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भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक ड्रॉफ्ट निष् पादि लेखापरीक्षण ददशानिदेश 2014

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भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक ड्रॉफ्ट निष् पादि लेखापरीक्षण ददशानिदेश 2014
भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
ड्रॉफ्ट निष्पादि लेखापरीक्षण ददशानिदे श 2014
Performance Auditing Guidelines – SAI India
1|Page
विषय सच
ू ी
अध्याय सं.
अध्याय शीषषक
भूममका
पष्ृ ठ सं.
ii
अध्याय 1
प्रस्ताििा
1-12
अध्याय 2
निष्पादि लेखापरीक्षा के मलए अधिदे श तथा सामान्य
13-26
मसद्िान्त
अध्याय 3
िीनतगत लेखापरीक्षा योजिा और लेखापरीक्षा विषयों का चयि
27-34
अध्याय 4
िैयक्‍तक निष्पादि लेखापरीक्षाओं की योजिा
35-56
अध्याय 5
निष्पादि लेखापरीक्षा का कायाषन्ियि
57-67
अध्याय 6
साक्ष्य एिं प्रलेखि
68-79
अध्याय 7
प्रनतिेदि प्रक्रिया
80-92
अध्याय 8
अिि
ु ती निष्पादि लेखापरीक्षा
93-99
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
i
भमू मका
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षण‍ ददशा-निदे श‍ 2004‍ से‍ विभाग‍ को‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षण‍ के‍ प्रचललत‍
अंतरााष्‍रीय‍ मािक‍ अपिािे‍ तथा‍ जोखखम‍ आधाररत‍ योजिा‍ एिं‍ लेखापरीक्षा‍के‍ िैज्ञानिक‍तरीकों‍ के‍
माध्‍यम‍से‍विषयों‍के‍चयि‍में ‍कठोरता‍और‍अिुशासि‍लािे‍में ‍मदद‍लमली।‍हालांकक‍समय‍के‍साथ-
साथ‍ बहुत‍ अधधक‍ समय‍ से‍ सिोच्‍च‍ लेखापरीक्षा‍ संस्‍थाओं‍ (आईएसएसएआईएस)‍ के‍ ललए‍ िए‍
अंतरााष्‍रीय‍ मािकों‍ के‍ अिुरूप‍ बिे‍ रहिे‍ के‍ साथ-साथ‍ विलभन्‍ि‍ क्षेत्रों‍ और‍ सरकारी‍ पररिेश‍ में‍
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षाओं‍ के‍ दौराि‍ हमारे ‍ द्िारा‍ सीखे‍ गए‍ सबकों‍ के‍ आधार‍ पर‍ आईएएण्‍डएडी‍ में‍
इसकी‍ प्रासंधगकता‍ के‍ ललए‍ भी‍ इि‍ ददशा-निदे शों‍ के‍ संशोधि‍ की‍ आिश्‍यकता‍ महसूस‍ की‍गई‍ थी।‍
एक्‍सपोजर‍ड्रॉ फ्ट्स‍के‍पररचालि‍की‍कठोर‍प्रकिया,‍कायाशाला,‍चचााओं‍ के‍माध्‍यम‍से‍ उिकी‍जांच‍
तथा‍सभी‍स्‍तरों‍पर‍अधधकाररयों‍से‍ललखखत‍फीडबैक‍प्राप्‍त‍ककया‍गया‍जजसे‍िए‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍
ददशा-निदे शों‍ में ‍ शालमल‍ ककया‍ गया।‍ ‘निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षण‍ ददशा-निदे श‍ 2014’‍ के‍ रूप‍ में ‍ इसका‍
विमोचि‍करते‍हुए‍मुझ‍े अपार‍हषा‍हो‍रहा‍है ।‍
इि‍ददशा-निदे शों‍में ‍कई‍विलशष्‍ट‍विशेषतायें‍है ।‍यह‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍के‍लसद्धांतों‍के‍िैचाररक‍
आधार‍ निधााररत‍ करता‍ है‍ और‍ मुख्‍यालय‍ स्‍तर‍ पर‍ िीनतगत‍ क्षेत्रीय‍ लेखापरीक्षा‍ स्‍तर‍ पर‍ योजिा‍
प्रकिया‍ के‍ साथ‍ संघदटत‍ रूप‍ से‍ जोड़िे‍ की‍ आिश्‍यकता‍ पर‍ बल‍ दे ता‍ है ।‍ ददशानिदे श‍ विलभन्‍ि‍
लेखापरीक्षा‍दृजष्‍टकोणों‍पर‍प्रकाश‍डालते‍हैं,‍जो‍अपिाये‍जा‍सकते‍हैं।‍एक‍िई‍लेखापरीक्षा‍डडजाइि‍
मैदरक्स‍जजसका‍लेखापरीक्षा‍की‍पूण‍ा अिधध‍में ‍लगातार‍प्रयोग‍ककया‍जािा‍है ‍और‍समीक्षा‍जािी‍है‍
तथा‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषा‍मैदरक्स‍‍से‍ललंक‍ककया‍जािा‍है ,‍को‍निधााररत‍ककया‍गया‍है।‍कड़ी‍प्रलेखि‍
प्रकिया‍की‍प्रभािशाली‍अलभव्‍यजक्‍त‍और‍अनििायाता,‍जजसे‍ दे खा‍जािा‍चादहये,‍इि‍ददशानिदे शों‍ की‍
एक‍और‍उल्‍लेखिीय‍विशेषता‍है ।‍ररपोदटिं ग‍के‍तरीकों‍की‍रूपरे खा‍बिािे‍और‍लसफाररशें‍करते‍समय‍
यह‍ संतुललत‍ ररपोदटिं ग‍ सुनिजश्‍चत‍ करिे‍ के‍ ललये‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्‍ि‍ के‍ साथ‍ निरं तर‍ बातचीत‍ की‍
आिश्‍यकता‍पर‍ध्‍याि‍केजन्‍ित‍करता‍है।‍इसके‍अनतररक्‍त,‍प्रशासि‍में‍सुधार‍लािे‍के‍ललये‍निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍ररपोटों‍ पर‍अमल‍करिे‍ की‍आिश्‍यकता‍पर‍प्रकाश‍डाला‍गया‍है।‍ददशानिदे शों‍ को‍और‍
अधधक‍संक्षक्षप्‍त‍और‍केंदित‍करिे‍के‍ललये‍भी‍प्रयास‍ककये‍गये‍हैं।
यह‍संस्‍करण‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍ददशा‍निदे श‍2004‍को‍प्रनतस्‍थावपत‍करता‍है ‍और‍तुरंत‍लागू‍होगा।‍
शमश कान्त शमाष
भारत‍के‍नियंत्रक‍एिं‍महालेखापरीक्षक‍
जॉूि‍2014
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
ii
1.
प्रस्ताििा
1.1
इि‍ ददशानिदे शों‍ में ‍ भारत‍ के‍ नियंत्रक-महालेखापरीक्षक‍ द्िारा‍ अध्‍यक्षक्षत‍ भारतीय‍ लेखा‍
तथा‍लेखापरीक्षा‍विभाग‍(आईएएंडएडी)‍इसके‍बाद‍में ‍विभाग‍के‍रूप‍में ‍संदलभात‍है ,‍में ‍निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षण‍ की‍ पूरी‍ प्रकिया‍ हे तु‍ एक‍ रूपरे खा‍ दी‍ गई‍ है ।‍ इिमें ‍ उि‍ सिोत्तम‍ पद्धनतयों‍ का‍
प्रािधाि‍ ककया‍ गया‍ है ‍ जजिका‍ विभाग‍ के‍ अधधकाररयों‍ तथा‍ कमाचाररयों‍ को‍ सभी‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍ में ‍ योजिा,‍ कायाान्ियि,‍ ररपोदटिं ग,‍ अिुिती‍ प्रकियाओं‍ तथा‍ गुणित्ता‍ आश्‍िासि‍ में‍
अिुसरण‍ करिा‍ चादहए।‍ इिमें ‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ करिे‍ के‍ ललए‍ संगत‍ लसद्धांतों,‍ उद्दे श्‍यों,‍
अलभगम,‍कायाप्रणाली,‍तकिीकों‍तथा‍प्रकियाओं‍ को‍प्रस्तुत‍ककया‍गया‍है ।‍ये‍ ददशानिदे श‍भारत‍
के‍ नियंत्रक-महालेखापरीक्षक‍ तथा‍ अन्तरााष्‍रीय‍ मािक‍ सिोच्च‍ लेखापरीक्षा‍ संस्थाि‍
(आईएसएसएआईएस)‍100,‍300‍तथा‍3000‍के‍मौजूदा‍ददशा-निदे शों‍और‍एसोसाई‍के‍निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍ ददशा-निदे शों‍ पर‍ आधाररत‍ है ।‍ इि‍ ददशा-निदे शों‍ में ‍ व्यापक‍ कायाान्ियि‍ निदे श‍
अंतविाष्‍ट‍है ‍तथा‍यह‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श,‍2004‍के‍प्रनतस्‍
थापि‍में ‍है ।
व्यक्‍तगत पहल तथा व्यािसानयक निणषय की गुंजाइश
1.2
जबकक‍ये‍ ददशानिदे श‍आदे शात्मक‍स्िरूप‍के‍होते‍ है ‍ तथावप‍उिका‍आशय‍महालेखाकार‍
के‍उस‍व्यािसानयक‍निणाय‍का‍पूणत
ा या‍स्थाि‍लेिा‍िहीं‍ है ‍ जो‍सत्ता‍के‍प्रचालिों‍के‍अलग‍क्षेत्रों‍
से‍और‍प्रत्येक‍क्षेत्र‍के‍अन्दर‍अलग‍विषयों‍से‍सुसंगत‍हो।‍महालेखाकार‍से‍यह‍अपेक्षा‍की‍जाती‍
है ‍ कक‍िह‍इि‍ददशानिदे शों‍में ‍ नियत‍प्रािधािों‍के‍प्रनत‍जस्थनत‍बिाए‍या‍विशेष‍समायोजि‍करे ।‍
तथावप,‍महालेखाकारों‍से‍ यह‍अपेक्षा‍की‍जाएगी‍कक‍िे‍ ददशा-निदे शों‍से‍ सभी‍महत्िपण
ू ‍ा विचलिों‍
के‍तकााधार‍का‍सुस्पष्‍टता‍से‍प्रलेखि‍करें ‍तथा‍सक्षम‍प्राधधकारी‍से‍प्राधधकार‍प्राप्त‍करें ।

महालेखाकार‍के‍संदभा‍में ‍एसएजी‍तथा‍उक्त‍आईएएंडएडी‍के‍अन्दर‍क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍कायाालयों‍के‍सभी‍प्रमुख‍
शालमल‍है ।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
1 | पष्ृ ठ
‍
निष्पादि लेखापरीक्षण
1.3
लेखापरीक्षा‍ तथा‍ लेखा,‍ 2007‍ के‍ विनियम‍ विभाग‍ द्िारा‍ ली‍ गई‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ ललए‍
उपयुक्त‍ ददशानिदे श‍ प्रदाि‍ करते‍ है ।‍ विभाग‍ अपिे‍ लेखापरीक्षण‍ काया‍ सीएजी‍ लेखापरीक्षण‍
मािक,‍2002‍के‍अिुसार‍करता‍है ‍ जजन्हें ‍ आईएसएसएआईज‍(100-400)‍से‍ अपिाया‍गया‍है ।‍
सीएजी‍का‍लेखापरीक्षण‍मािक‍4.9‍लेखापरीक्षा‍कायाक्षेत्र‍को‍निम्िािुसार‍िखणात‍करता‍है :
“शब्द‍ ‘लेखापरीक्षा’‍ में ‍ वित्तीय‍ लेखापरीक्षा,‍ नियलमतता‍ लेखापरीक्षा‍ तथा‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍
शालमल‍है ”।
लेखापरीक्षण‍मािक‍से‍ आगे‍ पता‍चलता‍है ‍ कक‍संिैधानिक‍उत्तरदानयत्ि‍के‍अिस
ु रण‍में ‍ विभाग‍
को‍अपिे‍द्िारा‍अथिा‍अपिी‍ओर‍से‍की‍जािे‍िाली‍लेखापरीक्षा‍के‍स्िरूप,‍कायाक्षेत्र,‍सीमा‍तथा‍
प्रमात्रा‍का‍निणाय‍करिे‍की‍शजक्त‍प्राप्त‍है ।
‘’निष्पादि लेखापरीक्षण उस सीमा का एक स्ितंत्र नििाषरण या जांच होती है क्जसे
एक संगठि, कायषिम अथिा योजिा ममतव्ययता, दक्षता तथा प्रभािकाररता से
प्रचामलत करती है ।‘’
लेखा तथा लेखापरीक्षा विनियम, 2007 का विनियम 68
1.4
विभाग‍ द्िारा‍ ककया‍ गया‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षण‍ एक‍ स्ितंत्र,‍ उद्दे श्‍यात्मक‍ तथा‍
विश्‍
िसिीय‍ जांच‍ है ‍ कक‍ क्या‍ सरकारी‍ उपिम‍ कायािम,‍ प्रणाली,‍ गनतविधध‍ अथिा‍ संगठि‍
लमतव्ययता,‍दक्षता‍तथा‍प्रभािकाररता‍के‍लसद्धांतों‍के‍अिुसार‍निष्‍पादि‍कर‍रहे ‍है ‍और‍क्या‍िे‍
सध
ु ार‍का‍केन्ि‍है ।
1.5
िई‍ सच
लेषण‍ करिे‍ अथिा‍ आत्मनिरीक्षण‍ करिे‍ तथा‍ सध
ू िा‍ उपलब्ध‍ करािे,‍ विश्‍
ु ार‍ के‍
ललए‍ उपयुक्त‍ लसफाररशों‍ में ‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षण‍ की‍ मांग‍ करते‍ है ।‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षाएं‍
निम्िललखखत‍द्िारा‍िई‍सूचिा,‍जािकारी‍अथिा‍मूल्यांकि‍दे ती‍है :
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
2 | पष्ृ ठ
‍

िया‍ विश्‍
लेषणात्मक‍ सूक्ष्‍मदृजष्‍ट‍ उपलब्ध‍ कराकर‍ (व्यापक‍ अथिा‍ गहि‍ विश्‍
लेषण‍ अथिा‍
िए‍पररपेक्ष्‍य);

मौजूदा‍सूचिा‍को‍विलभन्ि‍पणधाररयों‍तक‍अधधक‍सुगम‍बिाकर;

एक‍ स्ितंत्र‍ तथा‍ प्रमाखणक‍ धारणा‍ अथिा‍ लेखापरीक्षा‍ साक्ष्‍
य‍ के‍ आधार‍ पर‍ निष्‍कषा‍
उपलब्ध‍कराकर;

1.6
लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍के‍विश्‍लेषण‍पर‍आधाररत‍लसफाररशें‍उपलब्ध‍कराकर।
परम्परागत‍ रूप‍ से,‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ लमतव्ययता,‍ दक्षता‍ तथा‍ प्रभािकाररता‍ के‍
मामलों‍को‍सम्बोधधत‍करती‍है ।
ममतव्ययता, दक्षता तथा प्रभािकाररता
ममतव्ययता
प्रभािकाररता
दक्षता
ममतव्ययता
ममतव्ययता
निक्‍चत समय, उपयु‍त मात्रा तथा गुणित्ता और
सही मूल्य पर स्रोतो को उिके अधिग्रहण में
उपयोग करके लागत को कम करिा।
1.7
लमतव्ययता‍का‍स्ियं‍में ‍अिम
ु ाि‍लगािे‍का‍निदहताथा‍है ‍कक‍पररनियोजजत‍संसाधिों‍(मािि,‍
वित्तीय‍और‍सामग्री)‍पर‍एक‍मत‍बिािा।‍इसमें ‍यह‍निधाारण‍करिा‍अपेक्षक्षत‍होता‍है ‍कक‍क्या‍ददए‍
गए‍पररप्रेक्ष्‍य‍में ‍ संसाधि‍प्राप्त‍ककए‍गए‍है ,‍रखे‍ गए‍है ‍तथा‍उिका‍लमतव्ययता‍से‍उपयोग‍ककया‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
3 | पष्ृ ठ
‍
गया‍है ‍और‍उन्हें ‍निजश्‍
चत‍समय‍पर,‍उधचत‍मात्रा‍तथा‍गुणित्ता‍में ‍सहीं‍मूल्य‍पर‍अधधग्रहीत‍ककया‍
गया‍है ।‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षक‍को‍यह‍जांच‍करिी‍होती‍है ‍ कक‍क्या‍चि
ु े‍ गए‍साधि‍सािाजनिक‍
निधधयों‍के‍सिााधधक‍अथिा‍कम‍से‍कम‍एक‍उधचत‍लमतव्ययी‍उपयोग‍के‍घोतक‍है ?
दक्षता
दक्षता
मात्रा, गुणित्ता तथा समय के अिुसार पररनियोक्जत
स्रोतों तथा आबंदटत आउटपट
ु के बीच सहसंबंि।
1.8
दक्षता‍से‍ प्रमुख‍तात्पया‍उपलब्ध‍स्रोतों‍से‍ अधधकतम‍प्राप्त‍करिा‍है ।‍दक्षता‍िहां‍ होती‍है‍
जहां‍ वित्तीय,‍ मािि,‍ भौनतक‍ तथा‍ सच
ू िा‍ संसाधिों‍ का‍ उपयोग‍ ऐसे‍ हो‍ कक‍ संसाधि‍ प्रयोज्य‍
सामग्री‍ के‍ ककसी‍ ददए‍ गए‍ सेट‍ के‍ ललए‍ आउटपुट‍ अधधकतम‍ रहे ‍ या‍ इिपुट‍ की‍ ककसी‍ दी‍ गई‍
मात्रा‍और‍गण
ु ित्ता‍के‍ललए‍अथाात ्‍सही‍खचा‍करते‍हुए‍निगात‍निम्ितम‍रहे ।‍जांच‍करिे‍के‍ललए‍
मुख्‍य‍मामला‍यह‍है ‍ कक‍क्या‍संसाधिों‍का‍इष्‍
टतम‍या‍संतोषजिक‍ढं ग‍से‍ उपयोग‍ककया‍गया‍
है ‍ या‍ क्या‍गुणित्ता‍ और‍ प्रनतिताि‍ काल‍ के‍रूप‍में ‍ उसे‍ या‍िैसे‍ ही‍पररणाम‍कम‍संसाधिों‍ के‍
साथ‍ प्राप्त‍ ककए‍ जा‍ सकते‍ थे।‍ इसे‍ पररणाम‍ प्राप्त‍ करिे‍ के‍ ललए‍ प्रदाि‍ ककए‍ गए‍ माल‍ और‍
सेिाओं‍ की‍गुणित्ता‍और‍मात्रा‍तथा‍उिको‍उत्पाददत‍करिे‍ के‍ललए‍प्रयुक्त‍संसाधिों‍की‍लागत‍
के‍बीच‍संबंध‍मािा‍गया‍है ।
1.9
दक्षता‍पर‍एक‍निष्‍कषा‍ का‍अन्य‍अिधधयों‍के‍साथ‍या‍एक‍मािक‍के‍साथ,‍जजसे‍ सत्ता‍
िे‍ सुस्पष्‍ट‍ रूप‍ से‍ अपिाया‍ हो,‍ एक‍ तुलिा‍ करके‍ निरूपण‍ ककया‍ जा‍ सकता‍ है ।‍ दक्षता‍ का‍
निधाारण‍उि‍शतों‍पर‍भी‍आधाररत‍हो‍सकता‍है ‍जो‍विशेष‍मािकों‍से‍संबंधधत‍ि‍हो‍अथाात ्‍जब‍
मामलें‍इतिे‍जदटल‍हो‍कक‍कोई‍मािक‍ि‍हो।‍ऐसे‍मामलों‍में ,‍निधाारण‍सिोंत्तम‍पद्धनतयों‍तथा‍
उपलब्ध‍सूचिा‍पर‍आधाररत‍होिा‍चादहए।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
4 | पष्ृ ठ
‍
1.10 लेखापरीक्षण‍दक्षता‍में ‍ऐसे‍तथ्‍य‍सजम्मललत‍होते‍है ‍कक‍क्या:

मािि,‍वित्तीय‍तथा‍अन्य‍संसाधिों‍का‍दक्षता‍पूिाक‍उपयोग‍ककया‍गया‍है ;

सािाजनिक‍ क्षेत्र‍ के‍ कायािमों,‍ सत्ि‍ तथा‍ कायाकलापों‍ का‍ दक्षतापूिक
ा ‍ प्रबन्धि,‍ विनियमि,‍
गठि‍और‍निष्‍
पादि‍ककया‍गया‍है ;

सेिाएं‍एक‍समयबद्ध‍तरीके‍से‍प्रदाि‍की‍जाती‍है ;‍और

सािाजनिक‍क्षेत्र‍के‍कायािमों‍के‍लागत‍उद्दे श्‍य‍को‍प्रभािी‍ढं ग‍से‍प्राप्त‍ककये‍जाते‍है ।
प्रभािकाररता
प्रभािकाररता
1.11
नििाषररत उद्दे ‍यों को प्राप्त करिा तथा िांनित
पररणाम लािा।
प्रभािकाररता‍ अनििायात:‍ एक‍ लक्ष्‍य‍ प्राजप्त‍ की‍ संकल्पिा‍ है ।‍ इसमें ‍ इस‍ मुद्दे ‍ को‍
सम्बोधधत‍ककया‍जाता‍है ‍कक‍क्या‍कायािम/कायाकलाप‍िे‍अपिे‍उद्दे श्‍यों‍को‍प्राप्त‍कर‍ललया‍है ।‍
प्रभािकाररता‍पर‍ध्‍याि‍दे ते‍समय,‍तत्काल‍आउटपुट‍या‍उत्पादों‍तथा‍पूण‍ा प्रभाि‍या‍पररणाम‍के‍
बीच‍ अन्तर‍ करिा‍ महत्िपूण‍ा है ।‍ कायािम/कायाकलापों‍ की‍ प्रभािकाररता‍ के‍ ललए‍ पररणाम‍
महत्िपूण‍ा होते‍है ‍परन्तु‍इिपुट‍तथा‍आउटपुट‍को‍मापिा‍तथा‍निधााररत‍करिा‍अधधक‍कदठि‍हो‍
सकता‍है ।‍ पररणाम‍अधधकतर‍बाहृय‍घटकों‍से‍ प्रभावित‍होगें ‍ तथा‍इसमें ‍ अल्पकाललक‍निधाारण‍
की‍बजाय‍दीघाकाललक‍निधाारण‍अपेक्षक्षत‍हो‍सकते‍है ।
1.12 लेखापरीक्षण‍प्रभािकाररता‍में ‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍जा‍सकती‍है ,‍उदाहरणाथा:

यह‍निधाारण‍करिा‍कक‍क्या‍एक‍िये‍ या‍चाल‍ू सािाजनिक‍क्षेत्र‍के‍कायािम‍के‍उद्दे श्‍य‍तथा‍
इसके‍ललए‍उपलब्ध‍कराए‍गए‍ साधि‍(कािूिी,‍वित्तीय‍आदद)‍िीनत‍के‍ललए‍उधचत,‍संगत,‍
उपयुक्त‍या‍प्रांसधगक‍हैं;
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
5 | पष्ृ ठ
‍

प्रमाण‍सदहत‍यह‍निधााररत‍तथा‍तय‍करिा‍कक‍क्या‍एक‍िीनत‍के‍अिलोककत‍प्रत्यक्ष‍अथिा‍
अप्रत्यक्ष‍सामाजजक‍तथा‍आधथाक‍प्रभाि‍िीनत‍के‍अथिा‍अन्य‍कारणों‍की‍िजह‍से‍है ;

उि‍घटकों‍का‍पता‍लगािा‍जो‍संतोषजिक‍निष्‍
पादि‍या‍उद्दे श्‍य‍को‍पूरा‍करिे‍से‍रोकते‍हो;

यह‍निधााररत‍करिा‍कक‍क्या‍कायािम‍अन्य‍संबंधधत‍कायािमों‍का‍पूरक‍है ,‍उिकी‍िकल‍है ,‍
अनतव्यापि‍करती‍है ‍अथिा‍विरोध‍करती‍है ;

एक‍ कायािम‍ की‍ प्रभािकाररता‍ को‍ आकंिे,‍ म िीटररंग‍ तथा‍ ररपोदटिं ग‍ के‍ ललए‍ प्रबन्धि‍
नियंत्रण‍प्रणाली‍की‍पयााप्तता‍का‍निधाारण‍करिा;‍और

कायािमों‍का‍काया‍अधधक‍प्रभािी‍ढं ग‍से‍करिे‍के‍तरीके‍का‍पता‍लगािा।
दो मूल प्र‍ि
1.13 निष्‍पादि‍लेखापरीक्षक‍निम्िललखखत‍दो‍मूल‍प्रश्‍िों‍के‍उत्तर‍ढूंढ‍सकता‍है :

‍या सही तरीके से कायष क्रकया जा रहा है ?

‍या सही कायष क्रकया जा रहा है ?
व्यापक‍तौर‍पर‍बात‍करते‍हुए‍पहले‍प्रश्‍ि‍का‍अथा‍है ‍कक‍क्या‍िीनतगत‍निणायों‍को‍सही‍ढं ग‍से‍
ललया‍जा‍रहा‍है ।‍यह‍प्रश्‍ि‍सामान्यतया‍मािदण्‍
डों‍की‍तुलिा‍में ‍ निधाारण‍के‍साथ‍सम्बद्ध‍है ‍
अथाात ्‍निष्‍
पादि‍लेखापरीक्षक‍यह‍जाििा‍चाहते‍ है ‍ कक‍क्या‍कायाकारी‍िे‍ नियमों‍का‍अिलोकि‍
ककया‍है ‍ अथिा‍अपेक्षाएं‍ कायािम‍से‍ संगत‍है ।‍इस‍मुद्दे ‍ तक,‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍मुख्‍यतया‍
प्रचालिों‍ की‍ लमतव्ययता‍ या‍ दक्षता‍ के‍ विलभन्ि‍ पहलओ
ु ं‍ से‍ संबंधधत‍ है ।‍ दस
ू रा‍ प्रश्‍ि‍ उठाकर‍
विश्‍
लेषणों‍के‍ललए‍गुंजाइश‍काफी‍अधधक‍हो‍जाती‍है ‍ अथाात ्‍क्या‍सही‍काया‍ ककया‍जा‍रहा‍है ।‍
दस
ू रे ‍ शब्दों‍ में ,‍ प्रचालिों‍ की‍ प्रभािकाररता‍ की‍ यह‍ प्रश्‍ि‍ पछ
ू कर‍ जांच‍ की‍ जाएगी‍ कक‍ क्या‍
अपिाई‍गई‍िीनतयां‍ सही‍ढं ग‍से‍ कायााजन्ित‍हो‍गयी‍है ।‍उदाहरणाथा‍ एक‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षक‍
एक‍चयनित‍उपाय‍को‍िीनतगत‍उद्दे श्‍यों‍के‍साथ‍अप्रभािी‍तथा‍असंगत‍माि‍सकता‍है ।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
6 | पष्ृ ठ
‍
1.14 दस
ू रे ‍ प्रश्‍ि‍ का‍ उत्तर‍ ढूंढिे‍ के‍ प्रयास‍ में ,‍ कायाकारी‍ तथा‍ लेखापरीक्षा‍ को‍ ददए‍ काया‍ का‍
सम्माि‍करके‍लेखापरीक्षा‍अिुदेश‍का‍अनतिमण‍ि‍करके‍पयााप्त‍सािधािी‍बरती‍जािी‍चादहए।‍
तथावप,‍ सूचिा‍ अथिा‍ इिपुट‍ की‍ सत्यता‍ को‍ जजस‍ पर‍ िीनत‍ तैयार‍ करते‍ समय‍ विचार‍ ककया‍
गया‍ तथा‍ िीनतगत‍ उद्दे श्‍यों‍ को‍ पूरा‍ करिे‍ के‍ ललए‍ कायािमों‍ और‍ संसाधिों‍ की‍ पयााप्तता‍ का‍
निधाारण‍ककया‍जा‍सकता‍है ‍तथा‍उन्हें ‍सधू चत‍ककया‍जा‍सकता‍है ।
निष्पादि लेखापरीक्षा के उद्दे ‍य
1.15 निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षण‍ का‍ मख्
ु ‍य‍ उद्दे श्‍य‍ रचिात्मक‍ तरीके‍ से‍ लमतव्ययी,‍ प्रभािी‍ तथा‍
दक्षतापूण‍ा शासि‍ को‍ उन्ित‍ करिा‍ है ।‍ यह‍ जिाबदे ही‍ तथा‍ पारदलशाता‍ में ‍ भी‍ सहयोग‍ दे ता‍ है।‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍शासि‍के‍साथ‍उि‍चाजों‍की‍सहायता‍करके‍तथा‍निष्‍पादि‍को‍सुधारिे‍
के‍ललए‍जिाबदे दहयों‍का‍निरीक्षण‍करके‍उत्तरदानयत्ि‍को‍बढाती‍है ।‍इसे‍इस‍बात‍की‍जांच‍करके‍
ककया‍जाता‍है ‍ कक‍क्या‍विधानयका‍अथिा‍कायाकारी‍के‍निणायों‍को‍दक्षतापूिक
ा ‍तथा‍प्रभािपूिक
ा ‍
तैयार‍ और‍ कायााजन्ित‍ ककया‍ जाता‍ है ,‍ तथा‍ क्या‍ करदाता‍ अथिा‍ िागररकों‍ िे‍ धि‍ हे तु‍ मूल्य‍
प्राप्त‍ ककया‍ है ।‍ यह‍ विधानयका‍ की‍ धारणाओं‍ तथा‍ निणायों‍ पर‍ प्रश्‍ि‍ िहीं‍ उठाता‍ है ‍ परन्त‍ु यह‍
जांच‍ करता‍ है ‍ कक‍ क्या‍ कािि
ू ों‍ तथा‍ विनियमों‍ अथिा‍ उिके‍ कायाान्ियि‍ के‍ तरीके‍ में ‍ ककसी‍
अभाि‍में ‍ प्राप्त‍ककए‍जा‍रहे ‍ विलशष्‍
ट‍उद्दे श्‍यों‍का‍निषेध‍ककया‍है ।‍निष्‍
पादि‍लेखापरीक्षण‍उि‍
क्षेत्रों‍पर‍ध्‍याि‍दे ते‍ है ‍ जजिमें ‍ यह‍िागररकों‍के‍ललए‍मल्
ू य‍जोड़‍सकते‍ है ‍ तथा‍जजसमें ‍ सध
ु ार‍के‍
ललए‍सिााधधक‍क्षमता‍है ।‍यह‍उधचत‍कारा िाई‍करिे‍ के‍ललए‍उत्तरदायी‍पक्षों‍हे तु‍ रचिात्मक‍लाभ‍
प्रदाि‍ करती‍है ।‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षण‍संसद,‍ करदाताओं‍ जजन्हें ‍ प्रबंधि
ं ‍तथा‍विलभन्ि‍सरकारी‍
कायों‍के‍पररणामों‍में ‍ एक‍अन्तदृाजष्‍ट‍से‍ सरकारी‍िीनतयों,‍मीडडया‍तथा‍अन्य‍पणधाररयों‍द्िारा‍
लक्षक्षत‍ककया‍गया‍था,‍के‍द्िारा‍पारदलशाता‍को‍बढाता‍है । जजससे‍यह‍िागररको‍को‍प्रत्यक्ष‍तरीके‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
7 | पष्ृ ठ
‍
से‍ उपयोगी‍जािकारी‍उपलब्ध‍करािे‍ में ‍ सहयोग‍दे ता‍है ,‍जबकक‍यह‍सीख‍तथा‍सुधार‍के‍ललए‍
मूल‍रूप‍में ‍काया‍भी‍करे गा।
निष्पादि लेखापरीक्षा के तत्त्ि
1.16 सािाजनिक‍ क्षेत्र‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ कुछ‍ मूल‍ तत्ि‍ है ‍ (i)‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ तीि‍ पक्ष‍ अथाात ्‍
लेखापरीक्षक,‍उत्तरदायी‍पक्ष,‍अलभप्रेत‍उपयोगकत्ताा,‍(ii)‍विषय‍से‍संबंधधत‍सच
ू िा‍तथा‍(iii)‍विषय‍
तक‍पहुुँचिे‍के‍ललए‍मािदण्‍ड।

तीि पक्ष
1.17 सािाजनिक‍क्षेत्र‍लेखापरीक्षा‍में ‍ कम‍से‍ कम‍तीि‍पथ
ृ क‍पक्ष‍सजम्मललत‍है :‍लेखापरीक्षक,‍
उत्तरदायी‍पक्ष‍तथा‍अलभप्रेत‍उपयोगकत्ताा।‍ये‍िीचे‍संक्षक्षप्त‍रूप‍में ‍िखणात‍है :
1.18
लेखापरीक्षक: सािाजनिक‍ क्षेत्र‍ लेखापरीक्षण‍ में ,‍ लेखापरीक्षक‍ की‍ भूलमका‍ को‍ विभाग‍ तथा‍
लेखापरीक्षा‍करिे‍ के‍काया‍ के‍साथ‍प्रत्यायक्
ु त‍व्यजक्तयों‍ द्िारा‍निभाया‍जाता‍है ।‍तथावप,‍विलभन्ि‍
कायों‍तथा‍प्रकियाओं‍ के‍ललए‍अधधकाररयों‍ तथा‍कमाचाररयों‍के‍कायों‍ तथा‍उत्तरदानयत्िों‍ का‍स्पष्‍ट‍
अिधध‍ को‍ एक‍ पदािुिलमत‍ संरचिा‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍ बिाया‍ जाता‍ है ।‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ में ‍
लेखापरीक्षक‍परम्परागत‍रूप‍से‍विलभन्ि‍तथा‍परू कीकरण‍कौशल‍के‍साथ‍एक‍टीम‍के‍रूप‍में ‍काया‍
करते‍है ।
1.19 उत्तरदायी पक्ष: उत्तरदायी‍पक्ष‍से‍तात्पया‍परम्परागत‍रूप‍से‍लेखापरीक्षक्षत‍इकाई‍तथा‍उि‍
शासि‍के‍साथ‍प्रभाररत‍से‍हैं।‍उत्तरदायी‍पक्ष‍की‍भूलमका‍को‍एक‍समय‍में ‍विलभन्ि‍बबन्दओ
ु ं‍पर‍
कुछ‍मामलों‍में ‍ विषय‍ के‍विलभन्ि‍तथ्‍यों‍के‍ललए‍प्रत्येक‍जिाबदे ही‍के‍साथ‍व्यजक्तगत‍अथिा‍
सत्िों‍ के‍ रें ज‍ द्िारा‍ बांटा‍ जा‍ सकता‍ है ।‍ कुछ‍ पक्ष‍ ऐसे‍ कायों‍ के‍ ललए‍ उत्तरदायी‍ हो‍ सकते‍ हैं‍
जजन्होंिे‍ समस्याएं‍ उत्पन्ि‍की‍है ।‍अन्य‍एक‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍पररणामस्िरूप‍लसफाररशों‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
8 | पष्ृ ठ
‍
को‍ सम्बोधधत‍ करिे‍ के‍ ललए‍ बदलाि‍ की‍ शुरूआत‍ करिे‍ के‍ योग्य‍ हो‍ सकते‍ है ।‍ तब‍ भी‍ अन्य‍
सूचिा‍अथिा‍साक्ष्‍य‍सदहत‍लेखापरीक्षक‍उपलब्ध‍करािे‍के‍ललए‍उत्तरदायी‍हो‍सकते‍है ।
1.20 अमभप्रेत उपयोगकत्ताष: अलभप्रेत‍ उपयोगकत्ताा‍ िे‍ व्यजक्त‍ है ‍ जजसके‍ ललए‍ लेखापरीक्षक‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍ बिाते‍ है ।‍विधानयका,‍सरकारी‍एजेंलसयां‍ तथा‍पजब्लक‍सभी‍अलभप्रेत‍
उपयोगकत्ताा‍हो‍सकते‍है ।‍एक‍उत्तरदायी‍पक्ष‍भी‍एक‍अलभप्रेत‍उपयोगकत्ताा‍है ।

विषयिस्तु
1.21 निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍विषयिस्त‍ु को‍विलशष्‍ट‍कायािम,‍सत्त्िों‍अथिा‍निधधयों‍के‍ललए‍
सीलमत‍ ककया‍ जािा‍ जरूरी‍ िहीं‍ है ‍ परन्तु‍ इसमें ‍ गनतविधधयों‍ (उिके‍ आउटपुट,‍ पररणाम‍ तथा‍
प्रभािों‍ सदहत)‍ अथिा‍ मौजूदा‍ जस्थनत‍ (कारणों‍ तथा‍ पररणामों‍ सदहत)‍ को‍ सजम्मललत‍ ककया‍ जा‍
सकता‍ है ।‍ विषयिस्तु‍ को‍ उद्दे श्‍य‍ द्िारा‍ निधााररत‍ ककया‍ जाता‍ है ‍ तथा‍ लेखापरीक्षा‍ प्रश्‍िों‍ में ‍
प्रनतपाददत‍ककया‍जाता‍है ।

लेखापरीक्षा मािदण्ड
1.22 निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍संदभा‍में ‍लेखापरीक्षा‍मािदण्ड‍निष्‍पादि‍की‍विलशष्‍ट‍लेखापरीक्षा,‍
उधचत‍मािक‍है ‍ जजसके‍प्रनत‍प्रचालिों‍की‍लमतव्ययता,‍दक्षता‍तथा‍प्रभािकाररता‍को‍मल्
ू यांककत‍
तथा‍ निधााररत‍ ककया‍ जा‍ सकता‍ है ।‍ कई‍ बार‍ लेखापरीक्षक‍ भी‍ उस‍ मािदण्ड‍ के‍ विकास‍ अथिा‍
चयि‍करिे‍ में ‍ सजम्मललत‍हो‍सकता‍है ‍ जो‍लेखापरीक्षा‍से‍ सम्बद्ध‍हो‍जैसाकक‍आगे‍ अध्‍याय‍2‍
के‍तहत‍पैरा‍2.7‍से‍2.11‍में ‍चचाा‍की‍गई‍है ।
निष्पादि लेखापरीक्षण में आ‍िासि तथा वि‍िास
1.23 जैसाकक‍ सभी‍ लेखापरीक्षाओं‍ में ,‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ ररपोटा ‍ के‍ उपयोगकत्ताा‍ ररपोटा ‍ में ‍
सूचिा‍ के‍ उत्तरदानयत्ि‍ के‍ विषय‍ में ‍ विश्‍िास‍ की‍ मांग‍ करते‍ है ।‍ इसललए‍ सभी‍ मामलों‍ में ‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
9 | पष्ृ ठ
‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षक‍को‍पयााप्त‍तथा‍उपयुक्त‍प्रमाण‍पर‍आधाररत‍निष्‍
कषा‍प्रदाि‍करिे‍चादहए‍
तथा‍अिुपयुक्त‍ररपोटा ‍के‍जोखखम‍को‍सकियता‍से‍प्रबंधधत‍करिा‍चादहए।
1.24 आश्‍िासि‍का‍िह‍स्तर‍जो‍एक‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍प्रदाि‍करती‍है ,‍को‍पारदशी‍
तरीके‍ से‍ सम्प्रेवषत‍ ककया‍ जािा‍ चादहए।‍ क्या‍ लमतव्ययता,‍ दक्षता‍ तथा‍ प्रभािकाररता‍ को‍ प्राप्त‍
ककया‍गया‍है ,‍इसे‍विलभन्ि‍तरीको‍से‍निष्‍
पादि‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍में ‍बताया‍जा‍सकता‍है :

लमतव्ययता,‍दक्षता‍तथा‍प्रभािकाररता‍के‍पहलुओं‍पर‍एक‍सम्पूण‍ा समीक्षा‍के‍माध्‍यम‍से,‍
जब‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों,‍ विषयिस्त,ु ‍ प्राप्त‍ साक्ष्‍
य‍ तथा‍ पररणाम‍ ऐसे‍ निष्‍कषों‍ के‍ ललए‍
स्िीकृत‍हो,‍अथिा

लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों,‍ पूछे‍ गए‍ प्रश्‍िों,‍ प्राप्त‍ प्रमाणों,‍ उपयोग‍ ककए‍ गए‍ मािदण्‍
डों,‍ प्राप्त‍
पररणामों‍ तथा‍ विलशष्‍
ट‍ निष्‍कषों‍ को‍ शालमल‍ करते‍ हुए‍ विलभन्ि‍ बबन्दओ
ु ं‍ पर‍ ररपोटा ‍ में ‍
विलशष्‍
ट‍सूचिा‍उपलब्ध‍कराकर।
तथावप,‍ सामान्य‍ तौर‍ पर‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षक‍ से‍ वित्तीय‍ वििरण‍ पर‍ मत‍ के‍ रूप‍ में ‍ इसी‍
प्रकार‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्त्ि‍के‍स्तर‍पर‍लमतव्ययता,‍दक्षता‍तथा‍प्रभािकाररता‍की‍प्राजप्त‍पर‍एक‍
सम्पण
ू ‍ा मत‍उपलब्ध‍करािे‍की‍अपेक्षा‍िहीं‍की‍जाती‍है ।
1.25 सन्तुललत‍ररपोटा ‍ बिािे,‍निष्‍कषा‍ निकालिे‍ तथा‍लगातार‍लसफाररशों‍का‍निरूपण‍करिे‍ में‍
ललए‍ गए‍ निणायों‍ को‍ उपयोगकत्ताा‍ के‍ विश्‍
िास‍ को‍ बिािे‍ के‍ ललए‍ विस्तत
ृ ‍ ककया‍ जािा‍ चादहए।‍
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षक‍ को‍ मुख्‍य‍ रूप‍ से‍ यह‍ िणाि‍ करिा‍ चादहए‍ कक‍ कैसे‍ उिके‍ पररणाम‍
निष्‍कषों‍ तथा‍ यदद‍ ये‍ व्यिहाया‍ हो,‍ तो‍ एक‍ सम्पूण‍ा निष्‍कषा‍ के‍ सेट‍ का‍ कारण‍ बिे‍ है ‍ इसका‍
तात्पया‍ विकलसत‍ और‍ उपयोग‍ ककए‍ गए‍ मािदण्‍
डों‍ की‍ व्याख्‍या‍ करिा‍ तथा‍ यह‍ कहिा‍ है‍ कक‍
सभी‍प्रांसधगक‍दृजष्‍टकोणों‍पर‍विचार‍ककया‍गया‍है ।‍ररपोदटिं ग‍पर‍लसद्धान्त‍इस‍प्रकिया‍के‍ललए‍
आगे‍मागादशाि‍करते‍है ।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
10 | पष्ृ ‍ठ
निष्पादि लेखापरीक्षाओं के पररणाम
1.26
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षाएं‍ सािाजनिक‍स्रोतों‍के‍प्रबंधि‍की‍गुणित्ता‍के‍विषय‍में ‍ सूचिा‍तथा‍
आश्‍िासि‍ के‍ साथ‍ सत्त्ि‍ तथा‍ पणधारक‍ उपलब्ध‍ कराती‍ है ‍ तथा‍ बेहतर‍ प्रबंधि‍ पद्धनतयों‍ को‍
पहचाि‍तथा‍उन्ित‍करके‍सािाजनिक‍क्षेत्र‍प्रबंधकों‍की‍सहायता‍भी‍करती‍है ।‍इसललए‍निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षण‍ बेहतर‍ जिाबदे ही,‍ स्रोतों‍ के‍ अधधग्रहण‍ में ‍ लमतव्ययता‍ तथा‍ दक्षता‍ को‍ सुधारिे,‍
सािाजनिक‍ क्षेत्र‍ के‍ कायािम‍ उद्दे श्‍यों‍ को‍ प्राप्त‍ करिे‍ में ‍ प्रभािकाररता‍ को‍ सुधारिे,‍ सािाजनिक‍
क्षेत्र‍सेिा‍आिंटि‍में ‍ अधधक‍गण
ु ित्ता‍तथा‍प्रबंधि‍योजिा‍और‍नियंत्रण‍सध
ु ारिे‍ का‍कारण‍बि‍
सकता‍ है ।‍ ये‍ लेखापरीक्षकों‍का‍यह‍सुनिजश्‍चत‍ करिे‍ के‍ललए‍एक‍महत्िपूण‍ा उत्तरदानयत्ि‍है ‍ कक‍
प्रत्येक‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍ इि‍ उद्दे श्‍यों‍ में ‍ से‍ एक‍ अथिा‍ अधधक‍ प्राप्त‍ ककए‍
जाते‍है ।
1.27 निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षण‍ से‍ तात्पया‍ एक‍ पाररणाम‍ से‍ है ‍ परन्तु‍ इसके‍ द्िारा‍ पररणाम‍ से‍
िहीं‍ है ।‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍को‍मुख्‍य‍रूप‍से‍ आउटपुट‍तथा‍आउटकम‍और‍सामान्य‍तौर‍पर‍
व्यय‍अथिा‍प्रबंधि‍की‍गुणित्ता‍को‍प्रभावित‍करिे‍ िाली‍कायािम‍योजिा,‍कायाान्ियि,‍सूचिा‍
प्रणाली‍की‍कलमयों‍को‍दशाािे‍ िाली‍विश्‍
िसिीय,‍उद्दे श्‍यात्मक‍तथा‍स्ितन्त्र‍सूचिा‍के‍तरीके‍से‍
प्रबंधि‍ का‍ महत्ि‍ बढािे‍ के‍ ललए‍ लक्षक्षत‍ होिा‍ चादहए।‍ इसके‍ अनतररक्त,‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍
ररपोटा ‍ कायािम‍प्रबंधि‍ पर‍ महत्िपूण‍ा सूचिा‍तथा‍स्ितंत्र‍निधाारण‍प्रदाि‍ करती‍है ‍ तथा‍संसद,‍
राज्य‍ विधािमंडल‍ और‍ सामान्य‍ जिता‍ को‍ शालमल‍ करते‍ हुए‍ पणधाररयों‍ के‍ िीनतगत‍ उद्दे श्‍य‍
को‍ पूरा‍ करिे‍ की‍ सीमा‍ उपलब्ध‍ कराती‍ है ।‍ इस‍ प्रकार,‍ बेहतर‍ गण
ु ित्ता‍ िाली‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍अच्छे ‍शासि‍में ‍सहयोग‍दे ती‍है ।
1.28 निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍ के‍उपयोगकत्ताा‍ विश्‍िसिीय‍ररपोटा ‍ की‍उम्मीद‍करते‍ है ।‍इस‍
प्रकार,‍सभी‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षाओं‍ की‍योजिा‍बिाई‍जािी‍चादहए‍तथा‍अपेक्षक्षत‍पररणामों‍को‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
11 | पष्ृ ‍ठ
ध्‍याि‍ में ‍ रखते‍ हुए‍ निष्‍
पाददत‍ ककया‍ जािा‍ चादहए।‍ सत्त्ि‍ िीनतयों‍ तथा‍कायािमों‍ पर‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍के‍िास्तविक‍प्रभाि‍का‍मूल्यांकि‍करिे‍के‍ललए‍यह‍एक‍अच्छी‍पद्धनत‍है ।
निष्पादि लेखापरीक्षण ददशा-निदे श का सामान्य प्राििाि
1.29
ये‍ददशा-निदे श‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍प्रकिया‍के‍रूप‍में ‍एक‍िम‍में ‍प्रस्तत
ु ‍ककए‍जाते‍है ।‍
विभाग‍को‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षाओं‍के‍विषयों‍की‍विविधता‍का‍निपटाि‍करिा‍पड़ता‍है ‍तथा‍प्रनतकूल‍
सत्त्ि‍िातािरण‍में‍ लेखापरीक्षा‍करिी‍पड़ती‍है ।‍इसके‍अलािा,‍विभाग‍में ‍ संघ‍सरकार‍(लसविल,‍रक्षा,‍
रे लिे,‍ संचार,‍ राजस्ि‍ तथा‍ िाखणजज्यक‍ लेखापरीक्षा)‍ तथा‍ राज्य‍ सरकारों‍ की‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ ललए‍
लेखापरीक्षा‍प्रबधंि‍हे त‍ु विलभन्ि‍स्िरूप‍विद्यमाि‍है ।‍इसललए,‍ये‍ सत्त्ि‍िातािरण‍तथा‍लेखापरीक्षा‍
कायाालयों‍के‍सघंटि‍के‍संदभा‍में ‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍योजिा,‍क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍तथा‍समेकि‍
की‍िास्तविक‍प्रकिया‍को‍समायोजजत‍करिे‍के‍ललए‍आिश्‍यक‍हो‍सकती‍है ।
इि‍ ददशा‍ निदे शों‍ के‍ अध्याय 2‍ में ‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ ललए‍ अधधदे श‍ तथा‍ सामान्य‍
लसद्धांतों‍की‍चचाा‍की‍गई‍है ।
अध्याय 3 िीनतगत‍लेखापरीक्षा‍आयोजिा‍तथा‍लेखापरीक्षा‍विषयों‍के‍चयि‍की‍चचाा‍करता‍है ।
अध्याय 4 ‍ व्यजक्तगत‍निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍की‍आयोजिा‍कैसे‍ की‍जाए,‍ इसकी‍गणिा‍करता‍
है ।
अध्याय 5 निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍कायाान्ियि‍के‍विलभन्ि‍तत्त्िों‍की‍चचाा‍करता‍है ।
अध्याय 6 ‍‍साक्ष्‍य‍तथा‍प्रलेखि‍से‍संबंधधत‍पहलओ
ु ं‍की‍चचाा‍करता‍है ।
अध्याय 7
ड्र फ्टट‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍की‍ररपोदटिं ग‍प्रकिया‍की‍चचाा‍करता‍है ।
अध्याय 8
अिुिती‍प्रकियाओं‍के‍साथ‍सौदें ।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
12 | पष्ृ ‍ठ
2. निष्पादि लेखापरीक्षा के मलए अधिदे श तथा सामान्य मसद्िान्त
निष्पादि लेखापरीक्षा के मलए अधिदे श
2.1
विभाग‍के‍लेखापरीक्षा‍अधधदे श‍भारत‍के‍संविधाि‍से‍ ललए‍गए‍है ।‍भारतीय‍संविधाि‍का‍
अिुच्छे द‍151‍अिुबंधधत‍करता‍है ‍कक‍संघ‍अथिा‍राज्य‍सरकार‍के‍लेखाओं‍से‍संबंधधत‍भारत‍के‍
नियंत्रक‍ –‍ महालेखापरीक्षक‍ की‍ ररपोटा ‍ राष्‍रपनत‍ अथिा‍ उस‍ राज्य‍ के‍ राज्यपाल‍ को‍ प्रस्तुत‍ की‍
जािी‍चादहए‍जो‍उसे‍संसद‍के‍दोिों‍सदिों/राज्य‍विधािमंडल‍के‍समक्ष‍प्रस्तुत‍करे गा।‍सांविधधक‍
अिस्थाओं‍ को‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक‍(कत्ताव्य,‍शजक्तयां‍ तथा‍सेिा‍की‍शते)‍अधधनियम‍1971‍
के‍तहत‍बिाया‍जाता‍है ।‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षाओं‍के‍ललए‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक‍के‍
अधधदे श‍को‍इस‍अधधनियम‍की‍धारा‍23‍के‍साथ‍पदठत‍धारा‍13,‍14,‍15,‍16,‍17,‍19‍तथा‍
20‍ में‍ िखणात‍ ककया‍ जाता‍ हैं।‍ लेखापरीक्षा‍ तथा‍लेखा,‍ 2007‍ पर‍ विनियमों‍ का‍ अध्‍याय‍7‍ इस‍
विषय‍ पर‍ विलशष्‍
ट‍ मागादशाि‍ प्रदाि‍ करता‍ है ।‍ विनियम‍ 68‍ एक‍ स्ितन्त्र‍ निधाारण‍ अथिा‍ उस‍
सीमा‍ की‍ जांच‍ के‍ रूप‍ में ‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ का‍ िणाि‍ करता‍ है ‍ जजसके‍ ललए‍ एक‍ संगठि,‍
कायािम‍ अथिा‍ योजिा‍ को‍ लमतव्ययता,‍ दक्षता‍ तथा‍ प्रभािकाररता‍ पूण‍ा पररचाललत‍ ककया‍ जाता‍
है ।‍ अधधदे श‍ को‍ संघ‍ और‍ राज्य‍ सरकारों‍ की‍ प्राजप्तयों‍ और‍ व्यय‍ से‍ संबंधधत‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षाओं‍ के‍50‍िषों‍ से‍ ली‍गई‍प्रणाली‍तथा‍परम्परा‍ द्िारा‍अधधक‍सुदृढ‍ककया‍गया‍ है ,‍
सरकार‍िे‍ विभाग‍द्िारा‍बताए‍गए‍विलभन्ि‍विषयों‍पर‍स्िायत्त‍निकाय‍और‍अन्य‍सािाजनिक‍
क्षेत्र‍उद्यमों‍का‍समथाि‍ककया।
सामान्य मसद्िान्त
2.2
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍के‍सामान्य‍लसद्धान्त‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍के‍उि‍पहलओ
ु ं‍ पर‍
मागादशाि‍दे ते‍है ‍जो‍विभाग‍में ‍कायााजन्ित‍रूप‍में ‍लेखापरीक्षा‍प्रकिया‍से‍पूणत
ा या‍सम्बद्ध‍हैं।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
13 | पष्ृ ‍ठ
आचरण तथा स्ितंत्रता
2.3
लेखापरीक्षक को सुसंगत िीनतपरक अपेक्षाओं का पालि करिा चादहए और स्ितंत्र होिा
चादहए।
विभाग‍द्िारा‍अपिाई‍गई‍आचार‍संदहता‍लेखापरीक्षकों‍के‍स्तर‍पर‍उिके‍व्यिसानयक‍दानयत्िों‍
को‍ करते‍ समय‍ प्रत्येक‍ उक्त‍ उप-तत्त्िों‍ में ‍ िीनतपरक‍ आिश्‍यकताओं‍ की‍ व्याख्‍या‍ करती‍ है ।‍
आचार‍संदहता‍विभागाध्‍यक्ष,‍विभाग‍के‍सभी‍सदस्यों‍तथा‍विभाग‍के‍ललए‍अथिा‍उसकी‍ओर‍से‍
कायारत‍ सभी‍ व्यजक्त‍ जो‍ लेखापरीक्षण‍ तथा‍ लेखांकि‍ काया‍ में ‍ सजम्मललत‍ हो,‍ के‍ स्तर‍ पर‍
उपयुक्त‍ आचरण‍ को‍ पररकजल्पत‍ करती‍ है ।‍ आचार‍ संदहता‍ आिश्‍यकताओं‍ को‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍का‍आयोजि‍करते‍समय‍ध्‍याि‍में ‍रखा‍जाता‍है ।
लेखापरीक्षा उद्दे ‍य
2.4
लेखापरीक्षकों को स्पष्ट रूप से पररभावषत लेखापरीक्षा उद्दे ‍य तय करिे चादहए जोक्रक
ममतव्यता, क्षमता और प्रभािकाररता के मसद्िांतों से संबंधित हो।
लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍य‍ काया‍ की‍ अलभगम‍ और‍ डडजाइि‍ निधााररत‍ करता‍ है ।‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍य‍
े़
वििरणात्मक‍ (चीजे‍ कैसी‍ है ?)।‍ निदे शात्मक/मािदण्ड‍ संबंधी‍ (क्या‍ चीजे‍ िैसी‍ हैं‍ जैसी‍ होिी‍
चादहए)‍ और‍ विश्‍
लेषणात्मक‍ (चीजे‍ िैसी‍ क्यों‍ िहीं‍ है ‍ जैसी‍ होिी‍ चादहए)‍ हो‍ सकते‍ हैं।‍
निदे शात्मक‍ और‍ विश्‍लेषणात्मक‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍य‍ सम्भित:‍ अधधक‍ उपयोगी‍ होते‍ हैं।‍ सभी‍
मामलों‍ में ‍ लेखापरीक्षकों‍ को‍ विचार‍ करिा‍ चादहए‍ कक‍ लेखापरीक्षा‍ ककससे‍ संबंधधत‍ है ,‍ कौिसे‍
संगठि‍ और‍ सत्ि‍ शालमल‍ है ‍ और‍ ककसके‍ ललए‍ अंनतम‍ लसफाररशें‍ उपयुक्त‍ है ।‍ सुपररभावषत‍
उद्दे श्‍य‍ एकल‍ सत्ि‍ या‍ एक‍ सरकारी‍ उपिमों‍ का‍ अलभज्ञेय‍ समूह,‍ प्रणाललयाुँ,‍ पररचालिों,‍
कायािमों,‍गनतविधधयों‍या‍संगठिों‍से‍संबंधधत‍है ।‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य‍अधधक‍स्पष्‍ट‍उप-उद्दे श्‍यों‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
14 | पष्ृ ‍ठ
उप-विभाजजत‍ ककए‍ जा‍ सकते‍ हैं।‍ इन्हें ‍ समग्र‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍य‍ के‍ पररचयि‍ में ‍ विषय-िस्त‍ु
संबंधधत,‍पूरक,‍गैर-आच्छाददत‍और‍सामूदहक‍रूप‍से‍सम्बोधधत‍होिे‍चादहए।
लेखापरीक्षा दृक्ष्टकोण
2.5
लेखापरीक्षकों को एक पररणाम, कदठिाई या प्रणाली उन्मुख दृक्ष्टकोण अथिा इिके
ममश्रण का चयि लेखापरीक्षा डडजाइि
ा़ की सदृ
ु ढ़ता को सवु ििाजिक बिािे हे तु करिा चादहए।
कुल‍ लेखापरीक्षा‍ दृजष्‍टकोण‍ लेखापरीक्षा‍ का‍ एक‍ केंिीय‍ तत्ि‍ है ।‍ यह‍ की‍ जािे‍ िाली‍ जाुँच‍ का‍
स्िरूप‍निधााररत‍करता‍है ।‍यह‍आिश्‍यक‍ज्ञाि,‍सच
ू िा,‍डाटा‍लेखापरीक्षा‍प्रकियाएुँ‍ एिं‍ आिश्‍यक‍
विश्‍
लेषण‍ भी‍ पररभावषत‍ करता‍ है।‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ सामान्यत:‍ निम्ि‍ तीि‍ में‍ से‍ एक‍
दृजष्‍टकोण‍का‍अिुसरण‍करता‍है :

एक‍प्रणाली-उन्मुख‍दृजष्‍टकोण,‍जो‍कक‍प्रबंधि‍प्रणाललयों‍के‍उधचत‍कायाान्ियि‍की‍जाुँच‍
करता‍है ‍उदाहरणत:‍वित्तीय‍प्रबंधि‍प्रणाललयाुँ;

पररणाम‍उन्मुख‍दृजष्‍टकोण,‍जो‍कक‍मूल्यांकि‍करता‍है ‍ कक‍यदद‍अभीष्‍ट‍पररणाम‍अथिा‍
आउटकम‍उद्दे श्‍य‍की‍प्राजप्त‍हो‍गई‍है ‍ या‍अभीष्‍ट‍कायािम‍और‍सेिाओं‍ का‍पररचालि‍
हो‍रहा‍है ।

एक‍ कदठिाई-उन्मुख‍ दृजष्‍टकोण,‍जो‍कक‍ मािदण्ड‍की‍विशेष‍समस्याओं‍ अथिा‍विचलिों‍
के‍कारणों‍की‍जाुँच,‍सत्यापि‍और‍विश्‍लेषण‍करता‍है ।
2.6
लेखापरीक्षाएुँ‍ िीचे‍ से‍ ऊपर‍अथिा‍ऊपर‍से‍ िीचे‍ के‍पररप्रेक्ष्य
‍ ‍में ‍ की‍जा‍सकती‍हैं।‍ऊपर‍
से‍ िीचे‍ की‍लेखापरीक्षाएुँ‍ मुख्‍यत:‍विधािमंडल‍और‍केन्ि‍सरकार‍की‍आिश्‍यकताओं,‍धारणाओं,‍
उद्दे श्‍यों‍ और‍ अपेक्षाओं‍ पर‍ ध्‍याि‍ केजन्ित‍ करती‍ हैं।‍ िीचे‍ से‍ ऊपर‍ की‍ लेखापरीक्षा‍ लोगों‍ और‍
समुदाय‍की‍महत्िपूण‍ा समस्याओं‍पर‍ध्‍याि‍केजन्ित‍करती‍है ।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
15 | पष्ृ ‍ठ
लेखापरीक्षा मािदण्ड
2.7
लेखापरीक्षकों को एक उधचत मािदण्ड स्थावपत करिा चादहए जो क्रक लेखापरीक्षा प्र‍िों के
अिरू
ु प हो और अथषव्यिस्था, दक्षता और प्रभािकाररता के मसद्िांतों से संबंधित हो।
मािदण्ड‍विषय-िस्तु‍ के‍मूल्यांकि‍में ‍ प्रयुक्त‍बेंचमाका‍है ।‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍मािदण्ड‍उधचत‍
हैं‍और‍निष्‍पादि‍के‍विलशष्‍
ट‍मािकों‍के‍प्रनत‍पररचालिों‍की‍अथाव्यिस्था,‍क्षमता‍और‍प्रभािीपि‍
का‍मूल्यांकि‍और‍आंकलि‍ककया‍जा‍सकता‍है ।
2.8
मािदण्ड‍ प्रमाण‍ का‍ मूल्यांकि,‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ निष्‍कषों‍ में ‍ सुधार‍ और‍ लेखापरीक्षा‍
उद्दे श्‍यों‍के‍पररणामों‍पर‍पहुुँचिे‍के‍ललए‍आधार‍प्रदाि‍करते‍हैं।‍िह‍विभाग‍की‍लेखापरीक्षा‍दल‍
और‍प्रबंधि‍के‍भीतर‍और‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्िों‍से‍चचााओं‍में ‍एक‍महत्िपूणा‍तत्ि‍बिाते‍हैं।
मािदण्ड‍ गुणात्मक‍ अथिा‍ पररमाणात्मक‍ हो‍ सकते‍ हैं‍ और‍ उन्हें ‍ पररभावषत‍ करिा‍ चादहए‍ कक‍
लेखापरीक्षक्षत‍सत्ि‍को‍ककसके‍प्रनत‍मूल्यांककत‍करिा‍चादहए।‍कािूि,‍विनियमों‍अथिा‍उद्दे श्‍यों‍
के‍ अिस
ु ार‍ क्या‍ होिा‍ चादहए;‍ दृढ‍ लसद्धातों,‍ िैज्ञानिक‍ पद्धधनत‍ और‍ सिाक्षेष्‍ठ‍ कायाप्रणाली‍ से‍
क्या‍ अपेक्षक्षत‍ है ,‍ और‍ क्या‍ हो‍ सकता‍ है ‍ (बेहतर‍ जस्थनतयों‍ में )‍ पर‍ ध्‍याि‍ केजन्ित‍ करते‍ हुए‍
मािदण्ड‍सामान्य‍या‍विशेष‍हो‍सकते‍हैं।
निष्‍पादि‍मापक‍रूपरे खाओं‍ सदहत,‍मािदण्ड‍को‍पहचाििे‍ हे तु‍ विलभन्ि‍स्रोतों‍को‍प्रयुक्त‍ककया‍
जा‍सकता‍है ।‍यह‍पारदशी‍होिा‍चादहए,‍कौिसे‍ स्रोत‍प्रयुक्त‍हुए‍हैं‍ और‍मािदण्ड‍उपभोक्ताओं‍
के‍ललए‍प्रासंधगक‍और‍बोधगम्य‍के‍साथ-साथ‍विषय-िस्तु‍ और‍लेखापरीक्षा‍के‍संदभा‍ में ‍ सम्पूण,ा ‍
विश्‍
िसिीय‍और‍िस्तुनिष्‍ठ‍होिे‍चादहए।
2.9
मािदण्ड‍की‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्िों‍के‍साथ‍चचाा‍की‍जािी‍चादहए‍ककंत‍ु उधचत‍मािदण्ड‍का‍
चयि‍ करिे‍ का‍ उत्तरदानयत्ि‍ अंतत:‍ लेखापरीक्षक‍ का‍ है ।‍ योजिा‍ चरण‍ के‍ दौराि‍ मािदण्ड‍
पररभावषत‍और‍संचारण‍करिे‍ के‍दौराि‍अपिी‍विश्‍िसिीयता‍और‍सामान्य‍स्िीकृनत‍बढा‍सकते‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
16 | पष्ृ ‍ठ
है ;‍ जदटल‍ मुद्दों‍ िाली‍ लेखापरीक्षा‍ में ‍ मािदण्ड‍ पहले‍ से‍ सेट‍ करिा‍ हमेशा‍ संभि‍ िहीं‍ होता;‍
बजल्क‍िह‍लेखापरीक्षा‍प्रकिया‍के‍दौराि‍पररभावषत‍होंगी।
2.10 जबकक‍ कुछ‍लेखापरीक्षा‍प्रकारों‍मे‍ सुस्पष्‍ट‍िैद्यानिक‍मािदण्ड‍है ;‍निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍
के‍ मामले‍ में ‍ आमतौर‍ पर‍ ऐसा‍ िहीं‍ है ।‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍य,‍ प्रश्‍ि‍ और‍ दृजष्‍टकोण‍ उधचत‍
मािदण्‍
ड‍ की‍ प्रासंधगकता‍ और‍ प्रकार‍ निधााररत‍ करते‍ हैं‍ और‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ निष्‍कषों‍
और‍ पररणामों‍ में ‍ उपभोक्ता‍ का‍ भरोसा‍ मुख्‍त:‍ मािदण्ड‍ पर‍ निभार‍ करता‍ है ।‍ अत:‍ विश्‍
िसिीय‍
और‍उद्दे श्‍यपरक‍मािदण्‍ड‍का‍चयि‍करिा‍जदटल‍है ।‍
2.11 एक‍कदठिाई‍समस्या‍उन्मख
ु ‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍में ,‍आरं भ‍बबंद‍ु क्या‍होिा‍चादहए‍और‍
क्या‍ हो‍ सकता‍ है ‍ से‍ एक‍ ज्ञात‍ और‍ संददग्ध‍ विचलि‍ है ।‍ इसललए‍ इसका‍ मुख्‍य‍ उद्दे श्‍य‍ केिल‍
समस्या‍का‍सत्यापि‍िहीं‍हैं‍(मािदण्ड‍और‍इसके‍पररणामों‍से‍विचलि)‍बजल्क‍कारणों‍का‍पता‍
लगािा‍है ।‍यह‍डडजाइि‍चरण‍के‍दौराि,‍कारणों‍की‍जाुँच‍और‍सत्यापि‍कैसे‍ निधााररत‍करें ‍ को‍
महत्िपूण‍ा बिाता‍है ।‍निष्‍कषा‍ और‍ लसफाररशें‍ मुख्‍यत:‍ विश्‍
लेषण‍और‍कारण‍निधााररत‍करिे‍ की‍
प्रकिया‍पर‍आधाररत‍होते‍है ;‍यद्यवप‍िे‍हमेशा‍मािक‍मापदं ड‍में ‍निदहत‍होते‍हैं।
लेखापरीक्षा जोखखम
2.12 लेखापरीक्षकों को सक्रिय रूप से लेखापरीक्षा जोखखम का प्रबंि करिा चादहए जो क्रक
असंतुमलत सूचिा प्रदाि करते हुए अथिा उपभो‍ताओं को उपयोधगता में िद्
ृ धि करिे में असफल
होते हुए गलत या अपूणष निष्कषष प्राप्त करिे का जोखखम है ।
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ में ‍ कई‍ विषय‍ जदटल‍ और‍ राजिीनतक‍ रूप‍ से‍ संिेदिशील‍ हैं।‍ जब‍ इस‍
प्रकार‍ की‍ लेखापरीक्षा‍ से‍ परहे ज‍ त्रदु टपूण‍ा या‍ अपूण‍ा लेखापरीक्षा‍ को‍ पररणाम‍ दे ‍ सकता‍ है ,‍ यह‍
लेखापरीक्षा‍द्िारा‍बेहतर‍शासि‍और‍मूल्य‍संिधाि‍के‍ललये‍ महत्िपूण‍ा प्रनतपुजष्‍ट‍प्रदाि‍करिे‍ की‍
संभाििा‍सीलमत‍कर‍सकता‍है ।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
17 | पष्ृ ‍ठ
2.13 जोखखम‍लेखापरीक्षा‍महत्िपूण‍ा कारकों‍को‍अिदे खा‍करिे‍के‍जोखखम‍के‍दृजष्‍टकोण‍या‍िई‍
जािकारी‍ प्रदाि‍ ि‍ करिे‍ की‍ संभाििा‍ से‍ मूल्य‍ की‍ सीमा‍ में ‍ िद्
ृ धध‍ में ‍ विफल‍ रहे गा।‍ इसके‍
पररणामस्िरूप,‍ लेखापरीक्षा‍ ररपोटा ‍ के‍ उपभोक्ताओं‍ को‍ जािकारी‍ या‍ लसफाररशें‍ प्रदाि‍ िहीं‍ कर‍
पायेगी,‍जो‍कक‍बेहतर‍निष्‍पादि‍के‍ललये‍ िास्तविक‍योगदाि‍हो।‍जोखखम‍के‍महत्िपूण‍ा पहलुओ‍ं
में ‍ पयााप्त‍रूप‍से‍ व्यापक‍या‍गहि‍विश्‍
लेषण‍करिे‍ के‍ललये‍ असक्षम‍होिा,‍पण
ू ‍ा और‍गण
ु कारी‍
जािकारी‍के‍उपयोग‍में ‍ कमी,‍ गलत‍जािकारी‍पर‍निभारता‍(उदाहरण‍धोखाधड़ी‍या‍अनियलमत‍
प्रथाओं‍ के‍कारण),‍सभी‍निष्‍कषों‍को‍पररप्रेक्ष्य
‍ ‍में ‍ रखिे‍ मे‍ असक्षम‍और‍अत्यंत‍महत्िपण
ू ‍ा तकों‍
को‍एकबत्रत‍करिे‍और‍बतािे‍में ‍विफल‍होिा‍शालमल‍हो‍सकता‍है ।
2.14 इसललये‍ लेखापरीक्षक‍ को,‍जोखखम‍का‍सकिय‍ रूप‍से‍ प्रबंधि‍ करिा‍चादहये।‍ लेखापरीक्षा‍
जोखखम‍ से‍ निपटिा‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ पूरी‍ प्रकिया‍ और‍ पद्धनत‍ में ‍ अत:‍ स्थावपत‍ है ।‍
लेखापरीक्षा‍योजिा‍दस्तािेजों‍को‍पररकजल्पत‍काया‍ का‍संभावित‍या‍ज्ञात‍जोखखम‍बतािा‍चादहये‍
और‍ददखािा‍चादहये‍कक‍यह‍इि‍जोखखमों‍को‍कैसा‍संभाला‍जायेगा।
संचार
2.15 लेखापरीक्षक को लेखापरीक्षा प्रक्रिया के दौराि विषयिस्तु की क्जम्मेदारी बताते हुये
लेखापरीक्षक्षत सत्िों और अन्य पक्षों के साथ प्रभािी और उधचत संचार बिाये रखिा चादहये और
प्रत्येक लेखापरीक्षा के विषय, प्रक्रिया और संचार प्राप्तकताषओं को पररभावषत करिा चादहये।
कई‍कारण‍है ‍कक‍नियलमत‍संचार‍क्यों‍निष्‍
पादि‍लेखापरीक्षा‍में ‍एक‍विशेष‍महत्ि‍रखता‍है :

क्योंकक‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍नियलमत‍(उदाहरण‍िावषाक)‍रूप‍से‍उसी‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्िों‍
में ‍समान्यत:‍िहीं‍की‍जाती,‍संचार‍के‍साधि‍पहले‍से‍मौजूद‍िहीं‍हो‍सकते।‍जब‍विधाि‍
मण्‍
डल‍ और‍ सरकारी‍ निकायों‍ के‍ साथ‍ संबंध‍ हो‍ सकते‍ है ;‍ अन्य‍ समूह‍ (शैक्षक्षक‍ और‍
व्यापार‍समुदायों‍या‍िागररक‍समाज‍संगठि‍जैसे)‍पहले‍से‍जुड़‍े हुए‍ि‍हो।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
18 | पष्ृ ‍ठ

प्राय:‍ कोई‍ पूि‍ा निधााररत‍ मापदं ड‍ (वित्तीय‍ प्रनतिेदि‍ ढांच‍े जैसा)‍ िहीं‍ होते‍ और‍ इसललये‍
लेखापरीक्षक्षत‍सत्ि‍के‍साथ‍विचारों‍का‍गहि‍आदाि-प्रदाि‍आिश्‍यक‍है ।

संतुललत‍ररपोटा ‍लािे‍के‍ललये‍विलभन्ि‍पणधारकों‍के‍विचारों‍को‍पूरी‍तरह‍जाििे‍के‍ललये‍
सकिय‍प्रयासों‍की‍आिश्‍यकता‍है ।
2.16 लेखापरीक्षकों‍को‍जजम्मेदार‍पक्षों‍और‍अन्य‍मख्
‍ ‍पणधारकों‍को‍पहचाििा‍चादहये‍ और‍
ु य
प्रभािी‍ पारस्पररक‍ संचार‍ बिािे‍ के‍ ललये‍ पहल‍ करिी‍ चादहये।‍ अच्छे ‍ संचार‍ से,‍ लेखापरीक्षक;‍
लेखापरीक्षक्षत‍सत्ि‍से‍ जािकारी‍स्रोत‍और‍आकड़ों‍और‍विचारों‍के‍उपयोग‍में ‍ सध
ु ार‍कर‍सकता‍
है ।‍पणधारकों‍को‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍का‍उद्दे श्‍य‍समझािे‍ के‍ललये‍ संचार‍माध्‍यम‍का‍प्रयोग‍
संभाििा‍ भी‍ बढा‍ दे ता‍ है ‍ कक‍ लेखापरीक्षा‍ लसफाररशों‍ को‍ कियाजन्ित‍ ककया‍ जायेगा।‍ इसललये‍
लेखापरीक्षकों‍को‍सभी‍संबंधधत‍पणधारकों‍के‍साथ‍अच्छे ‍व्यािसानयक‍संबंध‍बिाये‍रखिे‍चादहये,‍
जहां‍ तक‍ गोपिीयता‍ की‍ आिश्‍यकता‍ अिुमनत‍ दे ती‍ है ‍ सूचिा‍ के‍ मुक्त‍ और‍ स्पष्‍ट‍ प्रिाह‍ को‍
बढािा‍दे िा‍चादहये‍और‍प्रत्येक‍पणधारक‍की‍जजम्मेदारी‍की‍भूलमका‍के‍ललये‍पारस्पररक‍सम्माि‍
और‍ समझ‍ के‍ िातािरण‍ में ‍ चचाा‍ करिी‍ चादहये।‍ तथावप,‍ ध्‍याि‍ रखा‍ जािा‍ चादहये,‍ यह‍
सनु िजश्‍चत‍करिे‍ के‍ललये‍ कक‍पणधारकों‍के‍साथ‍संचार‍विभाग‍की‍स्ितंत्रता‍और‍निष्‍पक्षता‍के‍
साथ‍समझौता‍ि‍करे ।
2.17 लेखापरीक्षक‍ को‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्ि‍ को‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍य,‍ लेखापरीक्षा‍ प्रश्‍िों‍ और‍
विषयिस्तु‍ सदहत‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ मुख्‍य‍ पहलुओं‍ की‍ जािकारी‍ दे िी‍ चादहये।‍ संचार‍ आमतौर‍ पर‍
लेखापरीक्षा‍के‍दौराि‍ललखखत‍काया‍ पत्र‍और‍नियलमत‍संचार‍का‍रूप‍ले‍ लेता‍है ।‍लेखापरीक्षक‍को‍
रचिात्मक‍बातचीत‍के‍माध्‍यम‍से‍लेखापरीक्षा‍प्रकिया‍के‍दौराि‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्ि‍के‍साथ‍संचार‍
बिाये‍रखिा‍चादहये‍क्योंकक‍विलभन्ि‍निष्‍कषों‍तकों‍और‍संभाििाओं‍का‍मूल्यांकि‍होता‍है ।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
19 | पष्ृ ‍ठ
2.18 विभाग‍ द्िारा‍ अपिा‍ लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदि‍ जारी‍ करिे‍ से‍ पहले‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्िों‍ को‍
लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍पररणामों‍और‍लसफाररशो‍पर‍दटप्पणी‍करिे‍ का‍अिसर‍ददया‍जािा‍चादहये।,‍
ककसी‍ भी‍ असहमनत‍ का‍ विश्‍
लेषण‍ ककया‍ जािा‍ चादहये‍ और‍ तथ्‍यात्मक‍ त्रदु टयों‍ को‍ सुधारिा‍
चादहये।‍ प्रनतपुजष्‍ट‍ का‍ परीक्षण‍ काया‍ पत्र‍ में ‍ अलभलेखखत‍ ककया‍ जािा‍ चादहये‍ ताकक‍ मसौदा‍
लेखापरीक्षा‍प्रनतिेदि‍में ‍सध
ु ार‍या‍सध
ु ार‍ि‍करिे‍के‍कारणों‍को‍प्रलेखखत‍ककया‍जाये।
कौशल
2.19 सामदू हक रूप से, लेखापरीक्षा दल के पास लेखापरीक्षा करिे के मलये आि‍यक
व्यािसानयक दक्षता होिी चादहये। इसमें लेखापरीक्षक्षत सत्ि के क्षेत्र की जािकारी के अनतरर‍त
लेखापरीक्षण का अच्िा ज्ञाि, अिुसंिाि प्रारूप, सामाक्जक विज्ञाि प्रणाली और जांच या
मूल्यांकि तकिीक के साथ-साथ व्यक्‍तगत शक्‍त जैसे वि‍लेषणात्मक लेखि और संचार कौशल
शाममल होगा।
2.20 निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षण‍ में ,‍ विशेष‍ कौशल‍ की‍ आिश्‍यकता‍ हो‍ सकती‍ है ,‍ जैसे‍ मूल्यांकि‍
तकिीक‍और‍सामाजजक‍विज्ञाि‍प्रणाली‍और‍व्यजक्तगत‍क्षमताओं‍की‍जािकारी‍जैसे‍संचार‍और‍
लेखि‍ कौशल,‍ विश्‍
लेषणात्मक‍दक्षता,‍ रचिात्मकता‍और‍ ग्रहणशीलता।‍ लेखापरीक्षक‍को‍सरकारी‍
संगठिों,‍ कायािमों‍ और‍ कायों‍ की‍ अच्‍छी‍ जािकारी‍ होिी‍ चादहये।‍ यह‍ सुनिजश्‍चत‍ करे गा‍ कक‍
लेखापरीक्षा‍के‍ललये‍ सही‍क्षेत्रों‍का‍चयि‍ककया‍गया‍है ‍ और‍लेखापरीक्षक‍सरकारी‍कायािमों‍और‍
गनतविधधयों‍के‍संिीक्षा‍प्रभािी‍रूप‍से‍कर‍सकते‍हैं।
2.21 आिश्‍यक‍कौशल‍पािे‍ के‍ललये‍ कुछ‍विशेष‍तरीके‍हो‍सकते‍ हैं।‍इस‍जािकारी‍को‍अक्सर‍
प्राप्त‍ करिा‍ चादहये‍ या‍ काया‍ के‍ ललये‍ विशेष‍ रूप‍ से‍ विकलसत‍ करिा‍ चादहये।‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍में ‍ अक्सर‍सीखिे‍ की‍प्रकिया‍होती‍है‍ और‍पद्धनत‍का‍विकास‍स्ियं‍ लेखापरीक्षा‍के‍
भाग‍ के‍ रूप‍ में ‍ होता‍ है।‍ इसललये‍ िौकरी‍ में ‍ लेखापरीक्षकों‍ को‍ सीखािा‍ और‍ प्रलशक्षण‍ उपलब्ध‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
20 | पष्ृ ‍ठ
होिा‍चादहये,‍जजससे‍सतत‍व्यािसानयक‍विकास‍के‍माध्‍यम‍से‍अपिा‍व्यािसानयक‍कौशल‍बिाये‍
रखिा‍ चादहये।‍ सीखिे‍ के‍ ललये‍ खल
ु ा‍ दृजष्‍टकोण‍ और‍ उत्साहिधाक‍ प्रबंधि‍ संस्कृनत‍ प्रत्येक‍
लेखापरीक्षक‍के‍व्यािसानयक‍कौशल‍बढािे‍के‍ललये‍महत्िपूण‍ा शतें‍हैं।
2.22 विशेष‍क्षेत्रों‍में ,‍लेखापरीक्षा‍दल‍की‍जािकारी‍को‍पूण‍ा करिे‍ के‍ललये‍ बाहरी‍विशेषज्ञ‍का‍
प्रयोग‍ककया‍जा‍सकता‍है ।‍लेखापरीक्षक‍को‍मूल्यांकि‍करिा‍चादहये‍कक‍कैसे‍और‍ककि‍क्षेत्रों‍में ‍
बाहरी‍ विशेषज्ञता‍ की‍ आिश्‍यकता‍ है ‍ और‍ आिश्‍यक‍ व्यिस्था‍ करािी‍ चादहये।‍ विशेषज्ञ‍ की‍ सेिा‍
या‍ उिके‍ काया‍ का‍ प्रयोग‍ करिे‍ का‍ प्रबंध‍ समय-समय‍ पर‍ सीएजी‍ कायाालय‍ द्िारा‍ सामान्य‍
ददशानिदे शों‍के‍अिस
ु ार‍होगा।
व्यािसानयक निणषय, उधचत दे खभाल और संदेह
2.23 लेखापरीक्षकों को व्यािसानयक संदेह का प्रयोग करिा चादहये लेक्रकि ग्रहणशील और िया
करिे के मलये भी तैयार होिा चादहये।
यह‍ महत्िपूण‍ा है ‍ कक‍ लेखापरीक्षक‍ प्रदाि‍ की‍ गई‍ जािकारी‍ से‍ सामान्य‍ दरू ी‍ रखते‍ हुये‍
व्यािसानयक‍संदेह‍का‍प्रयोग‍करता‍है ‍ और‍आलोचिात्मक‍दृजष्‍टकोण‍अपिाता‍है ।‍लेखापरीक्षकों‍
से‍ तकासंगत‍ आकलि‍ और‍ व्यजक्तगत‍ और‍ दस
ू रे ‍ की‍ प्राथलमकताओं‍ के‍ खंडि‍ की‍ अपेक्षा‍ करते‍
हैं।‍साथ‍ही,‍उन्हें ‍ विचारों‍और‍तकों‍के‍ललये‍ ग्रहणशील‍होिा‍चादहये।‍यह‍न्याय‍में ‍ त्रदु टयों‍या‍
संज्ञािात्मक‍पूिााग्रह‍से‍बचिे‍के‍ललये‍ आिश्‍यक‍है ।‍यदद‍िे‍ग्रहणशील‍िहीं‍हैं ,‍िे‍ महत्िपूण‍ा तका‍
या‍मख्
ु ‍य‍प्रमाण‍को‍खो‍सकते‍हैं।
2.24 क्योंकक‍लेखापरीक्षक‍िई‍जािकारी‍पािे‍ के‍ललये‍ काया‍ करते‍ हैं,‍उन्हें ‍ आंकडों‍को‍एकबत्रत‍
करिे,‍समझिे‍ और‍विश्‍
लेषण‍करिे‍ के‍अपिे‍ प्रयासों‍में ‍ जजज्ञासु,‍विचारशील‍और‍साधि‍संपन्ि‍
होिा‍भी‍आिश्‍यक‍है ।‍िया‍करिे‍ की‍इच्छाशजक्त‍भी‍उतिी‍ही‍महत्िपण
ू ‍ा है ।‍ििप्रिताि‍केिल‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
21 | पष्ृ ‍ठ
लेखापरीक्षा‍ प्रकिया‍ के‍ ललये‍ ही‍ िहीं‍ बजल्क‍ लेखापरीक्षा‍ प्रकियाओं‍ या‍ गनतविधधयों‍ पर‍ भी‍ लागू‍
होते‍है ।
2.25 लेखापरीक्षा‍ के‍ दौराि‍ विषय‍ चयि‍ और‍ लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ से‍ उधचत‍ लेखापरीक्षा,‍
ररपोदटिं ग‍तक‍व्यािसानयक‍व्यिहार‍के‍उच्च‍मािक‍बिाये‍ रखिे‍ चादहये।‍लेखापरीक्षकों‍के‍ललये‍
उधचत‍ पयािेक्षण‍ में ‍ और‍ उधचत‍ ध्‍याि‍ और‍ िस्तनु िष्‍ठता‍ के‍ साथ‍ नियमािस
ु ार‍ काया‍ करिा‍
आिश्‍यक‍है ।
गुणित्ता नियंत्रण
2.26 लेखापरीक्षकों को गुणित्ता बचािे के मलये कायषप्रणाली का प्रयोग करिा चादहये, सुनिक्‍चत
करते हुए क्रक अिुकूल आि‍यकतायें पूरी हो रही हैं और उधचत, संतुमलत और सही प्रनतिेदि पर
बल दे ते हुए जो लेखापरीक्षा प्र‍िों की महत्पूणत
ष ा बढ़ाये और उत्तर दें ।
एक‍ मजबूत‍ गुणित्ता‍ प्रबंधि‍ प्रणाली‍ प्रभािी‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ करिे‍ में ‍ सहायता‍ करती‍ है ।‍
गुणित्ता‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ केिल‍ तभी‍ अपेक्षक्षत‍ हो‍ सकती‍ है ‍ यदद‍ विभाग‍ के‍ अंदर‍ अच्छी‍
गुणित्ता‍ प्रबंधि‍ प्रणाली‍ मौजूद‍ हो।‍ इि‍ ददशानिदे शों‍ में ‍ विभाग‍ के‍ लेखापरीक्षा‍ गुणित्ता‍ प्रबंधि‍
तंत्र‍के‍मख्
ु ‍य‍लसद्धांत‍अंत:‍स्थावपत‍हैं।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍करते‍समय‍निम्िललखखत‍विशेष‍मुद्दों‍को‍बतािा‍अिश्‍यक‍है :

निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ िह‍ लेखापरीक्षा‍ प्रकिया‍ है‍ जजसमें ‍ लेखापरीक्षा‍ दल‍ बहुत‍ अधधक‍
विशेष‍जािकारी‍एकत्र‍करता‍है ‍और‍संबंधधत‍मुद्दों‍के‍विषय‍में ‍वििेक‍और‍व्यािसानयक‍
न्याय‍का‍उच्च‍प्रकार‍से‍ प्रयोग‍करता‍है ।‍यह‍गण
ु ित्ता‍नियंत्रण‍में ‍ ध्‍याि‍में ‍ रखा‍जािा‍
चादहये।‍ पारस्पररक‍ विश्‍
िास‍ और‍ जजम्मेदारी‍ का‍ कायाकारी‍ िातािरण‍ बिाये‍ रखिे‍ और‍
लेखापरीक्षा‍दल‍ के‍ललये‍ सहायता‍प्रदाि‍करिे‍ की‍आिश्‍यकता‍ गुणित्ता‍प्रबंधि‍ के‍भाग‍
के‍रूप‍में ‍ दे खी‍जािी‍चादहये।‍यह‍गुणित्ता‍नियंत्रण‍प्रणाललयों‍को‍लागू‍ करिा‍आिश्‍यक‍
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22 | पष्ृ ‍ठ
बिा‍ सकता‍ है ‍ जो‍ कक‍ उधचत‍ और‍ संचालि‍ में ‍ सरल‍ है ‍ और‍ सुनिजश्‍चत‍ करते‍ है ‍ कक‍
लेखापरीक्षक‍ गुणित्ता‍नियंत्रण‍से‍ प्राप्त‍जािकारी‍के‍ललये‍ खुला‍हैं।‍यदद‍पयािेक्षक‍और‍
लेखापरीक्षा‍दल‍के‍बीच‍मतभेद‍हो,‍तो‍लेखापरीक्षा‍दल‍की‍संभाििा‍पर‍पयााप्त‍विचार‍
ककया‍ गया‍ और‍ विभाग‍ की‍ िीनत‍ संगत‍ है ‍ यह‍ सुनिजश्‍चत‍ करिे‍ के‍ ललये‍ उधचत‍ कदम‍
उठाये‍जािे‍चादहये।

निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ में ,‍ यदद‍ प्रनतिेदि‍ प्रमाण‍ पर‍ आधाररत‍ अच्छी‍ तरह‍ से‍ प्रलेखखत‍
और‍ सटीक‍ भी‍ हो,‍ तब‍ भी‍ िह‍ अिधु चत‍ या‍ अपयााप्त‍ हो‍ सकता‍ है ,‍ यदद‍ िह‍ संतलु लत‍
और‍निष्‍पक्ष‍तका‍दे िे‍ में ‍ विफल‍होता‍है ,‍बहुत‍ कम‍प्रासंधगक‍दृजष्‍टकोण‍शालमल‍हो‍या‍
लेखापरीक्षा‍ प्रश्‍िों‍ को‍ असंतुष्‍ट‍ रूप‍ से‍ बताये।‍ इसललये‍ यह‍ बाते‍ गुणित्ता‍ सुरक्षक्षत‍ रखिे‍
के‍उपायो‍का‍आिश्‍यक‍भाग‍होिी‍चादहयें।

क्योंकक‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य‍विलभन्ि‍लेखापरीक्षा‍कायों‍के‍बीच‍व्यापक‍रूप‍से‍ बदलते‍ हैं ,‍
यह‍ स्पष्‍ट‍ रूप‍ से‍ बतािा‍ आिश्‍यक‍ है ‍ कक‍ लेखापरीक्षा‍ काया‍ में ‍ विलशष्‍
ट‍ विषय‍ में ‍ उच्च‍
गुणित्ता‍ ररपोटा ‍ ककससे‍ बिती‍ है ।‍ इसललये‍ सामान्य‍ गुणित्ता‍ नियंत्रण‍ उपायों‍ को‍
लेखापरीक्षा‍विशेष‍उपायों‍द्िारा‍पण
ू ‍ा करिा‍चादहये।
2.27 उच्च‍गण
ु ित्ता‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍करिे‍ के‍ललये‍अलभप्रेररत‍और‍कुशल‍लेखापरीक्षा‍दल‍
की‍आिश्‍यकता‍होती‍है ।‍इसललये‍नियंत्रण‍तंत्र‍सहायता‍द्िारा‍पूण‍ा ककया‍जािा‍चादहये,‍जैसे‍कक‍
लेखापरीक्षा‍दल‍के‍ललये‍िौकरी‍में ‍प्रलशक्षण‍और‍मागादशाि।
सारता
2.28 लेखापरीक्षको को पूणत
ष ा लेखापरीक्षा प्रक्रिया के सभी स्तरों पर महत्िपूणत
ष ा को ध्याि में
रखिा चादहये। क्जतिा भी संभि हो उतिा अधिक मल्
ू यांकि करिे के उद्दे ‍य के साथ विषय
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23 | पष्ृ ‍ठ
िस्तु के केिल वित्तीय ही िहीं बक्ल्क सामाक्जक और राजिीनतक पहलुओं पर भी ध्याि दे िा
चादहये।
महत्ि‍को‍विषय‍जजसमें ‍उस‍पर‍विचार‍ककया‍जा‍रहा‍के‍अंदर‍मामले‍के‍संबंधधत‍महत्ि‍के‍रूप‍
में ‍ समझा‍जा‍सकता‍है ।‍लेखापरीक्षा‍विषय‍के‍महत्ि‍को‍उसके‍प्रभाि‍के‍पररमाण‍को‍समझिा‍
चादहये।‍यह‍निभार‍करे गा‍इस‍पर‍कक‍क्या‍गनतविधध‍अपेक्षाकृत‍छोटी‍है ‍ या‍क्या‍संबंधधत‍क्षेत्र‍
में ‍ कलमयां‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्ि‍ के‍ अंदर‍ अन्य‍ गनतविधधयों‍ को‍ प्रभावित‍ करें गी।‍ एक‍ मद्
ु दे ‍ को‍
महत्िपूण‍ा तब‍ समझा‍ जायेगा‍जहां‍ विषय‍विशेष‍महत्ि‍ का‍मािा‍जायेगा‍और‍ जहां‍ प्रगनत‍का‍
कोई‍महत्िपण
ू ‍ा प्रभाि‍होगा।‍यह‍कम‍महत्िपण
ू ‍ा होगा‍जहां‍ गनतविधधयां‍ सामान्य‍प्रकार‍की‍होंगी‍
और‍खराब‍निष्‍
पादि‍का‍प्रभाि‍छोटे ‍क्षेत्र‍तक‍सीलमत‍होगा‍या‍न्यूितम‍होगा।
2.29 निष्‍पादि‍ लेखारीक्षा‍ में ,‍ वित्तीय‍ महत्ि‍ से‍ महत्ि‍ प्राथलमक‍ मुद्दा‍ हो‍ सकता‍ है ,‍ लेककि‍
आिश्‍यक‍ िहीं‍ है ,‍ महत्ि‍ को‍ स्पष्‍ट‍ करिे‍ में ,‍ लेखापरीक्षा‍ को‍ यह‍ भी‍ ध्‍
याि‍ रखिा‍ चादहये‍ की‍
सामाजजक‍ या‍ राजिीनतक‍ महत्ि‍ क्या‍ है ‍ और‍ ध्‍याि‍ रखिा‍ चादहये‍ कक‍ यह‍ समय‍ के‍ साथ‍
बदलता‍ है ‍ और‍ संबंधधत‍ उपयोगकताा‍ और‍ जजम्मेदार‍ पक्षों‍ की‍ संभाििा‍ पर‍ निभार‍ करता‍ है ।‍
क्योंकक‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍विषय‍िस्तु‍व्यापक‍रूप‍से‍बदल‍सकती‍है ‍और‍मापदं ड‍अक्सर‍
विधािमंडल‍द्िारा‍निधााररत‍िहीं‍ ककये‍ जाते,‍संभाििा‍एक‍लेखापरीक्षा‍से‍ दस
ू री‍में ‍ बदल‍सकती‍
है ।‍उसका‍आंकलि‍करिे‍ के‍ललये‍ लेखापरीक्षक‍को‍ध्‍यािपूिक
ा ‍न्याय‍करिे‍ की‍आिश्‍यकता‍है।‍
महत्िपण
ा ा‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍सभी‍पहलओ
ू त
ु ं‍ से‍ संबंधधत‍है ,‍जैसे‍विषय‍का‍चयि,‍मापदं ड‍
की‍ पररभाषा,‍ प्रमाणों‍ का‍ मूल्यांकि‍ और‍ अिधु चत‍ या‍ कम‍ प्रभािी‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषा‍ या‍
प्रनतिेदि‍प्रस्तुत‍करिे‍के‍जोखखम‍के‍प्रबंधि‍और‍प्रलेखि।
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24 | पष्ृ ‍ठ
प्रलेखि
2.30 लेखापरीक्षकों को उसकी विमशष्ट पररक्स्थनतयों के अिुसार लेखापरीक्षा का प्रलेख रखिा
चादहये। जािकारी पयाषप्त रूप से पूणष और विस्तत
ृ होिी चादहये एक कुशल लेखापरीक्षक को
सक्षम बिािे के मलये क्जसका लेखापरीक्षा से पहले से कोई संबंि ि हो को बाद में नििाषररत
करिे के मलये क्रक लेखापरीक्षा पररणाम, निष्कषष और मसफाररशों तक पहुुँचिे के मलये ‍या कायष
क्रकया गया था।
2.31 सभी‍ लेखापरीक्षाओं‍ की‍ तरह‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षक‍ को‍ प्रत्येक‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ तैयारी,‍
प्रकिया‍ और‍ निष्‍कषा‍ के‍ पयााप्त‍ प्रलेखखत‍अलभलेख‍रखिे‍ चादहये।‍ तथावप,‍निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍
में ‍प्रलेखि‍का‍उद्दे श्‍य‍और‍विषय‍कुछ‍विलशष्‍ट‍है ।

अक्सर‍लेखापरीक्षक‍के‍ पास‍लेखापरीक्षा‍ विषय‍ के‍बारे ‍ में ‍ संग्रदहत‍विशेष‍ज्ञाि‍होता‍है‍
जो‍ विभाग‍ में ‍ आसािी‍ से‍ प्रकट‍ िहीं‍ होगा।‍ क्योंकक,‍ लेखापरीक्षा‍ प्रणाली‍ और‍ मापदं ड‍
एकल‍काया‍ के‍ललये‍ विलशष्‍
ट‍रूप‍से‍ विकलसत‍ककये‍ गये‍ हैं ,‍लेखापरीक्षक‍को‍अपिे‍ तका‍
को‍पारदशी‍बिािे‍के‍ललये‍एक‍विशेष‍जजम्मेदारी‍उठािी‍पड़ती‍है ।

निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍में ,‍प्रनतिेदि‍प्रारूप,‍संभाििा‍और‍विश्‍
लेषणात्मक‍ढांच‍े का‍िणाि‍
करता‍ है ‍ जो‍ अपिाये‍ गये‍ थे‍ और‍ प्रकिया‍ जजसे‍ निष्‍कषा‍ और‍ लसफाररशों‍ के‍ अनतररक्त‍
पररणामों‍तक‍पहुुँचिे‍के‍ललये‍अपिाया‍गया।‍कुछ‍हद‍तक,‍ररपोटा ‍िह‍काया‍करती‍है ‍जो‍
दस
ू रे ‍ प्रकार‍की‍लेखापरीक्षा‍में ‍ लेखापरीक्षा‍प्रलेखि‍के‍सामान्य‍मािकों‍द्िारा‍प्रदाि‍की‍
जाती‍है ।

प्रलेखि‍ से‍ केिल‍ तथ्‍यों‍ की‍ सत्यता‍ ही‍ िहीं‍ सुनिजश्‍चत‍ होिी‍ चादहये‍ बजल्क‍ यह‍ भी‍
सुनिजश्‍चत‍होिा‍चादहये‍कक‍ररपोटा ‍विषय‍िस्तु‍या‍लेखापरीक्षक्षत‍प्रश्‍िों‍का‍संतुललत,‍उधचत‍
और‍ पूण‍ा निरीक्षण‍ प्रस्तुत‍ करें ।‍ इस‍ प्रकार,‍ उदाहरण‍ के‍ ललये‍ प्रलेखि‍ में ‍ ररपोटा ‍ में ‍
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25 | पष्ृ ‍ठ
स्िीकार‍ ि‍ ककये‍ गये‍ तका‍ का‍ संदभा‍ शालमल‍ करिा‍ या‍ ररपोटा ‍ में ‍ ककतिे‍ अलग-अलग‍
दृजष्‍टकोणों‍को‍दे खा‍गया‍था‍का‍िणाि‍करिे‍की‍आिश्‍यकता‍हो‍सकती‍है ।
2.32 पयााप्त‍प्रलेखि‍का‍रख-रखाि‍केिल‍गुणित्ता‍को‍सुरक्षक्षत‍(उदाहरण‍सुनिजश्‍चत‍करिे‍ में‍
सहायता‍करते‍हुये‍कक‍काया‍संतुष्‍ट‍रूप‍से‍निष्‍पाददत‍ककया‍गया‍है ‍और‍कक‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य‍
प्राप्त‍कर‍ललये‍ गये‍ हैं)‍रखिा‍िहीं,‍बजल्क‍विभाग‍और‍लेखापरीक्षक‍के‍व्यजक्तगत‍व्यािसानयक‍
विकास‍का‍भी‍भाग‍है ,‍क्योंकक‍यह‍भविष्‍य‍में ‍इस‍प्रकार‍की‍लेखापरीक्षा‍के‍ललये‍अच्छी‍पद्धनत‍
बिा‍सकता‍है ।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
26 | पष्ृ ‍ठ
3.
िीनतगत लेखापरीक्षा योजिा और लेखापरीक्षा विषयों का चयि
िीनतगत लेखापरीक्षा योजिा
3.1
िीनतगत‍ लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ विभाग‍ के‍ ललये‍ दीघाकाललक‍ लक्ष्‍यों‍ को‍ निधााररत‍ करिे‍ की‍
प्रकिया‍ है ‍ और‍ उन्हें ‍ प्राप्त‍ करिे‍ के‍ ललये‍ सिोच्च‍ दृजष्‍टकोण।‍ उन्हें ‍ प्राप्त‍ करिे‍ के‍ ललये‍ इसमें ‍
िीनतगत‍लक्ष्‍य‍(लमशि‍वििरण),‍िीनतगत‍उद्दे श्‍य‍(अधधक‍विलशष्‍ट‍और‍विस्तत
ृ ‍वििरण)‍और‍
िीनतगत‍ उपाय‍ होते‍ हैं।‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ ललये‍ िीनतगत‍ योजिा‍ विभाग‍ की‍ िीनतगत‍
लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ का‍ उपसमुच्चय‍ है ।‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षाओं‍ के‍ विषय‍ में ,‍ विभाग‍ िीनतगत‍
लक्ष्‍यों‍ और‍ उद्दे श्‍यों‍ के‍ अिुसरण‍ में ‍ की‍ जािे‍ िाली‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ विषयों‍ और‍
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍ पण
ू ‍ा ककये‍ जािे‍ अपेक्षक्षत‍ विस्तत
ृ ‍ उद्दे श्‍यों‍ का‍ वििरण,‍
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍ प्राप्त‍ ककये‍ जािे‍ लक्ष्‍यों‍ से‍ अपिे‍ दीघाकाललक‍ ध्‍यये‍ का‍
िणाि‍कर‍सकता‍हैं।‍क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍कायाालय‍को‍भी‍विभाग‍के‍िीनतगत‍लेखापरीक्षा‍योजिा‍
के‍ संदभा‍ में ‍ अपिी‍ लेखापरीक्षा‍ योजिायें‍ तैयार‍ करिा‍ आिश्‍यक‍ है ।‍ अपिी‍ लेखापरीक्षा‍ योजिा‍
बिाते‍ समय,‍क्षेत्रीय‍कायाालय‍को‍सुनिजश्‍चत‍कर‍लेिा‍चादहये‍ कक‍योजिा‍बिाते‍ समय,‍क्षेत्रीय‍
कायाालय‍को‍सुनिजश्‍चत‍कर‍लेिा‍चादहये‍ कक‍योजिा‍विभाग‍की‍िीनतगत‍लेखापरीक्षा‍योजिा‍में ‍
अिुकूल‍ हैं‍ और‍ दीघाकाललक‍ उद्दे श्‍यों‍ को‍ पूरा‍ करिे‍ में ‍ सहायता‍ करती‍ है ‍ जैसा‍ कक‍ अपिे‍
क्षेत्राधधकार‍के‍संबंधधत‍क्षेत्रों‍में ‍ लेखापरीक्षा‍जोखखमों‍को‍बतािे‍ के‍अनतररक्त‍पूण‍ा रूप‍से‍ विभाग‍
की‍िीनतगत‍लेखापरीक्षा‍योजिा‍में ‍बताया‍गया‍है।
3.2
जबकक‍क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍कायाालयों‍द्िारा‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍योजिा‍के‍ललये‍एक‍
समाि‍ समय‍ सीमा‍ निधााररत‍ िहीं‍ की‍ जा‍ सकती‍ है ‍ क्योंकक‍ ‍ विलभन्ि‍ प्रकार‍ की‍ इकाईयों‍ की‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
27 | पष्ृ ‍ठ
लेखापरीक्षा‍ के‍ उत्तरदायी‍ अलग-अलग‍ लेखापरीक्षा‍ कायाालयों‍ की‍ आिश्‍यकता‍ में ‍ विलभन्िता‍ हो‍
सकती‍है ,‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍योजिा‍के‍ललये‍ पांच‍िषों‍की‍संदलभात‍सीमा‍मािी‍जा‍सकती‍
है ।‍ तथावप,‍ योजिा‍ कायािम‍ की‍ िावषाक‍ लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ तैयार‍ करते‍ समय‍ रोल‍ ओिर‍
अभ्‍यास‍ के‍ रूप‍ में ‍ प्रनत‍ िषा‍ समीक्षा‍ की‍ जायेगी।‍ क्षेत्रीय‍ लेखापरीक्षा‍ कायाालयों‍ की‍ िावषाक‍
लेखापरीक्षा‍योजिा‍को‍ आगे‍ लािे,‍ककये‍ जािे,‍ पण
ू ‍ा करिे‍ और‍अग्रेिीत‍करिे‍ के‍अिश
ु ीषाक‍ के‍
अंतगात‍सभी‍निष्‍
पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍विलभन्ि‍स्तरों‍को‍पहचाििा‍चादहये।
िीनतगत लेखापरीक्षा योजिा के उद्दे ‍य
3.3
विभाग‍की‍िीनतगत‍लेखापरीक्षा‍योजिा,‍दृजष्‍टकोण‍बताती‍है ‍ जो‍क्या‍लेखापरीक्षा‍करिी‍
हैं‍यह‍निणाय‍करिे‍में ‍महत्िपूण‍ा शुरूआती‍बबंद‍ु उपलब्ध‍करता‍है ;‍पररणाम‍निददा ष्‍ट‍करती‍है ‍जो‍
हम‍ प्राप्त‍ करिा‍ चाहते‍ हैं‍ सामान्य‍ रूप‍ में ,‍ बेहतर‍ प्रबंधधत‍ सरकारी‍ कायाकम‍ और‍ संसद‍ और‍
जिता‍ को‍ बेहतर‍ जािाबदे ही।‍ बेहतर‍ औधचत्य‍ पर‍ आधाररत‍ अच्छी‍ तरह‍ से‍ संरधचत‍ िीतीगत‍
लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ प्रकिया‍ यह‍ सुनिजश्‍चत‍ करिे‍ के‍ ललये‍ आिश्‍यक‍ है ‍ कक‍ विभाग‍ के‍ संसाधि‍
अत्यंत‍कुशलता‍और‍प्रभािी‍रूप‍से‍उपयोग‍ककये‍जा‍रहे ‍हैं।
िीनतगत लेखापरीक्षा योजिा के उद्दे ‍य है :

भविष्य में लेखापरीक्षा किरे ज के मलये िीनतगत ददशा दे िे के मलये विभाग के प्रबंिि के
मलये मजबूत आिार उपलब्ि करािा;

सािषजनिक क्षेत्र जिाबदे ही और प्रशासि को सि
ु ारिे के मलये क्षमता से लेखापरीक्षा को
पहचाििा और चयि करिा;
 इकाई
के जोखखम
को समझिा और लेखापरीक्षा चयि में उिका ध्याि रखिा; और
Strategic
planning
process
 विभाग के दानयत्िों के मलये आिार उपलब्ि करािा।

कायष का कायषिम बिािा क्जसे अपेक्षक्षत/उपलब्ि संसाििों से प्राप्त क्रकया जा सके;
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
28 | पष्ृ ‍ठ
िीनतगत लेखापरीक्षा योजिा प्रक्रिया
3.4
िीनतगत‍ लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ तैयार‍ करिे‍ से‍ पहले,‍ निम्िललखखत‍ की‍ बेहतर‍ समझ‍ का‍
विकास‍सहायता‍करे गा:

सामान्य‍आधथाक‍और‍सामाजजक‍जस्थनतयों;

सरकारी‍प्राथलमकताऐं,‍लक्ष्‍य‍और‍कायािम;

विनियामक‍और‍जिाबदे ही‍ढांच‍े जजसके‍अंदर‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्िों‍काया‍करती‍है ।
3.5
विभाग‍का‍िररष्‍ठ‍प्रबंधि‍विषय‍जो‍उच्च‍जोखखम‍कायािमों‍और‍गनतविधधयों‍के‍ललये‍
विभाग‍ की‍ धचंता‍ बतायेगा‍ के‍ चयि‍ के‍ ललये‍ िीनतगत‍ लेखापरीक्षा‍ और‍ िावषाक‍ लेखापरीक्षा‍
योजिाओं‍के‍संबंध‍में ‍समय-समय‍पर‍महालेखाकार‍के‍साथ‍बुद्धधशील‍बैठकों‍का‍आयोजि‍कर‍
सकते‍हैं।
इिपट
ु


पूिष िीनतगत योजिा
परु ािी लेखापरीक्षा ररपोटष और उि पर
अिुिती कायषिाही

योजिा दस्तािेज, विभागीय पररणाम
बजट और पररणाम रूपरे खा दस्तािेज


सरकारी विभागों की िावषषक ररपोटष

वििायी रूधच

लेखापरीक्षा सलाहकार बोडष की कायषिाही

मीडडया और बाहरी ररपोटष

शैक्षक्षक ररपोटष

बहुपक्षीय एजेंमसयों द्िारा ररपोटष
आऊटपुट
विभाग के मलए िीनतगत
लेखापरीक्षा योजिा
प्राथममकतायें
संसािि आि‍यकतायें
िररष्‍ठ‍प्रबंधि‍में ‍भारत‍के‍नियंत्रक‍महालेखापरीक्षक,‍उप-नियंत्रक‍महालेखापरीक्षक‍और‍अपर‍उप‍नियंत्रक-
महालेखापरीक्षक‍शालमल‍होते‍हैं।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
29 | पष्ृ ‍ठ
िावषषक लेखापरीक्षा योजिा प्रक्रिया
3.6
क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍कायाालय‍द्िारा‍एक‍बार‍विभाग‍के‍ललये‍ िीनतगत‍लेखापरीक्षा‍योजिा‍
बिािे‍ के‍ बाद,‍ िावषाक‍ लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ तैयार‍ करिे‍ की‍ प्रकिया‍ को‍ ललया‍ जाता‍ है ।‍ क्षेत्रीय‍
लेखापरीक्षा‍ कायाालय‍ की‍ िावषाक‍ लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ में ‍ वित्तीय‍ िषा‍ के‍ दौराि‍ की‍ जािे‍ िाली‍
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा,‍ अिुपालि‍ लेखापरीक्षा‍ और‍ वित्तीय‍ लेखापरीक्षा‍ शालमल‍ होती‍ है ।‍ यह‍
लेखापरीक्षा‍ प्राथलमकताओं‍ और‍ संसाधि‍ उपलब्धता‍ के‍ बीच‍ संतल
ु ि‍ का‍ काया‍ है ।‍ लेखापरीक्षा‍
योजिा‍ का‍ एक‍महत्िपूण‍ा घटक‍लेखापरीक्षा‍चि‍में ‍ ककये‍ जािे‍ िाली‍ निष्‍
पादि‍ लेखापरीक्षा‍के‍
ललये‍ विलशष्‍
ट‍ विषयों‍ का‍ चयि‍ है ।‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ ललये‍ लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ घटक‍ में ‍
आमतौर‍पर‍विलशष्‍
ट‍क्षेत्रों‍से‍ संबंधधत‍विषय‍या‍अपिे‍ लेखापरीक्षा‍क्षेत्राधधकार‍के‍अंतगात‍राज्य‍
और‍अखखल‍भारतीय‍दायरे ‍ में ‍ कुछ‍लेखापरीक्षा‍भी‍शालमल‍होती‍हैं।‍अखखल‍भारतीय‍निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍की‍समय‍पर‍सूचिा‍जैसा‍मुख्‍यालय‍द्िारा‍अिुमोददत‍हो,‍दहस्सा‍लेिे‍ िाले‍ क्षेत्रीय‍
लेखापरीक्षा‍ कायाालय‍ को‍ उिकी‍ योजिा‍ उधचत‍ रूप‍ से‍ तैयार‍ करिे‍ के‍ ललये‍ सक्षम‍ करे गी।‍ यह‍
सुनिजश्‍चत‍ करिा‍ चादहये‍ कक‍ बहुत‍ अधधक‍ लेखापरीक्षा‍ करिे‍ के‍ कारण‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍
प्रभावित‍ि‍ हो।‍पणधारकों‍का‍ विचार‍ ललया‍जा‍सकता‍है ‍ और‍ क्षेत्रीय‍ लेखापरीक्षा‍कायाालय‍ के‍
िावषाक‍योजिा‍और‍पण
ू ‍ा करते‍ समय‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍विषय‍के‍चयि‍के‍समय‍उधचत‍
ध्‍याि‍ददया‍जा‍सकता‍है ।
लेखापरीक्षा विषय का चयि
3.7
आयोजजत‍की‍जािे‍िाली‍लेखापरीक्षा‍के‍चयि‍के‍ललये‍गंभीर‍वििेचिा‍की‍आिश्‍यकता‍है‍
क्योंकक‍लेखापरीक्षा‍के‍ललये‍ महत्िपूण‍ा क्षेत्र‍बहुत‍अधधक‍है ‍ और‍प्रयास‍और‍समय‍के‍संबंध‍में ‍
विभाग‍ की‍ क्षमता‍ सीलमत‍ है ।‍ इसका‍ अथा‍ है ‍ कक‍ चयि‍ ध्‍यािपूिक
ा ‍ करिा‍ चादहये।‍ सत्ि‍ या‍
कायािम‍की‍पूणा‍ रूप‍से‍ निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍करिा‍हमेशा‍आिश्‍यक‍िहीं‍ है ।‍महालेखाकार‍को‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
30 | पष्ृ ‍ठ
या‍तो‍व्यापक‍रूप‍से‍सत्ि‍के‍कायािम‍और‍गनतविधधयों‍और‍विषय‍जजसके‍ललये‍कायाक्षेत्र‍और‍
लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य,‍कायािम‍ या‍गनतविधधयों‍के‍केिल‍महत्िपूण‍ा पहलुओं‍ तक‍ सीलमत‍ हो,‍ को‍
शालमल‍करते‍ हुये‍ लमले-जुले‍ निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍विषयों‍का‍चयि‍करिा‍चादहये।‍कायािम‍के‍
घटकों‍या‍भागों‍के‍चयि‍को‍महत्िपूणत
ा ा‍और‍जोखखम‍रूपरे खा‍द्िारा‍निदे लशत‍ककया‍जा‍सकता‍
है ।‍यह‍महालेखाकार‍को‍अधधक‍महत्िपण
ू ‍ा और‍समकालीि‍मद्
ु दों‍की‍अपेक्षाकृत‍अधधक‍संख्‍या‍
के‍ किरे ज‍ को‍ बढािे‍ में ‍ सक्षम‍ करे गा,‍ जजससे‍ कधथत‍ और‍ िास्तविक‍ मूल्य‍ संिधाि‍ बढािे‍ की‍
अपेक्षा‍की‍जा‍सकती‍है ।‍
3.8
जब‍ िांनछत‍ हो,‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ विषय‍ का‍ विलभन्ि‍ विभागों‍ या‍ सत्िों‍ को‍
छोड़कर‍ चयि‍ ककया‍ जा‍ सकता‍ है ।‍ यह‍ सत्ि‍ जजन्हें ‍ कायािम,‍ गनतविधध‍ आदद‍ की‍ जजम्मेदारी‍
सौंपी‍गई‍हो,‍के‍विलभन्ि‍िगों‍के‍ऊपर‍विषयिस्तु‍और‍महत्िपूण‍ा क्षेत्र‍पर‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍
के‍ ललये‍ आधार‍ उपलब्ध‍ करायेगा।‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षकों‍ को‍ अक्सर‍ कायािम‍ की‍
प्रभािशीलता/असर‍के‍आकलि‍के‍ललये‍ अन्य‍एजेंलसयों/विभागों‍के‍ललये‍ लेखापरीक्षा‍कायाक्षेत्र‍को‍
विस्तत
ृ ‍ करिे‍ की‍ आिश्‍यकता‍ ज्ञात‍ होती‍ है । तथ्‍य‍ के‍ बािजूद‍ कक‍ उिके‍ कारोबार‍ का‍ आिंटि‍
विलभन्‍
ि‍ क्षेत्रों‍ (लसविल,‍ रे लिे,‍ संप्रेषण,‍ सामाजजक,‍ आधथाक‍ एिं‍ सेिा‍ क्षेत्र‍ इत्‍यादद)‍ में ‍ है ‍ और‍
उिकी‍जस्‍थनत‍लभन्‍
ि‍हो‍सकती‍है ‍ (सरकारी‍विभाग,‍सरकारी‍वित्‍
तपेावषत‍संस्‍थापि‍और‍सरकारी‍
ं यादद)‍‍
कंपनिय ‍इत्‍
3.9
ं
उभरते‍ हुए‍मुद्दों‍जैसे‍ पयाािरणीय‍चि
ु ौनतय ,‍सतत‍विकास‍और‍स
ूचिा‍प्रौद्योधगकी‍को‍
भी‍ विलभन्‍
ि‍ निकायों‍ की‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षाओं‍ में ‍ शालमल‍ ककया‍ जािा‍ चादहए।‍ कायािमों,‍
योजिाओं‍ इत्‍यादद‍को‍लेखापरीक्षाओं‍ के‍विषयों‍का‍अंनतम‍रूप‍से‍ चयि‍करते‍ समय‍लोगों‍और‍
समुदाय‍के‍महत्‍िपूण‍ा समस्‍याओं‍पर‍भी‍उधचत‍जोर‍ददया‍जािा‍चादहए।‍
विषयों‍के‍चयि‍के‍ललए‍कुछ‍विचार‍इस‍प्रकार‍हैं:‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
31 | पष्ृ ‍ठ
(क) नििाषरण जोखखम : चुँ कू क‍ संसाधि‍ बाधाओं‍ के‍ कारण‍ सभी‍ सत्‍िों‍ और‍ निकायों‍ की‍ सभी‍
गनतविधधयों‍ की‍ लेखापरीक्षा‍ िहीं‍ की‍ जा‍ सकी,‍ सत्‍िों‍ की‍ जागरूकता‍ या‍ क्षेत्र‍ अथाक्षेप्र‍ जो‍
कायािम‍ बिाते‍ हैं‍ अथिा‍ अथाव्‍यिस्‍था‍ के‍ मद्दे िजर‍ जोखखम‍ पर‍ सािाजनिक‍ संसाधिों,‍ दक्षता‍
और‍ प्रभाविता‍ उि‍ पर‍ लेखापरीक्षा‍ का‍ ध्‍याि‍ केंदित‍ करिे‍ में ‍ सहायता‍ करता‍ है ।‍ लेखापरीक्षक्षत‍
सत्‍िों‍की‍ररस्‍क‍प्रोफाइललंग‍क्षेत्रों‍और‍कायािमों‍में ‍विषयों‍का‍चयि‍निधााररत‍करिे‍ में ‍सहायता‍
करता‍है ।‍‍‍
(ख) यथाथषता और महत्ि लेखापरीक्षक‍ को‍ लेखापरीक्षा‍ प्रकिया‍ के‍ सभी‍ स्‍तरों‍ में ‍ यथाथाता‍ का‍
ध्‍याि‍ रखिा‍ चादहए‍ और‍ यह‍ ि‍ केिल‍ वित्‍
तीय,‍ बजल्‍क‍ विषयगत‍ मद्
ु दे ‍ के‍ सामाजजक‍ और‍
राजिीनतक‍पहलुओं‍तथा‍लेखापरीक्षा‍के‍माध्‍यम‍से‍ सािाजनिक‍संभि‍मूल्‍य‍कैसे‍जोड़ा‍जाए,‍इस‍
पर‍भी‍ध्‍याि‍रखिा‍चादहए।‍विषय‍की‍महत्ता‍संगठि,‍कायािम‍अथिा‍विषय‍के‍संदभा‍में ‍इसका‍
महत्‍ि‍है ।‍एक‍विषय‍का‍सिााधधक‍महत्‍ि‍होगा‍यदद‍इसके‍द्िारा‍बतायी‍जािे‍ िाली‍पररयोजिा‍
अथिा‍गनतविधध‍सत्‍ि‍के‍संचालि‍के‍केन्‍
ि‍में ‍हो;
‍‍
(ग) विषय की दृ‍यता‍;‍दहत‍का‍निधाारण‍है ,‍यह‍सामान्‍य‍लोगों‍और‍विधािों‍से‍ उत्‍पन्‍
ि‍होती‍
है ।‍जबकक‍दृश्‍यता‍का‍कोई‍एकरूप‍सच
ू कांक‍िहीं‍ निधााररत‍ककया‍जा‍सकता,‍विधायी‍डाटाबेस,‍
मीडडया‍ररपोटें ‍ अथिा‍लेख‍और‍कायाशालाओं‍ और‍व्‍याख्‍यािों‍के‍विषय‍दृश्‍यता‍के‍एक‍सूचकांक‍
के‍रूप‍में ‍प्रयोग‍ककए‍जा‍सकते‍हैं;
(घ) विभाग‍ द्िारा‍ वपिली लेखापरीक्षाओं‍ में ‍ महत्‍ता,‍ यथाथाता‍ और‍ विषयों‍ के‍ जोखखम‍ का‍
प्रािधाि‍ककया‍जा‍सकता‍था;
(ड.) निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ का‍ अिुमानित प्रभाि‍ भी‍ प्राथलमकता‍ के‍ ललए‍ एक‍ कसौटी‍ है ।‍ यह‍
सत्‍ि‍की‍अथाव्‍यिस्‍था,‍दक्षता‍और‍प्रभाविता,‍पररयेाजिा‍अथिा‍गनतविधध‍में ‍ सुधार‍कर‍सकता‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
32 | पष्ृ ‍ठ
था,‍ जो‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ का‍ विषय‍ है ।‍ सत्‍ि‍ की‍ ररस्‍क‍ प्रोफाईल‍ और‍ विषय‍ द्िारा‍ बताए‍
जािे‍िाले‍प्रस्‍तावित‍क्षेत्रों‍की‍समझ‍के‍माध्‍यम‍से‍प्रभाि‍का‍निधाारण‍ककया‍जा‍सकता‍है ;
(च) किरे ज
ि‍ केिल‍ विभाग‍ द्िारा‍ शालमल‍ की‍ गई‍ वपछली‍ लेखापरीक्षा‍ बजल्‍क‍ गनतविधध‍ की‍
अन्‍य‍स्‍ितंत्र‍समीक्षाओं‍ को‍भी‍संदलभात‍करता‍है ।‍ऐसी‍समॉीक्षायें‍ आंतररक‍लेखापरीक्षा,‍बाह्य‍
परामशादाता‍अथिा‍सरकारी‍सलमनत‍या‍गनतविधध‍कायािम‍मल्
ू ‍यांकि‍के‍विषयगत‍होिी‍चादहए‍
थी।‍जबकक‍हाल‍में ‍गनतविधध‍की‍पयााप्त
‍ ‍समीक्षा‍की‍गई‍है ,‍गनतविधध‍न्‍यूि‍रैंककंग‍को‍आकवषात‍
करे गी।‍ जबकक‍ उच्‍चतर‍ रैंककंग‍ दी‍ जाएगी‍ जहां‍ विधािमंडल‍ द्िारा‍ अथिा‍ सरकार‍ द्िारा‍
लेखापरीक्षा‍ को‍ अिुरोध‍ ककया‍ गया‍ है ‍ और‍ पहले‍ का‍ निषॉ्पादि‍ लेखापरीक्षा‍ दशााया‍ कक‍ ऐसा‍
अिुिती‍घदटत‍होिा‍चादहए।‍
(ि) प्रबंधि‍निष्‍पादि‍का‍मूल्‍यांकि
करते‍ समय‍कायषिम विकास के स्तर‍को‍ध्‍याि‍में ‍ रखिा‍
चादहए।‍‍
प्रकिया‍ को‍ विषयों‍ की‍ एक‍ सूची‍ के‍ साथ‍ महालेखाकर‍ को‍ उपलब्‍ध‍ कराया‍ जाएगा‍ जजसे‍
विचाराधीि‍अिधध‍के‍ललए‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षाओं‍हे तु‍ललया‍जािा‍चादहए।‍
लेखापरीक्षा सत्िों तथा अन्य पणिारकों के साथ िाताषलाप
3.10
महालेखार‍विषयों‍अथिा‍क्षेत्रों‍जजिका‍लेखापरीक्षाओं‍के‍ललए‍चयि‍ककया‍जा‍सकता‍था,‍
के‍ ललए‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्‍िों‍ के‍ शासि‍ प्रभारी‍ अथिा‍ कायाकारी‍ से‍ सझ
ु ािों,‍ सेमजॉिारों,‍ कांफ्रेंस‍
तथा‍लेखापरीक्षा‍के‍समय‍अन्‍य‍पणधारकों‍के‍साथ‍विचार-विमशा‍ द्िारा‍योजिा‍प्रकिया‍के‍साथ‍
पणधारकों‍को‍शालमल‍करिे‍ के‍उद्दे श्‍य‍से‍ लेखापरीक्षा‍योजिा‍पर‍भी‍विचार‍ककया‍जा‍सकता‍
है ।‍ इससे‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्‍िों‍ की‍ समस्‍याओं‍ को‍ समझिे‍ में ‍ भी‍ मदद‍ लमलेगी‍ तथा‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍के‍विषयों‍का‍निधाारण‍करिे‍ हे तु‍ विभाग‍में ‍ अपिायी‍जा‍रही‍जोखखम‍निधाारण‍प्रथा‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
33 | पष्ृ ‍ठ
में ‍ भी‍सहायता‍लमलेगी।‍यह‍विभाग‍को‍हमें ‍ लेखापरीक्षक्षत‍सत्‍िों‍से‍ संबंधधत‍विनियामक‍मुद्दों‍
और‍उपयुक्‍त‍शासि‍का‍एक‍अिसर‍भी‍प्रदाि‍करे गा।‍‍
डाटा और ररस्क प्रोफाईल का आिधिक अद्यति करिा
3.11
सत्‍ि‍ या‍ कायािम‍ की‍ ररस्‍क‍ प्रोफाईल‍ और‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षाओं‍ के‍ ललए‍ िीनतगत‍
योजिा‍ हे त‍ु जट
ु ाई‍ गई‍ सच
ू िा‍ और‍ डाटा‍ को‍ आिधधक‍ रूप‍ से‍ अद्यनतत‍ ककया‍ जािा‍ चादहए,‍
महालेखाकार‍ द्िारा‍ निधााररत‍ की‍ जािे‍ िाली‍ अिधध‍ पररिेश‍ में ‍ पररितािों‍ पर‍ आधाररत‍ होिी‍
चादहए।‍ जबकक‍ महालेखाकार‍ डाटा‍ अद्यनतत‍ करिे‍ हे त‍ु प्रकिया‍ बिा‍ सकते‍ हैं,‍ यह‍ प्रत्‍येक‍
आिधधक‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ समाजप्‍त‍ पर‍ सत्‍िों‍ के‍ संबंध‍ में ‍ यह‍ डाटा‍ अद्यनतत‍ करिे‍ के‍ ललए‍
लेखापरीक्षा‍अधधकारी‍के‍ऊपर‍आिश्‍यक‍होिा‍चादहए।‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
34 | पष्ृ ‍ठ
4.
िैयक्‍तक निष्पादि लेखापरीक्षाओं की योजिा
4.1
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ योजिा‍ इस‍ प्रकार‍ बिायी‍ जाए‍ जो‍ सुनिजश्‍चत‍ करता‍ है ‍ कक‍
आधथाक,‍ दक्ष‍ और‍ प्रभािी‍ तरीके‍ से‍ समय‍ पर‍ एक‍ उच्‍च‍ गण
ु ित्‍ता‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ जाती‍ है।‍
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षण‍ में ‍ एक‍ अच्‍छी‍ तरह‍ से‍ नियोजजत‍ योजिा‍ अपररहाया‍ है ।‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍के‍कायाान्‍ियि‍से‍ पूि‍ा एक‍विशेष‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍लक्ष्‍यों‍को‍पूरा‍करिे‍ के‍
ललए‍ पद्धनत,‍ कायाक्षेत्र,‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ की‍ पहचाि‍ करिा‍ महत्‍िपण
ू ‍ा है ।‍ यह‍ अधधकांशत:‍
पायलट‍अध्‍ययि‍के‍रूप‍में ‍ककया‍जाता‍है ।‍इस‍अध्‍ययि‍का‍उद्दे श्‍य‍यह‍है ‍कक‍क्‍या‍निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍करिे‍ की‍शतें‍ विद्यमाि‍हैं ,यदद‍ऐसा‍है ‍ तो‍एक‍लेखापरीक्षा‍प्रस्‍ताि‍प्रस्तुत‍ करिा।‍
यह‍ सत्‍ि,‍ कायािम‍ अथिा‍ कायाकलाप‍ को‍ समझिे‍ के‍ ललए‍ आिश्‍यक‍ पष्ृ ‍ठभूलम,‍ जािकारी‍ और‍
सच
ू िा‍प्रदाि‍करती‍है ।‍अध्‍ययि‍की‍समाजप्‍त‍पर‍यह‍स्‍पष्‍ट‍रूप‍से‍ बताया‍जाए‍कक‍निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍व्‍यिहाया‍ है ‍ अथिा‍िहीं।‍पायलट‍अध्‍
ययि‍सामान्‍यतया‍काफी‍कम‍अिधध‍में ‍ ककया‍
जाता‍ है ।‍ इस‍ प्रकिया‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍ लेखापरीक्षाओं‍ का‍ चयि‍ करिे‍ में ‍ महालेखाकार‍ को‍ इस‍
विश्‍
िास‍ के‍ ललए‍ के‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ ददशा-निदे शों‍ के‍ अिुरूप‍ पूरी‍ हो‍
सकेगी,एक‍ उधचत‍ आधार‍ के‍ रूप‍ में ‍ विषय‍ क्षेत्र‍ के‍ अपिे‍ प्राथलमक‍ जािकारी‍ का‍ प्रयोग‍ करिा‍
होगा।‍‍‍
4.2
योजिा‍में ‍ ददशा-निदे शों‍ और‍ निधाारण‍संसाधिों‍का‍विकास‍निदहत‍होता‍है ।‍ लेखापरीक्षा‍
ददशा-निदे शों‍में ‍ लेखापरीक्षक्षत‍सत्‍िों‍के‍पररिेश,‍लेखापरीक्षा‍यथााथता‍और‍जोखखम‍पर‍जािकारी‍
और‍ लेखापरीक्षा‍ कायाक्षेत्र‍ वििरण,‍ उद्दे श्‍यों‍ और‍ पद्धनत‍ सदहत‍ विस्‍तत
ृ ‍ वििरण‍ होिे‍ चादहए,‍
जैसाकक‍आगामी‍पैराग्राफों‍में ‍चचाा‍की‍गई‍है ।‍योजिा‍में ‍लेखापरीक्षा‍की‍संभावित‍प्रकृनत,‍समय‍
और‍सीमा‍के‍ललए‍एक‍विस्‍तत
ृ ‍दृजष्‍टकोण‍विकलसत‍करिा‍शालमल‍है ।‍लेखापरीक्षा‍की‍समधु चत‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
35 | पष्ृ ‍ठ
योजिा‍ यह‍ सुनिजश्‍चत‍ करिे‍ में ‍ मदद‍ करती‍ है ‍ कक‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ महत्‍िपूण‍ा क्षेत्रों‍ पर‍ उधचत‍
ध्‍याि‍ ददया‍ गया‍ है ,‍ संभावित‍ समस्‍याओं‍ की‍ पहचाि‍ की‍ गई‍ हे ‍ और‍ काम‍ को‍ तेजी‍ से‍ पूरा‍
ककया‍गया‍है ।‍योजिा‍से‍टीम‍के‍सदस्‍यों‍को‍उधचत‍कताव्य‍प्रदाि‍करिे‍और‍विभाग‍तथा‍उिके‍
विशेषज्ञों‍के‍बीच‍अन्‍य‍कायाालयों‍द्िारा‍ककए‍गए‍काया‍के‍समंिय‍में ‍भी‍सहायता‍लमलती‍है ।‍‍‍‍‍‍
लेखापरीक्षा‍योजिा‍को‍एक‍विस्‍तत
ृ ‍लेखापरीक्षा‍प्रस्‍ताि‍के‍विकास‍को‍बढािा‍दे िा‍चादहए‍
4.3
जो‍ ककए‍ जािे‍ िाले‍ विलशष्‍
ट‍ लेखापरीक्षा‍ कायों‍ की‍ पहचाि‍ करता‍ है ।‍ एक‍ उधचत‍ लेखापरीक्षा‍
प्रस्‍ताि‍ यह‍ सुनिजश्‍चत‍ करिे‍ के‍ ललए‍ इसे‍ आसाि‍ बिाता‍ है ‍ कक‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ क्षेत्र‍
व्‍यापक‍और‍ व्‍यिहाया‍ है ।‍ यह‍उल्‍लेख‍करिा‍उधचत‍होगा‍कक‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍की‍योजिा‍
पर‍पयााप्त
‍ ‍समय‍और‍प्रयास‍ककया‍जािा‍चादहए।‍योजिा‍दस्‍तािेजों‍में ‍भी‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍
का‍संभावित‍प्रभाि‍दशााया‍जा‍सकता‍है ।‍‍‍
एक‍लेखापरीक्षा‍प्रस्‍ताि‍बिािे‍में ‍महत्‍िपूण‍ा चरण‍निम्‍िललखखत‍है :
4.4

अध्‍ययि‍ककए‍जािे‍िाले‍विशेष‍मुद्दों‍और‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍की‍पहचाि‍करिा,‍

लेखापरीक्षा‍की‍डडजाइि‍और‍कायाक्षेत्र‍विकलसत‍करिा,‍

समय‍सारणी‍और‍संसाधिों‍का‍निधाारण‍करिा।‍
निम्‍िललखखत‍चाटा ‍व्‍यिहार‍में ‍एक‍व्‍यजक्‍तगत‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍योजिा‍बिािे‍में ‍निदहत‍
प्रकिया‍ को‍ दशााता‍ है ,‍ ये‍ चरण‍ हमेशा‍ अलग‍ िहीं‍ ककए‍ जा‍ सकते‍ हैं‍ और‍ ये‍ निम्‍िललखखत‍ के‍
माध्‍यम‍से‍समाि‍िम‍में ‍अनििाया‍रूप‍से‍िहीं‍रखे‍जा‍सकते।‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
36 | पष्ृ ‍ठ
सत्ि/कायषिम की समझ
(क)
सत्ि/कायषिम की समझ
4.5
सत्‍ि/कायािम‍ की‍ समझ‍ व्‍यजक्‍तगत‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ बिािे‍ का‍ शुरूआती‍
बबन्‍द‍ु है ।‍सत्‍ि‍की‍समझ‍के‍ललए‍निम्िललखखत‍स्रोतों‍का‍उपयोग‍ककया‍जा‍सकता‍है ।‍

सत्ि के दस्तािेज : सत्‍ि‍की‍किया-कलापों‍और‍प्रशासि‍पर‍दस्‍तािेजों,‍िीनत‍फाइलों,‍िावषाक‍
ररपोटों,‍बजट‍और‍िावषाक‍योजिा‍दस्‍तािेजों‍सदहत‍उि‍पर‍फाइलों,‍लेखाओं‍ आंतररक‍बैठकों‍
के‍ कायाित्ृ ‍त‍ संचालि‍ नियम‍ पुजस्‍तकायें/ददशा-निदे श,‍ प्रबंधि‍ सूचिा‍ प्रणाललयों,‍ िेबसाइट‍ की‍
सूचिा,‍ कायािम‍ मूल्‍यांकि‍ और‍ आंतररक‍ लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदि,‍ इलेक्‍र निक‍ डाटाबेस‍ और‍
एमआईएस‍ररपोटा ,‍सकिय‍और‍आरटीआई‍सामग्री‍इत्‍यादद;
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
37 | पष्ृ ‍ठ

वििायी दस्तािेज: विधानयका,‍ संसदीय‍ प्रश्‍ि‍ और‍ चचााएुँ,‍ लोक‍ लेखा‍ सलमनत‍ की‍ ररपोटें ‍
ं
सािाजनिक‍उपिमों‍पर‍सलमनत,‍निधाारण‍सलमनत‍और‍विभागीय‍संबंध‍स्‍थायी‍सलमनतय ‍और‍
संसद‍सदस्यों‍के‍पत्र‍;

िीनत दस्तािेज : योजिा‍आयोग,‍वित्‍त‍मंत्रालय‍के‍दस्‍तािेज‍आदद।‍

अकादमी अथिा विशेष अिुसंिाि : निकाय‍पर‍स्‍िंतत्र‍मल्
ू ‍यांकि,‍अकादमी‍अिस
ु ंधाि‍और‍
अन्‍य‍सरकारों‍अथिा‍अन्य‍एसएआईएस‍द्िारा‍ककए‍गए‍समाि‍काया‍;

विगत लेखापरीक्षायें : सत्‍ि‍ पर‍ वपछली‍ वित्‍तीय‍ और‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षायें‍ सच
ू िा‍ और‍
समझ‍ की‍ व्‍यापक‍ स्रोत‍ प्रदाि‍ करती‍ हैं।‍ अिुिती‍ आिश्‍यकतायें,‍ लसफाररशों‍ की‍ कधथत‍ गैर‍
अिुपालिा‍और‍बढे ‍जोखखम‍और‍व्‍यिहायाता‍विशेष‍पररणाम‍दे ‍सकते‍हैं;

मीडडया किरे ज: वप्रंट‍और‍इलेक्‍र निक‍मीडडया‍ दोिों-पारदशी‍तरीके‍से‍ नियलमत‍आधार‍पर‍
उिके‍प्रणालीगत‍दस्‍तािेज;‍और

विशेष
फोकस
ग्रुप:‍ लेखापरीक्षा‍ सलाहकार‍ संबंधी‍ मुद्दे ,‍ राष्‍रीय‍ अथिा‍ अंतरााष्‍रीय‍
कायाशालाऍ/व्‍
ं याख्‍याि,‍विश्‍
ि‍बैंक‍आईएमएफ,‍यूएि‍एजेंलसेयों,‍भारतीय‍ररजिा‍बैंक‍की‍िावषाक‍
और‍विशेष‍ररपोटें ,‍विशेष‍दहत‍समह
ू ों,‍एिजीओज‍द्िारा‍ररपोटें ‍इत्‍यादद;‍
(ख)
लेखापरीक्षा उद्दे ‍यों को पररभावषत करिा:
4.6
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ प्रकिया‍ में ‍ सिााधधक‍ महत्‍िपूण‍ा चरण‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ को‍
ं ‍
पररभावषत‍करिा‍है ।‍ये‍मल
ू भत
ू ‍लेखापरीक्षा‍प्रश्‍ि‍हैं‍जजसका‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षक‍उत्‍तर‍म गते
हैं।‍ये‍ सामान्‍यतया‍निष्‍पादि‍के‍बारे ‍ में ‍ प्रश्‍िों‍के‍ललए‍व्‍यक्‍त‍ककए‍जाते‍ हैं‍ अथाात ्‍अथाव्‍यिस्‍था‍
की‍प्राजप्‍त,‍सत्‍ि‍की‍दक्षता‍और‍प्रभाविता,‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य;‍‍अथाव्‍यिस्‍था‍की‍प्राजप्‍त,‍सत्‍ि‍
की‍दक्षता‍और‍प्रभाविता,‍लेखापरीक्षा‍के‍अंतगात‍कायािम‍अथिा‍गनतविधध।‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों
को‍संक्षेप‍में ‍पररभावषत‍ककया‍जािा‍चादहए‍क्‍योंकक‍ये‍लेखापरीक्षा‍की‍प्रकृनत‍पर‍प्रभाि‍डालते‍हैं,‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
38 | पष्ृ ‍ठ
इसका‍संचालि‍करते‍हैं‍और‍लेखापरीक्षा‍निष्‍
कषों‍पर‍प्रभाि‍डालते‍हैं।‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍प्रकिया‍में ‍जल्‍दी‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍के‍निधाारण‍से‍विभाग‍द्िारा
4.7
अच्छी‍ गुणित्तापरक‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षायें‍ सुनिजश्‍चत‍ होती‍ हैं‍ और‍ इस‍ प्रकार,‍ यह‍ सिााधधक‍
महत्‍िपूण‍ा गुणित्‍ता‍आश्‍
िासि‍उपाय‍हैं।‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍का‍निधाारण:‍
4.8

पि
ू ााग्रदहत‍पररणामों‍की‍धारणों‍को‍रोकिे‍में ‍मदद‍करता‍है ;

अिुशासि‍और‍पररशुद्धता‍को‍प्रोत्‍साहि‍दे ता‍है ;

स्‍पष्‍टता‍प्रदाि‍करता‍है ;

केजन्‍ित‍ऑकड़ा‍जुटािे‍िाली‍गनतविधधयों‍में ‍सहायता‍प्रदाि‍करता‍है ;

अंतनिादहत‍तका‍स्‍थावपत‍करिे‍में ‍मदद‍करता‍है ;

लेखापरीक्षा‍की‍सतत‍गुणित्‍ता‍दशााता‍है ; और‍

निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍गुणित्‍ता‍आश्‍िासि‍के‍उपाय‍के‍रूप‍में ‍काया‍करता‍है ।‍
लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य‍लेखापरीक्षा‍करिे‍ के‍कारण‍हैं‍ और‍इसललए‍इसे‍ स्‍पष्‍ट‍रूप‍से‍ ललखा‍
जािा‍चादहए।‍लेखापरीक्षा‍हे तु‍उपयुक्‍त‍ध्‍
याि‍केजन्‍ित‍करिे‍के‍ललए‍उद्दे श्‍यों‍को‍सीलमत‍संख्‍या,‍
आदशा‍ रूप‍ में ‍ तीि‍ से‍ पाुँच‍ होिे‍ चादहए।‍ उन्‍
हें‍ इस‍ प्रकार‍ पररभावषत‍ ककया‍ जािा‍ चादहए‍ जो‍
प्रत्‍येक‍उद्दे श्‍यों‍के‍प्रनत‍निष्‍कषा‍ निकालिे‍ हे त‍ु लेखापरीक्षा‍की‍समाजप्‍त‍पर‍लेखापरीक्षा‍दल‍को‍
अिुमत‍करे ।‍चुँकू क‍सम्‍पण
िों‍के‍उत्‍तर‍दे िे‍ के‍रूप‍
ू ‍ा लेखापरीक्षा‍प्रयास‍उद्दे श्‍यों‍में ‍ उठाए‍गए‍प्रश्‍
में ‍ निदे लशत‍ हैं,‍ इसललए‍ इसे‍ जजतिा‍ संभि‍ हो‍ उतिा‍ संक्षक्षप्‍त‍ रूप‍ में ‍ पररभावषत‍ ककया‍ जािा‍
चादहए।‍ उद्दे श्‍यों‍ ‍ को‍ व्‍यापक‍ रूप‍ में ‍ िहीं‍ व्‍यक्‍त‍ ककया‍ जािा‍ चादहए‍ क्‍योंकक‍ यह‍ उसे‍ प्राप्‍त‍
करिे‍ में ‍ मुजश्‍कल‍ पैदा‍ करता‍ है ।‍ एक‍ बार‍ यदद‍ विस्‍तत
ृ ‍ लेखापरीक्षा‍ डडजाइि‍ शुरू‍ हो‍ जाती‍ है ,‍
टीम‍ को‍ मुद्दों‍ और‍ उप-मुद्दों‍ के‍ सम्‍पण
ू ा‍ स्‍तर‍ की‍ पहचाि‍ करिी‍ चादहए‍ जजसे‍ प्रत्‍येक‍
लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य‍के‍प्रनत‍शालमल‍ककए‍जािे‍की‍आिश्‍यकता‍है ।‍‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
39 | पष्ृ ‍ठ
(ग)
लेखापरीक्षा का कायषक्षेत्र
4.9
कायाक्षेत्र‍लेखापरीक्षा‍की‍सीमा‍है ।‍कायाक्षेत्र‍लेखापरीक्षा‍को‍महत्‍िपूण‍ा मुद्दों‍तक‍सीलमत‍
करता‍है ‍जो‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍से‍संबंधधत‍है ।‍कायाक्षेत्र‍निधाारण‍लेखापरीक्षा‍की‍सीमा,‍समय‍
और‍प्रकृनत‍पर‍केजन्‍ित‍है ।‍निम्‍
िललखखत‍चार‍प्रश्‍िों‍के‍उत्‍तर‍लेखापरीक्षा‍कायाक्षेत्र‍पररभावषत‍
करिे‍में ‍मदद‍करते‍हैं:
‍या ?
4.10
ं करिी‍ है ?‍ ककस‍ प्रकार‍ का‍ लेखापरीक्षा‍
क्‍या‍ विशेष‍ प्रश्‍ि‍ अथिा‍ पररकल्‍पिाओं‍ की‍ ज च‍
दृजष्‍टकोण‍ समझा‍ जाए‍ ?‍ कायाक्षेत्र‍ का‍ यह‍ भाग‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ और‍ गहराई‍ जजसके‍ ललए‍
ं
विषयगत‍मामले‍ की‍ज च‍की‍जािी‍है
‍ और‍पद्धनत‍जजसे‍ अपिायी‍जािी‍है ,‍के‍साथ‍एक‍संबंध‍
है ।‍‍
कौि ?
4.11
ं है ‍ ?‍ लेखापरीक्षा‍ कायाक्षेत्र‍
कौि‍ महत्‍िपूण‍ा व्‍यजक्‍त‍ है ‍ और‍ लेखापरीक्षक्षत‍ इकाई‍ (य )‍
निधााररत‍ करते‍ समय‍ यह‍ उपयोगी‍ है ‍ कक‍ विषयगत‍ मामलों‍ से‍ संबंधधत‍ उत्‍त रदायी‍ पक्षों‍ और‍
उिकी‍भूलमका‍की‍पहचाि‍ककया‍जाए।‍
कहॉ ?
4.12
ककि‍ चयनित‍ इकाईयों/स्‍थािों‍ को‍ शालमल‍ ककया‍ जािा‍ है ?‍ अधधकांशत:‍ कायािम‍ अथिा‍
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ तहत‍ गनतविधधय ‍ं काफी‍ व्‍यापक‍ हो‍ सकती‍ हैं।‍ यह‍ आिश्‍
यक‍ है ‍ कक‍
क्षेत्रों/स्‍थािों‍ को‍ सीलमत‍ ककया‍ जाए‍ जजसे‍ लेखापरीक्षा‍ में ‍ शालमल‍ ककया‍ जाएगा‍ और‍ जजसका‍
ं
निष्‍कषा‍ लागू‍ ककया‍जाएगा।‍जह ‍सम्‍
पूण‍ा जिसंख्‍या‍का‍विश्‍
लेषण‍करिा‍व्‍यिहाया‍ ि‍हो,‍िमूिा‍
लेिे‍ की‍ तकिीक‍ का‍ उपयोग‍ ककया‍ जाए।‍ जह ‍ं तक‍ यह‍ व्‍यिहाया‍ हो‍ िमूिे‍ का‍ आकार‍ का‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
40 | पष्ृ ‍ठ
स्‍थनै तक‍रूप‍से‍चयि‍ककया‍जाए।‍‍‍‍‍
क्रकस अिधि ?
4.13
लेखापरीक्षा‍के‍तहत‍शालमल‍की‍जािे‍ िाली‍अिधध‍कौि‍सी‍है ‍ ?‍लेखापरीक्षा‍ककए‍जािे‍
िाले‍ संचालिों‍ की‍ समयािधध‍ लेखापरीक्षा‍ हे तु‍ ललए‍ गए‍ विषयों‍ अथिा‍ कायािमों‍ के‍ प्रकार‍ के‍
अिस
ु ार‍ बहुत‍ अधधक‍ लभन्‍ि‍ हो‍ सकते‍ हैं।‍ कायािम‍ के‍ प्रकार‍ के‍ अलािा‍ यह‍ जोखखम‍ पैमािों,‍
लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ और‍ उपयुक्‍तता,‍ दक्षता‍ और‍ जुटाए‍ जािे‍ िाले‍ साक्ष्‍
यों‍ की‍ तकासंगतता‍ पर‍
निभार‍करे गा।‍
4.14
उपरोक्‍त‍पहलओ
ु ं‍ के‍ आधार‍ पर‍निधााररत‍कायाक्षेत्र‍में ‍ निम्‍िललखखत‍महत्‍िपण
ू ‍ा निदहताथा‍
हैं:

लेखापरीक्षा‍कायािम‍सामान्‍यत:‍लेखापरीक्षा‍ककये‍जािे‍िाले‍कायािमों‍के‍आकार‍और‍
लेखापरीक्षा‍ के‍ कायाक्षेत्र‍ में ‍ बढोत्तरी‍ के‍ साथ‍ आकार‍ और‍ जदटलता‍ (अधधक‍ विस्‍तत
ृ ‍
प्रकियाओं,‍प्रश्‍िािललयों‍और‍जाुँच-सूधचयों)‍में ‍बढ‍जाते‍हैं‍; और‍

विजजट‍ ककए‍ जािे‍ िाले‍ स्‍थलों‍ की‍ जस्‍थनत‍ और‍ प्रसार‍ स्‍पष्‍ट‍ रूप‍ से‍ लेखापरीक्षा‍
कायािम‍ को‍ प्रभावित‍ कर‍ सकते‍ हैं।‍ निरं तरता‍ सुनिजश्‍चत‍ करिे‍ के‍ ललए‍ विस्‍तत
ृ ‍
प्रकियाओं‍ की‍ आिश्‍यकता‍ हो‍ सकती‍ है ,‍ जब‍ विलभन्‍
ि‍ कालमाक‍ लभन्‍
ि-लभन्‍ि‍ स्‍थािों‍
पर‍समाि‍लेखापरीक्षा‍कर‍रहे ‍हों।‍‍

िमि
ू ‍े का‍आकार‍लेखापरीक्षा‍कायाक्षेत्र‍पर‍प्रभाि‍डालता‍है ‍ क्‍योंकक‍चयनित‍िमि
ू े‍ में ‍
विलभन्‍
ि‍भौगोललक‍स्‍थाि‍और‍जोखखम‍अिधारणायें‍हो‍सकती‍हैं।‍
(घ) लेखापरीक्षा मापदण्ड नििाषरण करिा
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
41 | पष्ृ ‍ठ
4.15
लेखापरीक्षा‍ मापदण्‍
ड‍ मूल्‍यांकि‍ करिे‍ का‍ निदे श‍ दे ता‍ है ‍ (लेखापरीक्षक‍ को‍ ऐसे‍ प्रश्‍िों‍ के‍
उत्‍तर‍दे िे‍में ‍मदद‍करिा‍जैसे, ‘ककस‍आधार‍पर‍क्‍या‍िास्‍तविक‍व्‍यिहार‍करिा‍संभि‍है ?’‍‘क्‍या
आिश्‍यक‍है ‍अथिा‍क्या‍अपेक्षक्षत‍हैं?’‍और‍क्या‍पररणाम‍प्राप्त‍करिा‍है ‍और‍कैसे?)।‍लेखापरीक्षा‍
मापदण्‍
ड‍ युजक्तयुक्त‍ और‍ निष्‍पादि‍ के‍ प्राप्त‍ मािक‍ हैं‍ कक‍ क्या‍ कायािम‍ पूरा‍ होता‍ है ‍ अथिा‍
उम्मीदों‍से‍अधधक‍है ।‍लेखापरीक्षा‍मापदण्‍
ड‍यजु क्‍तयक्
ु ‍त‍और‍निष्‍पादि‍के‍प्राप्‍य‍मािक‍हैं‍जजसके‍
प्रनत‍कायािमों‍और‍गनतविधधयों‍की‍लमतव्‍ययता,‍दक्षता‍और‍प्रभाविता‍का‍मूल्‍यांकि‍ककया‍जा‍
सकता‍ है ।‍ मापदण्‍
ड‍ जो‍ सामान्‍य‍ या‍ विलशष्‍
ट‍ हो‍ सकते‍ हैं‍ और‍ िह‍ सब‍ दशााते‍ हैं‍ कक‍ नियमों,‍
विनियमों‍ या‍ उद्दे श्‍यों‍ के‍ अिुसार‍ क्‍या‍ होिा‍ चादहए,‍ और‍ मजबूत‍ लसद्धांतों‍ और‍ सिोत्‍तम‍
प्रथाओं‍के‍अिुसार‍क्‍या‍अपेक्षक्षत‍है ;‍ककस‍ललए‍ककया‍जाए‍(बेहतर‍जस्‍थनत‍दे कर)।‍लेखापरीक्षा‍में ‍
जदटल‍ मुद्दों‍ को‍ शालमल‍ करिे‍ में ‍ हमेशा‍ मापदण्‍ड‍ को‍ पूिना िधााररत‍ करिा‍ सम्‍भि‍ िहीं‍ होता;‍
इसके‍बजाए‍इन्‍हें‍लेखापरीक्षा‍की‍प्रकृनत‍और‍लेखापरीक्षा‍प्रश्‍ि,‍संदभा‍और‍उपयुक्‍त‍मापदण्‍
ड‍का‍
प्रकार‍निधााररत‍करते‍हैं।‍पररणामों‍की‍विश्‍
िसिीयता‍और‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍निष्‍कषा‍बहुत‍
हद‍तक‍मापदण्‍
ड‍पर‍निभार‍करते‍ हैं‍ इसललए‍लेखापरीक्षा‍मापदण्‍
ड‍निधााररत‍करते‍ समय‍उधचत‍
सािधािी‍बरती‍जािी‍चादहए।‍‍‍‍‍
जबकक‍मापदण्‍
ड‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षकों‍को‍ताककाक‍निष्‍कषा‍ तक‍पहुुँचिे‍ में ‍ मदद‍है ,‍तथ्‍य‍कक‍
क्‍या‍सत्‍ि‍के‍पास‍कायािम‍के‍मूल्‍यांकि‍के‍ललए‍मापदण्‍
ड‍निधााररत‍करिे‍ की‍प्रणाली‍है ,‍और‍
समिती‍ मािॉीटररंग,‍ निष्‍
पादि‍ मापदण्‍
ड‍ के‍ प्रनत‍ िास्तविक‍ मािॉीटररंग‍ अिप
ु यक्
ु त‍ अथिा‍
ं
दोषपूण‍ा मापदण्‍ड‍आदद‍के‍प्रभाि‍स्‍ियं‍ही‍निष्‍
पादि‍लेखापरीक्षाओं‍में ‍ज च‍क
े ‍विषयगत‍हैं।‍‍
4.16

ं
निष्‍पादि‍सूचिाओं‍की‍ज च‍करिे
‍में ‍लेखापरीक्षकों‍को‍चादहए:‍
सुनिजश्‍चत‍करिा‍कक‍क्‍या‍मौजूदा‍निष्‍पादि‍माप‍पूण,ा ‍प्रासंधगक‍और‍लागत‍लाभ‍आधार‍
पर‍औधचत्‍यपूण‍ा है ;
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
42 | पष्ृ ‍ठ

यह‍ ध्‍याि‍ दे िा‍ कक‍ क्‍
या‍ सत्‍ि‍ के‍ पास‍ माप‍ और‍ निष्‍पादि‍ पर‍ ररपोटा ‍ जैसे-महत्‍िपूणा‍
ं दस्‍तािेज‍ (आरएफडी)‍ इत्‍यादद‍ के‍ ललए‍
निष्‍पादि‍ सूचक‍ (केपीआई)‍ और‍ पररणामी‍ ढ चा‍
उपयुक्‍त‍और‍विश्‍िसिीय‍प्रकियायें‍हैं;‍

ं करिा‍ कक‍ क्‍या‍ िे‍ सत्‍ि‍ के‍ कारपोरे ट‍
यह‍ निधााररत‍ करिे‍ के‍ ललए‍ प्रकियाओें‍ की‍ ज च‍
उद्दे श्‍यों‍से‍संबंधधत‍हैं; और‍

यह‍ध्‍याि‍दे िा‍कक‍क्‍या‍निष्‍पादि‍उपायों‍को‍प्रबंधि‍निणाय‍प्रकियाओं‍ में ‍ शालमल‍ककया‍
गया‍है ‍अथाात‍क्‍या‍िे‍बतायी‍गई‍हैं‍और‍एजेंसी‍के‍भीतर‍हैं।‍
ये‍ मुद्दे ‍ निष्‍पादि‍लेखापरीक्षकों‍केा‍मात्रात्‍मक‍एिं‍ गुणात्‍मक‍निष्‍पादि‍सूचिा‍पर‍ध्‍याि‍ददलाते‍
हैं।‍ऐसे‍ध्‍याि‍सभी‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षकों‍में ‍ आिश्‍यक‍तत्‍ि‍के‍रूप‍में ‍ होिे‍ चादहए।‍मुख्‍यालय‍
और‍महालेखाकार‍को‍उिके‍कायािम‍योजिा,‍कायाान्ि
‍ यि‍हऔर‍मािॉीटररंग‍प्रणाली‍के‍भाग‍के‍
रूप‍में ‍ उपयुक्‍त‍निष्‍पादि‍सूचकों‍को‍विकलसत‍करिे‍ के‍ललए‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍के‍
माध्‍यम‍से‍सत्‍ि‍को‍प्रभावित‍कर‍सकते‍हैं।‍
मापदण्ड के स्रेात
4.17
यह‍ उम्‍मीद‍ करिा‍ अव्यिहाररक‍ है ‍ कक‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्‍ि‍ के‍ निष्‍पादि‍ स्‍तर‍ अथिा‍
प्रणाललयाुँ,‍ गनतविधधय ‍ं हमेशा‍ मापदण्‍ड‍ को‍ पूरा‍ करें गी।‍ यह‍ उल्लेख‍ करिा‍ महत्‍िपूण‍ा है ‍ कक‍
संतोषजिक‍निष्‍पादि‍का‍अथा‍ पररपण
ू ा‍ निष्‍पादि‍िहीं‍ होता‍बजल्‍क‍सत्‍ि‍संचालि‍करता‍है ।‍इस‍
ं
प्रकार,‍लेखापरीक्षा‍मापदण्‍
ड‍निम्‍िललखखत‍स्रोतों‍से‍ललए‍जािे‍की‍म ग‍की‍जािी‍चादहए:‍‍‍

समथाकारी‍और‍संबद्ध‍विधानयका‍जो‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्‍ि‍के‍प्रश्‍िों‍को‍नियंबत्रत‍करती‍है ;

सत्‍ि‍संचालि‍और‍प्रकिया‍नियमािली;

ं
सत्‍ि‍िीनतय ,‍मािक,निदे
श‍एिं‍ददशा-निदे श;

भारत‍द्िारा‍हस्‍
ताक्षररत‍बहुपक्षीय‍अंतरााष्‍रीय‍समझौते;
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
43 | पष्ृ ‍ठ

समाि‍लेखापरीक्षाओं‍में ‍पूि‍ा में ‍प्रयुक्‍त‍मापदण्‍
ड‍;

लेखापरीक्षा‍ ककए‍ जािे‍ िाले‍ कायािम/गनतविधध‍ के‍ ललए‍ सत्‍ि‍ द्िारा‍ प्रयुक्‍त‍ निष्‍पादि‍
मािक,‍अथिा‍विधानयका‍द्िारा‍पूि‍ा तहकीकात‍;

समाि‍ गनतविधधयों‍ अथिा‍ कायािमों‍ में ‍ समाि‍ सत्ि‍ अथिा‍ अन्‍य‍ सत्‍िों‍ द्िारा‍ प्रयुक्‍त‍
मापदण्‍
ड;

पेशि
े र‍संस्‍थािों‍और‍मािक‍निधाारण‍सत्िों‍द्िारा‍विकलसत‍और‍प्रयुक्‍त‍मापदण्‍
ड‍;

स्‍ितंत्र‍विशेषज्ञ‍सझ
ु ाि‍एिं‍जािकारी‍;

िई‍अथिा‍स्‍थावपत‍िैज्ञानिक‍जािकारी‍और‍अन्‍
य‍विश्‍
िसिीय‍सूचिा;

अन्‍य‍एसएआईएस‍द्िारा‍प्रकालशत‍मापदण्‍
ड‍; और‍

सामान्‍य‍प्रबंधि‍और‍विषयगत‍मामला‍विधानयका‍एिं‍अिुसंधाि‍पत्र।‍
4.18
सिााधधक‍ प्रमाखणक‍ स्रोतों‍ के‍ बबन्‍द‍ु में ‍ प्रकरण‍ पर‍ आधाररत‍ लेखापरीक्षा‍ मापदण्‍
ड‍ का‍
आधार‍ तय‍ करिे‍ के‍ ललए‍ अधधकाररक‍ मािक‍ (जैसे-विधानयका‍ अथिा‍ कायाकारी‍ शाखा‍ द्िारा‍
ं विनियम,‍ निणाय‍ एिं‍ कािूि‍ में ‍ निदहत‍ लक्ष्‍य)‍ हो‍ सकते‍ हैं।‍ विशेषज्ञ‍
अपिायी‍ गई‍ िीनतय ,‍
िैज्ञानिक‍ विधायी‍ पेशि
े र‍ मािक‍ और‍ सिोत्‍तम‍ प्रथाएुँ‍ भी‍ मापदण्‍
ड‍ का‍ एक‍ स्‍िीकाया‍ आधार‍
बिाते‍ हैं।‍ कुछ‍ मामलों‍ में ‍ पणधारकों‍ और‍ निणायकतााओं‍ के‍ बीच‍ विचार-विमशा‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍
ं
मापदण्‍
ड‍बिािा‍लाभाकारी‍हो‍सकता‍है ।‍ऐसे‍ मामलों‍में ‍ जह ‍स्रोत‍आधधकाररक‍विनियमों‍आदद‍
के‍ अलािा‍ हों,‍ विशेषकर‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्‍ि‍ के‍ मापदण्‍
ड‍ के‍ स्रोतों‍ का‍ साझाकरण‍ एक‍ अच्‍छा‍
व्‍यिहार‍हो‍सकता‍है ।‍‍‍‍
मापदण्ड विकमसत करिे हे तु विशेषज्ञ की सेिाऍ ं
4.19
सलाहकार‍अथिा‍संबंधधत‍क्षेत्र‍में ‍ प्रतजष्‍ठत‍विशेषज्ञ‍की‍सेिायें‍ विशेषकर‍उि‍विषयों‍जो‍
ि‍तो‍िए‍हों‍अथिा‍ि‍ही‍जदटल‍हों‍पर‍मापदण्‍ड‍विकलसत‍करिे‍में ‍उपयोगी‍हो‍सकती‍हैं।‍यह‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
44 | पष्ृ ‍ठ
सामान्‍यतया‍ विधायी,‍ मीडडया‍ और‍ लोगों‍ द्िारा‍ विशेष‍ रूप‍ से‍ सत्ि‍ द्िारा‍ मापदण्‍
ड‍ की‍
स्िीकायाता‍और‍विश्‍
िसिीयता‍में ‍ भी‍येागदाि‍दे गा।‍विशेष‍मामले‍ में ‍ जब‍तक‍निणाय‍ि‍ललया‍
जाए‍ महालेखाकार‍ को‍ सत्‍ि‍ के‍ साथ‍ सूचिा‍ साझा‍ करिे‍ हे तु‍ प्रोतसादहत‍ ककया‍ जाता‍ है ‍ जो‍
मापदण्‍
ड‍संस्‍थाि‍अथिा‍विशेषज्ञ‍की‍सलाह‍पर‍निधााररत‍ककया‍जाता‍है ।‍‍
मापदण्ड का पररशोिि तथा सत्ि द्िारा स्िीकायषता
4.20
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ करिे‍ के‍ आशय‍ से‍ सधचि‍ और/या‍ मुख्‍य‍ कायाकारी‍ अधधकारी‍ को‍
सधू चत‍ करते‍ समय‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍य‍ और‍ मापदण्‍
ड,‍ यदद‍ पहले‍ ही‍ विकलसत‍ ककए‍ गए‍ हों,‍
मापदण्‍
ड‍ की‍ स्‍िीकायाता‍ की‍ सूचिा‍ दे िे‍ का‍ अिुरोध‍ करते‍ हुए‍ सत्‍ि‍ के‍ साथ‍ साझा‍ ककए‍ जा‍
सकते‍ हैं।‍सत्‍ि‍द्िारा‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍में ‍ प्रयुक्‍त‍सभी‍लेखापरीक्षा‍मापदण्‍
ड‍की‍स्‍िीकायाता‍
एक‍ िांनछत‍ शता‍ है ‍ और‍ यह‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ प्रभाविता‍ में ‍ योगदाि‍ दे ती‍ है ।‍ कफर‍ भी‍
ऐसे‍अिसर‍हो‍सकते‍हैं‍जब‍सत्‍ि‍एक‍से‍अधधक‍मािदण्‍
ड‍की‍िैधता‍के‍बारे ‍में ‍आरक्षण‍प्रस्‍तत
ु ‍
करती‍हो।‍जबकक‍यह‍अनििाया‍ अथिा‍सम्‍भि‍िहीं‍ है ,‍उस‍सत्‍ि‍को‍हमेशा‍मापदण्‍
ड‍से‍ सहमत‍
ं
होिा‍चादहए,‍महालेखाकार‍‍को‍जह ‍तक‍सं
भि‍हो‍असहमनतयों‍को‍दरू ‍करिे‍ का‍प्रयास‍करिा‍
चादहए‍तथा‍अपिे‍प्रयासों‍का‍दस्‍तािेज‍बिािा‍चादहए।‍
(i)
अच्िे मापदण्ड की विशेषतायें
4.21
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षकों‍ को‍उद्दे श्‍यों‍को‍परू ा‍ करिे‍ तथा‍ लेखापरीक्षा‍ को‍ विषयगत‍ करिे‍
में ‍ सक्षम‍बिािे‍ हे तु‍ उपयुक्त‍मापदण्‍ड‍की‍पहचाि‍की‍जािी‍चादहए।‍चुँ कू क‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषा‍
विकलसत‍ करिे‍ में ‍ मापदण्‍
ड‍ जदटल‍ है ,‍ इसललए‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ को‍ बताते‍ हुए‍ उन्‍हें‍
सामान्‍यत:‍स्‍
िीकाया‍होिी‍चादहए।‍उपयुक्‍त‍मापदण्‍
ड‍की‍कुछ‍विशेषताओं‍में ‍शालमल‍है :‍
वि‍िसिीयता : विश्‍िसिीय‍ मापदण्‍ड‍ निरं तर‍ निष्‍कषा‍ दे ता‍ है ;‍ जब‍ समाि‍ पररजस्‍थनतयों‍ में ‍
मूल्‍यांकि‍हे तु‍प्रयुक्‍त‍होता‍है ;
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
45 | पष्ृ ‍ठ
उद्दे ‍यपरकता: उद्दे श्‍य‍मापदण्‍ड‍लेखापरीक्षक‍अथिा‍प्रबंधि‍के‍ककसी‍भी‍पक्षपात‍से‍मुक्‍त‍है;
उपयोधगता : उपयोग‍मापदण्‍ड‍पररणामों‍और‍निष्‍कषों‍में ‍ पररणत‍होते‍ हैं‍ जो‍उपयोगकतााओं‍ की‍
िांनछत‍जािकारी‍प्रदाि‍करते‍हैं‍;
तुलिात्मकता : तुलिात्‍मक‍ मापदण्‍ड‍ उिके‍ साथ‍ सुसंगत‍ है ‍ जो‍ अन्‍य‍ समाि‍ एजेंलसयों‍ के‍
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षाओं‍ या‍ गनतविधधयों‍ में ‍ प्रयक्
हें‍ वपछली‍ निष्‍पादि‍
ु ‍त‍ होती‍ हैं‍ और‍ जजन्‍
लेखापरीक्षाओं‍में ‍उपयोग‍ककया‍गया‍था‍;
पररपूणत
ष ा : पररपूणत
ा ा‍ दी‍ गई‍ पररजस्‍थनतयों‍ में ‍ निष्‍
पादि‍ तक‍ पहुुँचिे‍ के‍ ललए‍ उपयुक्‍त‍ सभी‍
महत्‍िपण
ू ‍ा मापदण्‍ड‍का‍विकास‍करता‍है ‍; और‍
(ड़.)
लेखापरीक्षा दृक्ष्टकोण और पद्िनतयॉ ं नििाषररत करिा
4.22
ं
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍सामान्‍यतया‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्‍ि;‍(िों)‍के‍निष्‍पादि‍की‍ज च‍करिे
‍
में ‍तीि‍दृजष्‍टकोणों‍में ‍से‍एक‍का‍अिुसरण‍ककया‍जाता‍है ।‍लेखापरीक्षा‍में ‍ललया‍जा‍सकता‍है :

एक‍प्रणाली‍उन्‍मुख‍दृजष्‍टकोण‍जो‍प्रबंधि‍प्रणाललयों‍विशेषकर‍वित्‍
तीय‍प्रबंधि‍प्रणाललयों‍
ं
के‍समुधचत‍किया–कलाप‍की‍ज च‍करता‍हैं
;

एक‍पररणाम‍उन्‍मुख‍दृजष्‍टकोण‍जो‍यह‍तय‍करता‍है ‍कक‍क्‍या‍पररणामी‍उद्दे श्‍यों‍को‍पूरा‍
ं
ं
कर‍ललया‍गया‍है ‍ जजसकी‍म ग‍की‍गई‍थी‍अथिा‍काया
िम‍या‍सेिायें‍ म ग‍क
े ‍अिरू
ु प‍
संचाललत‍हो‍रही‍है ;

एक‍समस्‍या‍उन्‍मुख‍दृजष्‍टकोण‍जो‍विशेष‍समस्‍याओं‍ या‍मापदण्‍
ड‍से‍ विचलि‍के‍कारणों‍
ं
की‍ज च,‍सत्‍
यापि‍और‍विश्‍
लेषण‍करता‍है ।‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
46 | पष्ृ ‍ठ
4.23
कोई‍ एकरूप‍ लेखापरीक्षा‍ दृजष्‍टकोण‍ निधााररत‍ िहीं‍ ककया‍ जा‍ सकता‍ जो‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षाओं‍ के‍विलभन्‍ि‍प्रकार‍के‍विषयों‍पर‍लागू‍ हो।‍दृजष्‍टकोण‍का‍चयि‍लेखापरीक्षा‍करिे‍
हे तु‍ पद्धनतयों‍और‍माध्‍यमों‍को‍भी‍निधााररत‍करता‍है 1‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍करिे‍ में ‍ प्रयुक्‍त‍
की‍जािे‍िाली‍कुछ‍पद्धनतयों‍में ‍शालमल‍है :‍
(i)
प्रक्रियाओं का मूल्यांकि
4.24
ं
इसमें ‍ योजिा,‍आयोजि,‍ज च‍और‍ले
खापरीक्षा‍ककए‍जािे‍ में ‍गनतविधध‍की‍म िीटररंग‍के‍
ललए‍मौजूद‍प्रणाललयों‍की‍समीक्षा‍निदहत‍है ।‍इसमें ‍ दस्‍तािेजों‍की‍ज च‍निदहत‍होगी‍जैसे-बजट,‍
वित्‍
तीय‍ररपोटें ,‍कायािम‍ददशा-निदे श,‍िावषाक‍या‍अन्‍य‍योजिायें,‍प्रकिया‍नियमािली,‍प्रत्‍यायोजि‍
और‍ ररपोदटिं ग‍ आिश्‍यकतायें,‍ निष्‍पादिों‍ लेखापरीक्षकों‍ को‍ कायािम‍ ददशा-निेदेशों‍ में ‍ उजल्‍
लखखत‍
उत्‍तरदानयत्‍ि‍ संबंधों‍ और‍ प्रकियाओं‍ की‍ उपयक्
ु ‍तता,‍ संसाधिों‍ की‍ मात्रा‍ का‍ मूल्‍यांकि‍ करिा‍
चादहए।‍प्रकियाओं‍ की‍िांनछत‍नियंत्रण‍म डल‍या‍मापदण्‍
ड‍के‍प्रनत‍जाुँच‍की‍जाए।‍इसका‍विशेष‍
रूप‍ से‍ अथा‍ है ‍ कक‍ विधानयका‍ और‍ प्रशासनिक‍ निदे शों,‍ आंतररक‍ निरं तरता,‍ व्‍यिहायाता‍ और‍
ं
अिुपालि‍के‍प्रनत‍पररपण
ा ा;‍‍प्रासंधगकता‍के‍ललए‍अन्‍य‍चीजों‍के‍बीच‍प्रकियाओं‍ की‍ज च‍की‍
ू त
जाएगी।‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
47 | पष्ृ ‍ठ
(ii)
मामले का अध्ययि
4.25
मामले‍ का‍ अध्‍ययि‍ एक‍ सत्‍ि‍ योजिा‍ अथिा‍ एक‍ कायािम‍ का‍ व्‍यापक,‍ अन्‍िेषी‍ या‍
अन्‍िेषी‍विश्‍
लेषण‍है ।‍यह‍विशेष‍घटिा‍की‍व्‍यापक‍समझ‍पर‍आधाररत‍एक‍जदटल‍मुद्दे ‍के‍बारे ‍
में ‍ समझिे‍ की‍ एक‍पद्धनत‍है ।‍इसमें ‍ समीक्षा‍के‍तहत‍सम्‍पूण‍ा क्षेत्र‍के‍संदभा‍ के‍भीतर‍ विशेष‍
मुद्दे ‍का‍एक‍व्‍यापक‍वििरण‍है ।
(iii)
‍मौजूदा आंकड़े का उपयोग
4.26
लेखापरीक्षा‍स्‍ट फ‍के‍ललए‍यह‍महत्‍िपूण‍ा है ‍ कक‍प्रबंधि‍द्िारा‍और‍अन्‍य‍संबंधधत‍स्रोतों‍
ं करे ।‍ इसमें ‍ सत्‍ि‍ कायािमों/गनतविधधयों‍ और/अथिा‍ व्यजक्‍तगत‍
द्िारा‍ रखे‍ ऑकड़ों‍ की‍ ज च‍
ं
कायािमों‍से‍ संग्रहीत‍डाटा‍के‍प्रबंधि‍हे तु‍ प्रयुक्‍त‍सूचिा‍प्रणाललय ‍शालमल‍हैं
।‍ऑ ंकड़ों‍का‍एक‍
महत्‍िपूण‍ा स्रोत‍ िाउचर‍लेिल‍कंपाइलेशि‍(िीएलसी)‍से‍ सजृ जत‍ डाटा‍ हो‍सकता‍है ।‍सत्‍ि‍द्िारा‍
ं
अिुरक्षक्षत‍मूलभूत‍दस्‍तािेजों‍के‍संबंध‍में ‍ सटीकता‍और‍पूणत
ा ा‍के‍ललए‍उपलब्‍ध‍डाटा‍की‍ज च‍
द्िारा‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ का‍ विश्‍
िसिीय‍ स्‍तर‍ बढाया‍ जाता‍ है ।‍ लेखापरीक्षा‍ दल‍ सत्‍ि‍ द्िारा‍
ं के‍ साक्ष्‍य‍ अिुरक्षक्षत‍
अिुरक्षक्षत‍ और‍ प्रस्‍तत
ु ‍ ऑ ंकड़े‍ की‍ सटीकता‍ सुनिजश्‍चत‍ करिे‍ के‍ ललए‍ ज च‍
करे गा।‍‍‍‍
(iv)
सिेक्षण
4.27
एक‍ एजेंसी‍ की‍ गनतविधधयों‍ की‍ एक‍ अन्‍य‍ पद्धनत‍ सिेक्षण‍ द्िारा‍ आउटपुटस‍ और‍
पररणामों‍और‍उिकी‍गण
ु ित्‍ता‍की‍समझ‍प्राप्‍त‍करिा‍है ।‍यह‍घटिा,‍घटिाओं‍ के‍वितरण‍और‍
अंतस
ा ंबंध‍और‍शतों‍का‍मूल्‍यांकि‍करिे‍ के‍ललए‍जिसंख्‍या‍के‍सदस्‍यों‍से‍ सूचिा‍जुटािे‍ की‍एक‍
पद्धनत‍है ।‍सामाजजक‍क्षेत्र‍कायािमों‍में ‍ पूिना िधााररत‍मािकों‍पर‍विश्‍िसिीय‍सिेक्षण‍लेखापरीक्षा‍
पररणामों‍ और‍ निष्‍कषों‍ को‍ पूरा‍ कर‍ सकते‍ हैं‍ जो‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षाओं‍ के‍ महत्‍ि‍ में ‍ िद्
ृ धध‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
48 | पष्ृ ‍ठ
करता‍है ।‍निष्‍
पादि‍लेखापरीक्षाओं‍के‍ललए‍चयनित‍गनतविधधयों‍या‍कुछ‍कायािमों‍की‍प्रिनृ त‍इस‍
प्रकार‍हो‍सकती‍है ‍कक‍योजिा‍चरण‍के‍दौराि‍एक‍सीलमत‍िमूिे‍का‍केंदित‍सिेक्षण‍लेखापरीक्षा‍
उद्दे श्‍यों‍और‍मापदण्‍
ड‍स्‍थावपत‍करिे‍के‍ललए‍अधधक‍समझ‍प्रदाि‍कर‍सकता‍है ।‍सिेक्षण‍करिे‍
तथा‍सेिेक्षण‍करिे‍ तथा‍सिेक्षण‍की‍डडजाइि‍का‍निणाय‍महालेखाकार‍द्िारा‍ददए‍गए‍प्रस्‍तािों‍
ं इसे‍ ददमाग‍ में ‍ रखा‍ जा‍
पर‍ विभाग‍ के‍ िररष्‍ठ‍ प्रबंधि‍ द्िारा‍ अिम
ु ोदि‍ ककया‍ जाएगा।‍ हाल कक‍
सकता‍ है ‍ कक‍ केिल‍ सिेक्षणों‍ का‍ पररणाम‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ का‍ प्राथलमक‍ साक्ष्‍
य‍ िहीं‍ हो‍
सकता।‍ सिेक्षणों‍ को‍ प्राथलमक‍ साक्ष्‍य‍ की‍ सहायता‍ से‍ स्‍थावपत‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ के‍ ललए‍
संपोषक‍के‍रूप‍में ‍उपयोग‍ककया‍जा‍सकता‍है ।‍‍‍‍‍‍
(v)
पररणामों का वि‍लेषण
4.28
ं करिे‍ से‍
एक‍ विशेष‍ क्षेत्र‍ में ‍ सत्त्ि‍ की‍ गनतविधध‍ की‍ घटिाओं‍ की‍ संख्‍या‍ की‍ ज च‍
पररणामेां‍ का‍विश्‍
लेषण‍यह‍निणाय‍करिे‍ में ‍ सहायता‍करे गा‍कक‍सत्‍ि‍का‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍
मापदण्‍
ड‍से‍ संबंधधत‍सहज‍क्षेत्र‍तथा‍सामान्‍यतया‍संतोषजिक‍है ।‍ इसके‍ ललए‍लेखापरीक्षक‍को‍
कायािम‍में ‍ बिे‍ आउटपुट-इिपुट‍म डल‍का‍मूल्‍यांकि‍करिे‍ तथा‍कायािम‍की‍दक्षता‍सुनिजश्‍चत‍
करिे‍ के‍ ललए‍ िास्‍तविक‍ आउटपट
यकता‍ है ।‍ पररणामों‍ का‍
ु -इिपट
ु ‍ विश्‍लेषण‍ करिे‍ की‍ आिश्‍
विश्‍
लेषण‍प्रत्‍यालशत‍प्रभाि‍के‍प्रनत‍कायािम‍के‍प्रभाि‍के‍विश्‍
लेषण‍हे तु‍भी‍कहा‍जाय।‍‍‍
(vi)
मात्रात्मक वि‍लेषण
4.29 मात्रात्‍मक‍ विश्‍
लेषण‍ िस्‍तुओं‍ को‍ मापिे‍ का‍ एक‍ तरीका‍ है ।‍ इसमें ‍ ककसी‍ भी‍ रूप‍ में ‍
ं शालमल‍ है ,‍ यह‍ वित्‍
उपलब्‍ध‍ डाटा‍ की‍ ज च‍
तीय‍ जैसे‍ अजाि,‍ राजस्‍ि,‍ बाजार‍ शेयर‍ से‍ संबंधधत‍
डाटा‍हो‍ सकता‍है‍ अथिा‍कायािम‍के‍कायाान्‍ियि‍ से‍ संबंधधत‍डाटा‍जैस‍े लाभाधथायों‍के‍वििरण‍
इत्‍यादद‍हो‍सकता‍है ।‍एक‍वििरण‍की‍व्‍याख्‍या‍करिे‍ अथिा‍पुजष्‍ट‍करिे‍ के‍ललए‍लेखापरीक्षकों‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
49 | पष्ृ ‍ठ
द्िारा‍ लेखापरीक्षक्षती‍ सत्त्िों‍ के‍ डाटा‍ का‍ विश्‍
लेषण‍ ककया‍ जा‍ सकता‍ है ।‍ गखणतीय,‍ आधथाक,‍
कम्प्यट
लेषण‍ कुछ‍ मात्रात्‍मक‍ तकिीकें‍ हैं,‍ जजिका‍ उपयोग‍
ू रीकृत‍ अथिा‍ संजख्‍यकीय‍ विश्‍
लेखापरीक्षकों‍ द्िारा‍ लेखापरीक्षक्षती‍ सत्त्ि‍ के‍ जदटल‍ डाटा‍ का‍ विश्‍
लेषण‍ करते‍ समय‍ ककया‍ जा‍
सकता‍ है ।‍ विलभन्‍
ि‍ उपलब्‍ध‍ आईटी‍ उपकरणों‍ की‍ सहायता‍ से‍ सारी‍ जिसंख्‍या‍ का‍ विश्‍
लेषण‍
करिा‍काफी‍‍हद‍तक‍संभि‍है ।‍इस‍उद्दे श्‍य‍के‍ललए‍डाटा‍विश्‍
लेषण‍तथा‍अन्‍य‍तकिीकों‍का‍
उपयोग‍ ककया‍ जा‍ सकता‍ है ।‍ मात्रात्‍मक‍ विश्‍लेषण‍ प्रिनृ तयां,‍ एक‍ विलशष्‍
ट‍ व्‍यिहार‍ के‍ ललए‍
स्‍पष्‍टीकरण‍तथा‍अन्‍य‍पररणाम‍उपलब्‍ध‍करा‍सकती‍हैं।‍
4.30‍‍तथावप,‍जब‍सम्‍पोषण‍परीक्षण‍की‍बात‍आती‍है ‍ तो‍एक‍कायािम‍अथिा‍ सत्त्ि‍ से‍ जड
ु े‍
डाटा‍ एिं‍ सूचिा‍ की‍ भारी‍ मात्रा‍ के‍ कारण‍ संपूण‍ा डाटा‍ के‍ साथ‍ काया‍ करिा‍ संभि‍ िहीं‍ ‍ हो‍
सकता।‍ ऐसे‍ मामलों‍ में ,‍ िमूिा‍ तकिीकों‍ का‍ उपयोग‍ करिा‍ अपेक्षक्षत‍ होता‍ है ।‍ अत्‍यधधक‍
ं की‍ जािी‍
यथोधचत‍ िमूिा‍ पद्धनत‍ का‍ निश्‍चय‍ करिे‍ के‍ ललए‍ जिसंख्‍या‍ की‍ प्रकृनत‍ की‍ ज च‍
चादहए‍चयनित‍िमूिे‍तथा‍िमूिा‍दृजष्‍टकोण‍तथा‍पद्धनत‍को‍प्रलेखखत‍तथा‍सत्त्ि‍के‍साथ‍साझा‍
ककया‍जािा‍चादहए।‍‍‍‍‍
‍
4.31‍‍एक‍लेखापरीक्षा‍िमि
ू ा‍का‍चयि‍करते‍ समय,‍विलशष्‍ट‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍और‍आबादी‍
की‍विशेषता‍जजससे‍ िमि
ू ा‍तैयार‍ककया‍जािा‍है ,‍को‍ध्‍याि‍में ‍ रखिा‍चादहए।‍िमूिा‍आकार‍का‍
निधाारण‍करिे‍ में ‍यह‍विचार‍करिा‍चादहए‍कक‍क्‍या‍िमि
ू ा‍जोखखम‍को‍स्‍िीकाया‍निम्‍िस्‍तर‍तक‍
कम‍ककया‍जायेगा।‍िमूिा‍मदों‍को‍चयनित‍करिा‍है ‍ ताकक‍यथोधचत‍प्रत्‍याशा‍हो‍कक‍आबादी‍में ‍
सभी‍िमूिा‍इकाईयों‍के‍ललए‍चयि‍करिे‍का‍बराबर‍अिसर‍हो।‍जिसंख्‍या,‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍
तथा‍ अपिाए‍ गए‍ विशलेषणात्‍
मक‍ उपकरणों‍ की‍ एकरूपता‍ को‍ ध्‍याि‍ में ‍ रखते‍ हुए‍ लेखापरीक्षा‍
िमूिे‍ के‍ पयााप्‍त‍ परीक्षण‍ पर‍ आधाररत‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ का‍ बदहिेसि‍ समस्‍त‍ लेखापरीक्षा‍
समजष्‍ट‍को‍ककया‍जािा‍होता‍है ।‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
50 | पष्ृ ‍ठ
4.32‍ ‍ लेखापरीक्षा‍ पद्धनत‍ का‍ चयि‍ एक‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ योजिा‍ बिािे‍ का‍ एक‍
महत्‍िपूण‍ा भाग‍ है ।‍ लेखापरीक्षा‍ पद्धनत‍ का‍ चयि‍ लेखापरीक्षा‍ दृजष्‍टकोण,‍ उद्दे श्‍यों,‍ काया‍ की‍
जदटलता‍तथा‍लेखापरीक्षा‍के‍कायाान्‍ियि‍में ‍ लगे‍ संसाधिों‍को‍ध्‍याि‍में ‍ रखकर‍ककया‍जाता‍है ।‍
लेखापरीक्षा‍दल‍को‍ककसी‍पहचाि‍की‍गई‍गलती‍के‍स्‍िरूप‍और‍कारण‍और‍विलशष्‍
ट‍लेखापरीक्षा‍
उद्दे श्‍य‍पर‍एिं‍लेखापरीक्षा‍के‍अन्‍य‍क्षेत्रों‍पर‍उिके‍संभावित‍प्रभाि‍पर‍विचार‍करिा‍चादहए।‍
(च) लेखापरीक्षा प्र‍ि विकमसत करिा
4.33
लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ के‍ प्रारूप‍ तथा‍ लेखापरीक्षा‍ मािदण्‍
ड‍ की‍ पहचाि‍ के‍ पश्‍चात,‍
लेखापरीक्षा‍दल‍को‍प्रश्‍िों‍की‍सूची‍तैयार‍करिी‍चादहए‍जजसके‍उत्‍तर‍उन्‍हें‍ चादहए।‍लेखापरीक्षा‍
प्रश्‍ि‍विकलसत‍करिे‍तथा‍बिािे‍के‍अिेक‍तरीके‍हो‍सकते‍हैं।‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षकों‍को‍प्रश्‍िों‍
की‍एक‍व्‍यापक‍तथा‍विस्‍तत
ृ ‍सूची‍बिािी‍चादहए।‍
4.34
प्रत्‍येक‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य‍के‍तहत‍दो‍अथिा‍अधधक‍उप-उद्दे श्‍य‍हो‍सकते‍ हैं।‍ प्रत्‍
येक‍
उद्दे श्‍य/अउद्दे श्‍य‍के‍तहत‍प्रश्‍िों‍का‍एक‍विस्‍तत
ृ ‍अिुिम‍हो‍सकता‍है ,‍जजसके‍पररणामस्‍िरूप‍
एक‍ वपरालमड‍ अिसंरचिा‍ बिती‍ है ।‍ अजन्‍
तम‍ स्‍तर‍ के‍ लेखापरीक्षा‍ प्रश्‍िों‍ के‍ पररणाम‍ ह ‍ं अथिा‍
िहीं‍ उत्‍तर‍में ‍ होिे‍ चादहए।‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍के‍लेखापरीक्षा‍उप‍उद्दे श्‍यों,‍स्‍तर‍1‍प्रश्‍ि‍तथा‍
स्‍तर‍2‍प्रश्‍
िों‍में ‍ विघटि‍के‍पररणामस्‍िरूप‍प्रत्‍येक‍स्‍तर‍पर‍कम‍से‍ कम‍2‍प्रश्‍ि‍होिे‍ चादहएं।‍
यदद‍िहीं,‍तो‍प्रश्‍ि‍की‍िैधता‍तथा‍अन्‍य‍स्‍तर‍पर‍कुछ‍दस
ू रे ‍ प्रश्‍िों‍के‍साथ‍इसके‍समािेश‍की‍
संभाििा‍पर‍विचार‍ककया‍जािा‍चादहए।‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍को‍निष्‍पाद्य‍लेखापरीक्षा‍प्रश्‍िों‍में ‍
िखणात‍ करिे‍ के‍ अिेक‍लाभ‍ होते‍ है ।‍ यह‍ लेखापरीक्षा‍ प्रश्‍िों‍ तथा‍ संग्रह‍ ककये‍ जािे‍ िाले‍ साक्ष्‍
य‍
तथा‍ निकाले‍ गए‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषा‍ के‍ बीच‍ संबंध‍ स्‍थावपत‍ करिे‍ में ‍ सहायता‍ करता‍ है ।‍ यह‍
विश्‍
लेषण‍बाद‍में ‍चचाा‍ककये‍जािे‍के‍ललए‍लेखापरीक्षा‍डडजाईि‍मैदरक्स‍‍का‍सज
ृ ि‍करे गा।‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
51 | पष्ृ ‍ठ
(ज)
लेखापरीक्षा दल के कौशल का नििाषरण तथा ‍या बाहरी विशेषज्ञ की राय की आि‍यकता
होगी
4.35
उत्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍एक‍ज्ञाि‍आधाररत‍लमशि‍है ।‍अत:‍यह‍आिश्‍यक‍है ‍ कक‍निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षकों‍ के‍ पास‍ विशेष‍ योग्‍यता,‍ कौशल‍ तथा‍ ज्ञाि‍ हो।‍ भारत‍ के‍ सीएजी‍ के‍ लेखापरीक्षण‍
मािक‍में ‍ यह‍प्रािधाि‍ककया‍गया‍है ‍ कक‍लेखापरीक्षा‍संस्‍थािों‍को‍लेखापरीक्षकों‍को‍अपिे‍ काया‍
दक्षता‍ से‍ करिे‍ में ‍ सक्षम‍ बिािे‍ के‍ ललए‍ उन्‍
हें‍ विकलसत‍ तथा‍ प्रलशक्षक्षत‍ करिा‍ चादहए‍ तथा‍
लेखापरीक्षा‍ करिे‍ से‍ संिंधधत‍ नियम‍ पुजस्‍तकाएं‍ तथा‍ अन्‍य‍ ललखखत‍ ददशानिदे श‍ दटप्‍पणी‍ तथा‍
अिद
ु े श‍तैयार‍करिे‍ चादहए।‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षकों‍के‍पास‍लेखपरीक्षा‍अधधदे श‍के‍प्रभािशाली‍
संपादि‍के‍ललए‍आिश्‍यक‍कौशल‍तथा‍अिुभि‍की‍सीमा‍होिी‍चादहए।‍लसद्धान्‍तों,‍कायापद्धनत‍
तथा‍ तकिीकों‍ की‍ समझ‍ को‍ बढािे‍ तथा‍ सुदृढ‍ करिे‍ के‍ ललए‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षकों‍ के‍ ललए‍
प्रलशक्षण‍तथा‍कौशल‍विकास‍प्रदाि‍करिे‍िाले‍कायािमों‍को‍उच्‍च‍प्राथलमकता‍दी‍जािी‍चादहए।
4.36
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षण‍ के‍ विषयों‍ के‍ वििधतापण
ू ‍ा क्षेत्र‍ को‍ दे खते‍ हुए,‍ महालेखाकार‍ तथा‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍दल‍को‍लेखापरीक्षा‍ककये‍जािे‍के‍ललए‍प्रस्‍तावित‍कायािम‍अथिा‍सत्‍ि‍को‍
एक‍विशेषज्ञ‍की‍ररपोटो,‍विचारों,‍मल्
यांकिों‍तथा‍वििरणों‍के‍रूप‍में ‍सुदृढ‍समझ‍विकलसत‍करिे‍
ू ‍
की‍आिश्‍यकता‍हो‍सकती‍है ।‍उन्‍
हें‍ योजिा‍के‍चरण‍पर‍ही‍यह‍निजश्‍चत‍करिा‍होगा‍कक‍ककस‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
52 | पष्ृ ‍ठ
पहलू‍ पर‍ विशेषज्ञ‍ राय‍ की‍ आिश्‍यकता‍ है।‍ यह‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ कायाक्षेत्र‍ को‍ रूपरे खखत‍ करिे,‍
लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍का‍निरूपण‍करिे‍अथिा‍निधाारण‍हे तु‍मािदण्‍डों‍को‍धचजन्‍हत‍करिे‍क‍स्‍तर‍
हो‍सकता‍है‍।यद्यवप‍महालेखाकार‍एक‍विशेषज्ञ‍के‍काया‍का‍उपयोग‍कर‍सकता‍है ,‍कफर‍भी‍िह‍
लेखापरीक्षा‍ ररपोटा ‍ में ‍ निष्‍कषों‍ के‍ ललए‍ पूरा‍ दानयत्‍ि‍ रखता/रखती‍ है ।‍ विशेषज्ञ‍ की‍ सेिाओं‍ का‍
प्रबन्‍
ध‍ अथिा‍ उिके‍ काया‍ का‍ प्रयोग‍ विभाग‍ के‍ मख्
ु ‍यालय‍ द्िारा‍ समय‍ समय‍ पर‍ अिम
ु ोददत‍
ककये‍गए‍सामान्‍य‍ददशानिदे शों‍के‍अिुसार‍होगा।‍‍‍
(ज) लेखापरीक्षा डडजाईि मैदि‍स
4.37
लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍य,‍ लेखापरीक्षा‍ दृजष्‍टकोण,‍ लेखापरीक्षा‍ मािदण्‍
ड,‍ डाटा‍ संग्रहण‍ तथा‍
साक्ष्‍
य‍ संग्रहण‍ पद्धनत‍ इत्‍यादद‍ निजश्‍चत‍ हो‍ जािे‍ पर,‍ लेखापरीखा‍ दल‍ को‍ एक‍ लेखापरीक्षा‍
डडजाईि‍ मैदरक्‍स‍ तैयार‍ करिा‍ चादहए।‍ लेखापरीक्षा‍ डडजाईि‍ मैदरक्‍स‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों,‍
संबंधधत‍ उप-उद्दे श्‍यों‍ तथा‍ निम्‍ि‍ स्‍तरीय‍ विस्‍तत
ृ ‍ प्रश्‍िों‍ के‍ चारों‍ ओर‍ आधाररत‍ एक‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍ अध्‍ययि‍ अलभकजल्पत‍ करिे‍ हे त‍ु एक‍ कठोर,‍ संरक्षक्षत‍ तथा‍ उच्‍च‍ रूप‍ से‍ केजन्‍ित‍
दृजष्‍टकोण‍ है ।‍ इस‍ प्रकार,‍ यह‍ क्षेत्रीय‍ काया‍ तथा‍ अनतररक्‍त‍ विश्‍
लेषण‍ हे त‍ु ढांचा‍ उपलब्‍ध‍ कराता‍
है ।‍ लेखापरीक्षा‍ प्रश्‍ि‍ जजिके‍ उत्‍तर‍ अपेक्षक्षत‍ हैं,‍ निजश्‍चत‍ करिे‍ पर‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षक‍ से‍
लेखापरीक्षा‍ डडजाईि‍ मैदरक्‍स‍ लेखापरीक्षा‍ प्रश्‍िों‍ के‍ उत्‍तर‍ खोजिे‍ की‍ प्रकिया‍ संलग्‍ि‍ करिे‍ की‍
अपेक्षा‍भी‍की‍जाती‍है ।‍पररभावषत‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍के‍संदभा‍ में ‍ लेखापरीक्षा‍विचार/निष्‍कषों‍
के‍ समथाि‍ के‍ ललए‍ अपेक्षक्षत‍ साक्ष्‍
य‍ के‍ प्रकार‍ एिं‍ स्रोत‍ के‍ साथ‍ साथ‍ यह‍ डाटा‍ संग्रहण‍ तथा‍
विश्‍
लेषण‍ पद्धनत‍ को‍ भी‍ दशााता‍ है ।‍ यह‍ सुनिजश्‍
चत‍ करिे‍ के‍ ललए‍ सभी‍ धचजन्‍हत‍ लेखापरीक्षा‍
ं तथा‍ ररपोदटिं ग‍
मद्
ु दों‍ को‍ किर‍ ककया‍ गया‍ है ,‍ लेखापरीक्षा‍ डडजाईि‍ मैदरक्‍स‍ पर‍ योजिा,‍ ज च‍
ं चरण‍ पूरा‍ हो‍ जािे‍ पर,‍
चरणों‍ पर‍ शुरू‍ से‍ अंत‍ तक‍ विचार‍ ककया‍ जाता‍ है ।‍ एक‍ बार‍ ज च‍
लेखापरीक्षा‍दल‍को‍उधचत‍रूप‍से‍ लेखापरीक्षा‍डडजाईि‍मैदरक्‍स‍को‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषा‍ मैदरक्‍स‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
53 | पष्ृ ‍ठ
से‍ जोड़िा‍ चादहए‍ जैसा‍ कक‍ अध्‍याय‍ 5‍ में ‍ चचाा‍ की‍ गई‍ है ।‍ लेखापरीक्षा‍ डडजाईि‍ मैदरक्‍स‍ का‍
िमूिा‍भी‍यहां‍िीचे‍ददया‍गया‍है :
लेखापरीक्षा डडजाईि मैदि‍स
लेखापरीक्षा‍
लेखापरीक्षा‍ लेखापरीक्षा‍
उद्दे श्‍य/उप‍
प्रश्‍ि
उद्दे श्‍य
(1)
(2)
साक्ष्‍
य‍
मािदण्‍
ड‍
(3)
डाटा‍
संग्रहण‍
तथा‍
विश्‍
लेषण‍पद्धनत‍
(4)
(5)
लेखापरीक्षा‍डडजाईि‍मैदरक्‍स‍प्रारं लभक‍अध्‍ययि‍के‍दौराि‍योजिा‍चरण‍में ‍ प्राप्‍त‍की‍गई‍सूचिा‍
तथा‍ज्ञाि‍के‍आधार‍पर‍तैयार‍की‍जाती‍है ।‍उन्‍
हें‍डडजाईि‍मैदरक्‍स‍को‍अद्यनतत‍करिे‍ के‍ललए‍
प्रोत्‍सादहत‍ककया‍जाता‍है ,‍जब‍एिं‍ जैसे‍ ही‍लेखापरीक्षा‍दल‍को‍लेखापरीक्षा‍विषय‍िस्‍तु‍ का‍और‍
अधधक‍ गहि‍ ज्ञाि‍ प्राप्‍त‍ होता‍ है ।‍ एक‍ सु-पररकजल्‍पत‍ लेखापरीक्षा‍ डडजाईि‍ मैदरक्‍स‍ के‍ कारण‍
योजिा‍बिती‍है ‍तथा‍फलस्‍िरूप‍प्रभािशाली‍लेखापरीक्षा‍होती‍है ,‍जो‍लेखापरीक्षक्षती‍सत्त्िों‍तथा‍िे‍
जजन्‍
हें‍ ‍ सरकार‍ द्िारा‍ प्रभाररत‍ ककया‍ गया‍ है ,‍ को‍ उच्‍चतम‍ आश्‍िासि‍ प्रदाि‍ करती‍ है ।‍ प्रत्‍येक‍
लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य‍के‍ललए‍एक‍एडीएम‍तैयार‍करिा‍िांछिीय‍है ।‍‍‍
(झ) समय सारणी तथा संसािि स्थावपत करिा
4.38
ककसी‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ का‍ पररणाम‍ लेखापरीक्षा‍ दल‍ तथा‍ कायाकलाप‍ योजिा‍ पर‍
निभार‍होगा।‍समयसारणी‍तथा‍आिश्‍यक‍संसाधि‍निजश्‍
चत‍करिा‍महत्‍िपूण‍ा है ।‍महत्‍िपूणा‍कारकों‍
में ‍परू ा‍होिे‍का‍प्रत्‍यालशत‍समय‍तथा‍िह‍तरीका‍शालमल‍है ‍जजससे‍लेखापरीक्षा‍आयोजजत‍की‍गई‍
है ।‍एक‍लेखापरीक्षा‍की‍योजिा‍बिािे‍में ‍ उपयुक्‍त‍लेखापरीक्षा‍दल‍का‍चयि‍अत्‍यधधक‍महत्‍िपूणा‍
घटक‍ है ।‍ लेखापरीक्षा‍ प्रकिया‍ के‍ भाग‍ के‍ रूप‍ में ‍ ककए‍ जािे‍ िाले‍ विलभन्‍ि‍ कायाकलापों‍ के‍ ललए‍
प्रस्‍तावित‍समय‍सीमा‍के‍साथ‍एक‍विलशष्‍ट‍दल‍के‍चयि‍के‍ललए‍विचारों‍को‍योजिा‍दस्‍तािेजों‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
54 | पष्ृ ‍ठ
में ‍ दजा‍ ककया‍ जािा‍चादहए।‍इि‍समय‍सीमाओं‍ के‍प्रनत‍प्रगनत‍ की‍निगरािी‍की‍जािी‍चादहए।‍
महालेखाकार‍यह‍सुनिजश्‍चत‍करिे‍ के‍ललए‍उत्‍तरदायी‍होगा‍कक‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍समय‍‍पर‍
पूरी‍ की‍ गई‍ है ।‍ अपेक्षक्षत‍ समय‍ तथा‍ लगाए‍ गए‍ िास्‍तविक‍ समय‍ की‍ तुलिा‍ की‍ जािी‍ चादहए‍
तथा‍िहां‍अन्‍
तरों‍को‍सक्षम‍प्राधधकारी‍से‍अिुमोददत‍करािा‍चादहए।‍‍‍‍
4.39
लेखापरीक्षा‍के‍ललए‍स्‍थावपत‍मुख्‍य‍मील‍के‍पत्‍थर‍प्रगनत‍के‍निधाारण‍हे तु‍ आधार‍बिेगें।‍
यह‍ सदृ
ु ढता‍ से‍ परामशा‍ योग्‍य‍ है ‍ कक‍ दल‍ समय‍ सीमाओं‍ को‍ परू ा‍ करिे‍ के‍ ललए‍ उिके‍ अपिे‍
कायािम‍में ‍रूपान्‍तरण,‍अिुमोदि‍तथा‍संभावित‍विलम्‍बों‍के‍ललए‍समय‍निधााररत‍करे ।
(ञ)
लेखापरीक्षा की सूचिा
4.40
लेखापरीक्षक्षती‍सत्‍िों‍को‍लेखापरीक्षा‍शुरू‍होिे‍से‍ काफी‍पहले‍लेखापरीक्षा‍के‍कायाक्षेत्र‍तथा‍
विस्‍तार‍ ‍ के‍साथ‍नियोजजत‍निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍करिे‍ के‍अलभप्राय‍के‍बारे ‍ में ‍ अिश्‍
य‍सूधचत‍
ं
ककया‍ जािा‍ चादहए।‍सूचिा‍में ‍ लेखापरीक्षा‍ दल‍ का‍गठि,‍चयनित‍उप‍ इकाईय ,‍यदद‍पहले
‍ ही‍
निजश्‍चत‍ ककया‍ जा‍ चक
ु ा‍ है ‍ तथा‍ संभावित‍ समय‍ कायािम‍ भी‍ शालमल‍ होिा‍ चादहए।‍ सूचिा‍
प्रबन्‍
धि‍की‍जिाबदे ही‍हेतु‍ भेजी‍जा‍सकती‍है ‍ तथा‍लेखापरीक्षा‍काया‍ के‍सफलतापूिक
ा ‍पूरा‍होिे‍
के‍ ललए‍ उिके‍ सहयोग‍ का‍ अिुरोध‍ ककया‍ जा‍ सकता‍ है ।‍ इसकी‍ पािती‍ हे तु‍ अिुरोध‍ ककया‍ जा‍
सकता‍है ‍तथा‍इसे‍अलभलेख‍पर‍रखा‍जा‍सकता‍है ।‍‍
उद्दे ‍यों तथा मािदण्ड का पररमाजषि अथिा सीममत करिा
4.41
ऐसे‍ कदठि‍िातािरण‍के‍मद्दे िजर‍जजसमें ‍ हम‍काया‍ करते‍ हैं ,‍लेखापरीक्षा‍परू ी‍करिे‍ हे तु‍
आिश्‍यक‍ सूचिा‍ संग्रह‍ करिे‍ के‍ ललए,‍ जैसे‍ जैसे‍ लेखापरीक्षा‍ आगे‍ बढती‍ है ,‍ लेखापरीक्षा‍ के‍
उद्दे श्‍यों को‍ पररमाजजात‍ करिा‍ आिश्‍यक‍ हो‍ सकता‍ है ।‍ उद्दे श्‍यों/मािदण्‍
डों‍ में ‍ ऐसे‍ पररितािों‍ के‍
ललए‍ कारणों‍ को‍ ररकाडा‍ ककया‍ जािा‍ चादहए‍ तथा‍ सक्षम‍ प्राधधकारी‍ का‍ अिुमोदि‍ प्राप्‍त‍ ककया‍
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55 | पष्ृ ‍ठ
जािा‍ चादहए।‍ संशोधधत‍ उद्दे श्‍यों‍ तथा‍ मािदण्‍
ड‍ को‍ उधचत‍ रूप‍ से‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्‍ि‍ अथिा‍
अलभशासि‍द्िारा‍प्रभाररत‍की‍जािकारी‍में ‍भी‍लाया‍जािा‍चादहए।‍
लेखापरीक्षा कायषिम में िम्यता
4.42
एक‍ लेखापरीक्षा‍ कायािम‍ को‍ विकलसत‍ करते‍ समय‍ सभी‍ आकजस्‍मकताओं‍ की‍ प्रत्‍याशा‍
करिा‍संभि‍िहीं‍ होगा।‍लेखापरीक्षा‍की‍प्रारं लभक‍अिस्‍थाओं‍ में ,‍िम्‍
यता‍को‍सरु क्षक्षत‍रखिे‍ और‍
औधचत्‍य‍के‍ललए‍लेखापरीक्षा‍कायािम‍की‍समीक्षा‍करिे‍ की‍आिश्‍यकता‍है ।‍लेखापरीक्षा‍मामलों‍
के‍ ललए‍ अलभगम‍ की‍ रूपरे खा‍ कायािम‍ शरू
ु ‍ करिे‍ हे त‍ु बेहतर‍ है ‍ और‍ जैसे‍ ही‍ लेखापरीक्षा‍
विकलसत‍हो‍जाती‍तो‍इसमें ‍संशोधि‍और‍िद्
ृ धध‍की‍जाये।‍‍‍
4.43
महालेखाकार‍ को‍ उसी‍ महालेखाकार‍ के‍ प्रबंधकीय‍ नियंत्रण‍ के‍ अन्‍दर‍ अथिा‍ विभाग‍ के‍
अन्‍तगात‍ विलभन्‍
ि‍ प्रबंधि‍ नियंत्रण‍ के‍ अधीि‍ जब‍ विलभन्‍
ि‍ व्‍यजक्‍त‍ विलभन्‍
ि‍ स्‍थािों‍ पर‍
लेखापरीक्षा‍ करते‍ है ,‍ समिती‍ रूप‍ से‍ अन्‍य‍ लेखापरीक्षा‍ दलों‍ के‍ साथ‍ अलभगम‍ और‍ अनतररक्‍त‍
ं एिं‍ निष्‍कषों‍ में ‍ सभी‍ महत्‍िपूण‍ा पररष्‍करण‍ की‍ भागीदारी‍ के‍ ललए‍ अिसर‍ मुहैया‍ करािा‍
ज च‍
चादहए।‍महत्‍िपूण‍ा क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍अिुभि‍की‍भागीदारी‍की‍प्रणाली‍को‍प्रलेखखत‍ककया‍जािा‍
चादहए‍और‍समीक्षा‍की‍जािी‍चादहए।‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
56 | पष्ृ ‍ठ
5.
5.1
निष्पादि लेखापरीक्षा का कायाषन्ियि
इस‍ अध्‍याय‍ में ‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ कायाान्‍ियि‍ के‍ दौराि‍ लेखापरीक्षा‍ दल‍ द्िारा‍
अिुसरण‍ ककये‍ जािे‍ िाली‍ पद्धनतयों‍ और‍ कियाविधधयों‍ को‍ ददया‍ गया‍ है ‍ और‍ लेखापरीक्षा‍
आयोजि‍के‍पश्‍चात‍निष्पादि‍लेखापरीक्षा‍‍के‍स्‍तर‍से‍ लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍और‍लसफाररशों‍को‍
विकलसत‍ करिे‍ के‍ स्‍तर‍ तक‍ को‍ सामील‍ करता‍ है ।‍ निष्पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ कायाान्‍ियि‍ की‍
प्रकिया‍का‍लेखापरीक्षा‍आबन्‍ध,‍प्रविजष्‍ट‍सम्‍मेलि,‍लेखापरीक्षा‍कायािम‍का‍विकास,‍लेखापरीक्षा‍
ं कायािम‍ का‍ विकास‍ करिे‍ और‍ अन्‍त‍ में ‍ लेखापरीक्षा‍
अलभगम‍ का‍ निधाारण,‍ लेखापरीक्षा‍ ज च‍
निष्‍कषों‍और‍लसफाररशों‍का‍विकास‍करिे‍के‍माध्‍यम‍से‍पररचालि‍होता‍है ।‍‍‍‍
एन्िी कांफ्रेंस
5.2
महालेखाकार‍द्िारा‍संबंधधत‍विभाग‍के‍सधचि‍के‍साथ‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍शुरूआत‍
ं
पर‍ एन्‍
री‍ कांफ्रेंस‍ आयोजजत‍ की‍ जाती‍है ।‍ जह ‍एक‍
से‍ अधधक‍ विभाग/एजेन्‍सी‍ शालमल‍ हैं,‍ ऐसी‍
एजेजन्‍
सयेां‍ /विभागों‍ से‍ प्रनतनिधधत्‍ि‍ पर‍ जोर‍ ददया‍ जािा‍ चादहए।‍ इस‍ कांफ्रेंस‍ का‍ उद्दे श्‍य‍ सत्त्ि‍
को‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों,‍ लेखापरीक्षा‍ दृजष्‍टकोण‍ तथा‍ समय‍ सीमा‍ जजसमें‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ जािी‍‍
अपेक्षक्षत‍है ,‍के‍साथ‍लेखापरीक्षा‍ककये‍ जािे‍ िाले‍ क्षेत्रों‍के‍विषय‍में ‍ सूचिा‍दे िा‍है ।‍लेखापरीक्षा‍
मािदण्‍
ड/प्राचलों/प्रनतमािों‍ जजिके‍ प्रनत‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ को‍ िैंचमाका‍ ककया‍ जाएगा,‍ पर‍ भी‍
चचाा‍की‍जािी‍चादहए।‍संपका‍अधधकाररयों‍के‍िामांकि,‍अलभलेखों‍की‍प्रस्तुनत,‍संयुक्त
‍ ‍निरीक्षणों‍
का‍प्रबन्‍
धि,‍फोटोग्राफ,‍इत्‍यादद‍सदहत‍लेखापरीक्षा‍साक्ष्‍
य‍का‍प्रमाणीकरण,‍लेखापरीक्षा‍दटप्‍पखणयों‍
को‍ जारी‍ करिा,‍ उत्‍तरों‍ की‍ प्राजप्‍त‍ हे तु‍ समय‍ अिधध‍ तथा‍ अन्‍य‍ समस्‍तन्‍
त्र‍ प्रबन्‍
धों सदहत‍
लेखापरीक्षा‍के‍संचालि‍के‍ललए‍प्रोटोकोल‍स्‍थावपत‍ककया‍जाता‍है ।‍यह‍कांफ्रेंस‍विषय‍िस्‍त‍ु पर‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
57 | पष्ृ ‍ठ
लेखापरीक्षक्षती‍सत्‍त्ि‍की‍धचन्‍
ताओं‍ पर‍चचाा‍ करिे‍ हे तु‍ अिसर‍भी‍प्रदाि‍करती‍है ।‍एन्‍री‍कांफ्रेंस‍
कायािाही‍का‍कायाित
ृ ‍तैयार‍करते‍ हुए‍की‍जािी‍चादहए‍जजसे‍ लेखापरीक्षक्षती‍सत्‍ि‍के‍साथ‍साझा‍
ककया‍जािा‍चादहए‍तथा‍पािती‍हे तु‍अिुरोध‍ककया‍जािा‍चादहए।‍
आबन्ि पत्र जारी करिा
5.3
महालेखाकार‍ तथा‍ लेखापरीक्षा‍ दल‍ से‍ परू े ‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ चि‍ के‍ दौराि‍ विलभन्‍
ि
स्‍तरों‍पर‍सत्‍त्ि‍के‍साथ‍संचारण‍करिे‍की‍अपेक्षा‍की‍जाती‍है ।‍लेखापरीक्षा‍प्रारम्‍भ‍करिे‍से‍पूिा‍
महालेखाकार‍ को‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ ललए‍ समय‍ सीमा‍ और‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ ललए‍ प्रायोधगक‍ रूप‍ से‍
चयनित‍ इकाईयों‍ को‍ सत्‍त्ि‍ सदहत‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ प्रारम्‍भ‍ करिे‍ के‍ बारे ‍ में ‍ सूधचत‍ करते‍ हुए‍
सत्‍त्ि‍ के‍ सधचि/मुख्‍य‍ कायाकारी‍ को‍ एक‍ आबन्‍ध‍ पत्र‍ भेजिा‍ चादहए‍ और‍ लेखापरीक्षा‍ दल‍ को‍
दस्‍तािेज‍ और‍ सूचिा‍ मुहैया‍ करािे‍ के‍ ललए‍ कायाकारी‍ अधधकाररयों‍ और‍ क्षेत्रीय‍ इकाईयों‍ को‍
आिश्‍यक‍निदे श‍जारी‍करिे‍ के‍ललए‍उिसे‍ अिुरोध‍करिा‍चादहए।‍यह‍एन्‍री‍कांफ्रेंस‍के‍कायाित
ृ ‍
के‍सार‍की‍पुजष्‍ट‍करिे‍ के‍एक‍अिसर‍के‍रूप‍में ‍ काया‍ करे गा।‍यदद‍अपररहाया‍ कारणों‍से‍ एन्‍
री‍
कांफ्रेंस‍आयोजजत‍िहीं‍ की‍जा‍सकी,‍तो‍आबन्ध‍पत्र‍एन्‍री‍कांफ्रेंस‍से‍ अपेक्षाओं‍ की‍सूचिा‍दे िे‍
हे त‍ु एक‍माध्‍यम‍भी‍उपलब्‍ध‍कराएगा।‍
क्षेत्रीय लेखापरीक्षा प्रक्रिया
5.4
क्षेत्रीय‍ लेखापरीक्षा‍ प्रकिया‍ में ‍ बताए‍ गए‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ के‍ संबंध‍ में ‍ डाटा‍ संग्रह‍
करिे,‍व्‍याख्‍या‍करिे‍तथा‍विश्‍
लेषण‍करिे‍तथा‍पूि‍ा अिधाररत‍मािदण्‍ड‍के‍प्रनत‍उिके‍मूल्‍
यांकि‍
करिे‍ के‍ललए‍ककये‍ गए‍प्रयास‍शालमल‍होते‍ हैं।‍क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍प्रकिया‍में ‍ शालमल‍कायों‍पर‍
आगामी‍पैराग्राफों‍में ‍चचाा‍की‍गई‍है ।‍‍
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58 | पष्ृ ‍ठ
एन्िी बैठक
5.5
एन्‍
री‍ कांफ्रेंस‍ के‍ अलािा,‍ लेखापरीक्षा‍ दलों‍ को‍ लेखापरीक्षा‍ योग्‍य‍ चयनित‍ इकाईयों‍ की‍
लेखापरीक्षा‍ शुरू‍ करिे‍ से‍ पहले‍ इकाईयों‍ के‍ प्रमख
ु ों‍ के‍ साथ‍ एन्‍री‍ बैठक‍ भी‍ आयोजजत‍ करिी‍
चादहए।‍ इि‍ बैठकों‍ के‍ दौराि,‍ लेखापरीक्षा‍ दल‍ को‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ उद्दे श्‍य,‍ प्रयोजि,‍ समयसीमा‍
तथा‍ लेखापरीक्षा‍ योग्‍य‍ चयनित‍ इकाई‍ के‍ प्रमख
ु ‍ से‍ अपेक्षक्षत‍ सहयोग‍ का‍ िणाि‍ करिा‍ चादहए।‍
ऐसी‍एन्‍
री‍बैठक‍का‍कायाित
ृ ‍तैयार‍ककया‍जािा‍चादहए‍तथा‍लेखापरीक्षक्षती‍सत्त्ि‍के‍साथ‍साझा‍
ककया‍जािा‍चादहए‍तथा‍पािती‍हे त‍ु अिरु ोध‍ककया‍जािा‍चादहए।
डाटा संग्रहण तथा वि‍लेषण
5.6
डाटा संग्रहण‍ एक‍ बार,‍ आिती‍ अन्‍तरालों‍ पर‍ अथिा‍ निरं तर‍ मापि‍ द्िारा‍ ककया‍ जा‍
सकता‍ है ,‍ जैसी‍ भी‍ आिश्‍यकता‍ हो।‍ सूचिा‍ प्रत्‍यक्ष‍ साक्ष्‍
य,‍ दस्‍तािेज‍ (ललखखत‍ वििरणों‍ सदहत),‍
मौखखक‍पररसाक्ष्‍
यों‍(साक्षात्‍कार)‍अथिा‍अन्‍य‍साधिों‍के‍आधार‍पर‍एकत्र‍की‍जा‍सकती‍है ‍ जो‍
लेखापरीक्षा‍के‍उदृदे श्‍यों‍पर‍निभार‍करता‍है।‍प्राप्‍त‍ककये‍ जािे‍ िाले‍ डाटा‍‍के‍प्रकार,‍पयााप्त
‍ ता,‍
िैधता,‍ विश्‍
िसिीयता,‍ प्रासंधगकता‍ तथा‍ उपयुक्‍तता‍ के‍ अथों‍ में ‍ व्‍याख्‍या‍ योग्‍य‍ तथा‍ न्यायोधचत‍
होिी‍चादहए।‍प्राय:‍एक‍विशाल‍डाटा‍(अन्‍यों‍द्िारा‍प्रस्तुत‍सामग्री‍विशेषकर‍लेखापरीक्षक्षती‍सत्‍ि
द्िारा)‍ का‍ प्रयोग‍ ककया‍ जाता‍ है ,‍ तथावप‍ लेखापरीक्षक‍ प्रश्‍िािललयों,‍ सिेक्षणों‍ तथा‍ प्रत्‍यक्ष‍
पयािेक्षण‍‍की‍सहायता‍से‍ निजश्‍चत‍डाटा‍(इसकी‍अपिी‍संसाधि‍सामग्री)‍भी‍प्रस्तुत‍कर‍सकते‍
हैं।‍‍
5.7
डाटा‍ संग्रहण‍ तथा‍ प्रलेखि‍ में ‍ गुणित्‍ता‍ ‍ बहुत‍ महत्‍िपूण‍ा है ।‍ यह‍ महत्‍िपूण‍ा है ‍ कक‍
लेखापरीक्षक‍विलभन्‍
ि‍स्रोतों‍से‍ सूचिा‍चाहते‍ हैं,‍चकूं क‍संगठि,‍एक‍संगठि‍में ‍ व्‍यजक्‍
त,‍विशेषज्ञ‍
तथा‍रूधच‍रखिे‍ िाले‍ पक्षों‍के‍पास‍प्रस्तुत‍करिे‍ हे तु‍ अलग‍अलग‍पररप्रेक्ष्‍य‍‍एिं‍ तका‍होते‍ हैं।‍
मोटे ‍ तौर‍पर‍कहा‍जाए‍तो‍डाटा,‍सूचिा‍तथा‍ज्ञाि‍आदद‍एक‍दस
ू रे ‍ से‍ जड
ु ी‍समाि‍अिधारणाएं‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
59 | पष्ृ ‍ठ
है ।‍ डाटा‍ प्राथलमक‍ तथ्‍य‍ होते‍ हैं।‍ डाटा‍ जजसे‍ संकललत‍ ककया‍ गया‍ है ,‍ को‍ सूचिा‍ में ‍ रूपान्‍तररत‍
ककया‍ जाता‍ है ।‍ सूचिा,‍ जजसका‍ विश्‍
लेषण‍ ककया‍ जाता‍ है ‍ और‍ समझा‍ जाता‍ है ,‍ िह‍ ज्ञाि‍ बि‍
जाएगा।‍एक‍लेखापरीक्षा‍के‍दौराि‍सीखिे‍ की‍प्रकिया‍के‍भाग‍के‍रूप‍ में ,‍अथिा‍एक‍पररणाम‍
अथिा‍एक‍समस्‍या‍को‍विश्‍
लेषण‍एिं‍ वििरण‍दे िे‍ हे तु‍ विलभन्‍ि‍प्रयोजिों‍के‍ललए‍डाटा‍संग्रदहत‍
ककया‍जा‍सकता‍है ।‍‍
लेखापरीक्षा‍ दल‍ को‍ लेखापरीक्षक्षती‍ सत्त्ि‍ से‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ की‍ पूनता‍ हे त‍ु आिश्‍यक‍
5.8
कायाकारी‍तथा‍प्रशासिात्‍मक‍फाइलों‍के‍रूप‍में ‍ अलभलेख‍तथा‍अन्‍
य‍सच
ू िा‍मंगिािी‍पड़ती‍है ।‍
अपेक्षक्षत‍ अलभलेख‍ एन्‍
री‍ कांफ्रेंस‍ तथा‍ एन्‍
री‍ बैठक‍ में ‍ पररभावषत‍ प्रोटोकोल‍ के‍ अिुसार‍ उन्‍हें
उपलब्‍ध‍करािे‍ के‍ललए‍ उत्‍तरदायी‍प्राधधकारी‍से‍ एक‍समायोधचत‍ ढं ग‍ से‍ मंगिाए‍जािे‍ चादहए।‍
लेखापरीक्षक्षती‍सत्‍त्ि‍द्िारा‍दी‍गई‍सूचिा‍(जैसे‍ निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍ में ‍ अिुबन्‍ध‍भरिा)‍
ं की‍ जा‍ सकती‍ है ।‍ फाईल‍ ज च‍
ं
की‍ स्रोत‍ तथा‍ दस्‍तािेज‍ के‍ संदभा‍ में ‍ तदिुसार‍ िमूिा‍ ज च‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षाओं‍ का‍आधार‍बिती‍है ।‍फाइलों‍में ‍साक्ष्‍
य‍के‍प्रकारों‍की‍विस्‍तत
ृ ‍श्रेणी‍होती‍
है ,‍ जैसे‍ अधधकाररयों‍ के‍ निणाय,‍ कायािम‍ लाभाधथायों‍ के‍ ‘मामला‍ अलभलेख’‍ तथा‍ सरकारी‍
कायािमों‍के‍अलभलेख।‍एक‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍शरू
ु आत‍में ‍ ही‍अलभलेखों‍के‍स्‍िरूप,‍स्‍थाि‍‍
ं
तथा‍उपलब्‍धता‍स्‍थावपत‍करिा‍महत्‍िपूण‍ा है ‍ताकक‍उिकी‍प्रभािी‍ढं ग‍से‍ज च‍की‍जा‍सक
े ।‍‍‍
सामान्‍य‍ अिभ
ु ि‍ पर‍ आधाररत,‍ सच
ू िा‍ संग्रह‍ प्रकिया‍ में ‍ निम्‍िललखखत‍ घटकों‍ के‍ मध्‍य‍
5.9
अन्‍तर‍करिा‍महत्‍िपूण‍ा है :

दस्‍तािेजों,‍फाइलों‍इत्‍यादद‍के‍रूप‍में ‍अलभलेख।‍

लेखापरीक्षा‍द्िारा‍उत्‍तर‍ददये‍जािे‍के‍ललए‍बिाए‍गए‍प्रश्‍ि।‍

प्रश्‍ि‍ समूह‍ का‍ उत्‍तर‍ दे िे‍ के‍ ललए‍ आिश्‍यक‍ डाटा‍ संग्रहण‍ तकिीके‍ (प्रलेखि,‍ बैठकों,‍
प्रश्‍िािललयों,‍साक्षात्‍
कारों‍इत्‍यादद‍का‍अध्‍ययि)।‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
60 | पष्ृ ‍ठ

ं
लेखापरीक्षा‍कायािम,‍अथाात‍ज च‍पड़ताल‍का‍प्रकार‍जो‍डाटा‍सं
ग्रह‍के‍ललए‍आिश्‍यक‍है‍
(जैसे‍ प्रनतचयि,‍ मामले‍ का‍ अध्‍ययि,‍ अिुषंगी‍ विश्‍लेषण,‍ पूछ‍ ताछ,‍ ‘पूि‍ा तथा‍ पश्‍चात‍
विश्‍
लेषण’‍तुलिीय‍मूल्‍यांकि‍इत्‍यादद)।‍‍

संग्रह‍ककये‍ गए‍डाटा‍पर‍लागू‍ ककया‍गया‍मात्रात्‍मक‍तथा‍गुणात्‍मक‍विश्‍लेषण‍(संग्रहीत‍
सच
ू िा‍के‍गहि‍विश्‍लेषण‍हे त)ु ।‍
5.10
अधधकतर‍ लेखापरीक्षाओं‍ में ‍ यह‍ समझिे‍ अथिा‍ व्‍याख्‍या‍ करिे‍ के‍ ललए‍ कक‍ क्‍या‍ दे खा‍
गया,‍विश्‍
लेषण‍के‍कुछ‍प्रकार‍शालमल‍होते‍ है ।‍यह‍और‍अधधक‍विस्‍तत
लेषण,‍
ृ ‍सांजख्‍यकीय‍विश्‍
लेखापरीक्षा‍ दल‍ में ‍ निष्‍कषों‍ पर‍ चचाा,‍ प्रलेखि‍ तथा‍ िककिंग‍ पेपर‍ इत्‍यादद‍ के‍ रूप‍ में ‍ ककया‍ जा‍
सकता‍है ।‍विश्‍
लेषण‍िे‍ कभी‍एक‍अथिा‍अधधक‍विषयों‍के‍बीच‍निष्‍कषों‍की‍तुलिा‍जैसे‍ विषय‍
जो‍ अच्‍छी‍ प्रकार‍ काया‍ करते‍ हैं‍ तथा‍ िे‍ जो‍ कम‍ अच्‍छी‍ तरह‍ से‍ काया‍ करते‍ है‍ तथा‍ एक‍
विहं गािलोकि‍ जैसे‍ एक‍ लेखापरीक्षक्षत‍ क्षेत्र‍ तथा‍ अन्‍य‍ राज्‍यों‍ में ‍ समाि‍ लेखापरीक्षा‍ क्षेत्र‍ की‍
तुलिा‍की‍आिश्‍यकता‍हो‍सकती‍है ।‍डाटा‍विश्‍लेषण‍की‍कुछ‍पद्धनतयों‍पर‍विश्‍लेषण‍में ‍अजन्‍
तम‍
चरण‍में ‍ विलभन्‍
ि‍प्रकार‍के‍स्रोतों‍से‍ पररणामों‍ को‍लमलाया‍जाता‍है ।‍ लेखापरीक्षा‍दल‍को‍डाटा‍
विश्‍
लेषण‍ करते‍ समय‍ एिं‍ उसकी‍ तकिीक‍ अथिा‍ उपकरण‍ अपिाते‍ समय‍ लेखपरीक्षा‍ डडजाईि‍
मैदरक्‍स‍का‍संदभा‍लेिा‍चादहए।‍‍
लेखापरीक्षा निष्कषष तथा पररणाम विकमसत करिा
5.11
लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषा‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ को‍ संतुष्‍ट‍ करिे‍ के‍ ललए‍ लेखापरीक्षक‍ द्िारा‍
संग्रह‍ ककए‍ गए‍ विलशष्‍ट‍ साक्ष्‍
य‍ हैं।‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ में ‍ निम्‍िललखखत‍ तत्‍ि‍ शालमल‍ है :‍
मािदण्‍ड‍ (‘क्‍या‍ होिा‍ चादहए’),‍ जस्‍थनत‍ (‘क्‍या‍ है ’)‍ तथा‍ प्रभाि‍ (‘युजक्‍तयक्
ु ‍त‍ ‍ तथा‍ ताककाक‍
भविष्‍य‍ प्रभाि‍ के‍ साथ‍ दे खे‍ गए‍ पररणाम‍ क्‍या‍ हैं’),‍ जमा‍ कारण‍ (‘मािकों‍ अथिा‍ मािदण्‍
डों‍ से‍
विचलि‍क्‍यों‍हैं’)‍जब‍समस्‍या‍पाई‍जाती‍है ।‍तथावप,‍एक‍लेखापरीक्षा‍में ‍ सभी‍चारों‍तत्‍ि‍हमेशा‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
61 | पष्ृ ‍ठ
अपेक्षक्षत‍ िहीं‍ होते;‍ उदाहरण‍ के‍ ललए,‍ तत्‍ि‍ मािदण्‍ड‍ को‍ समस्‍या‍ उन्‍मुख‍ दृजष्‍टकोण‍ में ‍ हमेशा‍
विलशष्‍
ट‍रूप‍से‍ संबोधधत‍िहीं‍ ककया‍जाता।‍पररणाम‍लेखापरीक्षक‍द्िारा‍इि‍निष्‍कषों‍के‍कारणों‍
तथा‍प्रभािों‍के‍विश्‍
लेषण‍के‍पश्‍चात‍उि‍निष्‍कषों‍से‍उत्‍पन्‍
ि‍वििरण‍हैं‍और‍अन्‍त‍में ,‍लसफाररशें‍
ं ।‍‍‍‍‍
लेखापरीक्षक‍द्िारा‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍से‍संबंधधत‍सूझाई‍गई‍कायािादहय ‍हैं
5.12
लेखापरीक्षा‍डडजाईि‍मैदरक्‍स‍को‍लेखापरीक्षा‍के‍प्रत्‍येक‍स्‍तर‍पर‍उधचत‍रूप‍से‍ अद्यनतत‍
ककया‍ जािा‍ चादहए‍ क्‍योंकक‍ ये‍ प्रारं भ‍ में ‍ आरं लभक‍ अध्‍ययि‍ के‍ दौराि‍ प्राप्‍त‍ ‍ की‍ गई‍ सीलमत‍
जािकारी‍के‍आधार‍पर‍तैयार‍ककया‍गया‍होता‍है‍ तथा‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषा‍ मैदरक्‍स‍के‍साथ‍भी‍
जोड़ा‍जािा‍चादहए‍जैसाकक‍पैरा‍सं.‍5.19‍में ‍ पररभावषत‍है ।‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍तथा‍पररणामों‍
ं ककये‍ गए‍
को‍ विकलसत‍ करते‍ समय,‍ िा‍ केिल‍ विचलिों‍ ‍ की‍ संख्‍या‍ का‍ बजल्‍क‍ िमूिा‍ ज च‍
मामलों‍की‍कुल‍संख्‍या‍तथा‍जिसंख्‍या‍के‍आकार‍का‍भी‍संदभा‍ ललया‍जाता‍है ।‍खराब‍व्‍यिहार‍
के‍धचजन्‍हत‍क्षेत्रों‍का‍समाधाि‍करिे‍ के‍ललए‍साक्ष्‍
यों‍के‍विश्‍
लेषण,‍निष्‍
कषा‍ विकलसत‍करिे‍ तथा‍
लसफाररशें‍प्रस्‍तत
िललखखत‍धचत्र‍में ‍सारांशीकृत‍ककया‍गया‍है ।
ु ‍करिे‍की‍प्रकिया‍को‍निम्‍
‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
62 | पष्ृ ‍ठ
5.13
लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषा‍ मािदण्‍ड‍ के‍ साथ‍ साक्ष्‍
य‍ की‍ तुलिा‍ करके‍ निकाले‍ जाते‍ हैं।‍ ये‍
लेखापरीक्षा‍के‍दौराि‍संग्रह‍की‍गई‍सूचिा‍के‍विश्‍लेषण‍पर‍आधाररत‍होते‍ हैं।‍मुद्दे ‍ की‍प्रिनृ त‍
तथा‍जदटलता‍के‍अनतररक्‍त‍विश्‍
लेषण‍से‍ लेखापरीक्षा‍पररणाम‍का‍विकास‍होता‍है ।‍ये‍ पररणाम‍
उद्दे श्‍यों,‍ ताककाकता‍ तथा‍ पररयोजिा‍ विलशष्‍ट‍ मािकों‍ तथा‍ मािदण्‍
ड‍ पर‍ आधाररत‍ होिे‍ चादहए।‍
लेखापरीक्षा‍ पररणाम‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ विलभन्‍
ि‍ चरणों‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍ विकलसत‍ तथा‍
मूल्‍यांककत‍ककये‍जािे‍चादहए।‍योजिा‍चरण‍में‍अथिा‍प्रारं लभक‍अध्‍ययि‍के‍दौराि‍धचजन्‍हत‍ककये‍
ं
संभावित‍पररणामों‍पर‍लेखापरीक्षा‍के‍विस्‍तत
‍ कायािाही‍की‍जािी‍चादहए।‍इसके‍
ृ ‍ज च‍चरण‍में
अनतररक्‍त,‍लेखापरीक्षा‍दल‍को‍यह‍सुनिजश्‍चत‍करिा‍चादहए‍कक‍कमी‍एक‍नछट-पुट‍दृष्‍टान्‍
त‍है‍
अथिा‍एक‍सामान्‍
य‍या‍प्रणालीगत‍समस्‍या‍का‍प्रनतनिधधत्‍ि‍करती‍है ।‍इस‍तथ्‍य‍के‍कारण‍कक‍
लेखापरीक्षा‍ साक्ष्‍
य‍ प्रकृनत‍ में ‍ निणाायक‍ (सही/गलत)‍ होिे‍ के‍ बजाए‍ प्रत्‍यायक‍ (पररणाम‍ के‍ प्रनत‍
बबन्‍द‍ु है ‍ कक‍.....)‍हो‍सकते‍ है ,‍ पररणामों‍के‍ललए‍लेखापरीक्षा‍प्रश्‍िों‍का‍उत्‍तर‍दे िे‍ में‍ व्‍याख्‍या
तथा‍महत्‍िपूण‍ा निणाय‍के‍प्रयोग‍की‍आिश्‍यकता‍भी‍हो‍सकती‍है ।‍सही‍होिे‍की‍आिश्‍यकता‍को‍
इस‍ प्रकार‍ मापा‍ जािा‍ चादहए‍ जो‍ िररष्‍ठ‍ प्रबंधि‍ की‍ सहभाधगता‍ के‍ उद्दे श्‍य‍ से‍ युजक्‍तयुक्‍त,‍
आधथाक‍तथा‍सस
ु ंगत‍हो,‍की‍लसफाररश‍की‍जाती‍है ।‍‍‍
5.14
लेखापरीक्षा‍दल‍एक‍कारण‍एिं‍प्रभाि‍श्रख
ं ा‍को‍धचजन्‍हत‍कर‍सकता‍है ‍तथा‍उिके‍पास‍
ृ ल
श्रख
ं ा‍के‍विलभन्‍ि‍बबन्‍दओ
ु ं‍पर‍निष्‍कषों‍तथा‍पररणामों‍की‍ररपोदटा ग‍का‍विकल्‍प‍है ।‍इस‍जस्‍थनत‍
ृ ल
में ,‍लेखापरीक्षक‍को‍श्रख
ृ ंला‍में ‍सबसे‍अधधक‍गंभीर‍कलमयों‍का‍उल्‍लेख‍करिा‍चादहए।‍‍
5.15
लेखापरीक्षा‍पररणाम‍यह‍पुजष्‍ट‍करें गे‍कक‍सत्त्ि‍का‍निष्‍पादि‍निधााररत‍ककये‍गए‍मािदण्‍
ड‍
के‍संदभा‍में ‍संतोषजिक‍है ‍अथिा‍िहीं।‍यदद‍यह‍पयााप्त
‍ ‍िहीं‍था,‍तो‍िे‍या‍तो‍प्रणालीगत‍कमी‍
अथिा‍ उत्‍तरदायी‍ व्‍यजक्‍त,‍ कारण‍ और‍ यदद‍ निजश्‍चत‍ ककये‍ जािे‍ योग्‍य‍ हो,‍ तो‍ लेखापरीक्षा‍ की‍
विषय‍िस्‍त‍ु पर‍समस्‍
या‍के‍प्रभाि‍को‍दशाायेगें।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
63 | पष्ृ ‍ठ
मसफाररशें विकमसत करिा
5.16
सभी‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षाएं‍ सुविचाररत‍लसफाररशों‍के‍साथ‍पूरी‍होिी‍चादहए‍जो‍प्रबन्‍धि‍
के‍उत्‍तरदानयत्‍िों‍को‍अधधकार‍में ‍ ललए‍बबिा‍ही,‍लेखापरीक्षा‍पररणामों‍अथिा‍सामान्‍य‍सत्‍यों‍के‍
दशााये‍ गए‍ संस्‍करणों‍ को‍ आगे‍ बढाएं‍ तथा‍ स्‍पष्‍ट‍ रूप‍ से‍ संभावित‍ उपायों‍ की‍ व्‍याख्‍या‍ करें ।‍
लसफाररशें‍विकलसत‍करिे‍हे त‍ु निष्‍कषा‍के‍मल
ू भत
ू ‍कारण‍को‍धचजन्हत‍ककया‍जािा‍चादहए,‍क्‍योंकक‍
यह‍लसफाररश‍के‍ललए‍आधार‍बिाता‍है ।‍कारण‍िह‍है ‍ जजसे‍ यदद‍पररिनतात‍ककया‍जाए‍तो‍िह‍
समाि‍निष्‍कषों‍को‍रोकेगा।‍
5.17
लसफाररशें‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ के‍ कारण‍ की‍ पहचाि‍ से‍ उत्‍पन्‍
न्‍ होती‍ हैं ,‍ जजन्‍
हें‍ सत्त्ि‍
अथिा‍ अभी‍ शासि‍ से‍ प्रभाररतों‍ द्िारा‍ संबोधधत‍ ककया‍ जािा‍ चादहए।‍ लसफाररशें‍ पुख्‍ता‍ तथा‍
मूल्‍यिाि‍ होिी‍ चादहए।‍ यह‍ स्‍पष्‍ट‍ होिा‍ चादहए‍ कक‍ लसफाररश‍ द्िारा‍ क्‍या‍ तथा‍ ककये‍ संबोधधत‍
ककया‍गया‍है ,‍पहल‍करिे‍ के‍ललए‍कौि‍उत्‍तरदायी‍है ‍ तथा‍लसफाररश‍का‍क्‍या‍अथा‍ है ‍ अथाात‍िे‍
कैसे‍ बेहतर‍ निष्‍पादि‍ में‍ योगदाि‍ दे गीं।‍ लसफाररशें‍ व्‍यिहाररक‍ होिी‍ चादहए‍ तथा‍ उि‍ सत्त्िों‍ को‍
सम्‍बोधधत‍होिी‍चादहए‍जजिके‍पास‍उिके‍कायाान्‍ियि‍हे तु‍उत्‍तरदानयत्‍ि‍तथा‍क्षमता‍है ।‍‍
5.18
लसफाररशें‍ स्‍पष्‍ट‍होिी‍चादहए‍तथा‍एक‍ताककाक‍एिं‍ यजु क्‍तसंगत‍ढं ग‍से‍ प्रस्‍तुत‍की‍जािी‍
चादहए।‍िे‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों,‍निष्‍कषों‍तथा‍पररणमों‍से‍जुड़ी‍होिी‍चादहए।‍ररपोटा ‍की‍पूरी‍विषय‍
िस्‍त‍ु के‍साथ‍उिसे‍पाठक‍को‍यह‍संभि‍लगिा‍चादहए‍कक‍िे‍सरकारी‍संचालिों‍तथा‍कायािमों‍के‍
संचलि‍में ‍महत्‍िपूण‍ा सुधार‍करिे‍िाली‍है ‍जैसे‍लागतों‍को‍कम‍करके‍तथा‍सेिाओं‍के‍प्रशासि‍को‍
सरल‍ करके,‍ सेिाओं‍ की‍ गुणित्‍ता‍ तथा‍ मात्रा‍ को‍ बढाकर,‍ अथिा‍ समाज‍ के‍ ललए‍ सेिाओं‍ की‍
प्रभािशीलता,‍प्रभाि‍अथिा‍लाभों‍में ‍सुधार‍करके।‍कभी‍कभी,‍कारण‍लेखापरीक्षा‍के‍तहत‍सत्‍ि‍के‍
नियंत्रण‍ से‍ बाहर‍ का‍ हो‍ सकता‍ है ,‍ उस‍ मामले‍ में ‍ लसफाररश‍ को‍ लेखापरीक्षक्षती‍ सत्त्ि‍ से‍ बाहर‍
अलभशासि‍तंत्र‍का‍ध्‍याि‍आकृष्‍ट‍करिा‍चादहए।‍कुछ‍मामलों‍में ‍ विलभन्‍ि िैकजल्‍पक‍प्रस्‍तािों‍के‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
64 | पष्ृ ‍ठ
ललए‍एिं‍ के‍प्रनत‍तका‍प्रस्‍तुत‍करिा‍भी‍महत्‍िपूण‍ा होता‍है ।‍मूलभूत‍तकों‍का‍अिुसरण‍करते‍ हुए‍
पाठक‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍के‍ कारण‍की‍पहचाि‍से‍ उत्‍पन्‍
ि‍ अजन्‍तम‍लसफाररशों‍को‍समझिे‍ के‍
ललए‍ज्‍यादा‍सक्षम‍होगा,‍जजसे‍सत्‍त्ि‍द्िारा‍संबोधधत‍ककया‍जािा‍चादहए।‍‍‍‍‍
लेखापरीक्षा निष्कषष मैदि‍स
5.19
लेखापरीक्षा‍दल‍को‍लसफाररशों‍के‍कायााजन्‍ित‍ककये‍जािे‍के‍मामले‍में ‍प्रत्‍यालशत‍लाभों‍के‍
साथ‍ साथ‍ अच्‍छी‍ प्रणाललयों‍ तथा‍ संभाव्‍य‍ लेखापरीक्षा‍ लसफाररश‍ की‍ तल
ु िा‍ में ‍ लेखापरीक्षा‍
निष्‍कषों‍ को‍ दशााते‍ हुए‍ एक‍ लेखापरीक्षा‍निष्‍कषा‍ मैदरक्‍स‍तैयार‍ करिे‍ के‍ ललए‍प्रोत्‍सादहत‍ककया‍
जाता‍है ।‍यह‍इससे‍ उत्‍पन्‍
ि‍होिे‍ िाले‍ लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों,‍मािदण्‍
ड,‍लेखापरीक्षा‍दटप्‍पणी‍और‍
लसफाररशों‍के‍बीच‍संबंध‍उपलब्‍ध‍करिे‍ के‍ललए‍बिाया‍गया‍है।‍लेखापरीक्षा‍दल‍को‍लेखापरीक्षा‍
निष्‍कषा‍मैदरक्‍स‍को‍लेखापरीक्षा‍डडजाईि‍मैदरक्‍स‍के‍साथ‍जोड़िा‍चादहए‍और‍प्रत्‍येक‍लेखापरीक्षा‍
ं
ं
उद्दे श्‍य‍जह ‍दटप्‍
पखणय ‍दजा
‍ की‍गई‍हैं,‍के‍प्रनत‍मसौदा‍ररपोटा ‍की‍अध्‍याय‍संख्‍या‍के‍साथ‍साथ‍
पैरा‍संख्‍या‍का‍उल्‍लेख‍करिा‍चादहए।‍यह‍लेखापरीक्षा‍दल‍और‍उन्‍
हें‍ जो‍उिके‍काया‍ की‍समीक्षा‍
करिे‍ के‍ ललए‍ उत्‍तरदायी‍ हैं,‍ को‍ यह‍ सुनिजश्‍चत‍करिे‍ में ‍ कक‍ पूरा‍ ककया‍गया‍ लेखापरीक्षा‍ काया‍
नियोजजत‍काया‍के‍अिुसार‍है ,‍में ‍सहायता‍करे गा।
मैदरक्‍स‍का‍िमि
ू ा‍िीचे‍ददया‍गया‍है ‍:
लेखापरीक्षा निष्कषष मैदि‍स
निष्कषष
उद्दे ‍य/
उप
लेखापरीक्षा
मािदण्ड
पररणाम
साक्ष्य
कारण
मसफाररशें
प्रभाि
प्र‍ि
उद्दे ‍य
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
65 | पष्ृ ‍ठ
एक्‍जट बैठक
5.20
लेखापरीक्षा‍ दल‍ के‍ प्रमुख‍ अथिा‍ प्रभारी‍ दल‍ अधधकारी‍ को‍ लेखापरीक्षा‍ बन्‍द‍ करिे‍ पर‍
लेखापरीक्षा‍पररणामों‍तथा‍लसफाररशों‍पर‍लेखापरीक्षक्षती‍इकाई‍के‍प्रभारी‍अधधकारी‍की‍दटप्‍पखणय ‍ं
प्राप्‍त‍ करिे‍ के‍ ललए‍ यदद‍ लेखापरीक्षा‍ ज्ञापिों‍ को‍ प्रनतकिया‍ में ‍ पहले‍ प्राप्‍त‍ िहीं‍ हुई‍ हैं,‍ उसके‍
साथ‍एक‍एजक्‍जट‍बैठक‍आयोजजत‍करिी‍चादहए।‍ऐसी‍एजक्‍जट‍बैठक‍का‍कायाित
ृ ‍तैयार‍ककया‍
जािा‍ चादहए‍ तथा‍ लेखापरीक्षक्षती‍ सत्‍त्‍ि‍ से‍ साझा‍ ककया‍ जािा‍ चादहए‍ एिं‍ पािती‍ हे त‍ु अिरु ोध‍
करिा‍चादहए।‍‍
पयषिेक्षण‍
5.21
चयनित‍विषयों‍की‍निष्पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍कायाान्‍ियि‍के‍पयािेक्षण‍में ‍ यह सुनिजश्‍चत‍
ककया‍ जायेगा‍ कक‍ लेखापरीक्षा‍ नियमपुस्‍तक‍ के‍ प्रािधािों‍ और‍ लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ के‍ अिुसार‍
निष्‍पाददत‍ की‍ गई‍ है ।‍ यह‍ भी‍ सुनिजश्‍चत‍ ककया‍ जायेगा‍ कक‍ प्रकिया‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ और‍
लेखापरीक्षा‍मािदण्ड‍पर‍केजन्‍ित‍है ‍ और‍मािदण्ड‍एिं‍ लेखापरीक्षा‍कायािम‍का‍पररष्‍करण‍शीघ्र‍
िैसे‍ही‍ककया‍गया‍है ‍जैसा‍अपेक्षक्षत‍है ।‍समूह‍अधधकाररयों‍द्िारा‍समिती‍पयािेक्षण‍इस‍उद्दे श्‍य‍
ं
को‍पूरा‍करे गा‍और‍यह‍सुनिजश्‍चत‍करे गा‍कक‍उिका‍हस्‍
तक्षेप‍जह ‍आिश्‍
यक‍है ‍ शीघ्रता‍से‍ लागू‍
है ।‍ महालेखाकार‍ को‍ क्षेत्रीय‍ ‍ लेखापरीक्षा‍ पक्षों‍ को‍ समय‍ पर‍ ददशानिदे श‍ उपलब्‍ध‍ करािे‍ का‍
अिसर‍प्राप्‍त‍करिे‍के‍ललए‍यह‍सुनिजश्‍चत‍करिे‍हे तु‍कक‍काया‍योजिा‍के‍अिुसार‍ककया‍जा‍रहा‍
है ,‍एक‍मध्‍यािधध‍समीक्षा‍करिी‍चादहए।‍
5.22
उि मामलों‍ में ‍ जह ‍ं निष्पादि‍ लेखापरीक्षा‍ एक‍ या‍ अधधक‍ महालेखाकार‍ के‍ प्रशासनिक‍
और‍ तकिीकी‍ नियंत्रण‍ के‍ अन्‍तगात‍ विलभन्‍
ि‍ दलों‍ द्िारा‍ की‍ गई‍ है ‍ िह ‍ं एक‍ या‍ अधधक‍
मध्‍यािधध‍कायाशालाएं‍ अलभगम‍और‍तकिीकों‍की‍सुसंगनत‍को‍सुनिजश्‍चत‍करिे‍ में ‍ सहायता‍कर‍
सकती‍ है ।‍ जह ‍ं आिश्‍यक‍ हो,‍ िह ‍ं फैले‍ हुए‍ क्षेत्रों‍ में ‍ और‍ विलभन्‍ि‍ लेखापरीक्षा‍ नियंत्रण‍ के‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
66 | पष्ृ ‍ठ
अन्‍तगात‍बहुत‍से‍दलों‍द्िारा‍ककये‍गये‍निष्पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍पररणामों‍पर‍कायाशाला‍सुसंगत‍
लेखापरीक्षा‍निष्‍
कषों‍और‍‍लसफाररशों‍को‍अजन्‍तम‍रूप‍दे िे‍के‍ललए‍आयोजजत‍की‍जा‍सकती‍है ।‍‍‍
5.23
एसआई‍लशखर‍प्रबंधि‍द्िारा‍निष्पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍कायाान्‍ियि‍पर‍गुणित्‍ता‍नियंत्रण‍
और‍पयािेक्षण‍कायाान्‍ियि‍ददशानिदे शों‍के‍अिुमोदि,‍आिती‍काया‍ प्रगनत‍ररपोटों‍और‍मध्‍यािधध‍
कायाशालाओं‍के‍दौराि‍मागादशाि‍के‍माध्‍यम‍से‍मह
ु ै या‍कराया‍गया‍है ।‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
67 | पष्ृ ‍ठ
6.
साक्ष्य एिं प्रलेखि
6.1
लेखापरीक्षा‍साक्ष्‍
य‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍का‍समथाि‍करिे‍ के‍ललए‍एकत्र‍और‍उपयोग‍की‍
गई‍सूचिा‍है ।‍यह‍आपजत्‍तयों को‍विकलसत‍करिे‍ और‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍के‍निष्‍कषों‍के‍ललए‍
तथ्‍यपूण‍ा आधार‍है ।‍उसी‍रूप‍में ,‍यह‍साक्ष्‍
य‍ही‍है ‍ जजसे‍ लसफाररशों‍का‍सज
ृ ि‍करिे‍ िाली‍सभी‍
आपजत्‍
तयों‍सदहत‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍की‍विषय‍िस्‍तु‍का‍अिश्‍
य‍समथाि‍करिा‍चादहए।‍‍
भारत के सीएजी के लेखापरीक्षण मािक
6.2
भारत‍के‍सीएजी‍के‍लेखापरीक्षण‍मािकों‍के‍अध्‍याय-III‍में ‍मािक‍3(ई)‍कहता‍है :‍‍‍
‘लेखापरीक्षाधीि‍संगठि,‍कायािम,‍कायाकलाप‍अथिा‍काया‍से‍संबंधधत‍लेखापरीक्षक‍के‍निणाय‍और‍
निष्‍कषों‍का‍समथाि‍करिे‍के‍ललए‍सक्षम,‍सुसंगत‍और‍समुधचत‍साक्ष्‍य‍प्राप्‍त‍ककया‍जािा‍चादहए।
लेखापरीक्षण‍मािक‍पुि:‍बल‍दे ते‍हैं‍कक‍
(i) ड टा‍संग्रहण‍और‍िमूिा‍तकिीकों‍का‍चयि‍ध्‍यािपूिक
ा ‍ककया‍जािा‍चादहए;
(ii) लेखापरीक्षकों‍ को‍ लेखापरीक्षा‍ साक्ष्‍
य‍ एकत्र‍ करिे‍ के‍ ललए‍ तकिीकों‍ और‍ प्रकियाओं‍ जैस‍े
निरीक्षण,‍अभ्‍युजक्‍त,‍जांच‍और‍पुजष्‍ट‍की‍पयााप्त
‍ ‍समझ‍होिी‍चादहए;‍और
(iii) साक्ष्‍
य‍सक्षम,‍सम्‍बद्ध‍और‍समधु चत‍तथा‍यथासम्‍भि‍सीधा‍होिा‍चादहए।‍
साक्ष्‍
य‍की‍सक्षमता,‍सबंद्धता‍और‍औधचत्‍य‍की‍धारणा,‍विशेषकर‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍संदभा‍
में ,‍का‍िणाि‍िीचे‍ककया‍गया‍है ।
सक्षमता
6.3
एक‍ साक्ष्‍
य‍तभी‍सक्षम‍होता‍है ‍ जब‍िह‍ िैध‍और‍ विश्‍
िसिीय‍ होता‍ है ‍ और‍जजस‍िस्‍तु‍
को‍ िह‍ निरूवपत‍ करिा‍ चाहता‍ है ‍ उसे‍ िास्‍ति‍ में ‍ निरूवपत‍ करता‍ है ।‍ ऐसे‍ कुछ‍ कारक,‍ जो‍
विश्‍
िसिीयता‍की‍दृजष्‍ट‍से‍साक्ष्‍
य‍के‍निधाारण‍में ‍सहायक‍हो‍सकते‍हैं,‍िीचे‍ददए‍गए‍हैं:‍‍

यदद‍कोई‍साक्ष्‍य‍अन्‍य‍स्रोतों‍से‍प्राप्‍त‍विलभन्‍
ि‍प्रकार‍के‍साक्ष्‍
यों‍की‍सहायता‍से‍पररपुष्‍ट‍है ;
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
68 | पष्ृ ‍ठ

दस्‍तािेजी‍साक्ष्‍
य,‍मौखखक‍साक्ष्‍
य‍से‍अधधक‍विश्‍िसिीय‍हैं;‍

प्रत्‍यक्ष‍ अभ्‍युजक्‍त‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍ प्राप्‍त‍ साक्ष्‍
य,‍ अप्रत्‍
यक्ष‍ रूप‍ से‍ प्राप्‍त‍ साक्ष्‍
य‍ की‍ तुलिा‍ में‍
अधधक‍विश्‍िसिीय‍हैं;‍

सत्‍त्‍ि‍‍के‍माध्‍यम‍से‍ एकबत्रत‍सूचिा,‍सत्त्ि‍के‍अन्‍तगात‍ही‍आन्‍तररक‍नियंत्रण‍प्रणाली‍की‍
विश्‍
िसिीयता‍का‍काया‍है ;‍

मौखखक‍ साक्ष्‍
य,‍ जजसकी‍ ललखखत‍ रूप‍ में ‍ पुजष्‍ट‍ कर‍ दी‍ जाती‍ है ,‍ केिल‍ मौखखक‍ साक्ष्‍
य‍ की‍
तल
ु िा‍में ‍अधधक‍विश्‍िसिीय‍है ;‍

मूल‍ दस्‍तािेजों‍ की‍ तुलिा‍ में ‍ फोटोप्रनतयों‍ के‍ कम‍ विश्‍िसिीय‍ होिे‍ के‍ कारण,‍ फोटो‍ प्रनतयों‍
का‍ स्रोत,‍ स्रोत‍ को‍ िोट‍ करके‍ निददा ष्‍ट‍ ककया‍ जािा‍ चादहए‍ और‍ जहां‍ तक‍ सम्‍भि‍ हो‍ सके‍
फोटो‍प्रनतयां‍प्रमाखणत‍होिी‍चादहए;‍और‍‍‍
सम्बद्िता
6.4
कोई‍साक्ष्‍
य‍तभी‍संबद्ध‍होता‍है ‍जब‍उसका‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍और‍मािदण्‍ड‍से‍स्‍पष्‍ट‍
और‍तकापूण‍ा संबंध‍हो।‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍में ‍ साक्ष्‍
य‍की‍संबंधता‍प्रत्‍येक‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों,‍
उप-उद्दे श्‍यों‍ और‍ इसके‍ पश्‍चात‍ प्रत्‍येक‍ मािदण्‍
ड‍ के‍ साथ‍ साक्ष्‍
य‍ और‍ लेखापरीक्षा‍ प्रकिया‍ को‍
जोड़कर‍सुनिजश्‍चत‍की‍जा‍सकती‍है ।‍संबंधता‍लेखापरीक्षा‍साक्ष्‍
य‍की‍गुणित्‍ता‍का‍मापक‍है ।‍‍‍
पयाषप्तता
6.5
पयााप्त
‍ ता‍लेखापरीक्षा‍साक्ष्‍
य‍की‍मात्रा‍का‍माप‍है ।‍साक्ष्‍
य‍तभी‍पयााप्त
‍ ‍होता‍है ‍जब‍जांच,‍
जि‍ समुदाय‍ के‍ समुधचत‍ प्रनतनिधध‍ द्िारा‍ की‍ जाए,‍ िमूिे‍ का‍ निष्‍पक्ष‍ दृजष्‍ट‍ से‍ चि
ु ाि‍ ककया‍
जाए।‍ ‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ में ‍ साक्ष्‍
य‍ प्रत्‍यायक‍ हो‍ सकते‍ है ।‍ इस‍ प्रकार,‍ साक्ष्‍
य‍ तभी‍ पयााप्त
‍‍
अथिा‍उधचत‍होता‍है ‍जब‍एक‍उधचत‍व्‍यजक्‍त‍को‍यह‍समझिे‍के‍ललए‍कक‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
69 | पष्ृ ‍ठ
पररणाम‍निष्‍कषा‍ और‍ लसफाररशें‍ न्‍
यायसंगत‍है ‍ और‍ पूणत
ा :‍समवपात‍है ,‍जब‍पयााप्त
‍ ‍संबंध‍और‍
विश्‍
िसिीय‍सूचिा‍हो।‍‍‍‍
6.6

अपेक्षक्षत‍साक्ष्‍
य‍की‍शजक्‍त‍को‍निधााररत‍करिे‍िाले‍तका‍निम्‍िललखखत‍हैं:‍
यदद‍अभ्‍युजक्‍त‍अत्‍
यधधक‍महत्‍िपूण‍ा और‍िस्‍तुपरक‍है ,‍तो‍उसे‍ बिाए‍रखिे‍ के‍ललए‍मजबूत‍
साक्ष्‍
य‍की‍आिश्‍यकता‍होगी;‍

जब‍गलत‍निष्‍कषा‍के‍साथ‍सम्‍बद्ध‍जोखखम‍की‍मात्रा‍अधधक‍हो‍तो‍साक्ष्‍य‍की‍शजक्‍त‍बहुत‍
अधधक‍होिी‍चादहए;‍

यदद‍वपछला‍‍अिुभि‍सुझाि‍दे ता‍है ‍कक‍सत्त्ि‍के‍दस्‍तािेज‍विश्‍िसिीय‍हैं,‍तो‍साक्ष्‍
य‍का‍कम‍
पुजष्‍टकरण‍आिश्‍यक‍होगा;और‍‍

यदद‍मामला‍वििादास्‍पद‍अथिा‍संिेदिशील‍हो‍तो‍साक्ष्‍
य‍अधधक‍तकापूण‍ा होिा‍चादहए।‍
साक्ष्य को प्रभावित करिे िाले कारक
6.7
साक्ष्‍
य‍की‍सक्षमता,‍सम्‍बद्धता‍और‍पयााप्त
‍ ता‍को‍प्रभावित‍करिे‍िाले‍कुछ‍कारक‍
निम्‍िललखखत‍है :‍‍

चयनित‍ककए‍गए‍िमि
‍ ता);‍
ू े‍प्रनतनिधधत्‍ि‍िहीं‍करते‍(पयााप्त

एकबत्रत‍साक्ष्‍
य‍एक‍वियुक्‍त‍घटिा‍से‍संबंधधत‍हैं‍(पयााप्त
‍ ता);‍

साक्ष्‍
य‍अधरू ा‍है ‍और‍उसका‍कोई‍कारण‍िहीं‍है ‍और‍संबंध‍को‍प्रभावित‍करता‍है ‍(पयााप्त
‍ ता,‍
संबंधता);

साक्ष्‍
य‍परस्‍
पर‍विरोधी‍हैं‍(सक्षमता);

साक्ष्‍
य‍अलभित‍है ‍(सक्षमता)।
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70 | पष्ृ ‍ठ
साक्ष्यों के प्रकार
6.8
साक्ष्‍
य‍ उिके‍ प्रकार‍ जैसे‍ प्रत्‍यक्ष,‍ मौखखक,‍ दस्‍तािेजी‍ अथिा‍ विश्‍
लेषणात्‍
मक‍ के‍ संदभा‍ में ‍
िगीकृत‍ककए‍जा‍सकते‍हैं।‍

प्रत्यक्ष साक्ष्य अभ्‍युजक्‍त फोटोग्राफों,‍ चाटों,‍ िक्‍शों,‍ ग्राफों‍ अथिा‍ अन्‍य‍ सधचत्र‍ प्रनतरूपों‍ आदद‍
के‍माध्‍यम‍से‍प्राप्‍त‍ककए‍जाते‍हैं।‍यह‍िांछिीय‍है ‍कक‍प्रत्‍यक्ष‍साक्ष्‍
य‍की‍पररपजु ष्‍ट‍की‍जाए,‍
विशेषकर‍ जब‍ िह‍ दस
हीं‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍
कषों(लेखापरीक्षा‍
ू रे ‍ साक्ष्‍य‍ प्रकारों‍ के‍ साथ‍ ककन्‍
उद्दे श्‍यों‍से‍संबध)‍में ‍महत्‍िपण
ू ‍ा हो।‍‍

मौखखक साक्ष्य‍लेखापरीक्षा‍जांचों‍अथिा‍साक्षात्‍कारों‍के‍प्रत्‍युत्‍तर‍में ‍ददया‍गया‍कथि‍हैं।‍ददए‍
गए‍कथि‍या‍तो‍आगे‍ की‍जांच‍के‍ललए‍भूलमका‍अथिा‍मागादशाि‍प्रदाि‍कर‍सकते‍ हैं ,‍जो‍
अन्‍य‍ ‍ लेखापरीक्षा‍ काया‍ के‍ अन्‍य‍ रूप‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍ उपलब्‍ध‍ िहीं‍ हो‍ सकते‍ हैं‍ अथिा‍
पुजष्‍टकृत‍ साक्ष्‍य‍ (अथाात‍ लाभकारी‍ सिेक्षण)‍ प्रदाि‍ कर‍ सकते‍ हैं।‍ ये‍ कथि‍ पुजष्‍टकृत‍ साक्ष्‍य‍
आदद‍प्रदाि‍करिे‍ के‍ललए‍सम्‍पका‍करिे‍ िाले‍ सत्‍
त्‍ि‍‍के‍कमाचाररयों,‍लाभभोधगयों,‍विशेषज्ञों‍
तथा‍परामशादाताओं‍ द्िारा‍ददए‍जा‍सकते‍ हैं।‍मौखखक‍साक्ष्‍
य‍की‍पुजष्‍ट‍अनििाया‍ होगी,‍यदद‍
मौखखक‍साक्ष्‍
य‍को‍आगे‍की‍जांच‍के‍ललए‍महज‍एक‍भलू मका‍अथिा‍मागादशाि‍के‍बजाए‍एक‍
प्रमुख‍साक्ष्‍य‍के‍रूप‍में ‍प्रयोग‍ककया‍जाता‍है ।‍
मौखखक‍साक्ष्‍य‍का‍पजु ष्‍टकरण‍निम्‍
िललखखत‍के‍द्िारा‍ककया‍जा‍सकता‍है :‍‍‍‍‍
▫ साक्षात्‍
कार‍ककए‍गए‍व्‍यजक्‍तयों‍द्िारा‍ललखखत‍पुजष्‍टकरण‍के‍द्िारा;
▫ उन्‍
हीं‍तथ्‍यों‍को‍प्रकट‍करिे‍िाले‍बहुद्दे श्‍यीय‍स्‍
ितन्‍
त्र‍स्रोतों‍के‍भार‍द्िारा;‍
▫ अथिा‍बाद‍में ‍अलभलेखों‍की‍जांच‍करके;‍अथिा‍
▫ ख्‍यानत‍प्राप्‍त‍स्‍ितन्‍
त्र‍संगठिों‍को‍साक्ष्‍
य‍का‍संग्रहण‍सौंप‍कर।
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71 | पष्ृ ‍ठ
तथावप,‍ स्‍ितन्‍
त्र‍ एजेंलसयों‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍ सिेक्षणों‍ के‍ मामले‍ में ‍ सिेक्षण‍ के‍ ‘विषयों’‍ से‍
ललखखत‍ पुजष्‍टकरण‍ प्राप्‍त‍ करिा‍ सम्‍भि‍ िहीं‍ होगा।‍ इस‍ पष्ृ ‍ठभूलम‍ में ,‍ सिेक्षण‍ हे तु‍ चयनित‍
गई‍एजेंसी‍की‍विश्‍
िसिीयता‍साक्ष्‍
य‍की‍सक्षमता‍को‍बिाए‍रखिे‍ के‍ललए‍निणाायक‍है ।‍यह‍
दे खिा‍ भी‍ महत्‍िपूण‍ा है ‍ कक‍ सिेक्षण‍ सामान्‍यत:‍ प्रमुख‍ साक्ष्‍य‍ के‍ बजाए‍ पुजष्‍टकृत‍ (गौण)‍
साक्ष्‍
य‍ होते‍ हैं।‍ उि‍ मामलों‍ में ‍ जजिमें ‍ प्रमख
ु ‍ साक्ष्‍य‍ एकत्र‍ करिा‍ संभि‍ िहीं‍ है ,‍ सिेक्षण‍
अथिा‍ अन्‍य‍ गौण‍ साक्ष्‍य‍ के‍ आधार‍ पर‍ लेखापरीक्षा‍ तथ्‍यों‍ को‍ विकलसत‍ करिे‍ का‍ निणाय‍
विभाग‍के‍शीषा‍प्रबन्‍
धि‍के‍अिम
ु ोदि‍से‍ही‍ललया‍जािा‍चादहए।‍‍‍

दस्तािेज साक्ष्य,‍ प्रत्‍यक्ष‍ या‍ इलेक्‍रोनिक‍ रूप‍ में ‍ लेखापरीक्षा‍ साक्ष्‍य‍ का‍ अनत‍ सामान्‍य‍
स्‍िरूप‍है ।‍ये‍ साक्ष्‍
य‍आन्‍तररक‍तथा‍बाह्य‍दोिों‍हो‍सकते‍ है ।‍आंतररक‍दस्‍तािेज‍साक्ष्‍
य‍के‍
कुछ‍ उदाहरण‍ लेखाकरण‍ और‍ सूचिा‍ अलभलेख,‍ बाहर‍ ककए‍ जािे‍ िाले‍ पत्राचार‍ की‍ प्रनतयां,‍
योजिाए,‍ बजट‍ िावषाक‍ ररपोटें ‍ और‍ आंतररक‍ लेखापरीक्षा‍ ररपोटें ‍ आदद‍ हैं।‍ बाह्य‍ स्रोतों‍ से‍
साक्ष्‍
य‍ के‍ कुछ‍ उदाहरण‍ दस
ू रे ‍ सत्त्िों‍ से‍ प्राप्त‍ दस्‍तािेज‍ (अथाात‍ अन्‍य‍ मंत्रालयों‍ की‍
दटप्‍पखणयां‍ या‍ ररपोटें ,‍ आिे‍ िाले‍ पत्र,‍ बाह्य‍ मूल्‍यांकि‍ तथा‍ सिेक्षण)‍ है ।‍ आन्‍तररक‍
दस्‍तािेजी‍साक्ष्‍
य‍सत्त्ि‍के‍अन्‍दर‍ही‍प्राप्त‍होते‍है ।‍अधधकतर‍मामलों‍में ,‍बाह्रय‍साक्ष्‍य‍सत्‍त्‍ि‍‍
के‍अलभलेखों‍से‍भी‍प्राप्‍त‍होते‍हैं।‍‍‍‍‍
दस्‍तािेजी‍साक्ष्‍
य‍की‍विश्‍
िसिीयता,‍संबद्धंता‍और‍पयााप्त
‍ ता‍का‍लेखापरीक्षा‍के‍उद्दे श्‍यों‍के‍
संबंद्ध‍में ‍ निधाारण‍ककया‍जािा‍चादहए।‍उदाहरण‍के‍तौर‍पर,‍यदद‍उद्दे श्‍य‍यह‍सनु िजश्‍चत‍
करिा‍ है ‍ कक‍ क्‍या‍ ठे का‍ प्रकिया‍ का‍ सत्त्ि‍ द्िारा‍ अिुसरण‍ ककया‍ गया‍ है ,‍ तो‍ ठे का‍ की‍
अद्यति‍नियम‍पुस्‍तक‍‍का‍मात्र‍अजस्‍तत्‍ि,‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍के‍ललए‍एक‍सक्षम,‍संबंध‍
और‍पयााप्‍त‍साक्ष्‍
य‍िहीं‍है ।‍‍‍
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72 | पष्ृ ‍ठ

वि‍लेषणात्मक साक्ष्य‍ आंकड़ों‍ के‍ विश्‍लेषण ‍ और‍ सत्‍यापि‍ से‍ प्रनतपाददत‍ होता‍ है ,‍ जजसमें‍
गणिा,‍ दरों‍ का‍ विश्‍
लेषण,‍ प्रिजृ त्‍तयां‍ और‍ पद्यनतयां,‍ मािकों‍ और‍ बेंचमाका‍ के‍ प्रनत‍ तुलिा‍
आदद‍शालमल‍हो‍सकते‍ हैं।‍विश्‍
लेषण‍और‍तुलिा‍संख्‍यात्‍मक‍और‍गैर‍संख्‍यात्‍मक‍दोिों‍हो‍
सकते‍ हैं।‍एक‍साक्ष्‍
य‍को‍विकलसत‍करिे‍ के‍ललए‍विश्‍
लेषण‍ककए‍गए‍आंकड़ों‍का‍स्रोत,‍सत्त्ि‍
द्िारा‍स्‍िीकृनत‍को‍सरल‍बिािे‍के‍ललए‍दशााया‍जािा‍चादहए।‍‍‍
साक्ष्य के स्रोत
साक्ष्‍
य‍ के‍ स्रोत‍ विलभन्‍
ि‍ मामलों‍ में ‍ लभन्‍
ि‍ हो‍ सकते‍ है ।‍ तथावप,‍ साक्ष्‍
य‍ के‍ कुछ‍ निदशी‍
6.9
स्रोत‍निम्‍िललखखत‍हैं:‍

िीनत‍वििरण‍तथा‍कािूि‍पष्ृ ‍ठभूलम‍कागजातों‍सदहत‍िीनत‍दस्‍तािेज,‍प्रचालि‍ददशानिदे श‍
एिं‍नियमपुस्‍तक,‍प्रशासनिक‍आदे श‍आदद‍के‍कारण‍उिका‍प्रिताि‍होता‍है।‍‍

प्रकालशत‍ कायािम‍ निष्‍पादि‍ आंकड़े-‍ संसद‍ तथा‍ विधािमण्‍डल‍ के‍ समक्ष‍ प्रस्‍तुत‍ बजट,‍
िीएलसी‍निगातों‍सदहत‍लेखे,‍योजिा‍दस्‍तािेज,‍निष्‍
पादि‍बजट‍तथा‍प्रनतिेदि,‍कायािम‍
दस्‍तािेज,‍िावषाक‍ररपोटा ‍तथा‍उत्‍तर‍अथिा‍वििरण।‍‍

प्रबन्‍धि‍ ररपोटें ‍ तथा‍ समीक्षाएं-‍ आन्‍तररक‍ ररपोटें ‍ तथा‍ समीक्षाएं,‍ बैठकों‍ के‍ कायाित्ृ ‍त,‍
प्रबन्‍
धि‍सूचिा‍श्रख
ं ा‍तथा‍सूचिा/निष्‍पादि‍ररपोटें ‍आदद।
ृ ल

विषय‍पर‍सत्‍त्‍ि‍की‍फाइलें-‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषा‍के‍समथाि‍के‍ललए‍मजबत
ू ‍साक्ष्‍य‍प्रदाि‍
करती‍हैं।‍समय‍बाधाओं‍के‍कारण‍सत्‍त्‍ि‍की‍सभी‍फाइलों‍की‍जांच‍करिा‍संभि‍िहीं‍हो‍
सकता।‍जांच‍के‍ललए‍फाइलों‍का‍चयि‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यो‍या‍जांच‍पड़ताल‍के‍उद्दे श्‍य‍
द्िारा‍निधााररत‍ककया‍जाएगा।‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍विषय‍के‍आधार‍पर‍लेखापरीक्षा‍
दल‍ यादृच्‍छ‍ चयनित‍ िमूिे‍ की‍ जांच‍ करे गा।‍ कुछ‍ अधधक‍ महत्‍िपूण‍ा फाईले‍ जो‍ िांनछत‍
साक्ष्‍
य‍प्रदाि‍कर‍सकती‍है ‍निम्‍िललखखत‍हैं:
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73 | पष्ृ ‍ठ
▫ िीनतगत‍तथा‍प्रचालिात्‍मक‍योजिा‍फाईलें ;‍
▫ बजट‍फाईलें ;
▫ प्रबन्‍
धि‍नियंत्रण,‍म िीटररंग‍तथा‍समीक्षा‍फाईलें ;
▫ आन्‍तररक‍लेखापरीक्षा‍प्रनतिेदि,‍आन्‍तररक‍एिं‍बाह्रय‍मूल्‍यांकि;‍तथा‍
▫ लशकायतें ‍तथा‍वििाद,‍आदद‍
▫ आंकड़ा‍ संचय-‍ सत्त्ि‍ द्िारा‍ अिुरक्षक्षत‍ आंकड़े‍ लेखापरीक्षा‍ साक्ष्‍य‍ का‍ महत्‍िपूण‍ा
स्रोत‍है ।‍‍
▫ बाह्रय‍स्रोत-‍स्‍ितन्‍
त्र‍सिेक्षण,‍मूल्‍यांकि,‍अिुसंधाि,‍आदद।‍‍

लेखापरीक्षक्षत‍ सत्त्िों,‍ नियामकों‍ और‍ दस
ू रे ‍ संबंधधत‍ सत्‍िों‍ की‍ िेबसाइट।‍ यह‍ सुनिजश्‍चत‍
ककया‍जाए‍कक‍िह‍िेबसाइट,‍जजससे‍लेखापरीक्षा‍साक्ष्‍
य‍ललया‍जा‍रहे ‍है ,‍विश्‍िसिीय‍और‍
अद्यनतत‍ है ।‍ ऐसी‍ सूचिा‍ के‍ स्रोत‍ को‍ लेखापरीक्षा‍ सत्‍त्‍िों‍ के‍ साथ‍ साझा‍ ककया‍ जािा‍
चादहए‍और‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍में ‍उधचत‍रूप‍से‍दशााया‍जािा‍चादहए।‍

विभाग‍ के‍ स्रोत-‍ वपछली‍ लेखापरीक्षाओं‍ में ‍ और‍ िीनतगत‍ योजिा‍ को‍ अजन्‍
तम‍ रूप‍ दे ते‍
समय‍संग्रहीत‍साक्ष्‍
य‍कई‍मामलों‍में ‍साक्ष्‍
य‍प्रदाि‍कर‍सकते‍हैं।‍

लेखापरीक्षक‍की‍अभ्‍युजक्‍त-‍साक्ष्‍य‍का‍एक‍महत्‍िपूण‍ा स्रोत‍बि‍सकती‍है ,‍विशेषकर‍तब‍
जब‍िह‍फोटोग्राफ,‍िीडडयो‍ररकाडडिंग‍आदद‍द्िारा‍समधथात‍हो‍एिं‍ पजु ष्‍ट‍की‍गई‍हो‍और‍
सत्त्ि‍ के‍ प्रनतनिधध‍ द्िारा‍ प्रमाखणत‍ हो।‍ लेखापरीक्षा‍ दल‍ को‍ अभ्‍युजक्‍त‍ के‍ पररणामों‍ के‍
विस्‍तत
ृ ‍वििरण‍को‍दजा‍करिा‍चादहए।‍‍

प्रत्‍यक्ष‍ सत्‍यापि/निरीक्षण,‍ साक्ष्‍
य‍ का‍ एक‍ महत्‍िपूण‍ा स्रोत‍ है ।‍ महालेखाकार‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍ के‍ विषय‍ की‍ प्रिनृ त‍ और‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ के‍ आधार‍ पर‍ निधाारण‍ कर‍
सकते‍ हैं‍ कक‍क्‍या‍प्रत्‍यक्ष‍सत्‍यापि/निरीक्षण‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य‍प्राप्‍त‍करिे‍ और‍ उिके‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
74 | पष्ृ ‍ठ
निधाारण‍ के‍ पररणामों‍ को‍ अलभललखखत‍ करिे‍ के‍ ललए‍ अपेक्षक्षत‍ है ।‍ जब‍ प्रत्‍यक्ष‍
सत्‍यापि/निरीक्षण‍केिल‍लेखापरीक्षकों‍द्िारा‍ही‍ककया‍जाए‍तो‍महालेखाकारों‍को‍साक्ष्‍
य‍
की‍अपेक्षाकृत‍कम‍स्‍िीकायाता‍के‍स्‍तरों‍के‍प्रनत‍सजग‍रहिा‍चादहए।‍अिलोककत‍साक्ष्‍
य‍
को‍सक्षम‍साक्ष्‍
य‍में ‍रूपान्‍
तररत‍करिे‍के‍कुछ‍उपाय‍संयुक्‍त‍निरीक्षण‍हो‍सकते‍हैं‍जजिमें ‍
उस‍ निरीक्षण‍ का‍ साक्ष्‍य‍ विश्‍
िसिीय‍ सत्‍ि‍ के‍ प्रनतनिधध‍ द्िारा‍ प्रमाखणत‍ हो,‍ प्रत्‍यक्ष‍
अभ्‍युजक्‍त‍ एक‍ ख्‍यानत‍ प्राप्‍त‍ एजेंसी‍ को‍ आऊटसोसा‍ की‍ गई‍ हो‍ और‍ सत्‍
ि‍ के‍ प्रनतनिधध‍
द्िारा‍प्रमाखणत‍फोटोग्राफ‍आदद‍सदहत‍अिलोककत‍पररणाम‍सम्‍पूरक‍ककए‍गए‍हों।‍‍
प्रलेखि
6.10‍ साक्ष्‍
य‍का‍सतका‍प्रलेखि‍लेखापरीक्षा‍निष्‍
कषों‍की‍सहायता‍करता‍है ‍तथा‍यह‍पुजष्‍ट‍करता‍
है ‍ कक‍लेखापरीक्षा‍सुसंगत‍मािदण्‍डों‍के‍अिुसार‍की‍गई‍थी।‍भारत‍के‍ सीएजी‍के‍लेखापरीक्षण‍
मािदण्‍
ड‍(पैराग्राफ‍8,‍अध्‍याय‍III)‍बताते‍हैं‍कक:‍‍
“लेखापरीक्षकों‍को‍योजिा‍के‍आधार‍और‍मात्रा,‍निष्‍
पाददत‍काया‍और‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍सदहत‍
कायाकारी‍पत्रों‍में ‍ लेखापरीक्षा‍साक्ष्‍
य‍का‍पयााप्त
‍ ‍रूप‍से‍ प्रलेखि‍करिा‍चादहए।‍कायाकारी‍पत्रों‍में ‍
एक‍ अिभ
ु िी‍ लेखापरीक्षक;‍ जजसका‍ लेखापरीक्षा‍ से‍ पहले‍ कोई‍ संबंध‍ िहीं‍ है ,‍ को‍ उिसे‍
लेखापरीक्षक‍के‍महत्‍िपूण‍ा निष्‍कषों‍और‍पररणामों‍का‍समथाि‍करिे‍ िाले‍ साक्ष्‍
य‍का‍पता‍लगािे‍
के‍ललए‍पयााप्त
‍ ‍सच
ू िा‍होिी‍चादहए।‍”
6.11
मािकों‍में ‍यह‍भी‍जोड़ा‍गया‍है :‍
“कई‍कारणों‍से‍पयााप्त
‍ ‍प्रलेखि‍महत्‍िपूण‍ा हैं।‍इससे:

लेखापरीक्षक‍की‍राय‍और‍ररपोटा ‍की‍पुजष्‍ट‍और‍समथाि‍होगा;

लेखापरीक्षा‍की‍कायाक्षमता‍और‍प्रभािकाररता‍बढे गी;
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
75 | पष्ृ ‍ठ

लेखापरीक्षक्षत‍ सत्‍त्‍ि‍ अथिा‍ अन्‍य‍ ककसी‍ पक्ष‍ से‍ की‍ गई‍ ररपोटें ‍ तैयार‍ करिे‍ अथिा‍
पूछताछ‍का‍उत्‍तर‍दे िे‍के‍ललए‍सूचिा‍के‍स्रोत‍के‍रूप‍में ‍सहायता‍लमलेगी;

लेखापरीक्षण‍ मािकों‍ के‍ साथ‍ लेखापरीक्षक‍ के‍ अिुपालि‍ के‍ साक्ष्‍य‍ के‍ रूप‍ में ‍ सहायता‍
लमलेगी;‍

योजिा‍और‍पयािेक्षण‍में ‍सवु िधा‍लमलेगी;

भािी‍संदभा‍का‍ललए‍ककए‍गए‍काया‍का‍साक्ष्‍
य‍लमलेगा।
6.12

साक्ष्‍
य‍का‍अच्‍छा‍प्रलेखि‍निम्‍िललखखत‍को‍सनु िजश्‍चत‍करिे‍में ‍सहायता‍करता‍है :
लेखापरीक्षा‍ आपजत्‍
तयों,‍ निष्‍कषों‍ और‍ लसफाररशों‍ के‍ ललए‍ एक‍ पयााप्त
‍ ‍ और‍ उधचत‍ आधार‍
मौजूद‍है ;‍

अगली‍लेखापरीक्षाओं‍के‍बीच‍एक‍प्रभािी‍ललंक‍मौजूद‍है ;‍और‍

लेखापरीक्षा‍ करिे‍ में ‍ गण
‍‍
ु ित्‍ता‍ नियंत्रण‍ और‍ अिुिती‍ तीसरी‍ पक्ष‍ समीक्षा‍ के‍ ललए‍ उपयुक्त
आधार‍विद्यमाि‍है ।‍
कायषकारी पत्र
6.13
एक‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍दौराि‍संग्रहीत‍और‍सजृ जत‍समस्‍त‍सस
ं त‍दस्‍तािेज‍और‍
ु ग
सूचिा‍ कायाकारी‍ पत्र‍ होते‍ हैं।‍ उिमें ‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍यों‍ सदहत‍ लेखापरीक्षा‍ योजिा‍ दजा‍ करिे‍
िाले‍दस्‍तािेज‍उिके‍अिधारण‍की‍प्रकिया‍सदहत‍मािदण्‍
ड‍का‍अिधारण,‍क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍तथा‍
साक्ष्‍
य‍संग्रहण‍प्रकियाएं,‍साक्ष्‍
य‍विश्‍
लेषण,‍निष्‍पाददत‍लेखापरीक्षा‍विधधयों‍का‍स्‍िरूप,‍समय‍तथा‍
सीमा‍ और‍ लेखापरीक्षा‍जांचों‍ अथाात‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ और‍ पररणामों‍ पर‍ पहुंचिे‍ िाली‍ विधध‍
शालमल‍ हैं।‍ आदशात:‍ कायाकारी‍ पत्रों‍ में ‍ एक‍ दस
ू रे ‍ के‍ साथ‍ संबद्ध‍ तीि‍ अिुभाग‍ योजिा,‍
निष्‍पादि‍और‍ररपोदटिं ग‍शालमल‍होिे‍चादहएं।‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
76 | पष्ृ ‍ठ
6.14
कायाकारी‍ पत्र‍ क्षेत्र-काया‍ तथा‍ लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदि‍ के‍ बीच‍ एक‍ जोड़िे‍ िाली‍ कड़ी‍ का‍
काया‍ करते‍ हैं।‍ अत:‍ ये‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ स्‍पष्‍ट‍ जांच‍ करिे‍ के‍ ललए‍ पूरी‍ तथा‍ समुधचत‍ रूप‍ से‍
निददा ष्‍ट‍होिे‍चादहएं।‍कायाकारी‍पत्रों‍की‍गोपिीयता‍बिाई‍रखी‍जािी‍चादहए‍और‍िे‍व्‍
यािसानयक,‍
िैधानिक‍तथा‍कािूिी‍अपेक्षाएं‍पूरी‍करिे‍के‍ललए‍पयााप्‍त‍अिधध‍के‍ललए‍रखे‍जािे‍चादहएं।‍‍
6.15
कायाकारी‍पत्रों‍के‍ललए‍आिश्‍यक‍कुछ‍बह
ृ द‍विशेषताएं‍िीचे‍दी‍गई‍है :‍

पण
ा ा‍तथा‍शद्
ू त
ु धता:‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍तथा‍लसफाररशों‍का‍समथाि‍करती‍है ।‍

स्‍पष्‍टता‍तथा‍संक्षक्षप्‍तता:‍इिका‍उपयोग‍करिे‍ िाले‍ ककसी‍को‍भी‍ककसी‍अिुपूरक‍जांच‍की‍
आिश्‍यकता‍के‍बबिा‍समस्‍त‍लेखापरीक्षा‍प्रकिया‍की‍समझ‍होिी‍चादहए।‍

तैयारी‍की‍सुगमता:‍जबकक‍लेखापरीक्षा‍दलों‍को‍बड़ी‍मात्रा‍में ‍कायाकारी‍पत्र‍एकबत्रत‍करिे‍के‍
ललए‍बुलाया‍जाएगा,‍उस‍सीमा‍तक‍जहां‍ तक‍िे‍ सत्त्ि‍द्िारा‍तैयार‍दस्‍तािेजों‍तथा‍ररपोटों,‍
पूि‍ा मुदित‍मािक‍लेखापरीक्षा‍लेखा‍सामग्री‍तथा‍स्‍ित:‍सजृ जत‍मािक‍कायाकारी‍पत्र‍फामेटों‍‍
का‍उपयोग‍कर‍सकते‍हैं,‍समय‍तथा‍प्रयास‍इष्‍
टतम‍होिे‍चादहएं।

स्‍पष्‍टता‍एिं‍विशद्
ु धता:‍विशेषकर‍फोटोप्रनतयों‍पर‍लाग‍ू होती‍है ।‍‍

प्रासंधगकता:‍ कायाकारी‍ पत्र‍ उि‍ मामलों‍ तक‍ सीलमत‍ होिे‍ चादहएं,‍ जो‍ इस‍ प्रयोजि‍ हे त‍ु
महत्‍िपण
ू ‍ा ,प्रासंधगक‍तथा‍लाभप्रद‍हों।‍

समीक्षा‍ की‍ सुगमता:‍कायाकारी‍ पत्रों‍ में ‍ लेखापरीक्षा‍ ज्ञापि‍ पत्रों,‍चचाा‍ कागजातों,‍लेखापरीक्षा‍
अभ्‍यजु क्‍त,‍क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍ तथा‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ,‍जैसा‍भी‍मामला‍हो,‍
के‍प्रनत-संदभा‍निदहत‍होिे‍चादहएं‍ताकक‍महालेखाकार‍तथा‍पयािेक्षण‍प्राधधकारी‍कायाकारी‍पत्रों‍
को‍लेखापरीक्षा‍निष्‍
कषों‍तथा‍लसफाररशों‍के‍साथ‍लमला‍सकें।‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
77 | पष्ृ ‍ठ

संगठि‍ तथा‍ संदभा‍ की‍ सुगमता:‍ कायाकारी‍ पत्रों‍ में ‍ एक‍ लेखापरीक्षा‍ सारांश‍ फाईल‍ के‍ सभी‍
भागों‍ के‍ ललए‍ समुधचत‍ िणाि‍ सदहत‍ एक‍ संग्राही,‍ सरलता‍ से‍ अिुकरणीय‍ विषय‍ सूची‍ तथा‍
प्रत्‍येक‍कायाकारी‍पत्र‍फाईल‍के‍ललए‍एक‍विषय‍सूची‍होिी‍चादहए।‍‍

विश्‍
लेषण‍ की‍ संपूण‍ा लेखापरीक्षा‍ जांच:‍कायाकारी‍ पत्रों‍को‍इस‍ प्रकार‍ व्‍यिजस्‍थत‍ककया‍ जािा‍
चादहए‍जजससे‍ कक‍एक‍अप्रलशक्षक्षत‍व्‍यजक्‍त‍भी‍जांच‍को‍आगे‍ बढा‍सके‍कक‍विषय‍का‍चयि‍
कैसे‍ ककया‍ गया‍ था,‍ साक्ष्‍य‍ कैसे‍ एकत्र‍ ककए‍ गए‍ थे,‍ एकत्र‍ ककए‍ गए‍ साक्ष्‍
य‍ क्‍या‍ थे‍ और‍
लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍को‍कैसे‍ बिाया‍गया।‍इसमें‍ सकारात्‍मक‍निष्‍कषों‍के‍साक्ष्‍
य‍भी‍शालमल‍
होिे‍चादहए।‍
लेखापरीक्षा फाईल
6.16‍ निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍में ‍प्रलेखि‍को‍कायाकारी‍पत्रों‍सदहत‍लेखापरीक्षा‍फाईल‍के‍अिुरक्षण ‍
की‍आिश्‍यकता‍है ।‍लेखापरीक्षा‍फाईल‍प्रत्‍यक्ष‍या‍इलेक्‍रोनिक‍रूप‍में ‍एक‍या‍अधधक‍फोल्‍डरों‍या‍
दस
ू रे ‍ स्‍टोरे ज‍ मीडडया‍ से‍ संबंधधत‍ है ,‍ इसमें ‍ िह‍ अलभलेख‍ शालमल‍ है ‍ जो‍ विशेष‍ काया‍ के‍ ललए‍
लेखापरीक्षा‍प्रलेखि‍का‍वििरण‍दे ते‍हैं।‍‍‍
6.17‍ सामान्‍यत:‍ लेखापरीक्षा‍ फाईल‍ में ‍ लेखापरीक्षा‍ िीनत,‍ कायाक्षेत्र‍ और‍ कायाप्रणाली,‍ चयनित‍
िमूिा,‍ निष्‍पाददत‍ पद्धनतयों‍ की‍ प्रकृनत,‍ समय‍ और‍ सीमा,‍ ऐसी‍ पद्धनतयों‍ के‍ पररणाम‍ और‍
प्राप्‍त‍साक्ष्‍
य‍को‍शालमल‍ककया‍जािा‍चादहए।‍इसमें ‍लेखापरीक्षा‍के‍दौराि‍उत्‍पन्‍
ि‍विशेष‍मामलों,‍
उस‍ पर‍ प्राप्‍त‍ निष्‍कषों‍ और‍ उि‍ निष्‍कषों‍ को‍ प्राप्‍त‍ करिे‍ में ‍ ककए‍ गए‍ विशेष‍ व्‍यािसानयक‍
निणायों‍का‍भी‍उल्‍लेख‍ककया‍जािा‍चादहए।‍लेखापरीक्षा‍फाईल‍में ‍प्रबंधि‍के‍साथ‍विशेष‍मामलों‍
पर‍ चचााओं,‍ चचाा‍ ककए‍ गए‍ विशेष‍ मामलों‍ की‍ प्रिनृ त‍ सदहत‍ अलभशासि‍ और‍ दस
ू रे ‍ के‍ साथ‍
प्रभाररत‍और‍कब‍और‍ककसके‍साथ‍चचाा‍ की‍गई,‍को‍भी‍शालमल‍करिा‍चादहए।‍इसके‍अलािा,‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
78 | पष्ृ ‍ठ
एक‍विशेष‍लेखापरीक्षा‍ दल‍निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍के‍ललए‍क्‍यों‍‍चि
ु ा‍ गया,‍ के‍संबंध‍में ‍ संदभा‍
को‍योजिा‍दस्‍तािेजों‍में ‍स्‍पष्‍ट‍ककया‍जाए।‍‍‍‍‍‍
6.18
लेखापरीक्षा‍ फाईल‍ को‍ उधचत‍ रूप‍ से‍ सूचकांककत,‍ कायाकारी‍ पत्रों‍ के‍ सेट‍ द्िारा‍ संदलभात‍
और‍ अिुपूररत‍ होिा‍ चादहए।‍ लेखापरीक्षक‍ को‍ लेखापरीक्षा‍ फाईल‍ में ‍ लेखापरीक्षा‍ प्रलेखि‍ को‍
सारांशीकृत‍ और‍ समय‍ पर‍ लेखापरीक्षा‍ फाईल‍ को‍ अजन्‍
तम‍ रूप‍ दे िे‍ की‍ प्रशासनिक‍ प्रकिया‍ को‍
पूरा‍करिा‍चादहए।‍अजन्‍तम‍लेखापरीक्षा‍फाईल‍के‍संयोजि‍के‍पूरा‍हो‍जािे‍ के‍बाद‍लेखापरीक्षक‍
ककसी‍प्रिजृ त्‍त‍के‍लेखापरीक्षा‍प्रलेखि‍ को‍लमटाएगा‍या‍फेंकेगा‍िहीं।‍ अधधक‍लेखापरीक्षा‍फाइलों‍
के‍मामलें‍ में ‍ फाइलों‍के‍मास्‍टर‍ विषय‍ सूची‍का‍अिुरक्षण‍प्रत्‍येक‍लेखापरीक्षा‍ फाईल‍की‍विषय‍
सूची‍के‍अलािा‍ककया‍जाए।‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍ में ‍ शालमल‍सभी‍तथ्‍यों,‍आकड़ों‍और‍दटप्‍पखणयों‍
के‍ समथाि‍ में ‍ साक्ष्‍
य‍ के‍ प्रलेखि‍ को‍ सुनिजश्‍चत‍ करिे‍ का‍ उत्‍तरदानयत्‍ि‍ लेखापरीक्षा‍ करिे‍ िाले‍
क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍कायाालयों‍पर‍है ।‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
79 | पष्ृ ‍ठ
7.
प्रनतिदे ि प्रक्रिया
7.1
प्रत्‍येक‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ का‍ लेखापरीक्षा‍ पररणामों‍ और‍ लसफाररशों‍ िाली‍ ररपोटा ‍ में ‍
समापि‍ करिा‍ है ।‍ सीएजी‍ के‍ लेखापरीक्षण‍ मािकों‍ के‍ अध्‍याय‍ IV‍ के‍ अन्‍तगात‍ पैरा‍ 1.1‍ और‍
1.6‍में ‍प्रनतिेदि‍पर‍अन्‍
य‍बातों‍के‍साथ-साथ‍निम्‍िललखखत‍बातें ‍निधााररत‍की‍गई‍हैं:‍
‘प्रत्‍येक‍ लेखापरीक्षा‍ काया‍ के‍ पूरा‍ होिे‍ पर,‍ लेखापरीक्षक‍ को‍ एक‍ समुधचत‍ प्रपत्र‍ में ‍ लेखापरीक्षा‍
अभ्‍यजु क्‍तयां‍ तथा‍ निष्‍कषा‍ दशााते‍ हुए‍ एक‍ ललखखत‍ प्रनतिेदि‍ तैयार‍ करिा‍ चादहए;‍ उसमें ‍ निदहत‍
बातें ‍ आसािी‍से‍ समझ‍में ‍ आिी‍चादहए,‍संददग्‍धता‍से‍ मुक्‍त‍तथा‍पयााप्त
‍ ,‍सक्षम‍ तथा‍सुसंगत‍
लेखापरीक्षा‍ प्रमाण‍ द्िारा‍ समधथात‍ होिी‍ चादहएं‍ तथा‍ स्‍ितन्‍
त्र,‍ िस्‍तप
ु रक,‍ स्‍पष्‍ट,‍ परू ी,‍ सही,‍
रचिात्‍मक‍तथा‍संक्षक्षप्‍त‍होिी‍चादहएं।‘‍‍
‘धि‍ संबंधी‍लेखापरीक्षा‍ के‍ललए‍निष्‍पादि‍या‍मूल्‍य‍के‍संबंद्ध‍में ,‍ प्रनतिेदि‍में ‍ लेखापरीक्षा‍के‍
काया‍ क्षेत्र‍ तथा‍ किरे ज,‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ उद्दे श्‍य,‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ क्षेत्र,‍ लेखापरीक्षक्षत‍ क्षेत्र‍ (विषय‍
िस्‍तु)‍की‍कायाक्षमता,‍अथाव्‍यिस्‍था‍तथा‍प्रभािकाररता‍(प्रभाि‍सदहत)‍पहलुओं‍ के‍संबंध‍में ‍ मुख्‍य‍
निष्‍कषा‍तथा‍आिश्‍यक‍सुधार‍सुझािे‍िाली‍लसफाररशें‍शालमल‍होिी‍चादहए।‘
7.2
लेखापरीक्षण‍ मािक‍ आगे‍ बताते‍ है ‍ कक‍ ‍ अिुपालि‍ लेखापरीक्षा,‍ जोकक‍ स्‍पष्‍ट:‍ विलशष्‍ट‍
अपेक्षाओं‍ तथा‍आशाओं‍ के‍अध्‍यधीि‍है ,‍‍के‍विपरीत‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍का‍स्‍िरूप‍बड़ा‍होता‍
है ‍ तथा‍ िह‍ निणाय‍ तथा‍ व्‍याख्‍या‍ के‍ ललए‍ अधधक‍ खल
ु ा‍ होता‍ है ,‍ उसकी‍ किरे ज‍ भी‍ अधधक‍
चयिात्‍मक‍होती‍है‍तथा‍उसे‍एक‍वित्‍
तीय‍अिधध‍के‍बजाए‍कई‍िषों‍के‍चि‍के‍दौराि‍ककया‍जा‍
सकता‍है :‍ और‍यह‍सामान्‍यत:‍ विशेष‍वित्‍
तीय‍ अथिा‍अन्‍य‍वििरणों‍से‍ संबंधधत‍िहीं‍ होती‍है।‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
80 | पष्ृ ‍ठ
पररणामत:‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍प्रनतिेदि‍विलभन्‍
ि‍प्रकार‍के‍होते‍ हैं‍ तथा‍उिमें ‍ ‍अधधक‍चचाा‍
तथा‍समुधचत‍तका‍शालमल‍होते‍हैं।‍‍‍‍
ररपोदटिं ग प्रक्रिया
7.3
ररपोदटिं ग‍प्रकिया‍को‍निम्‍िललखखत‍डायग्राम‍में ‍दशााया‍गया‍है ।‍
लेखापरीक्षा दटप्पखणयां
7.4
लेखापरीक्षा‍ दटप्पखणयों‍ को‍ संभाव्‍य‍ नियंत्रण‍ कलमयों,‍ िीनत‍ उल्‍लंघि,‍ वित्‍
त‍ के‍ गलत‍
कथि,‍कायािम‍के‍कायाान्ि
‍ यि‍और‍कायािम‍उद्दे श्‍यों‍की‍प्राजप्‍त‍में ‍अक्षमता,‍या‍लेखापरीक्षा‍के‍
दौराि‍ पहचािे‍ गए‍दस
ू रे ‍ समस्‍यास्‍पद‍मामलों‍के‍क्षेत्र‍के‍रूप‍में ‍ पररभावषत‍ककया‍जाता‍है।‍यें‍
लेखापरीक्षा‍प्रश्‍िों‍एिं‍ कधथत‍पररकल्‍पिा‍आदद‍के‍सत्‍यापि‍का‍उत्‍तर‍दे ि‍े ‍के‍ललए‍समथा‍ होिे‍
के‍ललए‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍की‍पनू ता‍ हे त‍ु लेखापरीक्षक‍द्िारा‍एकत्र‍ककए‍गए‍विशेष‍साक्ष्‍यों‍को‍
प्रकट‍ करते‍ हैं।‍ यें‍ सत्‍त्ि
‍ ‍ के‍ तथ्‍यों‍ की‍ पुजष्‍ट‍ करिे‍ और‍ सत्‍त्‍ि‍ के‍ पहले‍ विशेष‍ निष्‍कषों‍ और‍
लसफाररशों‍के‍प्रकट‍करते‍हुए‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍और‍लसफाररश‍को‍विकलसत‍करिे‍में‍सहायता‍
करिे‍ और‍ प्राथलमक‍ प्रनतकिया‍ प्राप्‍त‍ करिे‍ के‍ ललए‍ उपयुक्‍त‍ हैं।‍ ड्र फ्टट‍ ररपोटा ‍ की‍ प्राजप्‍त‍ पर‍
सत्‍त्‍ि‍द्िारा‍इिके‍बताए‍जािे‍ की‍प्रतीक्षा‍करिे‍ की‍बजाय‍‍यें‍ विषय‍को‍समझिे‍ में ,‍प्राथलमक‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
81 | पष्ृ ‍ठ
स्‍तर‍ पर‍ सम्‍भावित‍ गलनतयों‍ का‍ पता‍ लगािे,‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ में ‍ ‍ सम्‍भावित‍ कलमयों‍ का‍
पता‍लगािे‍ और‍साक्ष्‍
य‍या‍तका‍का‍समथाि‍करिे‍ के‍ललए‍निष्‍पादक‍लेखापरीक्षक‍की‍सहायता‍
करते‍हैं।‍‍‍‍‍‍‍‍‍
7.5
यह‍एक‍अच्‍छी‍पद्धनत‍है ‍कक‍लेखापरीक्षा‍अभ्‍युजक्‍त‍को‍म ड्यूलर‍ढं ग‍से‍विकलसत‍ककया‍
जाए‍जजसमें ‍ प्रमाण‍के‍वििरण;‍उिके‍स्रोतों‍तथा‍विश्‍
लेषणों‍सदहत‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषा,‍पररणाम‍
और‍लसफाररशें‍(जहां‍लाग‍ू हों)‍निदहत‍हों‍ताकक‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों,‍पररणामों‍और‍लसफाररशों‍से‍
निदहत‍ भाग‍ को‍ ड्र फ्टट‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदि‍ में ‍ सीधे‍ इस्‍
तेमाल‍ ककया‍ जा‍ सकें।‍
लेखापरीक्षा‍ दलों‍ को‍ यह‍ सनु िजश्‍चत‍ करिे‍ के‍ ललए‍ प्रनत‍ संदभा‍ हे त‍ु लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषा‍ मैदरक्‍स‍
(पैरा‍सं.‍5.19)‍के‍साथ-साथ‍लेखापरीक्षा‍डडजाइि‍मैदरक्‍स‍(पैरा‍सं.‍4.37)‍का‍उपयोग‍करिे‍ के‍
ललए‍प्रोत्‍सादहत‍ककया‍जािा‍चादहए‍कक‍कुछ‍भी‍छोड़ा‍िहीं‍गया‍है ‍और‍उन्‍होंिे‍उपरोक्‍त‍मैदरक्‍स‍
के‍अिुरूप‍काया‍को‍पूरा‍ककया‍है ।‍‍‍‍
ड्रॉफ्ट लेखापरीक्षा ररपोटष
7.6
ड्र फ्टट‍परफारमें स‍लेखापरीक्षा‍प्रनतिेदि‍सत्‍ि‍की‍नियंत्रण‍इकाई‍तथा‍लेखापरीक्षा‍के‍ललए‍
चयनित‍की‍गई‍सभी‍क्षेत्रीय‍इकाईयों‍की‍क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍की‍समाजप्‍त‍पर‍तैयार‍ककया‍जाता‍
है ।‍ ड्र फ्टट‍ प्रनतिेदि‍ तैयार‍ करिे‍ का‍ उद्दे श्‍य‍ सत्‍ि‍ के‍ मखु खया‍ (मंत्रालय/विभाग‍ के‍ सधचि)‍ का‍
औपचाररक‍ उत्‍तर‍ प्राप्‍त‍ करिा‍ है ।‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍पाददत‍ करिे‍ के‍ ललए‍ पालि‍ ककए‍ गए‍
लेखापरीक्षण‍मािकों‍के‍संदभा‍को‍ड्र फ्टट‍ररपोटा ‍में ‍उधचत‍रूप‍से‍ददया‍जािा‍चादहए।‍‍‍
7.7
यह‍ महत्‍िपूण‍ा है ‍ कक‍ ककसी‍ पाठक‍ को‍ लेखापरीक्षा‍ का‍ उद्दे श्‍य‍ समझािे‍ के‍ ललए‍ ड्र फ्टट‍
प्रनतिेदि,‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ उद्दे श्‍यों‍ और‍ कायाक्षेत्र‍ का‍ िणाि‍ करे ।‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ कायाक्षेत्र‍ पर‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
82 | पष्ृ ‍ठ
लगाया‍ गया‍ कोई‍ सीमाबन्‍ध,‍ उसके‍ कारण‍ और‍ उिका‍ समाधाि‍ करिे‍ के‍ प्रयासों‍ को,‍ ड्र फ्टट‍
प्रनतिेदि‍में ‍दशााया‍जािा‍चादहए।‍‍
महालेखाकार‍ मंत्रालय‍ कें‍ वित्‍
तीय‍ सलाहकार‍ को‍ प्रनत‍ सदहत‍ सधचि‍ को‍ अद्ाधशासकीय‍ पत्र‍ के‍
साथ‍सरकार‍को‍ड्र फ्टट‍निष्‍
पादि‍लेखापरीक्षा‍प्रनतिेदि‍प्रेवषत‍करें गे‍हैं ,‍जजसमें ‍निम्‍िललखखत‍बातें ‍
शालमल‍होिी‍चादहएं:‍

निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍का‍विषय‍और‍वपछले‍‍िाताालाप‍का‍संदभा;

जोखखम‍तथा‍मामलों‍की‍महत्‍िपण
ा ा‍सदहत‍ प्रमख
ू त
ु ‍ लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍ और‍ लसफाररशों‍
का‍सार;‍

औपचाररक‍प्रनतकिया‍के‍ललए‍समय‍सीमा;

लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ और‍ निणायों‍ का‍ औपचाररक‍ चचाा‍ और‍ प्रस्‍तुनतकरण‍ आमजन्‍त्रत‍
करिा;‍तथा‍कायािम‍प्रबंधि‍में ‍प्रत्‍यालशत‍मूल्‍यिधाि,‍यदद‍लसफाररशें‍लागू‍की‍जाती‍हैं।‍
सत्ि की प्रनतक्रिया
7.8
यह‍ आिश्‍यक‍ है ‍ कक‍ सत्‍त्‍ि‍ को‍ ड्र फ्टट‍ लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदि‍ का‍ ललखखत‍ उत्‍तर‍ दे िे‍ के‍
ललए‍ राजी‍ ककया‍ जाए।‍ इसे‍ पत्राचार,‍ व्‍यजक्‍तगत‍ बैठकों‍ और‍ ड्र फ्टट‍ लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदि‍ के‍
प्रस्‍तुनतकरण‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍ प्राप्‍त‍ ककया‍ जा‍ सकता‍ है ।‍ चकूं क‍ लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदि‍ संसद/राज्‍य‍
विधािमण्‍डल‍ को‍ प्रस्‍तत
ु ‍ ककया‍ जाता‍ है ,‍ इसललए‍ यह‍ आिश्‍यक‍ है‍ कक‍ सत्‍ि‍ के‍ उत्‍तर‍ पर‍
मंत्रालय/विभाग‍ के‍ सधचि‍ का‍ अिुमोदि‍ प्राप्‍त‍ ककया‍ जाए।‍ यह‍ प्रयास‍ प्रत्‍येक‍ लेखापरीक्षा‍
पररणाम‍और‍लसफाररश‍पर‍प्रत्‍यक्ष‍रूप‍से‍प्रनतकिया‍दे िे‍के‍ललए‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्‍ि‍प्राप्‍त‍करिे‍
के‍ललए‍होिा‍चादहए‍जजससे‍कक‍इन्‍
हे‍अंनतम‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍में ‍प्रकालशत‍ककया‍जा‍सके।‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
83 | पष्ृ ‍ठ
एक्‍जट कॉन्फ्रेंस
7.9
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ का‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्‍त्‍ि‍ अथाात‍ संबंधधत‍ सरकार‍ के‍ सधचि/प्रधाि‍
सधचि‍ के‍ मुख्‍य‍ कायाकारी‍ के‍ साथ‍ एिं‍ एजक्‍जट‍ क न्‍
फ्रेंस‍ के‍ साथ‍ निष्कषा‍ ददया‍ जािा‍ चादहए,‍
जैसा‍ भी‍ मामला‍ हो।‍ जहां‍ कही‍ भी,‍ एक‍ से‍ अधधक‍ विभाग/एजेंसी‍ शालमल‍ है ‍ िहां‍ ऐसी‍
एजेंलसयों/विभागों‍से‍प्रनतनिधधत्‍ि‍पर‍जोर‍दे िा‍चादहए।‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्‍ि‍की‍प्रनतकियाओं‍ सदहत‍
ड्र फ्टट‍ लेखापरीक्षा‍ ररपोटा ‍ एजक्‍जट‍ क न्‍
फ्रेस‍ को‍ आयोजजत‍ करिे‍ से‍ पहले‍ अिश्‍य‍ जारी‍ करिी‍
चादहए।‍ महालेखाकर‍ या‍ समूह‍ अधधकारी‍ को‍ एजक्‍जट‍ कान्‍
फ्रेस‍ का‍ िेतत्ृ ‍ि‍ करिा‍ चादहए।‍ सभी‍
लेखापरीक्षा‍ पररणामों,‍ निष्‍कषों‍ और‍ लसफाररशों‍ पर‍ चचाा‍ की‍ जािी‍ है ‍ और‍ जहां‍ तक‍ संभि‍ हो‍
लेखापरीक्षक्षत‍सत्‍ि‍की‍प्रत्‍यक्ष‍प्रनतकियाएं‍प्राप्‍त‍और‍ररक डा‍की‍जािी‍है ।‍यह‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍
और‍ लसफाररशों‍ के‍ बारे ‍ में ‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्‍ि‍ के‍ साथ‍ करार‍ करिे‍ का‍ भी‍ मंच‍ है ।‍ यह‍ ककसी‍
सन्‍
देह‍ जजसे‍ सत्‍ि‍ द्िारा‍ उठाया‍ जा‍ सकता‍ है ,‍ को‍ स्‍पष्‍ट‍ करिे‍ के‍ ललए‍ लेखापरीक्षा‍ दल‍ को‍
अिुमनत‍भी‍दे गा।‍एजक्‍जट‍क न्‍
फ्रेस‍का‍कायाित
ृ ‍ररकाडा‍ ककया‍जािा‍चादहए‍‍और‍यह‍कहते‍ हुए‍
दो‍सप्‍ताह‍के‍अंतर‍कायाित
ृ ‍की‍पािती‍का‍अिुरोध‍के‍साथ‍सत्‍ि‍का‍समथाि‍करिा‍चादहए‍कक‍
निधााररत‍ अिधध‍ में ‍ पािती‍ की‍ प्राजप्‍त‍ ि‍ होिे‍ के‍ मामलें‍ में ‍ यह‍ मािा‍ जाएगा‍ कक‍ लेखापरीक्षक्षत‍
सत्‍ि‍ कायाित
जट‍ कान्‍फ्रेंस‍
ु ,‍ एजग्‍
ृ ‍ से‍ सहमत‍ है । उस‍ मामले‍ में ‍ यदद‍ लेखापरीक्षा‍ सत्त्ि‍ का‍ प्रमख
करिे‍ के‍ललए‍लेखापरीक्षा‍के‍नििेदि‍पर‍प्रनतकिया‍िहीं‍ करता‍है ‍ तब‍महालेखाकार‍को‍कान्‍
फ्रेंस‍
करिे‍ के‍ ललए‍ सत्त्ि‍ के‍ प्रमख
ु ‍ को‍ राजी‍ करिे‍ की‍ कोलशश‍ करिी‍ चादहए।‍ अिस
ु रण‍ के‍ बाद‍ भी‍
यदद‍एजग्‍
जट‍कान्‍
फ्रेंस‍िहीं‍ की‍जाती‍है ‍ तो‍उस‍मामलों‍में ,‍इस‍तथ्‍य‍का‍ररपोटा ‍ में ‍ ललखा‍जािा‍
चादहए।‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
84 | पष्ृ ‍ठ
तीसरे पक्ष से परामशष
7.10
जबकक‍ तीसरा‍पक्ष‍सामान्‍
यतया‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्त्ि‍िहीं‍ हो‍सकता‍ कफर‍ भी‍उिके‍काया‍
कलाप‍ कायािम‍ और‍ सेिा‍ सुपुदागी‍ को‍ प्रभावित‍ करती‍ हैं‍ और‍ अक्‍सर‍ लेखापरीक्षा‍ ररपोटों‍ में ‍
उिके‍ उत्तरदानयत्‍ि‍ और‍ निष्‍पादि‍ के‍ बारे ‍ में ‍ दटप्‍पणी‍ शालमल‍ होती‍ है ।‍ लेखापरीक्षकों‍ को‍
लेखापरीक्षा‍काया‍ के‍दौराि‍प्राप्‍त‍कोई‍सूचिा‍जहां‍ सांविधधक‍या‍अन्‍यथा‍निधााररत‍उत्तरदानयत्‍िों
में ‍ऐसा‍करिा‍आिश्‍यक‍हो‍को‍छोड़कर‍तीसरे ‍पक्षों‍को‍ि‍तो‍ललखखत‍में ‍और‍ि‍हीं‍मौखखक‍रूप‍
से‍ सूधचत‍ करिी‍ चादहए।‍ यदद‍ तीसरे ‍ पक्षों‍ से‍ सूचिा‍ अपेक्षक्षत‍ हो‍ तो‍ उस‍ मामले‍ में ‍ कोई‍
लेखापरीक्षक्षत‍ सत्त्ि‍ तीसरे ‍ पक्ष‍ से‍ िह‍ सच
ू िा‍ मुँगिाएगा‍ और‍ लेखापरीक्षा‍ को‍ उपलब्‍ध‍ कराएगा।‍
इसके‍ अनतररक्‍त‍ जहां‍ धचजन्‍हत‍ तीसरे ‍ पक्षों‍ की‍ भूलमका‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ और‍ लसफाररशों‍ के‍
ललए‍ काफी‍ महत्‍िपूण‍ा मािी‍ जाती‍ है ‍ िह ‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्त्िों‍ को‍ उि‍ पक्षों‍ की‍ धचन्‍
ताओं‍ को‍
लेखापरीक्षा‍को‍उिके‍उत्तरों‍में ‍लािे‍के‍ललए‍बढािा‍ददया‍जाए।‍‍
ड्रॉफ्ट ररपोटष पर मख्
ु यालय का अिलोकि
7.11
क्षेत्रीय‍लेखापरीक्षा‍कायाालयों‍द्िारा‍तैयार‍की‍गई‍लेखापरीक्षा‍ररपोटा ‍ का‍मुख्‍यालय‍द्िारा‍
पयािेक्षण‍और‍ समीक्षा,‍ लेखापरीक्षा‍पररणामों‍और‍निष्‍कषों,‍ लसफाररशों,‍ साक्ष्‍
यों‍ड्राजफ्टटं ग‍ इत्‍यादद‍
जो‍एक‍गण
ु ित्ता‍नियत्रंण‍का‍उपाय‍हैं‍ के‍विशेष‍संदभा‍ के‍साथ‍की‍जाती‍है ।‍मख्
ु ‍यालय‍द्िारा‍
सुधार‍हे तु‍ दटप्‍पणी‍और‍सुझाि,‍जो‍लेखापरीक्षा‍करते‍ समय‍प्रनतददि‍के‍आधार‍पर‍सजम्‍मललत‍
िहीं‍ककया‍गया‍हो,‍पररणामों‍और‍निष्‍कषों‍के‍ताककाक‍विकास,‍सहायक‍साक्ष्‍
यों‍की‍गण
ु ित्ता‍और‍
िैद्यता‍ और-िस्‍तप
ु रक‍ दृजष्‍टकोण‍ पर‍ आश्‍िासि‍ मुहैया‍ कराता‍ है ।‍ विभाग‍ के‍ िररष्‍ठ‍ प्रबंधि‍
द्िारा‍समीक्षा‍सुनिजश्‍चत‍करती‍है ‍कक‍महालेखाकारों‍द्िारा‍लेखापरीक्षा‍के‍कायान्ि
‍ यि‍में ‍उपयुक्‍त‍
प्रकियाओं‍ के‍कारण‍ररपोटा ‍ में ‍ ककए‍गए‍आशोधिों‍को‍उिका‍कारण‍बताते‍ हुए‍विलशष्‍ट‍रूप‍से‍
दशााते‍हुए‍दस्‍तािेजीकरण‍करिा‍चादहए।‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
85 | पष्ृ ‍ठ
ड्रॉफ्ट अक्न्तम ररपोटष
7.12
लेखापरीक्षक्षत‍ सत्‍ि‍ के‍ उत्तरों‍ और‍ मुख्‍यालय‍ द्िारा‍ सुझाए‍ गए‍ आशोधिों‍ को‍ समाविष्‍ट‍
करिे‍ के‍ बाद,‍ ड्र फ्टट‍ अजन्‍तम‍ ररपोटा ‍ तैयार‍ की‍ जािी‍ चादहए।‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्‍ि‍ को‍ दोबारा‍
लेखापरीक्षा‍पररणामों,‍निष्‍कषों‍और‍लसफाररशों‍पर‍दटप्‍पणी‍करिे‍ का‍अिसर‍ददया‍जािा‍चादहए।‍
िैसे‍ तो‍ िाररष्‍
ठ‍ प्रबन्‍
धि‍ के‍ अिुमोदि‍ के‍ पश्‍चात ्‍ ड्र फ्टट‍ अजन्‍
तम‍ ररपोटा ,‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्त्ि‍
एजक्‍जट‍कान्‍
फ्रेंस‍के‍कायाित
ृ ‍की‍प्रनतकिया‍सदहत‍उसकी‍एक‍संख्‍या‍और‍गोपिीय‍प्रनत‍के‍रूप‍
में ‍ लेखापरीक्षा‍सत्‍ि‍के‍प्रमुख‍या‍अलभशासि‍के‍ललए‍प्रभारी‍व्‍यजक्‍तयों‍को‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍
और‍लसफाररशों‍पर‍दो‍हफ्टतों‍की‍अिधध‍में ‍प्रनतकियों‍के‍अिरु ोध‍के‍साथ‍जारी‍की‍जािी‍चादहए।‍
ड्र फ्टट‍अजन्‍
तम‍ररपोटा ‍पर‍प्राप्‍त‍हुए‍निष्‍कषों‍और‍लसफाररशों‍पर‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्‍ि‍की‍प्रनतकिया‍
को‍अजन्‍
तम‍ररपोटा ‍में ‍शालमल‍ककया‍जािा‍चादहए।
अक्न्तम प्रनतिेदि
7.13
विभाग‍ के‍ िाररष्‍
ठ‍ प्रबन्‍धि‍ द्िारा‍ प्रनतिेदि‍ के‍ अिुमोदि‍ पर‍ महालेखाकार‍ नियंत्रक-
महालेखापरीक्षक‍ द्िारा‍ प्रनतिेदि‍ के‍ औपचाररक‍ अिुमोदि‍ के‍ ललए‍ समुधचत‍ दटप्‍पखणयों‍ सदहत‍
प्रनतिेदि‍की‍बांड‍प्रनत‍भेजता‍है ,‍जजसके‍पश्‍चात ्‍प्रनतिेदि‍प्रनतयों‍के‍निधााररत‍संख्‍या‍के‍मुिण,‍
स्‍याही‍ से‍ नियत्रंक‍ महालेखापरीक्षक‍ के‍ हस्‍
ताक्षर‍ हे त‍ु हस्‍ताक्षर‍ प्रनतयां‍ और‍ अन्‍य‍ प्रनतयां‍ उसके‍
प्रनतकृनत‍हस्‍ताक्षरों‍के‍ललए‍सही‍मािी‍जाती‍हैं।
7.14
प्रनतिेदि‍ की‍ मुदित‍ हस्‍ताक्षर‍ प्रनतयां‍ नियंत्रक‍ महालेखापरीक्षक‍ के‍ हस्‍
ताक्षर‍ हे त‍ु
मुख्‍यालयों‍को‍भेजी‍जाती‍है ।‍प्रनतिेदि‍की‍हस्‍
ताक्षररत‍प्रनतयां‍संसद/राज्‍य‍विधािमंडल‍के‍पटल‍
पर‍रखिे‍ के‍ललए‍सरकार‍को‍भेजी‍जािी‍चादहए।‍उसके‍साथ‍ही‍प्रनतिेदि‍की‍हस्‍
ताक्षररत‍प्रनत‍
सदहत‍प्रनतिेदि‍प्रेवषत‍करिे‍ की‍सूचिा‍िमश:‍संघ‍औरा‍राज्‍य‍सरकारों‍से‍ संबंधधत‍प्रनतिेदिों‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
86 | पष्ृ ‍ठ
के‍ संबंध‍ में ‍ राष्‍रपनत/राज्‍यपाल‍ के‍ सधचि‍ को‍ भेजी‍ जाती‍ है ।‍ मुदित‍ प्रनतिेदिों‍ की‍ शेष‍ प्रनतयां‍
उिके‍ अिुरोध‍ पर‍ सामान्‍
यत:‍ प्रनतिेदि‍ के‍ प्रस्‍
तुत‍ होिे‍ िाले‍ ददि‍ को‍ ही‍ ससंद/विधािमण्‍डल‍
सधचिालय‍को‍प्रेवषत‍की‍जाती‍है ।‍
अच्िे प्रनतिेदि की विशेषताएं
7.15
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍प्रनतिेदिों‍के‍संबंध‍में ‍निम्‍िललखखत‍बबन्‍दओ
ु ं‍पर‍बल‍ददए‍जािे‍की‍
आिश्‍यकता‍है :‍

लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदि‍ पूरा‍ होिा‍ चादहए‍ अथाात‍ कायाक्षेत्र,‍ मािदण्‍
ड,‍ प्रमाण,‍ निष्‍कषों‍ तथा‍
लसफाररशों‍ से‍ संबंधधत‍ सूचिा‍सदहत‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍य‍को‍संतुष्‍ट‍ करिे‍ के‍ललए‍ अपेक्षक्षत‍
समस्‍त‍आिश्‍यक‍सूचिा‍प्रनतिेदि‍में ‍उपलब्‍ध‍होिी‍चादहए;

लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदि‍ की‍ यथााथता‍ स्‍पष्‍ट‍ निष्‍कषों‍ तथा‍ संतुललत‍ विषयिस्‍तु‍ तथा‍ भाषा‍ के‍
माध्‍यम‍ से‍ सुनिजश्‍चत‍ की‍ जाती‍ है ।‍ एक‍ प्रनतिेदि‍ तभी‍ संतुललत‍ मािा‍जाता‍ है ‍ जब‍ उसमें ‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
87 | पष्ृ ‍ठ
केिल‍आलोचिा‍पर‍ही‍बल‍िहीं‍ददया‍जाता‍बजल्‍क‍स्‍पष्‍ट‍निधाारण‍अथिा‍मूल्‍याकंि‍शालमल‍
ककया‍जाता‍है ‍जजसका‍अथा‍है ‍कक‍अच्‍छा‍निष्‍पादि‍भी‍सूधचत‍ककया‍जािा‍चादहए;

लेखापरीक्षा‍प्रनतिेदि‍तथा‍विश्‍
िसिीय‍होता‍है ‍ जब‍लेखापरीक्षा‍के‍पररणाम‍आकषाक‍ढं ग‍से‍
प्रस्‍तत
ु ‍ ककए‍ जाते‍ हैं‍ तथा‍ निष्‍कषा‍ एिं‍ लसफाररशों‍ प्रस्‍तुत‍ तथ्‍यों‍ से‍ तकापूण‍ा तरीके‍ से‍ की‍
जाती‍हैं;

प्रनतिेदि‍ पढिे‍ और‍ समझिे‍ में ‍ आसाि‍ होिा‍ चादहए,‍ िह‍ संक्षक्षप्‍त‍ होिा‍चादहए,‍ उससे‍ बड़ा‍
िही‍होिा‍चादहए‍जजतिा‍लेखापरीक्षा‍मत‍और‍निष्‍
कषा‍व्‍यक्‍त‍करिे‍के‍ललए‍आिश्‍यक‍हो;

प्रनतिेदि‍की‍सुसंगता‍यह‍सुनिजश्‍चत‍करते‍ हुए‍संरक्षक्षत‍हो‍जाती‍है ‍ कक‍उसमें ‍ समाि‍संदभा‍
में ‍विरोधाभासी‍तथ्‍य‍अथिा‍निष्‍कषा‍शालमल‍िही‍हैं‍अथिा‍प्रनतिेदि‍के‍विलभन्‍ि‍िगों‍अथिा‍
भागों‍में ‍उसी‍खण्‍
ड‍पर‍निष्‍
कषा‍अंसगत‍िही‍है ।

प्रनतिेदि‍ तभी‍ रचिात्‍मक‍ मािा‍ जाता‍ है ‍ जब‍ उसमें ‍ आलोचिात्‍मक‍ दृजष्‍टकोण‍ के‍ बजाए‍
उपचारी‍दृजष्‍टकोण‍व्‍यक्‍त‍ककए‍गए‍हों‍तथा‍उसमें ‍समुधचत‍लसफाररशें‍शालमल‍हो;

प्रनतिेदि,‍यदद‍िह‍समय‍पर‍ददया‍गया‍हो‍तो‍सत्त्ि‍के‍मूल्‍य‍को‍बढता‍है ;
प्रनतिेदि की संरचिा
7.16
निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदि‍ अधधमान्‍
य‍ रूप‍ से‍ निम्‍िललखखत‍ संरचिा‍ के‍ अिुसार‍
प्रस्‍तत
ु ‍ककया‍जािा‍चादहए:‍

शीषाक:‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍का‍विषय

कायाकारी‍सार:‍यह‍मुख्‍य‍प्रनतिेदि‍का‍सार‍प्रदाि‍करता‍है ।‍सारांश‍काफी‍लम्‍बा‍िहीं‍ होिा‍
चादहए‍ और‍ इसमें ‍ केिल‍ अनििाया‍ सूचिा‍ होिी‍ चादहए।‍ प्रमुख‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ को‍
संक्षक्षप्‍त‍में ‍ लसफाररशों‍के‍साथ‍को‍उसी‍िम‍में ‍ रखा‍जािा‍चादहए‍जैसे‍ लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य ‍
और‍उप‍उद्दे श्‍य‍हो।
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
88 | पष्ृ ‍ठ

प्रस्‍ताििा:‍ इसमें ‍ अध्‍यि‍ के‍ विषय,‍ कायािम,‍ कायाकलाप,‍ या‍ संस्‍था‍ का‍ संक्षक्षप्‍त‍ वििरण,‍
उसके‍ उद्दे श्‍य,‍ इिपुट,‍ कायाान्‍ियि‍ संरचिा,‍ प्रत्‍यालशत‍ आउटपुट‍ और‍ पररणाम‍ इत्‍यादद‍
शालमल‍ होते‍ है ।‍ प्रस्‍ताििा‍ संक्षक्षप्‍त‍ होिी‍ चादहए,‍ कफर‍ भी‍ पाठक‍ को‍ कायािम‍ का‍ संदभा‍
समझ‍आिे‍के‍ललए‍पयााप्त
‍ ‍होिी‍चादहए।

लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य:‍यह‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍का‍केन्‍ि‍बबन्‍द‍ु है ‍ जो‍लेखापरीक्षा‍शरू
ु ‍ करिे‍
का‍कारण‍निददा ष्‍ट‍करते‍ हैं।‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍सम्‍पूण‍ा किया,‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍के‍
आसपास‍बिाई‍जाती‍है ।‍इसललए‍उन्‍
हें‍ सरल‍और‍स्‍पष्‍ट‍शब्‍
दों‍में ‍ बताया‍जािा‍चादहए।‍यह‍
सम्‍पण
ू ‍ा कथि/प्रश्‍ि‍के‍रूप‍में ‍प्रत्‍येक‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍य‍के‍अन्‍दर‍लेखापरीक्षा‍उद्दे श्‍यों‍और‍
उप-उद्दे श्‍यों‍को‍निधााररत‍करिे‍के‍ललए‍लाभदायक‍है ।

लेखापरीक्षा‍कायाक्षेत्र:‍यह‍लेखापरीक्षा‍में ‍ किर‍ककए‍गए‍कायािम‍और‍लेखापरीक्षक्षत‍कायािम‍
के‍खण्‍
डों‍की‍अिधध‍ की‍शतों‍के‍अिुसार‍ पररभावषत‍है ‍ जजसे‍ संक्षक्षप्‍त‍रूप‍से‍ दशााया‍ जािा‍
चादहए;

लेखापरीक्षा‍कायाप्रणाली:‍यह‍डाटा‍संग्रहण/प्रमाण‍संग्रहण‍और‍िमूिा‍जांच‍हे तु‍ उपयोग‍ककया‍
जाता‍ है ‍ और‍ इसे‍ संक्षेप‍ में ‍ िखणात‍ ककया‍ जािा‍ चादहए।‍ यह‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ की‍
स्‍िीकायाता‍को‍बढाता‍है‍ और‍‍िह‍लेखापरीक्षा‍प्रकिया‍की‍पारदलशाता‍के‍ललए‍वििरण‍तैयार‍
करता‍है ;

लेखापरीक्षा‍ मािदण्‍
ड:‍ प्रत्‍येक‍ लेखापरीक्षा‍ उद्दे श्‍य‍ और‍ उप-उद्दे श्‍य‍ के‍ संदभा‍ में ‍ लेखापरीक्षा‍
निष्‍कषों‍और‍निणायों‍तक‍पहुंचिे‍ के‍ललए‍जजसे‍ समुधचत‍स्‍पष्‍टीकरण‍के‍साथ‍बताया‍जािा‍
चादहए;

प्रत्‍येक‍उद्दे श्‍य‍के‍संदभा‍ के‍साथ:लेखापरीक्षा‍के‍दौराि‍निकाले‍ गए‍लेखापरीक्षा‍निष्‍कषा‍ और‍
पररणाम‍बताए‍जािे‍चादहए;
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
89 | पष्ृ ‍ठ

लसफाररशें:‍जहां‍ भी‍लागू‍ हो‍एक‍बाक्‍स‍या‍धचन्‍हांककत‍वप्रंट‍में ‍ निष्‍कषों‍के‍साथ‍प्रस्‍तुत‍की‍
जािी‍चादहए;

आभार:‍ सत्त्ि‍ द्िारा‍ मािदण्‍
ड/निष्‍
कषों‍ और‍ लसफाररशों‍ के‍ सहयोग,‍ स्‍िीकृनत‍ को‍ संक्षेप‍ में ‍
दशाािा‍ अथिा‍ उसका‍ अभार‍ दे िा‍ लाभप्रद‍ होगा।‍ यदद‍ ककसी‍ स्‍तर‍ पर‍ सहयोग‍ अथिा‍ उत्तर‍
प्राप्त‍ िहीं‍ होता‍ तो‍ यह‍ दशााया‍ जािा‍ चादहए‍ कक‍ क्‍या‍ उसके‍ कारण‍ सहयोग‍ अथिा‍ उत्तर‍
प्राप्त‍करिे‍ के‍ललए‍महालेखाकार‍द्िारा‍ककए‍गए‍विशेष‍प्रयासों‍तथा‍उसकी‍विविक्षा‍सदहत‍
कोई‍सीमा‍हो।

शब्दािली:‍यह‍पाठक‍के‍ललए‍मददगार‍होगी‍यदद‍शब्‍
दािाली‍या‍आसािी‍से‍ ढूंढे‍ जािे‍ िाले‍
फुट‍िोट‍में ‍ स्‍पष्‍टीकरण‍ददया‍गया‍हो।‍प्रनतिेदि‍में ‍ प्रयोग‍की‍गई‍शब्‍
दािली‍व्‍यापक‍होिी‍
चादहए‍जजसमें ‍सभी‍तकिीकी‍और‍असामान्‍
य‍शब्‍दों‍की‍व्‍याख्‍या‍होिी‍चादहए।
प्रनतिेदिों के प्रस्तत
ु ीकरण और पाठिीयता संििषि
7.17
पाठकों‍का‍ध्‍याि‍विषय‍सूची,‍पष्ृ ‍ठ,‍शीषाक‍और‍उप-शीषाक,‍कायाकारी‍सार,‍निष्‍कषा‍ और‍
लसफाररशें‍ और‍विशेष‍आंकडे‍ जैसे‍ ताललकाएं,‍चाटा ,‍डायग्राम,‍मैप‍टे क्‍स्‍ट‍ब क्‍सेस‍और‍धचत्रों‍पर‍
केजन्‍ित‍होता‍है ‍ जजससे‍ पाठक‍का‍ध्‍याि‍सबसे‍ महत्‍िपण
ू ‍ा संदेश‍जो‍विभाग‍चाहता‍है ‍ कक‍उन्‍हें‍
लमल‍जाए।
7.18
महत्िपूण‍ा लेखापरीक्षा‍निष्‍कषों‍को‍बाक्स‍में ‍ धचन्‍
हांककत‍ककया‍जा‍सकता‍है ।‍लेखापरीक्षा‍
निष्‍कषों‍ का‍ ग्राफ‍ और‍ चाटा ‍ के‍ उपयोग‍ के‍ साथ‍ सोदाहरण‍ ददया‍ जािा‍ चादहए‍ और‍ जजससे‍
विश्‍
लेषण‍और‍निष्‍कषों‍की‍दृश्‍यता‍में ‍ सुधार‍हो‍सके।‍धचत्रों‍को‍भी‍निष्‍कषों‍की‍पुजष्‍ट‍के‍ललए‍
उपयोग‍ककया‍जा‍सकता‍है ।‍तथ्‍य,‍पररणाम‍और‍निष्‍कषों‍को‍विलभन्‍
ि‍पैराग्राफों‍में ‍ररपोटा ‍ककया‍
जा‍सकता‍जजससे‍उन्‍
हें‍स्‍पष्‍ट‍रूप‍से‍पहचािा‍जा‍सके।‍‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
90 | पष्ृ ‍ठ
7.19
प्रनतिदे िों‍ में ‍ अध्‍यायों‍ और‍ भागों‍ के‍ ललए‍ शीषाक‍ वििरणात्‍मक‍ के‍ बजाय‍ निश्‍चयात्‍मक‍
होिे‍ चादहए‍ क्‍योंकक‍ यह‍ पाठक‍ को‍ ररपोटा ‍ को‍ बेहतर‍ तरीके‍ से‍ दे खिे‍ की‍ अिुमनत‍ दे ता‍ है ।‍
लेखापरीक्षा‍दल‍को‍इस‍पर‍विचार‍करिे‍की‍आिश्‍यकता‍है ‍कक‍कौि‍सा‍डाटा‍और‍सूचिा‍पाठक‍
को‍साक्ष्‍
य‍या‍तकों‍को‍समझिे‍ में ‍ मदद‍करे गी।‍एक‍ताललका,‍ग्राफ‍या‍चाटा ‍ को‍डडजाइि‍करते‍
समय,‍ स्‍पष्‍ट‍ बबन्‍द‍ु जजस‍ पर‍ प्रकाश‍ डालिे‍ की‍ आिश्‍यकता‍ है‍ जजस‍ से‍ प्रदशाि‍ विलशष्‍
ट‍ और‍
साथाक‍हो‍सकेगा।‍शीषाक‍और‍लेबल‍स्‍पष्‍ट‍और‍सांक्षक्षप्‍त‍होिे‍चादहए।‍सभी‍डाटा‍ग्र कफक्‍स‍और‍
अन्‍य‍सोदाहरण‍स्‍ित:‍स्‍पष्‍ट‍होिे‍ चादहए,‍जजससे‍ पाठक‍को‍उन्‍
हें‍ समझिे‍ के‍ललए‍मख्
ु ‍य‍विषय‍
े़
का‍संदभा‍िही‍लेिा‍पडे।‍बाहरी‍(लेखापरीक्षक्षत‍सत्त्ि‍सदहत)‍स्रोतों‍से‍ललए‍गए‍डाटा‍िाली‍सारणी‍
और‍अन्‍
य‍ग्राकफक्‍स‍की‍ऐसे‍डाटा‍के‍स्रोत‍से‍अलभस्‍िीकृनत‍होिी‍चादहए।‍‍‍
लेखापरीक्षा कायाषन्ियि चि
7.20‍‍निजम्‍िललखत‍डायग्राम‍एक‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍लेखापरीक्षा‍कायाान्ि
‍ यि‍चि‍को‍दशााता‍है:‍‍‍‍‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
91 | पष्ृ ‍ठ
निष्पादि लेखापरीक्षा की सामानयकता
7.21
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍को‍समय‍पर‍पूरा‍करिा‍सुनिजश्‍चत‍करिे‍ के‍ललए‍और‍यह‍भी‍कक‍
शीषाक‍अपिा‍महत्‍ि‍ि‍खो‍दें ‍सभी‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍अभीष्‍ट‍रूप‍से‍दस‍माह‍की‍अिधध‍के‍
अन्‍दर‍ पूरे‍ ककए‍ जािे‍ चादहए।‍ लेखापरीक्षा‍ कायाान्‍ियि‍ चि‍ अथाात‍ एंरी‍ कान्‍
फ्रेंस‍ की‍ नतधथ‍ से‍
मुख्‍यालय‍द्िारा‍लेखापरीक्षा‍प्रनतिेदि‍को‍अजन्‍
तम‍रूप‍दे िे‍ तक,‍अधधमान्‍
य‍रूप‍से‍ इस‍अिधध‍
के‍ अन्‍दर‍ परू ी‍ हो‍ जािी‍ चादहए।‍ तथावप‍ बाहरी‍ विशेषज्ञों‍ की‍ मदद‍ से‍ की‍ गई‍ जदटल‍ अखखल‍
भारतीय‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ या‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ ललए‍ कुछ‍ अनतररक्‍त‍ समय‍ की‍
आिश्‍यकता‍हो‍सकती‍है ।‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
92 | पष्ृ ‍ठ
8.
अिुिती निष्पादि लेखापरीक्षा
8.1
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍प्रनतिेदि‍अनििायात:‍सािाजनिक‍क्षेत्र‍निष्‍पादि‍ और‍जिाबदे ही‍को‍
सध
पादि‍ लेखापरीक्षाओं‍ में ‍ निदहत‍ लसफाररशों‍ के‍
ु ारिे‍ के‍ ‘पररणाम’‍ के‍ साधि‍ है ।‍ इसे‍ निष्‍
कायाान्‍ियि‍ के‍ माध्‍यम‍ से‍ प्राप्‍त‍ ककया‍ जा‍ सकता‍ है ।‍ विभाग‍ में ‍ एक‍ सुसंगत‍ और‍ िमबद्ध‍
अिि
ु ती‍प्रकिया‍का‍कायािम‍प्रबन्‍धि‍को‍सध
ु ारिे‍ में ‍ निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍प्रभािकाररता‍के‍
ललए‍महत्‍िपूण‍ा योगदाि‍है
अिुिती‍ का‍ अथा‍ ऐसी‍ जस्‍थनत‍ से‍ है ‍ जहां‍ लेखापरीक्षक‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्त्ि‍ या‍ अन्‍य‍ जजम्‍मेिार‍
पक्ष‍ द्िारा‍ पूि‍ा निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ के‍ पररणामों‍ के‍ आधार‍ पर‍ ककए‍ गए‍ है ‍ की‍ सुधारात्‍मक‍
कारा िाईयों‍ की‍ जांच‍ करता‍ है ।‍ यह‍ एक‍ स्‍ितंत्र‍ कायाकलाप‍ है ‍ जो‍ लेखापरीक्षा‍ प्रकिया‍ द्िारा‍
लेखापरीक्षा‍के‍प्रभाि‍को‍ सुदृढ‍कर‍ उसके‍मूल्‍य‍में ‍ िद्
ृ धध‍और‍ भविष्‍य‍के‍लेखापरीक्षा‍काया‍ में‍
सध
ु ार‍करता‍है ।‍यह‍प्रनतिेदिों‍के‍उपयोगकत्ताा‍ और‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्त्िों‍को‍ररपोटों‍को‍गंभीरता‍
से‍ लेिे‍ के‍ ललए‍ प्रोत्‍सादहत‍ करता‍ हैं‍ और‍ लेखापरीक्षा‍ को‍ उपयोगी‍ जािकारी‍ का‍ आधार‍ और‍
निष्‍पादि‍ सच
‍ यि‍ तक‍ सीलमत‍
ू क‍ उिलब्‍ध‍ कराता‍ है ।‍ अिि
ु ती‍ कायािाई‍ लसफाररशों‍ के‍ कायाान्ि
िहीं‍ है ‍ ककन्‍त‍ु इस‍ पर‍ केजन्‍ित‍ है ‍ कक‍ क्‍या‍ लेखापरीक्षक्षत‍ सत्त्ि‍ िे‍ समस्‍या‍ का‍ पयााप्त
‍ ‍ रूप‍ से‍
समाधाि‍ककया‍है ‍ और‍इस‍प्रकिया‍के‍ललए‍अिुमत‍पयााप्‍त‍समय‍के‍बाद‍अन्‍तनिादहत‍शतों‍का‍
उपाय‍ ककया‍ है ।‍ लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदिों‍ पर‍ अिुिती‍ कायािाई‍ करते‍ समय,‍ लेखापरीक्षक‍ को‍ उि‍
निष्‍कषों‍ और‍ लसफाररशों‍ पर‍ ध्‍याि‍ केजन्‍ित‍ करिा‍ चादहए‍ जो‍ अिुिती‍ कारा िाई‍ के‍ समय‍ भी‍
प्रसांधगक‍हों‍और‍एक‍निष्‍
पक्ष‍और‍स्‍
ितंत्र‍दृजष्‍टकोण‍अपिािा‍चादहए।‍‍‍‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
93 | पष्ृ ‍ठ
अिुिती कायषिम का उद्दे ‍य
8.2 निष्पादि लेखापरीक्षा प्रनतिेदि की अिुिती कायषिाही का उद्दे ‍य निम्िमलखखत पर लक्षक्षत
है :

विधािमण्‍डल‍ की‍ सहायता‍ करिा-‍ अिुिती‍ प्रनतिेदि,‍ उिकी‍ जाचं‍ के‍ ललए‍ संसदीय‍
सलमनतयों/विधािमण्‍डलों‍को‍मल्
ू ‍यिाि‍सच
ू िा‍प्रदाि‍कर‍सकते‍है ;‍

सािाजनिक‍ क्षेत्र‍ कायािम‍ के‍ निष्‍पादि‍ में ‍ सुधार‍ प्राप्‍त‍ करिा:‍ लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदिों‍ पर‍
अिि
ु ती‍कारिाई‍का‍मख्
ु ‍य‍कारण‍इस‍संभाििा‍को‍बढािा‍है ‍कक‍लसफाररशों‍का‍कायाान्‍ियि‍
होगा‍और‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्त्िों‍के‍निष्‍पादि‍में ‍सुधार‍में ‍मदद‍लमलेगी;‍

विभाग‍ के‍ निष्‍पादि‍ का‍ मूल्‍यांकि‍ करिा:‍ अिुिती‍ कायािम‍ और‍ पररणाम‍ विभाग‍ के‍
निष्‍पादि‍के‍निधाारण‍ और‍मूल्‍यांकि‍और‍ लेखापरीक्षा‍की‍योजिा‍के‍समय‍ प्रत्‍यालशत‍और‍
कायािम‍प्रबन्‍
धि‍हे तु‍एक‍अच्‍छा‍उपाय‍हो‍सकते‍हैं‍इत्‍यादद‍और;‍

विभाग‍द्िारा‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍िीनतगत‍योजिा‍को‍इिपुट‍प्रदाि‍करता‍है ।‍
वििानयका की सहायता करिा
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍के‍संदभा‍ में ‍ अिि
ु ती‍कियाविधधयों‍का‍स्‍थापिा‍निम्‍िललखखत‍बातों‍
8.3
को‍ध्‍याि‍में ‍रखते‍हुए‍की‍जािी‍चादहए:‍

ं और‍ मौखखक‍ साक्ष्‍य‍ के‍ ललए‍ संसदीय‍ सलमनतयों/राज्‍य‍ विधािमण्‍डल‍ द्िारा‍
विस्‍तत
ृ ‍ ज च‍
चि
ु ी‍ गई‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षाएं,‍ संबंधधत‍ सलमनतयों‍ के‍ निणाय‍ के‍ संदभा‍ में ‍ आगे‍ बढाई‍
जािी‍चादहए,‍यदद‍उिकी‍लसफाररशें‍जारी‍की‍गई‍हैं।‍विभाग‍द्िारा‍अपिाए‍गए‍गुणित्ता‍
आश्‍िासि‍उपायों‍की‍सहायता‍से‍ आश्‍िस्‍त‍की‍जा‍रही‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍अच्‍छी
गुणित्ता‍ से‍ यह‍ आशा‍ की‍ जाएगी‍ कक‍ संसद/राज्‍य‍ विधािमण्‍डल‍ की‍ सलमनतयों‍ की‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
94 | पष्ृ ‍ठ
लसफाररशें‍ ि‍ केिल‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ लसफाररशों‍ की‍ सहायता‍ करें गी‍ बजल्‍क‍ उिका‍ समथाि‍
भी‍करें गी।‍तथावप‍जहां‍संसदीय/राज्‍य‍विधािमण्‍डल‍की‍सलमनतयों‍द्िारा‍चयनित‍मामलों‍
में ‍ जाचं‍ िहीं‍ की‍गई‍और‍लसफाररशें‍ जारी‍िहीं‍ की‍गई‍िहां‍ महालेखाकार‍लसफाररशों‍पर‍
अिुिती‍कारिाई‍जारी‍रखेगे‍जैसे‍कक‍उि‍मामलों‍में ‍जहां‍विस्‍तत
ृ ‍जाचं‍के‍ललए‍विषय‍ि‍
चि
ु ा‍गया‍हो;

विस्‍तत
ु े‍ गए‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षाओं‍ के‍ मामलों‍ में ,‍ महालेखाकर‍
ृ ‍ जाचं‍ हे तु‍ ि‍ चि
लसफाररशें,‍विशेष‍रूप‍से‍ िह‍जो‍सत्त्ि‍द्िारा‍स्‍िीकार‍कर‍ली‍गई‍हैं,‍के‍कायाान्‍ियि‍की‍
ं करिे‍ के‍ ललए‍ अिुिती‍ कियाविधधय ‍ं जारी‍ रखेगे।‍ उि‍ मामलों‍ में ,‍
सीमा‍ तक‍ की‍ ज च‍
ं
जजिमें ‍ लेखापरीक्षक्षत‍सत्त्ि‍द्िारा‍लसफाररशें‍ स्‍िीकार‍िही‍की‍जाती‍है ,‍िह ‍महाले
खाकार‍
आगे‍ चचाा‍ और‍ लसफाररश‍को‍ या‍तो‍स्‍िीकार‍या‍लागू‍ करिे‍ या‍लेखापरीक्षक्षत‍सत्त्ि‍ को‍
आगे‍कारिाई‍की‍लसफाररश‍हस्‍तांतररत‍कर‍सकता‍है ।‍‍‍‍
8.4
जबकक‍ सत्त्िों‍ द्िारा‍ अिुिती‍ की‍ गई‍ कारिाई‍ दटप्‍पखणयों‍ के‍ संदभा‍ में ‍ विधािमण्‍डल‍
सलमनतयों‍ की‍ लसफाररशों‍ पर‍ सामान्‍यत:‍ जारी‍ सरकार‍ के‍ आदे श‍ एक‍ राज्‍य‍ से‍ दस
ू रे ‍ राज्‍य‍ में‍
लभन्‍
ि‍ हो‍ सकते‍ है ;‍ लोक‍ लेखा‍ सलमनत‍ के‍ बतािे‍ पर‍ जारी‍ संघ‍ सरकार‍ पर‍ लागू‍ म डल‍ को‍
ध्‍याि‍में ‍रखा‍जािा‍चादहए।‍‍
8.5
‍‍‍संघ‍सरकार‍के‍प्रनतिेदिों‍के‍मामले‍ में ‍ लाग‍ू ितामाि‍कियाविधध‍के‍अिस
ु ार‍मंत्रालय‍
और‍ विभाग,‍ नियंत्रक-महालेखापरीक्षक‍ के‍ प्रनतिेदि‍ में ‍ शालमल‍ सभी‍ मामलों‍ के‍ प्रनत‍ ‘की‍ गई‍
कारिाई‍दटप्‍पणी’‍(एटीएि) निधााररत‍अिधध‍के‍अन्‍दर‍संसदीय‍सलमनतयों‍को‍भेजते‍ हैं।‍संसदीय‍
सलमनतयों‍को‍प्रस्‍तत
ु ‍करिे‍से‍पहले‍की‍गई‍कारा िाई‍दटप्‍पणी‍के‍तथ्‍यों‍और‍आकंडों‍की‍शुद्धता,‍
उपचारी‍ उपायों‍ की‍ पयााप्‍तता‍ और‍ कम‍ निष्‍पादि‍ के‍ स्‍पष्‍टीकरण‍ के‍ ललए‍ महालेखाकारों‍ द्िारा‍
जाचं‍ की‍जाती‍है ।‍मंत्रालय‍और‍विभाग,‍महालेखाकारों‍के‍दटप्‍पखणयों‍पर‍कारा िाई‍करके‍की‍गई‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
95 | पष्ृ ‍ठ
कारा िाई‍दटप्‍पखणयों‍प्रस्‍तुत‍करते‍ हैं।‍आपिाददक‍मामलों‍में ‍ िे‍ सलमनत‍को‍एटीएि‍प्रस्‍तुत‍करिे‍
ं
से‍पूि‍ा दटप्‍पखणयों‍के‍उत्तर‍सदहत‍लेखापरीक्षा‍की‍जांच‍दटप्‍पखणय ‍शालमल‍कर‍सकते
‍है ।‍
की‍ गई‍ कारा िाई‍ दटप्‍पाखणयों‍ की‍ जांच‍ करते‍ समय‍ फामा‍ के‍ बजाय‍ लसफाररशों‍ पर‍
8.6
िास्‍तविक‍ कारा िाई‍ केन्‍
ि‍ बबन्‍द‍ु है ।‍ जबकक‍ लसफाररशों‍ का‍ कायाान्‍ियि‍ सुनिजश्‍चत‍ करिे‍ के‍ ललए‍
ककसी‍समाि‍म डल‍का‍सुझाि‍िहीं‍ददया‍जा‍सकता,‍और‍ऊपर‍बताई‍गई‍प्रकिया‍उिमें ‍से‍एक‍
म डल‍ हो‍ सकता‍ है ,‍ अजन्‍
तम‍ उद्दे श्‍य‍ लसफाररशों‍ का‍ तरु न्‍त‍और‍ प्रभािी‍ कायाान्‍ियि‍ सनु िजश्‍चत‍
करिा‍होिा‍चादहए।‍‍
प्रभािकाररता नििाषरण
महालेखाकार‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ प्रभािकाररता‍ की‍ मूल्‍यांकि‍ िावषाक‍ रूप‍ से‍ कर‍
8.7
सकते‍है ।‍आन्‍
तररक‍मूल्‍यांकि‍में ‍निजम्‍िललखत‍शालमल‍है :
 िास्‍तविक‍ पररणाम‍ की‍ तुलिा‍ में ‍ योजिा‍ बिाते‍ समय‍ प्रत्‍यालशत‍ प्रत्‍येक‍ निष्‍पादि‍
लेखापरीक्षा‍का‍प्रत्‍यालशत‍पररणाम;‍और
 प्रत्‍यालशत‍मूल्‍यिद्ाधि‍और‍िास्‍तविक‍के‍बीच‍साथाक‍अन्‍तर‍के‍ललए‍कारण।‍अिनिधाारण‍
और‍अधधक‍निधाारण,‍अदक्ष‍सत्त्ि‍प्रनतकिया‍और‍निष्‍पादि‍लेखापरीक्षा‍की‍अदक्ष‍गण
ु ित्ता‍
अन्‍तर‍के‍कारण‍हैं।‍मूल्‍यांकि‍में ‍उपचारी‍उपाय‍भी‍शालमल‍होगे।‍
अिुिती‍या‍निष्‍पादि‍लेखपरीक्षाओं‍का‍मूल्‍यांकि‍निम्‍ि‍द्िारा‍ककया‍जा‍सकता‍है :
8.8

डेस्‍क‍ समीक्षा‍ करते‍ हुए‍ जजसमें ‍ लसफाररशों‍ के‍ िायाान्‍ियि‍ ‍ जजसमें ‍ बैठक,‍ चचाा,‍
प्रस्‍तुतीकरण‍ सदहत‍ की‍ अधधक‍ विस्‍तत
ृ ‍ समीक्षा‍ शालमल‍ है ,‍ ककन्‍तु‍ गहि‍ क्षेत्रीय‍ काया‍
शालमल‍होिा‍अनििाया‍िही‍है ।
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96 | पष्ृ ‍ठ

ब्‍यौराबद्ध‍अिुिती‍समीक्षा‍जजसमें ‍ विधानयका‍के‍ललए‍ररपोटा ‍ तैयार‍करिे‍ के‍उद्दे श्‍य‍के‍
साथ‍ लेखापरीक्षा‍ की‍ लसफाररशों‍ पर‍ सत्त्ि‍ द्िारा‍ की‍ गई‍ कारा िाई‍ के‍ संबंध‍ में ‍ व्‍यापक‍
क्षेत्रीय‍काया‍शालमल‍है ।
निरन्तर सि
ु ार
निरन्‍
तर‍सध
ु ार‍की‍अिि
ु ती‍प्रकियाओं‍का‍एक‍महत्‍िपण
ू ‍ा पररणाम‍है ।‍यह‍निम्िललखखत‍
8.9
द्िारा‍प्राप्‍त‍ककया‍जा‍सकता‍है :
गुणित्ता आ‍िासि समीक्षा कायषिम
‘गुणित्ता‍ समीक्षा‍ ग्रुप’‍ द्िारा‍ निष्‍पाददत‍ कायों‍ की‍ िावषाक‍ योजिा‍ बिाई‍ जािी‍ चादहए,‍
जजसे‍विभाग‍के‍िररष्‍ठ‍प्रबन्‍
धि‍का‍अिुमोदि‍प्राप्‍त‍हो।‍पूण‍ा लेखापरीक्षा‍कायो‍का‍केिल‍
एक‍िमूिा‍ग्रुप‍द्िारा‍समीक्षा‍हे तु‍चि
ु ा‍जािा‍चादहए।‍एक‍बार‍लेखापरीक्षा‍का‍चयि‍कर‍
ललया‍जाता‍है ,‍गुणित्ता‍समीक्षा‍दल‍लेखापरीक्षा‍दस्‍तािेजीकरण‍की‍समीक्षा‍कर‍सकता‍है ‍
और‍कुछ‍स्‍टाफ‍के‍सदस्‍यों‍से‍लमल‍सकते‍है ‍जजन्‍
होंिे‍उि‍कायों‍पर‍काया‍ककया‍है ।

सहकमी समीक्षा
एक‍ स्‍ितंत्र‍ दल‍ द्िारा‍ सहकमी‍ समीक्षा‍ की‍ जाती‍ है ‍ जो‍ विभाग‍ के‍ ललए‍ आन्‍तररक‍ या‍
बाहरी‍ हो‍ सकता‍ है ,‍ यह‍ मूल्‍यांकि‍ करिे‍ के‍ ललए‍ कक‍ क्‍या‍ एक‍ संगठि‍ की‍ आन्‍तररक‍
गण
ु ित्ता‍नियंत्रण‍प्रणाली‍उधचत‍रूप‍से‍ डडजाइि‍की‍गई‍है ‍ और‍प्रभािी‍रूप‍से‍ संचाललत‍
है ,‍जजससे‍ सत्त्ि‍को‍उधचत‍आश्‍िासि‍ददया‍जा‍सके‍कक‍स्‍थावपत‍िीनतयां,‍प्रकियाएं‍ और‍
लागू‍ सकरकारी‍लेखापरीक्षक्षत‍मािकों‍का‍अिुसरण‍ककया‍जा‍रहा‍है ।‍समकक्ष‍समीक्षा‍में ‍
पूरे‍ गुणित्ता‍ नियंत्रण‍ प्रणाल‍ की‍ जाचं‍ सजम्‍मललत‍ है ‍ और‍ काया‍ प्रगनत‍ पर‍ िही।‍ विभाग‍
का‍निरीक्षण‍और‍समकक्ष‍समीक्षा‍विंग‍आन्‍तररक‍समकक्ष‍समीक्षा‍के‍ललए‍उत्तरदायी‍है ।‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
97 | पष्ृ ‍ठ
इसके‍अलािा‍प्रकिया‍की‍मजबूती‍का‍आश्‍िासि‍पािे‍के‍ललए‍बाहरी‍समकक्ष‍समीक्षा‍का‍
प्रबंध‍भी‍ककया‍जा‍सकता‍है ।

सीखे गए सबकों का प्रसार
लेखापरीक्षा‍ अिुभिों,‍ अपिाई‍ गई‍ कायाप्रणललयों‍ और‍ प्राप्‍त‍ ककए‍ गए‍ अिुभिों‍ के‍
मद्दे िजर‍ उिमें ‍ कोई‍ भी‍ आिश्‍यक‍ पररिताि‍ जजससे‍ सुधार‍ के‍ ललए‍ उपयक्
ु ‍त‍ कारा िाई‍
प्रारम्‍भ‍की‍जाए‍पर‍विचार‍विमशा‍ करिे‍ के‍ललए‍नियलमत‍बैठकें‍िकाश प‍एंि‍संगोजष्‍ठ य ‍ं
आयोजजत‍की‍जािी‍चादहए।
मसफाररशों की सूची
8.10
ं े ‍ललए‍शुरूआती‍बबन्‍द‍ु सभी‍महालेखाकारों‍द्िारा‍उपयुक्‍त‍ड टाबेस‍
अिुिती‍कायाविधधय ‍क
में ‍ रखी‍ गई‍ लसफाररशों‍ की‍ व्‍यापक‍ सूची‍ हो‍ सकती‍ थी।‍ निष्‍पादि‍ लेखापरीक्षा‍ िार‍ सूची‍ के‍
अिुरक्षण‍ में ‍ ‘अत्‍
यािश्‍यक‍ अथिा‍ वििेचिात्‍मक’‍ ‘साथाक’‍ और‍ ‘महत्‍िपूण’ा ‍ की‍ उपयुक्‍त‍‍
श्रेणीबद्धता‍के‍अन्‍
तगात‍सभी‍लसफाररशें‍ शालमल‍होिी‍चादहए।‍ड टा‍बेस‍में ‍ अिुिती‍समीक्षाओं‍
के‍ अलािा‍ अन्‍य‍ सुसंगत‍ सूचिा‍ अथाात‍ लेखापरीक्षा‍ प्रनतिेदि‍ का‍ िषा,‍ स्‍िीकृनत‍ की‍ प्राजस्‍थनत‍
अथाात ्‍ स्‍िीकृत‍ आंलशक‍रूप‍ से‍ स्‍िीकृत,‍ स्‍िीकार‍ ि‍ ककया‍गया‍ और‍ उत्तर‍ ि‍ ददया‍गया,‍ सत्त्ि‍
द्िारा‍ सूधचत‍ िाममात्र‍ कायाान्‍ियि‍ और‍ सूधचत‍ करिे‍ का‍ समय,‍ कायाान्‍ियि‍ ि‍ करिे‍ अथिा‍
खराब‍कायाान्‍ियि‍के‍साथ‍जड़
ु ा‍जोखखम‍भी‍शालमल‍होिा‍चादहए।‍सच
ू ी‍को‍स्‍थायी‍डाटा‍बेस‍के‍
रूप‍में ‍रखा‍जािा‍चादहए‍जजससे‍भविष्‍य‍में ‍निष्‍पादि‍आयोजिा‍में ‍सहायता‍लमलती‍है ।‍
जहां‍ विधायी‍सलमनत‍िे‍ निष्‍पादि‍लेखपरीक्षा‍ररपोटा ‍ की‍जांच‍की‍है ‍ िहां‍ सूची‍में ‍ सलमनत‍द्िारा‍
की‍गई‍अजन्‍
तम‍लसफाररशें‍शालमल‍होती‍हैं।‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
98 | पष्ृ ‍ठ
िावषषक अिुिती कायषिम
8.11
लेखापरीक्षको‍ को‍ जब‍ उधचत‍ हो‍ तो‍ पूरािे‍ लेखापरीक्षा‍ निष्‍कषों‍ और‍ लसफाररशों‍ का‍
अिुसरण‍करिा‍चादहए।‍अिुिती‍कारा िाई‍को‍उधचत‍तरीके‍से‍ ररपोटा ‍ ककया‍जािा‍चादहए‍ताकक‍
यदद‍संभि‍हो‍विधािमंडल‍को‍जहां‍ संसंगत‍हो‍सुधारात्‍मक‍कारा िाई‍के‍निष्‍
कषों‍और‍प्रभािों‍के‍
साथ‍फीडबैक‍उपलब्ध‍कराया‍जा‍सके।
8.12
अिुिती‍ कारा िाई‍ के‍ पररणाम‍ पथ
ृ क‍ या‍ एक‍ समेककत‍ ररपोटा ‍ के‍ रूप‍ में ‍ ददया‍ सकते‍ है ।‍
समेककत‍अिि
लेषण,‍जजसमें ‍ ‍कई‍ररपोदटिं ग‍क्षेत्रों‍में ‍
ु ती‍ररपोटों‍में ‍ विलभन्‍ि‍लेखापरीक्षाओं‍ के‍विश्‍
सामान्‍य‍प्रिवृ त्त‍और‍विषयिस्‍तु‍ शालमल‍हो,‍को‍शालमल‍ककया‍जाता‍है ।‍अिुिती‍कारा िाई‍दी‍गई‍
समयािधध‍या‍विषयिस्‍तु‍ क्षेत्र‍में ‍ निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍के‍माध्‍यम‍से‍ िधधात‍मूल्‍य‍की‍बेहतर‍
समझ‍में ‍योगदाि‍कर‍सकती‍है ।‍‍
‍‍‍‍‍‍‍
‍
निष्‍पादि‍लेखापरीक्षण‍ददशानिदे श‍2014‍–‍भारत‍के‍नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
99 | पष्ृ ‍ठ
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