यह सिु नि चत करने
के िलये िक कोई कायर्वाही नहीं की जाये जो लोक
यास के िलये हािनकारक
हो। िकसी भी रा य की कायर्वाही की तरह, प्राकृितक संसाधन के िवतरण के
प्र येक तर पर संिवधानवाद प्रकट होना चािहये। संिवधान के अनु छे द 39
(बी) म यह िनधार्िरत है िक समद
ु ाय के भौितक संसाधन का
वािम व और
िनयंत्रण ऐसे िवतिरत करना चािहये तािक साझा िहत म अिधक विृ द्ध हो
लेिकन सामा य
प से प्राकृितक संसाधन और उनकी सरु क्षा के िलये परे खा
पिरभािषत करने के िलये कोई भी यापक कानन
ू नहीं बनाये गये ह। िन:संदेह
ही संसद और रा य िवधानमंडल
वारा लागू पयार्वरण कानन
ू िवशेष प्राकृितक
संसाधन जैसे वन, वाय,ु जल, तटीय क्षेत्र आिद से संबिं धत ह। x
x
x 85.
चँिू क प्राकृितक संसाधन सावर्जिनक व तु ह, समानता का िसद्धांत, जो
याय और िन पक्षता की धारणा से आता है , को प्राकृितक संसाधन के
िवतरण के िलये वा तिवक तंत्र िनधार्िरत करने म रा य का मागर्दशर्न करना
चािहये। इस संबंध म, समानता के िसद्धांत के दो पहलू ह: पहला, यह रा य
के अिधकार और क तर् य को िनयंित्रत करता है साथ ही उसके लोग को भी
और मांग करता है िक लोग को प्राकृितक संसाधन और उसके उ पाद का
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 7 से 32 समान अनुप्रयोग प्रदान िकया जाये और यह िक उ ह िनजी क्षेत्र म संसाधन
के
थानांतरण के िलये पयार् त
प से मआ
ू रा, यह
ु वजा िदया जाये; और दस
रा य के साथ –साथ िनजी पक्ष जो संसाधन के अिधग्रहण/प्रयोग की मांग
करते ह के अिधकार और क तर् य िनयंित्रत करता है और मांग करता है िक
िवतरण के िलये अपनाई गई प्रिक्रया, केवल िन पक्ष और पारदशीर् है और यह
िक यह िनजी पक्ष के समान
पर जोर िदया गया था)। 22.
थान पर रखने के बीच पक्षपात न कर’’ (इस
भारतीय टै लीग्राफ अिधिनयम, 1885 की धारा 4 के कारण, िबना िकसी
िववाद के, के द्रीय सरकार को टै लीग्राफ की
थापना, रखरखाव और कायर् करने का
िवशेषािधकार है, िजससे अथर् है िक के द्रीय सरकार के अलावा िकसी भी
यिक्त को
दरू संचार कायर् करने का अिधकार नहीं है । भारतीय टै लीग्राफ अिधिनयम, 1885 की
धारा 4 की उप धारा 1 के िनयम के कारण के द्रीय सरकार के पास है , इस शतर् पर
और उन भग
ु तान को
यान म रखते हुये जो वो ठीक समझती है , को भारत के िकसी
भी भाग म टै लीग्राफ की थापना, रखरखाव या कायर् के िलए िकसी भी यिक्त को
लाइसस दे ने की शिक्त है । अिधिनयम की धारा 3 की उप-धारा 1 एए म पिरभािषत
अनस
ु ार ‘टै लीग्राफ’ का अथर् कोई भी उपकरण, यंत्र, सामग्री या औजार है जो तार,
िवजअ
ु ल या अ य िव युत चु बकीय उ सजर्न, रे िडयो तरं गो या हटर् िजयन तरं गो,
रसायिनक, िव यत
ु या चब
ु ंकीय तरीके से िच न , िसग्नल , लेखन, प्रितिबंब और
विन
या िकसी भी प्रकार की सच
ू ना के प्रेषण या प्राि त के िलये प्रयोग म सक्षम और
प्रयोग िकये जाते ह। 23.
भारत म िनजीकरण और उदारीकरण के युग ने रा ट्रीय टै लीकॉम पुिलस,
1994 की शु आत दे खी िजसने अ य चीज
के बीच,
यापक सेवा प्रा त करने,
टे लीकॉम सेवा की गुणव ता को िव व मानक तक लाने, उिचत दाम पर उपयोगकतार्
की मांग परू ी करने के िलये सेवा के
यापक क्षेत्र का प्रावधान और वै यू एडेड
टे लीकॉम सेवा के साथ-साथ मल
ू क्षेत्र म कॉरपोरे ट सं था की भागीदारी िनजी ऑपरे टर
को सरकारी आपरे टर से बराबरी करने पर बल िदया। टे लीकॉम रे गुलेटरी अथॉिरटी
ऑफ इंिडया अिधिनयम, 1997 दािय व िदये गये िनयामक प्रािधकरण सिहत हमेशा
सेवा प्रदाता
24.
वारा लाइसेस शत का अनुपालन सिु नि चत करने के िलये लागू था। दो िरट यािचकाओं म उन दरू संचार कंपिनय , िज होने लाईसेस करार के
अनुसार संबिं धत क्षेत्र म से युलर/एकीकृत एक्सेस सेवा उपल ध कराने के िलए
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 8 से 32 लाइसेस करार िकया है , की राज व लेखापरीक्षा करने के िलए भारत के िनयंत्रकमहालेखापरीक्षक की शिक्त पर िवचार करते हुए कानन
ू के सम प प्र न को उठाया
यूपी (सी) सं 3673/2010 के िरट यािचकाकतार् स. 1
गया है । जैसािक ड
प्रितपािदत िकया गया, यह िनजी टे लीकॉम कंपिनय
वारा
का संगठन है , से युलर
लाइसेसधारक/एकीकृत एक्सेस सेवा लाइसस धारक इसके सद य है । ड
यूपी (सी) स;
3679/2010 के यािचकाकतार् स. 1 ने से युलर लाइससधारक /एकीकृत एक्सेस सेवा
लाइसस धारक का प्रितिनिध होने का भी दावा िकया है जैसािक दो िरट यािचकाओं म
प्रितपािदत िकया गया है यािचकाकतार् स. 1 के सद य कद्रीय सरकार के तहत ्
लाइससधारक
है ।
सेवा
सेवाओं/यूएएसएल की
के
संबिं धत
क्षेत्र
म,
व
से यल
ु र
मोबाइल
टे लीफोन
थापना, रख-रखाव और प्रचालन का अिधकार रखते है 1
यािचकाकतार् ने दावा िकया िक उसके सद य को भारतीय टे लीग्राफ अिधिनयम 1885
की धारा 4 के अंतगर्त कद्रीय सरकार
वारा लाइसस जारी िकए गए है , यह एक स य
है और इस पर कोई िववाद नहीं ह। 25.
वकील सहमत था िक प्र येक लाइससधारी के लाइसस की वािणि यक शत
समान है और संदभर् की सिु वधा हे तु हम भारत संघ और मै. टाटा टे लीसिवर्सेज िल. के
बीच िदनांक 03 माचर्, 2008 के लाइसस करार का हवाला दे सकते है । 26.
यह लाइसस करार मै. टाटा टे लीसिवर्सेज िल. को लाइसस करार म िनिदर् ट
शत पर 20 वष को अविध के िलए ज म-ू क मीर सेवा क्षेत्र म एकीकृत एक्सेस सेवा
उपल ध कराने का िवशेषािधकार दे ता है । लाइसस धारक को िदया गया िवशेषािधकार
करार के खंड 2 (और इसके िविभ न उप-खंड) के अनस
ु ार है । करार म पिरकि पत है
िक ए ट्री फीस के अलावा,
पैक्ट्रम प्रभार केा छोड़ते हुए समायोिजत सकल राज व
के 6% वािषर्क शु क का भग
ु तान मै. टाटा टे लीसिवर्सेज िल.
िकया जाना है । खंड 18.3.1 के अनुसार रे िडय
वारा भारत संघ को
पैक्ट्रम प्रभार इसके अितिरक्त
भग
ु तानयोग्य है । लाइसस करार के खंड 19 के अनुसार समायोिजत सकल राज व को
िन न के अंतगर्त पिरभािषत िकया गया है :- ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 9 से 32 ‘’19 समायोिजत सकल राज व की पिरभाषा
19.1 सकल राज व सकल राज व म
यय की संबिं धत मद हे तु िकसी समंजन आिद के िबना
प्रित ठापन प्रभार, िवलंब शु क, हैडसैट (या िकसी अ य टिमर्नल उप कर
आिद) की िबक्री प्राि तयां याज के आधार पर राज व, लाभांश, मू य विधर्त
सेवाएं, सहायक सेवाएं, एक्सेस या इंटरकनेक्ंशन प्रभार, रोिमंग प्रभार,
अवसंरचना की अनुम य शेयिरंग से राज व और कोई अ य िविवध राज व
शािमल ह गे। 19.2 समायोिजत सकल राज व (एजीआर) प्रा त करने के उ े य हे तु
िन निलिखत को एजीआर प्रा त करने के िलए सकल राज व से छोड़ा
जाएगा:- भारत म अ य पात्र/हकदार दरू संचार सेवा प्रदाताओं को वा तव म
I.
भग
ु तान िकए गए पीएसटीएन संबंिधत कॉल प्रभार (एक्सेस प्रभार); अ य पात्र/हकदार दरू संचार सेवा प्रेरको को वा तव म िदए गए रोिमंग
II.
राज व और; III.
सरकार को वा तव म भग
ु तान िकए गए सेवा और िबक्री कर के
प्रावधान पर सेवाकर यिद सकल राज व को िबक्री और सेवा कर के घटक के
प म शािमल िकया गया हो। 27.
चिूं क, लाइसस करार हे तु प्रितफल, भारत संघ को मै. टाटा टे लीसिवर्सेज िल से
प्रवाह ए ट्री फीस के अलावा समायोिजत सकल राज व और रे िडयो
भी प्रितशतता होने के नाते रािश का भग
ु तान है , यह
प्रैक्ट्रम प्रभार की
प ट होगा िक यह करार लेख
के रख-रखाव के संदभर् म होगा और हम इसे लाइसस करार के खंड 22 और इसके
िविभ न उप-खंड के अनस
ु ार पाते है , जो िन नानस
ु ार पिठत है :- ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 10 से 32 ‘’22. लेखाओं की तैयारी 22.1 लाइसस प्रदाता सेवा के िलए
वतंत्र लेख को तैयार करे गा, रखेगा
और प्र तत
ु करे गा और लाइससधारक या ट्राई जैसा भी मामला हो,
वारा
समय-समय पर जारी िकए गए आदे श िनदश और िविनयम का पण
ू र्
प से
पालन करे गा। 22.2 लाइसस धारक िन न के िलए बा य होगा: क)
लाइसस अविध या इसके कमतर अविधय की प्र येक परू ी ितमाही के
संबंध म इसके सं यवहार
को दशार्ने और
याख्या करने हे तु पयार् त
लेखाकरण अिभलेख का संकलन एवं अनुरक्षण करना तािक लाइसस प्रदाता
लाइसस के तहत लाइसस धारक के कारबार की लागत (पज
ंू ीगत लागत
सिहत), राज व और िव तीय ि थित का उिचत
प से उ लेख कर सके
िजसमे इसमे िविनयोिजत पिरसंपि तय का उिचत आकलन और लाइसस
धारक के कारबार पर आरो य दे यताओं के साथ-साथ राज व या िकसी अ य
उ े य का मात्रा िनधार्रण शािमल है । ख)
समा त िव तीय वषर् के संबध
ं म तैयार िकए गए प्र येक लेखाकरण
िववरण के संबंध म प्रा त, अ य बात के साथ-साथ यह कहते हुए लाइसस
प्रदाता
वारा िनधार्िरत िनयमानु प लाइसस धारक के लेखापरीक्षक
वारा
िरपोटर् िक यिद उसके मत म िववरण इस शतर् के उ े य हेतु पयार् त है उनकी
संबंिधत अविध की लेखाकरण अविध की समाि त पर तीन माह के अंदर
प्र येक लेखाकरण िववरण की प्रित को इसके प चात लाइसस प्रदाता को
आपिू रत कर िदया गया है। ग)
ितमाही हे तु भग
ु तान सिहत प्र येक ितमाही के िलए अलग से शतर् 19
म यथा पिरभािषत राज व के पण
ू र् लेखा को िनिदर् ट करते हुए कंपनी के
अिधकृत प्रितिनिध
वारा शपथ पत्र पर शपथ बद्ध प्रमािणत िववरण लाइसस
प्रदाता को भेजना। ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 11 से 32 22.3 (क) लाइसस प्रदाता या टाई, जैसा भी मामला हो, के िलए कोई कारण
दजर् िकए िबना कोई भी लेखा बही जांच हे तु मंगवाने का अिधकार होगा तथा
इसको आपिू तर् एवं उपल ध कराना लाइसस धारक का कतर् य होगा जो
ं म
लाइसस धारक इस लाइसस के अंतगर्त सेवा उपल ध कराने के संबध
अनरु िक्षत कर सकता है। 22.3 (ख) लाइससधारक कंपनी के उपयुक्त
प से लेखापरीिक्षत एवं
अनम
ु ोिदत लेखाओं के प्रकाशन की ितिथ से तीन वषर् की अविध तक सभी
िबल तथा अ य सभी लेखांकन अिभलेख (इलेक्ट्रोिनक के साथ हाडर् कॉपी)
िनरपवाद
ं म कोई भी लापरवाही िकसी
प से सरु िक्षत रखेगा तथा इस संबध
अ य उ लंधन से
वतंत्र तथा लाइसस के िनर तीकरण हेतु एक पयार् त
कारण समझते हुए एक मह वपूणर् उ लंघन माना जाएगा। 22.4 लाइससधारक के अिभलेख लाइसस प्रदाता
संवीक्षा के अ यधीन होगे िजससे िक
प्रदाता को दे य रािश की
वारा िनधार्िरत ऐसी
राज व के िह से के
प म लाइसस
वतंत्र जांच को सग
ु म बनाया जा सके। 22.5 लाइसस प्रदाता ऐसी िवचार धारा बनने पर िक प्र तत
ु िकए गए
िववरण अथवा लेखे गलत अथवा भ्रामक है, लाइसस धारक की लागत पर
लेखापरीक्षक िनयुक्त करके लाइसस धारक के लेखाओं की लेखापरीक्षा का
आदे श दे सकता है तथा ऐसे लेखापरीक्षक के पास वही शािक्तयां होगी जो
कंपनी के वैधािनक लेखापरीक्षक को कंपनी अिधिनयम 1956 की धारा 227
के अंतगर्त दी गई है । लेखापरीक्षक का पािर िमक जैसािक लाइसस प्रदाता
वारा िनधार्िरत िकया गया है, लाइसस धारक
वारा वहन िकया जाएगा। 22.6 लाइसस प्रदाता, लाइसस धारक कंपनी के लेखाओं/अिभलेख
‘‘िवशेष लेखापरीक्षक ’’
वारा ‘‘िवशेष लेखापरीक्षा’’ भी आयोिजत कर सकता
है , िजसके िलए भग
ु तान लाइसस प्रदाता
धारक
की
वारा िनधार्िरत दर पर लाइसस
वारा वहन िकया जाएगा। यह उपरोक्त पैरा 22.5 म विणर्त
लेखापरीक्षा की लेखापरीक्षा करने की प्रविृ त म होगा। िवशेष लेखापरीक्षक को
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 12 से 32 भी वहीं शिक्तयां ह गी तथा वहीं सिु वधा उपल ध कराई जाएगी जो कंपनी के
लेखापरीक्षक को प्रा त है जैसािक कंपनी अिधिनयम 1956 म पिरकि पत है । 22.7 लाइसस धारक, लाइसस प्रदाता अथवा ट्राई, जैसा भी मामला हो,
वारा िदए गए िनदश तथा िनधार्िरत लेखाकरण िसद्धांत के अनस
ु ार समय
समय पर कंपनी के वािषर्क िव तीय लेख तैयार करने तथा प्र तुत करने के
िलए उ तरदायी होगा। 28.
यह
प ट है िक एक रा ट्रीय संसाधन िजसकी संरक्षक कद्रीय सरकार है ,
लाइसस अनुबध
ं के अंतगर्त, का िनजी स व अथार्त लाइसस धारक
वारा उपयोग िकए
जाने की अनम
ु ित है , तथा रा ट्रीय संसाधन के उपयोग के िलए प्रितफल लाइसस शु क
का भग
ु तान है जो मख्
ु य घटक समायोिजत सकल राज व का प्रितशत है
(मै. टाटा
टे लीसिवर्सेज िलिमटे ड के पक्ष म लाइसस के मामले म 6 %)। ख ड 19.1 के अनुसार
सकल राज व की पिरभाषा
यापक है और राज व अंतवार्ह का प्र येक साधन
समािव ट है । प्रित आव यकता लेखाओं के रखरखाव की अ यंत प्रासंिगकता होगी,
इससे यह िनधार्िरत होगा िक लाइससधारी
वारा लाईसस दे ने वाले को िकतना
भग
ु तान करना है अथार्त दरू संचार सेवा प्रदाता
वारा भारत संघ को। 29. लाइसस करार पर िट पणी करते हुए, हम यह कहने
म गलत नहीं ह गे िक
पूवक
र् िथत के अनुसार, दल (मैससर् टाटा टे लीसिवर्िसज़ िलिमटे ड और भारत संघ) आपसी
लाभ के िलए एक उ यम म संि त ह; जो उ यम संयक्
ु त उ यम के समान है ।
लाइसस करार के अ तगर्त के द्र सरकार ने लाइसससधारी की स यिन ठा म िव वास
रखा है, क्य िक राज व िजसका सज
ृ न होगा और इसके
ोत लाइससधारी के शेष ज्ञान
और िनयंत्रण म ह; जो िक इस प्रकार अ यंत सदभाव से कायर् करने के िलए
क तर् यबद्ध ह गे। लाइसस करार और िवशेष तौर पर इसके
वारा प्रा त हुए राज व से
संबंिधत लेखाओं के रखरखाव के िलए के द्र सरकार ने लाइससधारक पर भरोसा और
िव वास रखा है और इस प्रकार सकल राज व प्राि तय के संबध
ं म संगिणत, इसके
राज व के भाग का के द्र सरकार को िहसाब दे ने और भग
ु तान करने की लाइससधारी
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 13 से 32 की ठे कागत बा यता है । यह कहना अनाव यक है िक लेखांकन के िबना कोई रा ता
नहीं है िजससे के द्र सरकार इसके प्रा य का अवधारण कर सके। 30. प्र येक संिवदा म संिवदा करने वाली पािटर् य को कुछ भी ऐसा करने िजसका
संिवदा का लाभ प्रा त करने वाली अ य पाटीर् अिधकार को न ट या क्षित करने वाला
प्रभाव पड़ेगा को बा य करते हुए िव वास और उिचत डीिलंग की एक अंतिनिहर्त
प्रसंिवदा शािमल है । 31. लाइसस करार की शत के तहत लाइससधारी ने के द्र सकरार के साथ साथ
के िलए लेखांकन उ तरदािय व िलया है ; इसे िववादा पद
वंय
प से करने के उ तरदािय व
म सकल राज व की सही प्राि तय को सही ढं ग से और ईमानदारी से सिू चत करने के
िलए िव वास पद क तर् य होते ह। 32. लेखाकार अपने ग्राहक को प्र ययी क तर् य के दे नदार होते ह। लेखाकार गैरग्राहक िज ह लेखाकार जानते ह को लापरवाही से या जानबूझकर गलत सच
ू ना न दे ने
के िलए भी आभारी होते ह जो पयार् त सिु नि चतता सिहत, अपने ग्राहक के साथ
अपनी डीिलंग म सच
ू नापर िव वास करगे। लाइसस करार के तहत, एक लेखाकार के
प म लाइससधारी की भिू मका पर िट पणी नहीं की जा सकती। 33. यह स य हो सकता है िक लाइससधारी एक लेखांकन फमर् नहीं है लेिकन वे
लेखाकार और मन
ु ीम को काम पर रखते ह जो लेखांकन का कायर् करते ह िज ह
करने के िलए लाइसेसध
ं ारी ने संिवदा पर होते ह। अ य त वा तिवक
प्रकार राज व वाले िकसी भी सं यवहार के
प म िकताब
प म से, इस
के पण
ू ,र् सटीक और
ईमानदार रखरखाव के संबंध म लाइससधारी, कद्र सरकार के लेखाकार होते ह। 34. हम यह दावा करनेका साहस करते ह िक जब िव तीय यग
ु का इितहास, जो िक
उदारीकरण और िनजीकरण से पहले था, िलखा गया जायेगा, और की गई गलितय
को िलिपबद्ध िकया जायेगा, एक मख्
ु य त्रिु ट, िव वास और उिचत डीिलंग के एक
अंतिनिहर्त प्रसंिवदा समािव ट िकेए जाने वाले प्र येक संिवदा के प्र ययी िसद्धांत को
लागू करने म असफल होगी क्य िक प्र येक संिवदा म प्र येक पाटीर् अ य म भरोसा
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 14 से 32 और िव वास रखती है , िक प्र येक कुछ भी ऐसा करने से बचेगा िजसका संिवदा के
लाभ को उठाने के िलए अ य पाटीर् के अिधकार को न ट या क्षित करने वाला प्रभाव
होगा। 35. इस प्रकार, एक िनयामक कानून की िकसी भी
चािहए िक िविनयिमत
याख्या म यह
यान म रखना
वारा डीिलंग म िव वास के प्र ययी िसद्धांत को प्राथिमक
आव यकता दे ने की आव यकता है मख्
ु य
प से तब जब िविनयिमत प्राकृितक
संसाधन का लाभाथीर् है और उसे िवनयिमत
वारा लाइससकृत गितिविधय से सिृ जत
राज व की प्रितशतता के
प म अवधािरत प्राकृितक संसाधन रािश के अिभरक्षक को
भग
ु तान करना होता ह। 36. यािचका दाता, भारत के दरू संचार िनयामक प्रािधकरण, सेवा प्रदाताओं (बही खात
और अ य द तावेज का अनुरक्षण) िनयमावली 2002, के अनुसार अपेिक्षत रखरखाव
के िलए बही खात के अनुरक्षण की िज मेवारी पर िववाद नहीं करते ह। यािचकादाता
लाइसस करार के पिरिश ट- II से अनुबंध-II के अनुसार ‘वषर् की प्र येक ितमाही के
िलए राज व और लाइसस फीस का िववरण’ प्र तत
ु करने के िलए उनकी िज मेवारी
पर भी िववाद नहीं करते है । वे यह भी िववाद नहीं करते ह िक लाइससधािरय
सिृ जत राज व म उ ह प्रदान िकए गए लाइसस
वारा
म यथा उि लिखत प्रितशत के
आधार पर के द्र सरकार के साथ साझा िकए जाने की आव यकता होती है । वे इस पर
भी िववाद नहीं करते िक राज व शेयर की मात्रा अिभिनि चत करने के उ े य से उस
संबंध म जहां प्रदान िकए गए संबंिधत लाइसस म प्रावधान िकए गए ह वहां के द्र
सरकार इस संबंध म ऐसे काय को करने की हकदार होगी। वे िववाद नहीं करते िक
लाइसस का ख ड 22.3 के द्र सरकार को िकसी भी बही खाते की जांच करने के िलए
लाइससधारी को दे ने ओ मह
ु ै या कराने के िलए पूछने का अिधकार दे ता है और उक्त
उ े य के िलए लाइससधारी को 3 वष की अविध के िलए सभी िबिलंग और अ य
लेखांकन अिभलेख को सरु िक्षत रखने की आव यकता है और यह िक ख ड 22.4 के
तहत के द्र सरकार को उक्त बही खात की संवीक्षा करने के िलए सशक्त िकया जाता
है तािक राज व के इसके भाग के
उ े य के िलए इसके
प मे इसको दे य रािश अिभिनि चत करने के
वतंत्र स यापन को सरल बनाया जाए। ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 15 से 32 37. इस चरण पर हम यह नोट कर सकते ह िक ख ड 22.6 के अनस
ु ार िवशेष
लेखापरीक्षा के संचालन के िलए िवशेष लेखापरीक्षक की िनयुिक्त के िलए ख ड 22.5
के अंतगर्त के द्र सरकार की शिक्त से संबंिधत िववाद टे िलकॉम िववाद
एवं अपीलीय अिधकरण
यव थापन
वारा यािचका सं. 139/2010 भारत के से यूलर प्रचालक
सभा एवं अ य बनाम दरू संचार िवभाग और यािचका सं. 141/2010 के एकीकृत
दरू संचार सेवा प्रदाता सभा (एयए
ू सपीआई) एवं अ य बनाम दरू संचार िवभाग एवं अ य
म िदनांक फरवरी 10,2011 को इसके िनणर्य के अनुसार लाइससधारी के हक म
िनपटाया गया है और वतर्मान म मामले की सव च
यायालय के समक्ष िवषय पर
अंितम अिधिनणर्य की प्रतीक्षा कर रहा ह। 38.
यह यािचकाक तार् ओं का मामला है िक भारतीय सं िवधान के अनु छे द 149
के अ तगर्त ,भारत के िनयं त्र क एवं महाले खापरीक्षक को के वल संघ तथा रा य और
इस प्रकार के अिधकािरय या िनकाय जै सा सं स द
वारा बनाए गए िकसी कानून
वारा िनधार् िरत या के अ तगर्त है की ले खापरीक्षा करने की शिक्त प्रा त है । वे
आग्रह करते है िक वाक्यां श िकसी अ य अिधकारी या िनकाय’ को पूवर् भाग यानी
सं घ तथा रा य
अिधकारीय
के साथ संयोजन म पढा जाए िजसका अथर् है सं वैधािनक
सरकारी क पिनय
िनवे दन करते है
या संघ या रा य
िक ऐसा सं िवधान
वारा िव तपोिषत स व। वे
सभा का िवचार िवमशर् प्रकट करे गा।
यािचकाकतार् ओं का कहना है िक िनजी क पिनयां भारतीय संिवधान के अनु छे द
149
की
पिरिध
से
बाहर
ह।
यािचकाकतार्
अ छा
तकर्
बनाने
के
िलए
आईएलआर(1996) 2 डीईएल 34 के स यनारायणन बनाम भारतीय संघ तथा
एआईआर 1991 मद्रास 61 आर.आर दे लावई िव द्ध इं िडयन ओवरसीज बक के
प म प्रितवे िदत िनणर्य पर िनभर्र कर रहे ह। यािचकाकतार् ओं के अनु सार एक
कानू न का हर अनु छे द, हर वाक्यां श तथा हर श द का अथर् प थ
ृ क्करण म नही
बि क सं द भर् तथा कानू न की योजना म िकया जाए जै सा िक उ
(1987)1 एससीसी 424 आरबीआई बनाम यूओ आई के
तम
यायालय के
प म प्रितवे िदत िनणर्य
वारा आयोिजत िकया गया है । यािचकातार् ओं ने भारत की द रू सं चार िनयामक के
िनयम 5, से वा प्रदाता (ले खा बिहय
तथा अ य द तावे ज
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
के संर क्षण) िनयम
प ृ ठ 16 से 32 2002 की शिक्त को चुनौती दे ते हु ए अिभयोग लगाया है िक यह भारतीय
सं िवधान के अनु छे द 149 के साथ पढे जाने वाले िनयंत्र क एवं महाले खापरीक्षक
(कतर् य, शिक्तयां तथा से वा की शत) अिधिनयम 1971 के खं ड 16 को शिक्तय
से परे बताया है । हम यह
विर ठ वकील
यान दे सकते है िक तकर् िवतकर् के दौरान िव वान
वारा यािचकाकतार् ओं के िलए िनवे दन िकया गया िक यिद िनयं त्रक
एवं महाले खापरीक्षक (कतर् य, शिक्तयां तथा से वा की शत) अिधिनयम 1971 को
उस प्रकार पढा जाए जै सा प्रितवादी
वारा सुझाव िदया गया है तो यह भारत के
सं िवधान के अनु छे द 149 की शिक्तय
से परे घोिषत िकया जाएगा। उ चतम
यायलय के (1997)5 एससीसी 516 कृ िष िवपणन सिमित बनाम शालीमार
रासायिनक वक्सर् िलिमटे ड के
प म सूिचत िनणर्य म घोिषत कानू न पर िनभर्र
होते हुए यह िनवे द न िकया गया है िक यिद एक सं वैधािनक प्रावधान (अनु छे द
149) एक सं वै धािनक प्रािधकारी की शिक्त पर प्रितबं ध लगाता है तो सं सद
वारा
िनिमर्त कोई कानू न उपरोक्त शिक्त को बढा नहीं सकता। 39.
समादे श यािचका दायर करने के िलए तीन पत्र िदनां िकत 28 जनवरी,
2010, 10 मई, 2010 तथा 21 मई, 2010 त या मक आधार है , पहला भारतीय
द रू सं चार िनयामक प्रािधकरण
एवं द रू सं चार महािनदे श क
बाद से शु
वारा िलखा गया तथा द स
ू रे दो ले खापरीक्षा, डाक
वारा सभी द रू सं चार से वा प्रदाताओं को 2006-07 के
तीन वष के िलए उनकी ले खा बिहय तथा द स
ू रे द तावे जो जो भारत
के िनयं त्र क एं व महाले खापरीक्षक के िलए राज व के स यापन को प्रभािवत करे ,
को प्र तु त करने की मां ग करने के िलए िलखे गए। तीन पत्र नीचे इस
प म
पढे जाए: ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 17 से 32 ‘’भारतीय दरू संचार िनयामक प्रािधकरण महानगर दरू संचार भवन, जवाहर लाल नेह
मागर्, पुराना िमंटो रोड, नई िद ली -110002 एफ. सं. 14.21/2009-एफए
िदनांक 28 जनवरी, 2010 सेवा म, ी िदिव द्र िसंह/सन
ु ील गु ता मै. िरलाय स ग्रप
ु ऑफ क पनी 15
लोर, िवजया िबि डंग 17, बारखंबा रोड, नई िद ली -110001 िवषय: डाक एवं दरू संचार महािनदे शक के लेखापरीक्षा शाखा कायार्लय को
लेखा बिहय प्र तत
ु करना। ीमान, भारतीय दरू संचार िनयामक प्रािधकरण, सेवा प्रदाता (लेखा बिहय तथा
दस
ू रे द तावेज का संरक्षण) िनयम, 2002 के िनयम 5 के अनस
ु ार प्र येक
सेवा प्रदाता को इसके िनयमा 3के उपिनयम म िनिदर् ट ऐसी सभी लेखा
बिहय
और द तावेज प्रसतत
ु करने ह गे जो भारतीय दरू संचार िनयमाक
प्रािधकरण (अिधकारी) के िलए राज व के स यापन को प्रभािवत करे । ‘’(ii) भारत के िनयंत्रक एवं महालेखापरीक्षक को उससे संबंिधत वक्त य या
जानकारी प्र तत
ु करना जो भारत के िनयंत्रक एवं महालेखापरीक्षक उनके
समक्ष प्र तु करने की आव यकता प्रकट कर सकते है तथा भारत के िनयंत्रक
एवं महालेखापरीक्षक, िनयंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के (क तर् य, शिक्तयां
तथा सेवा की शत)
अिधिनयम, 1971 (1971 का 56) की धारा 16 के
प्रावधान के अनुसार उसकी लेखापरीक्षा कर सकते है ।‘’ 2.
भारत के िनयंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने
(लेखापरीक्षा, डाक एवं
दरू संचार के महािनदे शक के मा यम से) डीओटी के साथ लाइसस समझौते की
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 18 से 32 शत के अनुसार आपकी क पनी
वारा कायार्ि वत राज व म से सरकारी
िह से को आंकने के िलए 2006-07 के बाद से शु
तीन वष के समय के
िलए आपकी क पनी की लेखा बिहय की लेखापरीक्षा करने का िनणर्य िलया
है । 3.
अत: टीआरएआई, सेवा प्रदाता (लेखा बिहय तथा दस
ू रे द तावेजो का
अनुरक्षण) िनयम 2002 के िनयम 5 के अनुसार/डीओ लेखापरीक्षा कायार्लय,
पीएंडटी, नई िद ली म जनवरी 2010 के अि तम स ताह के दौरन
लेखापरीक्षा तथा दस
ू रे उपयुक्त िवषय की बिहय के अनुरक्षण
आव यक अिभलेख/लेखपरीक्षा वत
ृ की बिहय
पर सभी
/क्षेत्रानस
ु ार प्रदान करने का
अनरु ोध िकया गया है, जो लेखापरीक्षा के कायर् को सस
ु ा य बना होगा। 4.
अत: यह अनरु ोध िकया जाता है िक उपरोक्त लेखापरीक्षा की
िन पादन के िलए इस लेखापरीक्षा कायर् के संबंध म ज री सभी आव यक
अिभलेख/जानकारी/द तावेज उपल ध कराने के अितिरक्त शाखा लेखापरीक्षा
कायार्लय तथा डीजी लेखापरीक्षा पीएंडटी के िद ली कायर्लय की ओर सभी
आव यक सहयोग बढाया जाए। यह प्रािधकारी के अनम
ु ोदन से जारी है । भवदीय, ह ताक्षिरत (मनोज कुमार िम ा) ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 19 से 32 महािनदे श लेखापरीक्षा, डाक एवं दरू संचार शामनाथ मागर्, (परु ाने सिचवालय के पास) िद ली-110002 आर.पी.िसंह महािनदे शक
िदनांक 10.5.2010 िवषय: दरू संचार सेवा प्रदाताओं की सीएजीआरईजी
वारा लेखापरीक्षा। संदभर्: 1) डीओटी पत्र सं. 842-1082/2010-एएस-IV िदनांक 16.3.2010। 2) आपका कायार्लय पत्र संख्या आरटीएल/09-10/4433 िदनांक
31.3.2010 । िप्रय महोदय, कृपया सीएजी वारा राज व िह से की लेखापरीक्ष के संचालन म
सहयोग दे ने के उपरोक्त िवषय पर दशार्ये गए अपने कायार्लय के पत्र का
संदभर् ल। आपकी क पनी
वारा लेखा बिहय को प्र यक्ष
प म उपल ध
कराने म कुछ किठनाई यिक्त की गई है क्य िक वे एसएपी आर 3 म
इलैक्ट्रािनक प म अनरु िक्षत की जा रही है। इसके अितिरक्त, यह बताया
गया है ये संबंिधत आईटी िस टम म दे खी जा सकती ह जो डीएकेसी नवी
मु बई म आपके मख्
ु यालय म उपल ध कराए जाएंगे। इस संबंध मे, यह
अनुरोध िकया जाता है िक 20 मई 2010 िबिलंग तथा िव तीय प्रणािलय एवं
राज व िह से से संबंिधत अ य सभी गितिविधय को शािमल करते हुए एक
याख्यान िदया जा सकता है िजसके बाद मेरे लेखापरीक्षा दल के साथ एक
संिक्ष त इ टरफेस बैठक होगी जो लेखापरीक्षा की प्रिक्रया प्रारं भ करे गा।
याख्यान का समय तथा
के
थान अनुबध
ं -1 म िदया गया है । मेरे कायार्लय
ी सब
ु ु आर िनदे शक (िरपोटर् ) को नोडल अिधकारी के
प म नामंिकत
िकया गया है जो लेखापरीक्षा का िनरीक्षण तथा समायोजन करगे। भवदीय, ह ताक्षिरत/‐ (आर.पी. िसंह) ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 20 से 32 एफ. सं. 14-21/209-एफए
िदनांक 21 मई 2010 सेवा म, ी आन द दलाल अपर उपा यक्ष (िनयामक मामले) मै. टाटा ग्रुप ऑफ क पनी इंडीकाम भवन 2 ए, ओ ड ई वर नगर मेन मथरु ा रोड नई िद ली-110065 िवषय: महािनदे शक लेखापरीक्षा, डाक एवं दरू संचार के शाखा लेखापरीक्षा
कायार्लय को लेखा बिहयां प्र तत
ु करना। कृपया ट्राई के िदनांक 28 जनवरी 2010 के पत्र सं. 14-21/2009एफए का संदभर् ल, िजसम आपकी क पनी को लेखापरीक्षा हे तु आव यक
सभी अिभलेख/लेखाबिहयां सकर्ल/क्षेत्रवार संबंिधत शाखा लेखापरीक्षा कायार्लय
(जैसा िक सच
ू ी म दशार्या गया है) को उपल ध कराने तथा समेिकत लेखे
महािनदे शक लेखापरीक्षा, डाक एवं दरू संचार िद ली के कायार्लय को प्र तुत
करने के िलए कहा गया है । आपकी क पनी से महािनदे शक लेखापरीक्षा डाक
एवं दरू संचार नई िद ली के कायार्लय म लेखाबिहय के अनरु क्षण तथा अ य
संबंिधत मामलो म एक याख्यान दे ने का अनरु ोध भी िकया गया था। 2.
हम सी ए ड एजी
वारा सिू चत िकया गया है िक आपकी क पनी ने
अब तक इन िनदश पर प्रितिक्रया नहीं की है । 3.
इस संबंध म,ट्राई ने यवसाय सहयोिगय से ये अिभवेदन प्रा त िकए
थे िक सी ए ड एजी की लेखापरीक्षा का कायर् क्षेत्र उस प्रिक्रया के कायर् क्षेत्र
के समान है जो डीओटी
वारा िनयक्
ु त िवशेष लेखापरीक्षा
है तथा यह प्रिक्रया कायर् की
वारा की जा रही
िवराविृ त होगी। यवसाय संगठनो
वारा यक्त
िचंता सी ए ड एजी के संज्ञान म लाई गई थी। तथािप, सी ए ड एजी ने हम
सिू चत िकया (महािनदे शक लेखापरीक्षा (पीएवंटी) के मा यम से ) िक सी ए ड
एजी (डीपीसी) अिधिनयम की धारा 16 के अ तगत भारत के सी एवं एजी
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 21 से 32 वारा
की गई लेखापरीक्षा ट्राई िनयमावली, 2002 के प्रावधान
िक्रया वयन म है तथा इसका डीओटी
वारा िनयक्
ु त सीएज
िवशेष लेखापरीक्षा से कोई संबध
ं नहीं है । 4.
के
वारा की गई
उपरोक्त के म ेनजर, इस पत्र की प्राि त के 15 िदन के अनदर
आपसे सकर्ल/क्षेत्रवार सभी आव यक अिभलेख/लेखा बिहयां संबिं धत शाखा
लेखापरीक्षा कायार्लय (जैसा िक िदनांक 28 जनवरी 2010 के पत्र म दशार्या
गया है ) को उपल ध कराने तथा समेिकत लेखे डीजी लेखापरीक्षा, पीएंडटी के
िद ली कायार्लय को प्र तुत करने का अनुरोध िकया जाता है। आपको यह भी
सिू चत िकया जाता है िक इस पत्र की अनुपालना पर ट्राई अिधिनयम के
अ तगर्त उपयक्
ु त कायर्वाही की जा सकती है । यह प्रािधकारी के अनम
ु ोदन से जारी िकया गया है। भवदीय, ह ताक्षिरत/- (अनरु ाधा िम ा) प्र.सलाहकार (एफए) 40.
अत: हमारी यात्रा भारत के संिवधान के अनु छे द 149 पर
होनी चािहए। यह िन निलिखत
प से पढा जाए: यान दे ने से शु
‘’149 िनंयत्र
ं क-महालेखापरीक्षक के कतर् य और शिक्तयां िनयंत्रक-
महालेखापरीक्षक संघ के और रा य के तथा िकसी अ य प्रािधकारी या
िनकाय के लेखाओं के संबंध म ऐसे कतर् य का पालन और ऐसी
शिक्तय का प्रयोग करे गा िज ह संसद
वारा बनाई गई िविध
वारा
या उसके अधीन िनयत िकया जाए और जब तक इस िनिमत इस
प्रकार उपबंध नहीं िकया जाता है तक तक, संध के और राजय के
लेखाओं के संबंध म ऐसे कतर् य का पालन और ऐसी शिक्तय का
प्रयोग करे गा जो इस संिवधान के प्रारं भ से ठीक पहले क्रमश: भारत
डोिमिनयन के और प्रांतो के लेखाओं के संबंध म भारत के
महालेखापरीक्षक को प्रद त थी या उसके
वारा प्रयोक्त य थी’ ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 22 से 32 41.
िनयंत्रक एवं महालेखापरीक्ष के (कतर् य , शिक्तयां और सेवा की शत)
अिधिनयम, 1971 की धारा 10, धारा 13, धारा 14 और धारा 16 िन निलिखत
प
से पढी जाएं: ‘‘10 िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक
करना- वारा संघ एवं रा य के लेखाओं का संकलन
(1) िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक िन निलिखत के िलये िज मेदार होगा‐ (क)
संघ और हर एक रा य के लेखाओं का संलकन उन प्रारि भक और
सहायक लेखाओं से करना जो ऐसे लेखाओं के रखने के िलये िज मेदार
खजान , कायार्लय या िवभाग
वारा उसके िनयंत्रण के अधीन लेखापरीक्षा
और लेखा कायार्लय को िदये जाएं; और (ख)
ख ड (क) म िविनिदर् ट िवषय म से िकसी के संबध
ं म ऐसे लेखाओं
को रखना जो आव यक ह : पर तु रा ट्रपित, िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक से परामशर् करने के प चात ् आदे श
वारा, उसे िन निलिखत का संकलन करने की िज मेदारी से अवमक्
ु त कर
सकेगा- (i)
संघ के उक्त लेखे (या तो त काल या िविभ न आदे श जारी करके
(ii)
संघ की िक हीं िविश ट सेवाओं अथवा िवभाग के लेखे: धीरे -धीरे ); अथवा िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक से परामशर् करने के प चात ् आदे श
वारा, उसे
िन निलिखत का संकलन करने की िज मेदारी से अवमक्
ु त कर सकेगा- (i)
रा य के उक्त लेखे (या तो त काल या िविभ न आदे श जारी करके
(ii)
रा य की िक हीं िविश ट सेवाओं अथवा िवभाग के लेखे: धीरे -धीरे ); अथवा पर तु यह भी िक रा ट्रपित, िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक से परामशर् करने के
प चात ् आदे श
वारा उसे िकसी िविश ट वगर् या प्रकार के लेखाओं को रखने
की िज मेदारी से अवमक्
ु त कर सकेगा। ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 23 से 32 (2) जब, िकसी यव था के अधीन, िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक से िभ न कोई
यिक्त, इस अिधिनयम के प्रार भ के पव
ू ,र् िन निलिखत के िलये िज मेदार
रहा है- (i)
संघ या िकसी रा य की िकसी िविश ट सेवा या िवभाग के लेखाओं का
(ii)
िकसी िविश ट वगर् या प्रकार के लेखाओं को रखना। संकलन करना; अथवा तब ऐसी यव था, उपधारा (1) म अंतिवर् ट िकसी बात के होते हुए भी तब
तक प्रव ृ त बनी रहे गी जब तक िक िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक से परामशर् करने
के प चात ् वह खंड (i) म िनिदर् ट दशा म यथाि थित, रा ट्रपित या रा यपाल
के आदे श
वारा और खंड (ii) म िनिदर् ट दशा म रा ट्रपित के आदे श
प्रितसं त नहीं कर दी जाती। x
13.
x
वारा
x
लेखापरीक्षा के संबंध म सामा य प्रावधान िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक का यह कतर् य होगा िक वह- (क)
भारत की और प्र येक रा य की और प्र येक ऐसे संघ रा यक्षेत्र की
िजसम िवधान सभा है, संिचत िनिध म से िकये गये
यय की लेखापरीक्षा
करे और यह अिभिनि चत करे िक क्या वे धनरािशयां जो लेखाओं म
संिवतिरत की गई िदखाई गई है, उस सेवा या प्रयोजन के िलये िजसके िलये
वे लागू की गई या प्रभािवत की गई है वैध
प से उपल ध या लागू थीं और
क्या वह यय उसे शािसत करने वाले प्रािधकार के अनु प है : (ख)
आकि मक िनिध लोक लेखाओं के संबध
ं म संघ और रा य के सभी
(ग)
संघ के या िकसी रा य के िकसी िवभाग म रखे गये सभी यवसाय,
सं यवहार की लेखापरीक्षा करे , िविनमार्ण, लाभ और हािन लेखाओं तथा तुलनपत्र और अ य सहायक लेखाओं
की लेखापरीक्षा करे ; और हर एक दशा म अपने
लेखाओं की बाबत िरपोटर् दे । वारा इस प्रकार लेखापरीक्षा यय, सं यवहार या
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 24 से 32 x
x
x 14.
संघ या रा य के राज व से पयार् त
प से िव तपोिषत िनकाय या
(1)
जहां िकसी िनकाय या प्रािधकरण का पयार् त िव तपोषण भारत की या
प्रािधकरण की प्राि तय तथा यय की लेखापरीक्षा- िकसी रा य की या िकसी ऐसे संघ रा यक्षेत्र की िजसम िवधान सभा है,
संिचत िनिध म से अनद
ु ान या उधार से िकया जाता है, वहां िनयंत्रक-
महालेखापरीक्षक, यथाि थित, उस िनकाय या प्रािधकरण को लागू त समय
प्रवत
ृ िकसी िविध के उपब ध के अधीन रहते हुए, उस िनकाय या प्रािधकरण
की सभी प्राि तय तथा यय की लेखापरीक्षा करे गा और इस प्रकार अपने
वारा लेखापरीिक्षत प्राि तय और यय की बाबत िरपोटर् दे गा। प टीकरण- जहां भारत की या िकसी रा य की या िकसी ऐसे रा यक्षेत्र की िजसम िवधान
सभा है, संिचत िनिध म से िकसी िनकाय या प्रािधकरण को िदया गया
अनद
ु ान या उधार िकसी िव तीय वषर् म प चीस लाख
पये से कम नहीं है
और ऐसे अनुदान या उधार की रकम उस िनकास या प्रािधकरण के कुल यय
के पचह तर प्रितशत के कम नहीं है , वहां इस उपधारा के प्रयोजन के िलये
यह समझा जाएगा िक उस िनकाय या प्रािधकरण का पयार् त िव तपोषण,
यथाि थित, ऐसे अनद
ु ान या उधार से िकया जाता है । (2)
उपधारा (1) म िकसी बात के होते हुए भी, िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक,
यथाि थित, रा ट्रपित या िकसी रा यपाल या ऐसे संघ रा य क्षेत्र के, िजसम
िवधान सभा है, प्रशासक के पूवर् अनुमोदन से िकसी िनकाय या प्रािधकरण
को, यथाि थित भारत की या िकसी रा य की या िकसी ऐसे संघ रा यक्षेत्र
की, िजसमे िवधान सभा है, संिचत िनिध म से िकसी िव तीय वषर् म िदए
गए अनद
ु ान या उधार एक करोड़
पये से कम नहीं है, वहां सभी प्राि तय
और यय की लेखापरीक्षा कर सकेगा। (3)
जहां िकसी िनकाय या प्रािधकरण की प्राि तय और यय, की उपधारा (1)
या उपधारा (2) म िविनिदर् ट बात की पूितर् के फल व प, िकसी िव तीय वषर् म
िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक
वारा लेखापरीक्षा की जाती है वहां वह उस िनकाय या
प्रािधकरण की प्राि तय और यय की लेखापरीक्षा इस बात के होते हुए भी दो वषर्
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 25 से 32 की अितिरक्त अविध तक करता रहे गा िक उपधारा (1) या उपधारा (2) म िनिदर् ट
शत उन दो बाद के वष म से िकसी के दौरान परू ी नहीं की जाती है । x
16.
x
x संघ की या रा य की प्राि तय की लेखापरीक्षा- िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक का क तर् य होगा िक वह उन सभी प्राि तय की
लेखापरीक्षा करे जो भारत की और प्र येक रा य की और प्र येक ऐसे संघ
रा यक्षेत्र की िजसम िवधान सभा है , संिचत िनिध म संदेय है, और अपना
समाधान कर ले िक उस बारे म सभी िनयम और प्रिक्रयाएं राज व के िनधार्रण,
संग्रहण और उिचत आंवटन की प्रभावपूणर् जांच पड़ताल सिु नि चत करने के िलये
पिरकि पत है और उसका स यक
प से अनुपालन िकया जा रहा है । 42. भारत दरू संचार िनयामक प्रािधकरण का िनयम 5 सेवा प्रदाता (बही खात
और अ य द तावेज का अनरु क्षण) िनयमावली, 2002 के अंतगर्त पढ़ा जाये:- ‘‘5. लेखापरीक्षा- प्रािधकारी को िनयम 3 के उप-िनयम से संदिभर्त ऐसे सभी
बहीखात और द तावेज को प्र येक सेवा प्रदाता प्र तत
ु करे गा, जो राज व के
स यापन पर प्रभाव डालेगी- (i) लाइसस फीस गणना के उ े य हे त,ु और (ii) भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक को िववरण या सच
ू ना प्र तत
ु करने के
िलए, िजससे संबंिधत सच
ू ना भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक को प्र तत
ु
िकया जाना हो और भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक, भारत के िनयंत्रक-
महालेखापरीक्षक (कतर् य, शिक्तयां और सेवा-शत) अिधिनयम, 1971 की 56)
की धारा 16 के प्रावधान के अनुसार इसकी लेखापरीक्षा कर सकता है ।’’ 43. भारत के संिवधान के अनु छे द को सरसरी तौर पर पढ़ने से पता चलेगा िक
संसद
वारा बनाए गए िकसी कानून के तहत या उसके
वारा िनधार्िरत कानून के
अनुसार संघ और रा य तथा िकसी अ य प्रािधकरण या िनकाय के लेखाओं के
संबंध म ऐसे कतर् य का पालन और ऐसी शिक्तय का प्रयोग करना भारत के
िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक का संवैधािनक कतर् य है । दस
ू रे श द म, संसद दो िवषय
पर कानून बना सकती है : (i) संघ और रा य के लेख से संबिं धत लेखापरीक्षा
कायर्क्षेत्र एवं तरीका, और (ii) ऐसे अ य िनकाय
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
या प्रािधकरण
के लेखे जो
प ृ ठ 26 से 32 लेखापरीक्षा कायर्क्षेत्र एवं तरीके सिहत भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक
लेखापरीक्षा के िवषयगत ह गे। वारा
44. हमारे िनणर्य के उ े य हे तु हम उस आधार पर आगे बढ़गे जो िनकाय या
प्रािधकरण के लेखे केवल भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक की लेखापरीक्षा के
िवषयगत ह गे जैसा िक यािचकाकतार्
वारा सझ
ु ाया गया था और यह िक िनजी
टे लीकॉम कंपिनयां भारत के संिवधान के अनु छे द 149
वारा धािरत िनकाय या
प्रािधकरण नहीं ह गे, यह प्र न छोड़ते हुए लेिकन एआईआर 1982 एससी 149
एसपी गु ता बनाम संघ सरकार के िनणर्य को दे खते हुए सव च यायालय ने
पैराग्राफ 62 म दे खा िक:- ‘‘िकसी भी सांिविधक प्रावधान की
याख्या बदलती अवधारणाओं और मू य
के साथ जड़
ु ी होनी चािहए और इसे उस सीमा तक होना चािहए जहां तक
याियक
याख्या के मा यम से इसकी अनुमित दे ता हो बि क, िनषेध या
समायोजन न करता हो तािक तेजी से बदलते समाज की आव यकता को पूरा
िकया जा सके जो तेजी से सामािजक एवं आिथर्क पिरवतर्न की ओर बढ़ रहा
है । यह आव यक है िक कानन
ू हवा म न हो। इसिलए यह अपेिक्षत है िक
इससे सामािजक उ े य पूरे िकए जाएं और सामािजक, आिथर्क और राजनीित
यव था को
यान म रखे िबना इसकी याख्या नहीं की जा सकती है । यहां
यायाधीन को सज
ृ ना मक कायर् करने के िलए कहा जाता है । उसे िवधाियका
वारा प्रदान िकए गए सख
ू े कंकाल म गितशील
याख्या
वारा रक्त संचार
करना होता है, वो भी इस आशय से जो प्रदान िकए गए मू य
अवधारणाओं वाले िनयम से सामंज य बैठाएगा और
एक प्रभावी तंत्र बन सकेगा।’’ और
याय दे ने के िलए यह
और एआईआर 1987 एससी 222 एसपी जैन बनाम कृ णा मोहन गु ता और
अ य के प म िरपोटर् िकये गये िनणर्य म, पैराग्राफ 18 म यह अवलोकन िकया
गया था जो अग्रिलिखत है- ‘‘हमारा िवचार यह है िक कानन
ू को मामले का यवहािरक पक्ष दे खना चािहए
और उस उ े य के िलए िक्रयाशील होना चािहए। िजसके िलए उसे बनाया
गया है और प्रौ योिगकी की मौजूदा क्षमता और समद
ु ाय की जीवन शैली का
पिरज्ञान भी करना चािहए।’’ ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 27 से 32 45. अत: हम संिवधान सभा चचार्ओं से उद्धरण को नोट नहीं करते िज ह हम
प्रचरु मात्रा म पढ़ चक
ु े ह, यह आकलन करने म असफल नहीं ह गे िक कानन
ू के
मामले पर कोई भी चचार् की आशय नहीं बताया जा सकता जैसा िक कानून को
पूराना नहीं समझा जाये। अिपत,ु समाज की गित शीलता के अनुसार कानून की
अथर्पूणर्
प से
याख्या की जानी चािहए। आधिु नक प्रगितशील समाज म, िजस
समय पर कानून बनाया गया उस समय प्रयक्
ु त श द से दशार्ये गये अथर् से
िवधान मंडल की अवधारणा तक सीिमत रहना तकर्पण
ू र् नहीं है , जब तक िक
प्रितकुल िवचार सामने नहीं आते। 46. भारत के संिवधान की धारा 266 को अग्रिलिखत
प से पढ़ा जाता है :- ‘‘266. भारत और रा य की समेिकत िनिध और लोक लेखा- धारा 267 के प्रावधान और रा य के िवशेषकर , और शु क की कुल
या आंिशक िनवल लाभ के िनधार्रण, भारत सरकार वारा प्रा त सभी राज व,
(1)
राजकोषीय िबल को जारी कर सरकार
वारा प्रा त सभी ऋण, ऋण या
अथ पाय अिग्रम और ऋण के पन
ु : भग
ु तान म सरकार
वारा प्रा त धन के
संबंध म इस अ याय के प्रावधान के अंतगर्त ‘‘भारत की समेिकत िनिध’’ के
प म एक समेिकत िनिध माना जाता है, और िकसी रा य की सरकार
वारा
ऋण, ऋण या अप पाय अिग्रम और ऋण के पुन: भग
ु तान म सरकार
वारा
प्रा त सभी राज व, राजकोषीय िबल का जारी कर सरकार
वारा प्रा त सभी
प्रा त धन के संबध
ं म इस अ याय के प्रावधान के अंतगर्त ‘‘भारत की
समेिकत िनिध’’ के
(2)
प म एक समेिकत िनिध माना जाता है । भारत सरकार या िकसी रा य सरकार
वारा या िकसी और से प्रा त
सभी अ य सावर्जिनक धन भारत के सावर्जिनक खाते या रा य के
सावर्जिनक खाते म क्रेिडट िकया जाएगा। (3)
भारत की समेिकत िनिध या रा य की समेिकत िनिध समेिकत िनिध
से अितिरक्त िकसी धन को कानून के अनुसार और सिवधान म िदये गये
उ े य के िलए और ढं ग से िविनयोिजत िकया जाएगा।’’ 47. हम ‘भारत सरकार
वारा प्रा त सभी राज व की अिभ यिक्त को उजागर करते ह’
और धारा 266 म ‘भारत की समेिकत िनिध के अंतगर्त एक समेिकत िनिध को तैयार
करगे’ ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 28 से 32 48. धारा 266 म प्रकािशत एआईआर 1957 पंजाब 45 गोपी प्रसाद बनाम पंजाब
रा य के
प म िकए गये िनणर्य को पंजाब उ च
वारा ‘राज व’ अिभ यिक्त के
यायालय की िडवीजन बच
प म दे खा गया परं तु इस बात म कोई शंका नहीं
िक इसका अथर् है िक रा ट्र की आय कर , शु क और रा ट्र के
के िलए अ य
और
यय के भग
ु तान
ोत से हुई। सामा यत: यह श द सरकार की आय से संबिं धत है
प म प्रयोग की जाती है , इसका अथर् है िकसी भी ोत और िकसी भी ढं ग से
रा य के िलए एकित्रत धन और प्राि तयां है । संवैधािनक आव यकताओं के म न
े जर
रा य की सारी आय क्रेिडट की जानी चािहए और रा य की समेिकत िनिध का भाग
बनती है, यह
प ट है िक िकसी ठे के से रा य
राज व से बाहर नहीं रखा जा सकता। वारा प्रा त आय को सामा य
49. इस प्रकार, यह भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक का संवैधािनक दािय व है
िक वे संघ की लेखाओं के संबंध म ऐसे कतर् य का िन पादन करे जैसा िक संसद
वारा बनाए गए िकसी कानून के तहत िनधार्िरत िकया जा सकता है और संसद
वारा बनाए गए कानन
ू भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक (कतर् य, शिक्तयाँ और
सेवा-शत) अिधिनयम, 1971 म ह। इसकी धारा 10 के अनस
ु ार, िनयंत्रक-
महालेखापरीक्षक पर आरं िभक अधीन थ लेखाओं से संघ-सरकार के लेखाओं के
संकलन करने का दािय व है । इसकी धारा 13 के अनुसार, िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक
को भारत की समेिकत िनिध से सभी
यय की लेखापरीक्षा करने का दािय व है ।
इसकी धारा 14 के अनस
ु ार, संघ या रा य से आंिशक
प से िव तपोिषत िनकाय
या प्रािधकरण के राज व की लेखापरीक्षा िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक के िवषयगत है
और इसकी धारा 16 के अनुसार, िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक को सभी प्राि तय की
लेखापरीक्षा करना है जो भारत के संिवधान के अनु छे द 266 और भारत की
समेिकत िनिध म दे य ह, िजसका हमन यहाँ उ लेख िकया है और िजसके संबंध म
हमन पहले ही याख्या की है िक राज व का क्या मतलब समझा जाना चािहए। 50. कानूनी ि थित को सरल भाषा म इस तरह से बताया जा सकता है : संिवधान
(अनु छे द 149) म िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक को संघ की लेखाओं के संबंध म ऐसे
कतर् य के िनवर्हन और ऐसी शिक्तय का प्रयोग करने का अिधदे श है । लेखाओं म
संघ
वारा प्रा त और यय िकए गए धन के अिभलेख शािमल ह गे। अनु छे द 149
के तहत पिरकि पत लेखे के संबध
ं
म शिक्तयां ऐसी ह गी जो संसद
िनधार्िरत या उसके
वारा
वारा बनाए िकसी कानन
ू के तहत ह गी िजसका ता पयर् होगा
िक संसद इसकी लेखांकन, संकलन और लेखाकरण के संबध
ं म कानून बना सकती
ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 29 से 32 है । भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक (कतर् य, शिक्तयाँ और सेवा-शत) अिधिनयम,
1971 की धारा 10 पर अमल करते हुए संसद ने उस तरीके का प्रावधान िकया
िजसम अनु छे द 149 म अपेिक्षत शिक्तय का प्रयोग लेखाओं का रख-रखाव और
उनके संकलन के संबंध म िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक
वारा िकया जाएगा और धारा
13 म वह तरीका बताया गया है िजसके मा यम से
यय की लेखापरीक्षा की
जाएगी और धारा 16 म बताया गया है िक िकस प्रकार प्राि तय की लेखापरीक्षा
की जाएगी। 51. हम
भारत
के
संिवधान
के
अनु छे द
149
और
भारत
के
िनयंत्रक-
महालेखापरीक्षक (कतर् य, शिक्तयाँ एवं सेवा-शत) की धारा 16 के बीच िकसी भी
िवरोधाभास का कोई तकर् प्रतीत नहीं होता है । हम कारण,
याख्या और शत के
िलए भारतीय टे लीकॉम िविनयामक प्रािधकरण के िनयम 5, सेवाप्रदाता (बही खात
एवं अ य द तावेज का अनुरक्षण) िनयमावली, 2002 और भारत के िनयंत्रक-
महालेखापरीक्षक (कतर् य, शिक्तयाँ एवं सेवा-शत) की धारा 16 के बीच कोई भी
िवरोधाभास का कोई भी तकर्प्रतीत नहीं होता, हमने पहले भी इसके साथ-साथ ऊपर
भी िनणर्य िदया था िक स चे अथ म राज व से जड़
ु े िकसी भी अंतरण (ओं) के
अनस
ं म लाइससी
ु ार बिहय के स पण
ू ,र् सटीक और ईमानदारी से अनरु क्षण के संबध
कद्र सरकार के लेखाकार ह। (उपरोक्त पैरा 33 दे ख)। हमने उपरोक्त पैराग्राफ 31
म पहले ही िनणर्य िदया है िक लाइसस करार की शत के अंतगर्त लाइससी ने
वयं के साथ-साथ कद्र सरकार की लेखांकन िज मेदारी का वहन िकया है । इसिलए
राज व प्राि तय के संबध
ं म लाइसिसय के लेखे को कद्र सरकार का लेखा कहा जा
सकता है और इस प्रकार यह भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक (कतर् य, शिक्तयाँ
एवं सेवा-शत) की धारा 16 के िवषयगत है । 52. हमने दे खा िक भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक की शिक्त लाइसिसय
वारा
बनाए गए लेखाओं की राज व लेखापरीक्षा करना है जो भारतीय टे लीकॉम िविनयामक
प्रािधकरण के िनयम 5, सेवा प्रदाता (बही खात एवं अ य द तावेज का अनुरक्षण)
िनयमावली, 2002 म नहीं है लेिकन भारत के संिवधान के अनु छे द 266 के संदभर् म
ऊपर हमारे
वारा याख्या िकए गए राज व की अवधारणा के साथ भारत के संिवधान
के अनु छे द 149, भारतीय टे लीकॉम िविनयामक प्रािधकरण के िनयम 5, सेवा प्रदाता
(बही खात एवं अ य द तावेज का अनरु क्षण) िनयमावली, 2002 से जड़
ु े िन कषर् म है । ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 30 से 32 53. इस प्रकार हम िन कषर् िनकालते ह िक न तो भारतीय टे लीकॉम िविनयामक
प्रािधकरण के िनयम 5, सेवा प्रदाता (बही खात एवं अ य द तावेज का अनुरक्षण)
िनयमावली, 2002, भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक (कतर् य, शिक्तयाँ एवं सेवा-शत)
की धारा 16 की शिक्तय से बाहर है और न ही धारा 16 भारत के संिवधान के
अनु छे द 149 से बाहर है । िनयम एवं धारा भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक
वारा
वाले प्र येक
वारा
लेखापरीक्षा िकए जाने वाले राज व के मा यम से भारत की संिचत िनिध म आने-जाने
पये की संवैधािनक योजना म पण
र् या उपयुक्त है । हमारे
ू त
याख्याियत िनयम, धारा और संवैधािनक प्रावधान नए उभरते िविनयामक रा य की
जिटल िवशेषताओं म पण
र् : उपयुक्त है िजसे माकीकरण और औपचािरकता के साथ
ू त
जड़
ु ी मह वपण
ू र् िवशेषता को बदलते हुए सरकारी क्षत-िवक्षत सं थान का पन
ु िनर्मार्ण
िकया जाए, प्रणालीगत सच
ू ना के प्रावधान की पहुँच आंतिरक व बाहरी दोन तक तथा
िनयंत्रण तंत्र और सावर्जिनक िरपोिटर्ं ग को और मजबत
ू बनाया जाए। 54. भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक को एक अनु मारक के मा यम से
चेतावनी/टे लीकॉम सेवा प्रदाताओं के लेखाओं के संबंध म लेखापरीक्षा को केवल
प्राि तय
से संबिं धत लेखापरीक्षा करनी है न िक कुछ और/भारत के िनयंत्रक-
महालेखापरीक्षक को भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक (कतर् य, शिक्तयाँ एवं सेवा-
शत) की धारा 16 की धारा 14(2) के तहत सभी शिक्तय को अपनाते हुए वयं
को उलझाना नहीं चािहए िजसम
यय म िव वसनीयता, बुिद्धम ता और
िमत यियता जैसे पहलओ
ु ं की जांच शािमल है । टे लीकॉम सेवा प्रदाता को हमारे
वारा- मरण कराया जाएगा जो हमने उपरोक्त पैराग्राफ 18 और 19 म िलखा है
और भारत के िनयंत्रक-महालेखापरीक्षक को उपरोक्त पैराग्राफ 20 म हमारे उ लेख
वारा
मरण कराया जाएगा। दोन के बीच सहिक्रयता से न केवल उ योग को
लाभ होगा, बि क दे श की अथर् यव था और समाज को भी काफी लाभ होगा,
लेिकन िनगम सश
ु ासन म सावर्जिनक आ मिव वास
लगेगा। थािपत करने म काफी समय
55. दायर यािचका खािरज़ की जाती है लेिकन 56. अंतिरम आदे श समा त िकया जाता है । (प्रदीप नंदराजोग) ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
प ृ ठ 31 से 32 यायाधीश
(वी.कामे वर राव) जनवरी 06, 2014 ड य(ू सी) एनओएस.3673/2010 एवं 3679/2010
यायाधीश प ृ ठ 32 से 32 
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